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भारतीय सांस्कृतिक निधि [इंटेक] दुर्ग-भिलाई अध्याय : विश्व विरासत दिवस के उपलक्ष में ‘इंटेक’ द्वारा आयोजित ‘लोक कथा कथन’ में 10 राज्यों के साहित्यकारों ने लोक कथाएं सुनाई

👉 [बाएँ से] • प्रो. देवेंद्र नाथ शर्मा, डॉ. परदेशीराम वर्मा, रवि श्रीवास्तव, गुलबीर सिंह भाटिया और संतोष झांझी

👉 • भारतीय सांस्कृतिक निधि [इंटेक] दुर्ग-भिलाई अध्याय की संयोजिका डॉ. हंसा शुक्ला ‘इंटेक’ के बारे में अपनी बात रखती हुई
• छत्तीसगढ़ आसपास
• छत्तीसगढ़ [भिलाई]
‘विश्व विरासत दिवस’ के उपलक्ष में ‘भारतीय सांस्कृतिक निधि’ {इंटेक} दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा आयोजित ‘लोक कथा कथन’ में छत्तीसगढ़ी, मध्यप्रदेश, बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, केरल, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, उड़िया एवं तेलगु सहित 10 राज्यों के संबंधित लोक भाषा के जानकार साहित्यकारों ने 12 लोक कथाएँ सुनाई.
इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मुख्य वक्ता देश के प्रतिष्ठित कथाकार गुलबीर सिंह भाटिया ने कहा कि-
“हम पुरखों के ऋणी हैं जिन्होंने लिपि के अभाव में भी कथा को जीवन दिया और उन कथाओं को जीवित रखा जो हमारे आज के कथा साहित्य की जड़ भी है, मूल भी है. लोक कथाएँ आज के कथा साहित्य की जननी है. ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी को वह प्रवेश द्वार बतलाया जिससे होकर हमारी लोक कथा आधुनिक कहानी में प्रवेश करती है”
‘छत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि-
“आज की कहानी लोक कथाओं की नींव पर खड़ी है. इस विरासत को सहेजने की जरूरत है ताकि लोक कथाओं की अनुगूंज आगामी सदियों तक गूंजती रहे”
आरंभ में ‘इंटेक’ की दुर्ग-भिलाई अध्याय की संयोजिका डॉ. हंसा शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए लोक कथाओं को महत्वपूर्ण साहित्यिक-सांस्कृतिक धरोहर बतलाया.
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षाविद डॉ. डीएन शर्मा ने कहा कि हजारों वर्षों पूर्व जन्मी लोक कथाएँ हमारी अनमोल अमूर्त धरोहर हैं. हमारी पीढ़ी की गलती से नई जनरेशन मोबाइल के जरिए कारटून, यू-ट्यूब, सोशल मीडिया में मस्त होकर लोक कथाओं से अनभिज्ञ है.

👉 • ‘इंटेक’ के पूर्व संयोजक प्रो. डीएन शर्मा का स्वागत करते हुए वर्तमान संयोजिका डॉ. हंसा शुक्ला

👉 • समाजसेविका शानू मोहनन ने वरिष्ठ कथाकार- कवयित्री संतोष झांझी का स्वागत किया

👉 • प्रो. डीएन शर्मा ने कुशल संचालन करते हुए सभी लोक कथा पठन करने वालों एवं उपस्थित प्रबुद्धजनों का शब्दों से आत्मीय अभिवादन किया
कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने रंगभेद, जातिवाद, ऊँच-नीच के खिलाफ छत्तीसगढ़ में लोकप्रिय ‘करिया मुसवा पंडरा मुसवा’ छत्तीसगढ़ी लोक कथा रोचक ढंग से बतलाई. कवयित्री संतोष झांझी ने पंजाब में लोकप्रिय भगवान में विश्वास को स्थापित करती पंजाबी लोक कथा ‘रजनी’ को सुनाई. कवयित्री विद्या गुप्ता ने मध्यप्रदेश के निवाड़ क्षेत्र में प्रचलित निमाड़ी लोक कथा ‘राजा भरथरी’ का रोचक कथन किया. प्रगतिशील कवि शरद कोकास ने महाराष्ट्र प्रांत की मराठी लोक कथा ‘बट्टे की खीर’ का एकल अभिनय कर प्रस्तुति की.

👉 • छत्तीसगढ़ के मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाने,जाने वाले प्रख्यात कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने रंगभेद, जातिवाद, ऊँच-नीच के खिलाफ छत्तीसगढ़ में लोकप्रिय लोक कथा को प्रभावी ढंग से सुनाई
पत्रकार जोस एंथोनी ने केरल की एक मलयालम लोक कथा ‘गोरा खरगोश’ को सुनाया. पत्रकार एवं कथाकार शिवनाथ शुक्ला ने उत्तरप्रदेश में कही जाने वाली लोक कथा ‘सुख की मुरली दुःख की मुरली’ को प्रभावी ढंग से सुनाया. बंगाल की दो भाईयों के संपत्ति बंटवारे से संबंधित बंगाली लोक कथा सुनाई गई. केशव शर्मा ने राजस्थान में लोक नायक तेजा पर केंद्रित लोक कथा ‘वचन के पक्के’ कही.

👉 • तेलुगु भाषी सुश्री डी. नागमणि ने आंध्रप्रदेश में प्रचलित लोक कथा का पाठ किया

👉 • प्रगतिशील कवि शरद कोकास ने महाराष्ट्र प्रांत की मराठी लोक कथा का एकल अभिनय कर प्रस्तुति दी

👉 • देश व्यापी चर्चित कवियित्री संतोष झांझी ने पंजाबी लोक कथा ‘रजनी’ सुनाई
उड़िया भाषी रविंद्र साहू ने ‘ठगराज’ नामक उड़ीसा की लोक कथा सुनाई. तेलगु भाषी सुश्री डी. नागमणि ने आंध्रप्रदेश में प्रचलित भगवान वैंकेटश्वर से जुड़ी लोक कथा ‘गोविंदा गोविंदा’ को सुनाया. संस्कृतकर्मी एवं ‘कला परंपरा’ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख ने छत्तीसगढ़ की रोचक लोक कथा ‘मारे मुसुवईनला’ का कथन किया और अंत में प्रीति अजय बेहरा ने उड़ीसा में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी उड़िया ‘अगहन बृहस्पति’ लोक कथा को बतलाता.
इस अवसर पर ‘इंटेक’ से जुड़े दुर्ग-भिलाई के प्रबुद्धजन उपस्थित थे-
प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ. पीसी पंडा, महेश चतुर्वेदी, राजेंद्र राव, बी.पोलम्मा, सहदेव देशमुख, शानू मोहनन, रविंद्र खंडेलवाल, कांतिभाई सोलंकी, विश्वास तिवारी, जगमोहन सिन्हा और सरस्वती.
• आभार व्यक्त प्रो. डीएन शर्मा ने दिया.
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