विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
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• दोहावली
– ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
[ • भिलाई-छत्तीसगढ़ ]

ज़रा ध्यान दें आप यह,परम अटल है सत्य।
दूषित जो पर्यावरण, करने वाले तथ्य।१।
आधुनिकी की दौड़ में, अंधाधुंध विकास।
होता कटने पेड़ से, पर्यावरण विनाश।२।
संरक्षित करने जहाॅं, प्रगतिशील की आस।
नित-प्रति जो पर्यावरण,का हो रहा विनाश।३।
दोषारोपण क्या करें, अपने ही हैं हाथ।
छेड़छाड़ जो हो रहा, रोज़ प्रकृति के साथ।४।
कारखाने विष-धुम्र जो, उगल रहे दिन रात।
साँस लेना है कठिन, जीवन पर है घात।५।
मास्क मुख पर बाँधकर, लिए सिलेंडर पीठ।
बच्चा पौधा रोपकर, दे सबको यह सीख।६।
नन्हा बालक कर रहा,विपिन बचाव प्रयास।
साथ स्वयं ले चल रहा ,प्राण वायु का वास।७।
बिन हरियाली के नहीं,ऑक्सीजन की आस।
भावी पीढ़ी के लिए, बहुत बड़ी यह त्रास।८।
पेड़ सभी जन काटकर, बना रहे प्रासाद।
ढूॅंढ रहे फिर छाॅंव जो,मानव हुआ विशाद।९।
नहीं किसी को फ़िक्र है, बच्चा, वृद्ध, अधेड़।
स्वारथ में सब काटते, बातें हों या पेड़।१०।
पेड़ सभी जो कट गये, बचे रहे बस ठूंठ।
क्या होगा मानुष कहीं, जाये मौसम रूठ।११।
• शब्द अर्थ-
• विपिन- वन, जंगल
[ • ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के संस्थापक एवं आजीवन सदस्य हैं. ]
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chhattisgarhaaspaas
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