NEET-UG 2026 पेपर लीक: CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA के 3 एक्सपर्ट पर लीक कराने का आरोप, बताया कैसे छात्रों तक पहुंचाया गया पेपर
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नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी 94 पन्नों की चार्जशीट में परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर पेपर लीक करने के लिए किसी हाई-टेक तकनीक का नहीं, बल्कि बेहद साधारण तरीके का इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि विशेषज्ञ प्रश्नों को याद कर लेते थे, बाद में उन्हें कागज पर लिखते और संबंधित NCERT अध्यायों पर निशान लगाकर उन्हें कोचिंग नेटवर्क के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचाया जाता था। यह मामला सामने आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
तीन विषय विशेषज्ञों पर गंभीर आरोप
चार्जशीट के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े NTA के तीन विषय विशेषज्ञ जांच के दायरे में हैं। इनमें केमिस्ट्री विशेषज्ञ पी.वी. कुलकर्णी, बॉटनी विशेषज्ञ मनीषा मंधारे और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा हवलदार शामिल हैं। सीबीआई का आरोप है कि मॉडरेशन और अनुवाद प्रक्रिया के दौरान इन विशेषज्ञों को प्रश्नों तक आधिकारिक पहुंच प्राप्त थी।
इसी दौरान उन्होंने कथित रूप से सवालों को याद किया, पर्चियों पर लिखा और संबंधित NCERT अध्यायों को चिह्नित कर भरोसेमंद बिचौलियों तथा कोचिंग संचालकों तक पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया कि आसान प्रश्नों को विशेषज्ञ याद कर लेते थे और बाद में होटल के कमरों में उन्हें लिखकर सुरक्षित रखते थे।
कोचिंग नेटवर्क और आर्थिक लाभ बना मकसद
जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का उद्देश्य अवैध आर्थिक लाभ कमाने के साथ-साथ कुछ निजी कोचिंग संस्थानों का चयन प्रतिशत (सक्सेस रेट) बढ़ाना था। जांच के दौरान कई ऐसे हस्तलिखित नोट्स बरामद किए गए, जिनमें कथित रूप से लीक हुए प्रश्न दर्ज थे।
सीबीआई के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई थी कि कोई डिजिटल रिकॉर्ड या इलेक्ट्रॉनिक सबूत न छोड़ा जाए और अभ्यर्थियों को बिना तकनीकी निशान छोड़े अनुचित लाभ मिल सके।
NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
चार्जशीट में NTA की गोपनीय परीक्षा प्रक्रिया में सुरक्षा संबंधी खामियों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, गोपनीय अनुभाग में कार्यरत विशेषज्ञों की तलाशी या स्क्रीनिंग की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। इससे उन्हें प्रश्न याद करने और बाद में कहीं भी लिखने का अवसर मिल जाता था।
जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी पी.वी. कुलकर्णी ने 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच तीन दिनों में 135 प्रश्नों का बैक-ट्रांसलेशन किया था।
13 आरोपी, 360 गवाह और 20 हजार पन्नों के दस्तावेज
सीबीआई ने मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें तीन विषय विशेषज्ञों के अलावा कोचिंग संचालक, बिचौलिए और कथित रूप से लाभ लेने वाले अभ्यर्थी शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मामला दर्ज किया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के साथ करीब 20 हजार पन्नों के दस्तावेज, 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेजी साक्ष्य और 43 भौतिक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं।
ऐसे आगे बढ़ी CBI की जांच
सीबीआई ने 12 मई को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया। इसके लिए 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीमें गठित की गईं। महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत पांच राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां से डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड जब्त किए गए।जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खाते, लॉकर और डीमैट खाते भी फ्रीज किए गए। इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को हुई थी। हालांकि सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट में लगाए गए सभी आरोपों का अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
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