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बांग्ला भाषा, कला, संस्कृति- सांस्कृतिक, साहित्य विरासत की धरोहर, 68 वर्षों से संचालित- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा’ में ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ पर समीक्षा

👉 बीते दिनों 01 अगस्त को भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस में सम्पन्न हुए ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ समीक्षा एवं विचार-विमर्श बैठक में शामिल हुए- • बानी चक्रवर्ती [सभापति] उप सभापति द्वय- दीपाली दासगुप्ता, स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास [सलाहकार] दुलाल समाद्दार [संपादक- ‘मध्यबलय’] शुभेंदु बागची [महासचिव] प्रकाशचंद्र मण्डल [उप सचिव] पल्लव चटर्जी [कोषाध्यक्ष] प्रदीप भट्टाचार्य [मीडिया-पब्लिकेशन सचिव] सक्रिय सदस्य- आलोक कुमार चंदा, ब्रजेश मल्लिक, सोमाली शर्मा, वीरेंद्रनाथ सरकार, रविंद्रनाथ देबनाथ और शंभू साहा

• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
भिलाई [01 अगस्त, 2026] : भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा’ में इस सप्ताह बीते 25 जुलाई को ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन में सम्पन्न हुए ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026’ पर समीक्षा की गई.
सभापति बानी चक्रवर्ती के सभापतित्व में हुई बैठक में सर्वप्रथम संस्था के सदस्य- आलोक कुमार चंदा और वीरेंद्रनाथ सरकार का जन्मोउत्सव हर्षोल्लास के साथ केक काटकर मनाया गया. संस्था की तरफ से डायरी-पेन भेंट करते हुए दीर्घायु होने की शुभकामनाएं एवं बधाई दी गई.

👉 आलोक कुमार चंदा को डायरी-पेन भेंट करते हुए [बाएँ से] • सोमाली शर्मा, बानी चक्रवर्ती, आलोक कुमार चंदा, स्मृति दत्त, दीपाली दासगुप्ता और समरेंद्र विश्वास

👉 • वीरेंद्रनाथ सरकार को मुंह मीठा कराकर जन्मदिन की बधाई देते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य…
इस अवसर पर बानी चक्रवर्ती ने कहा कि-

‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ के सफल आयोजन के लिए सभी सदस्यों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग मिला, तभी यह भव्य कार्यक्रम संभव हो सका. लगभग 10 घंटों तक चले इस सांस्कृतिक महोत्सव में साहित्य, संगीत, नृत्य और रंगमंच का अद्भुत संगम देखने को मिला, इससे पूरे वातावरण को कला और संवेदनाओं की अनुपम आभा से आलोकित कर दिया था. विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन-दर्शन, मानवीय चिंतन, शिक्षा, संस्कृति और विश्वबंधुत्व की अवधारणा एवं काज़ी नज़रूल इस्लाम पर सारगर्भित प्रस्तुति को हमेशा याद रखा जाएगा.
पूरे आयोजन के सूत्रधार शुभेंदु बागची ने महासचिव प्रतिवेदन के साथ एक-एक सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि-

25 जुलाई को सम्पन्न हुई ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ की उपलब्धि की अगर मैं बात करूं तो यह है कि बांग्ला भाषा की स्मृद्धि की गाथा एवं माधुर्य, ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की परंपरा एवं इतिहास अगर एक भी अतिरिक्त व्यक्ति के पास पहुंचाया जा सके या इस आयोजन के बाद कोई भी ये कहे कि मैं बांग्ला भाषा सीखना चाहता हूँ, रवींद्र संगीत को शिरोधार्य करना चाहता हूँ तो यह उत्सव सफलता की पहली सीढ़ी होगी. जिनके अथक परिश्रम से यह आयोजन संभव हो पाया है उनके प्रति ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की ओर से मैं महासचिव होने के नाते व्यक्तिगत तौर पर मेरा विनम्र आभार प्रकट करता हूँ. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती की प्रेरणा, मातृ सुलभ स्नेह,अतिथियों का आवभगत, ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार का पूरे आयोजन में आंतरिक जुड़ाव और समरेंद्र विश्वास की मौन अभिव्यक्ति एवं उत्साह से कार्यक्रम सफल हो सका. उप सभापति द्वय- दीपाली दासगुप्ता, स्मृति दत्त एवं उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल ने हर बाधा को नज़रअंदाज़ करते हुए सहयोग का हाथ बढ़ाया, इसे भूलना असंभव है. वरिष्ठ सदस्य- मनोरंजन दास, मीता दास, ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ कार्यक्रम के सभापति रहे रविंद्रनाथ देबनाथ, सपन गड़ाई के स्नेहपूर्ण उपस्थिति से नई ऊर्जा संचारित हुई. सुबीर रॉय के दिन-रात की मेहनत, उनका योगदान कार्यक्रम का साक्षी रहेगा जीवंतपर्यंत. मिहिर समाद्दार ने देर रात्रि तक ‘मध्यबलय’ बुलेटिन एवं नाटक ‘एकान्नवर्ती’ के लिए बैकग्राउंड म्युजिक तैयार किया. ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव समिति’ के मीडिया पब्लिकेशन प्रभारी- प्रदीप भट्टाचार्य ने इस काम का दायित्व बखूबी निभाया. रात के तृतीय प्रहर तक अखबार का प्रतिवेदन और पब्लिसिटी का काम करते रहे. इसका कोई प्रतिदान नहीं हो सकता. मानब सेन, वीरेंद्रनाथ सरकार, पल्लव चटर्जी, दीपेंद्र हालदार का अलिखित अंगिकार एवं ऊर्जावान युवक ब्रजेश मल्लिक के समर्पण को भूला पाना मुश्किल है. पर्दे के पीछे रहे रतन सरकार, आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन, प्रभाष मंडल, पं. बासुदेव भट्टाचार्य और देवाशीष विश्वास के समर्पण भावना भी हृदय में अंकित रहेगी. कृष्णचंद्र रॉय कार्यक्रम में उपस्थित न हो सके, मगर शुभेच्छा वार्ता से हम सबका मनोबल को बढ़ाया. महिला सदस्य- ममता सरकार, शेफाली भट्टाचार्य, सोमाली शर्मा, श्रेया समाद्दार, सुजॉशा सेन और जॉली चक्रवर्ती. इन सबके धैर्य की पराकाष्ठा से आयोजन को ऊँचाई मिली. कुछ नाम अंतर्मन में हैं- माया बनर्जी और शंभू साहा. इन सबके अलावा ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के अनेक सदस्यगण अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सके, किंतु संस्था के पूर्व के अनेकों कार्यक्रमों में उनके योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें मैं अपना अभिवादन प्रेषित करता हूँ. किसी भी आयोजन की सर्वांगीण सफलता की तृप्ति-सुख हम सबको अवश्य मिलना चाहिए, फिर भी मैं कहूँगा कि आयोजन का पुनरावलोकन होना चाहिए एवं स्वयं को अपने ही समालोचना का सामना करना चाहिए. इससे भविष्य में कार्यक्रमों का मान और भी उत्कृष्ट हो सकता है. मेरे पास शब्दों का भंडार अक्षम है, आप सबके अवदान के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए, इसलिए दो दिन मौन रहकर आप सबका स्नेह, प्यार एवं उष्ण सानिध्य को हृदयसंगम करता रहा. ‘वक़्त यहां ठहर जाए तो क्या हो, मौन अगर रह जाए तो क्या हो’ आपके हृदय के पास स्थान दीजिए. आज इस बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया जाता है कि ‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ में प्रस्तुत किया गया ‘थीमसोंग’ ‘बंगीय साहित्य संस्था’ का ‘थीमसोंग’ होगा एवं हर कार्यक्रम के पहले सामूहिक रूप से गाया जाएगा तथा कार्यक्रम के अंत में वंदेमातरम्’ गाकर कार्यक्रम की समाप्ति होगी.
मीडिया प्रभारी प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि-

प्रथम सत्र में सांस्कृतिक संस्था ‘गीत वितान कला केंद्र’ को भारतीय संस्कृति विरासत के संरक्षण एवं रवींद्र जीवन- दर्शन के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘टैगोर लिंगेसी अवार्ड-2026’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान प्रथम सत्र के गेस्ट ऑफ़ ऑनर डॉ. चित्तरंजन कर के कर-कमलों से प्रदान किया गया. दूसरे सत्र में हिंदी-उर्दू को समर्पित प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ को ‘उत्कृष्ट पहल सम्मान’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान भिलाई इस्पात संयंत्र के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर [प्रोजेक्ट] प्रबीर कुमार सरकार और बीएसपी ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार बंछोर के हाथों प्रदान किया गया. इस सम्मान के लिए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के प्रति हमारी संस्था ‘आरंभ’ आभार प्रकट करती है.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के अन्य उपस्थित सदस्यों ने भी अपने विचार रखते हुए बोले कि-

👉 [बाएँ से] • दीपाली दासगुप्ता, समरेंद्र विश्वास, रविंद्रनाथ देबनाथ और आलोक कुमार चंदा

👉 [बाएँ से] • रविंद्रनाथ देबनाथ, ब्रजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार और पल्लव चटर्जी

👉 [बाएँ से] • शुभेंदु बागची, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल और शंभू साहा
‘रवींद्र-नज़रूल उत्सव’ में कला, साहित्य, संगीत और सृजन के प्रति रवींद्रनाथ टैगोर की दूरदर्शी सोच, कालजयी विश्वविख्यात रचनाओं पर विस्तृत चर्चा एवं महान विद्रोही कवि काज़ी नज़रूल इस्लाम के ओजस्वी साहित्य, मानवीय चेतना और क्रांतिकारी सृजनधर्मिता का भी भावपूर्ण स्मरण किया गया. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा आयोजित ऐसे साहित्यिक महोत्सव को सालों तक याद रखा जाएगा.
स्मृति दत्त ने प्रकाशचंद्र मण्डल के निर्देशन में ‘एकन्नोबोरती’ नाट्य प्रस्तुति के सभी कलाकारों के बारे में बताया कि-
कलाकारों ने अत्यंत स्वाभाविक एवं जीवंत अभिनय के माध्यम से यह संदेश दिया कि परिवार केवल एक छत के नीचे साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सहयोग, सम्मान, त्याग और प्रेम जैसे जीवन- मूल्यों की मजबूत नींव पर ही एक सुदृढ़ परिवार का निर्माण होता है. प्रस्तुत पारिवारिक नाटक में- संदीप मल्लिक, सोमाली शर्मा, स्मृति दत्त, ब्रजेश मल्लिक, सुबीर रॉय, सुजॉशा सेन, ममता सरकार, प्रभाष मंडल और प्रकाशचंद्र मण्डल. बैकग्राउंड संगीत- गौतम शील, निर्देशन एवं एडिटिंग डॉयलॉग- प्रकाशचंद्र मण्डल, सम्पूर्ण नाट्य गाइड्नेंस- शुभेंदु बागची.

👉 • ‘एकन्नोबोरती’ नाटक में जमाई की भूमिका में उत्कृष्ट अभिनय के लिए संस्था द्वारा ब्रजेश मल्लिक को सम्मानित किया गया…

अंत में आभार व्यक्त ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सलाहकार समरेंद्र विश्वास ने दिया, उन्होंने कहा कि-
भिलाई-दुर्ग में जितनी भी साहित्यिक संस्थाएं साहित्य को लेकर कार्य कर रही है, आपस में एक-दूसरे के प्रोग्रामों में सहयोग करना चाहिए. हम सब साहित्य को लेकर काम कर रहे हैं. इन्होंने महासचिव शुभेंदु बागची के कुशल संचालन एवं कार्यक्रम संयोजन की प्रशंसा की. संस्था में पूरी टीम को भी बधाई दी. संस्था की सभापति बानी चक्रवर्ती और महासचिव शुभेंदु बागची के नेतृत्व में आगे भी ऐसे आयोजन करती रहेगी. संस्था द्वारा प्रति शनिवार को साहित्यिक ‘अड्डा’ एवं साहित्यिक सभा नियमित रूप से चलते रहना चाहिए.
[ • रिपोर्ट एवं प्रस्तुति- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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