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अपराध आसपास : साढ़े चार साल की मासूम से दुष्कर्म मामले और गला घोंट कर खंडहर में फेंकने वाले आरोपी को 153 दिन में मिली उम्रकैद की सजा

👉 • आरोपी धनेश्वर साहू : बच्ची ने कोर्ट में आरोपी को पहचान लिया. उसने अपने साथ हुई घटना के संबंध में भी बयान दिया. सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य और बच्ची की गवाही समेत अन्य सबूतों के आधार पर विशेष पाक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी माना
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
भिलाई-दुर्ग [27 सितम्बर, 2026] : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साढ़े चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या की कोशिश के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी धनेश्वर साहू उर्फ जनता (40) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। घटना उतई थाना क्षेत्र के बंजारीपारा की है। वारदात के करीब 153 दिन बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। घटना के बाद बच्ची को मरा हुआ समझकर आरोपी ने उसे तकिया कवर और जूट की बोरी में बंद कर घर के पीछे स्थित खंडहर में फेंक दिया था। बच्ची की सांसें चल रही थीं। बोरे से पैर बाहर निकला देखकर मोहल्ले के दो युवकों को शक हुआ। उन्होंने बोरा खोला तो बच्ची गंभीर हालत में मिली और तत्काल अस्पताल पहुंचाया।

• पांच रुपए लेकर दुकान गई थी बच्ची
पुलिस के मुताबिक, 10 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 11:30 बजे बच्ची अपनी दादी से 5 रुपए लेकर घर के पास दुकान पर खाने का सामान लेने गई थी। इसी दौरान आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर की छत पर ले गया। दुकान के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में आरोपी के बच्ची को अपने साथ ले जाने की तस्वीरें सामने आई थीं।
दुष्कर्म के बाद गला घोंटने की कोशिश
आरोप है कि आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के चिल्लाने पर उसने कपड़े से उसका मुंह दबाया और गला घोंटकर उसकी हत्या करने की कोशिश की। बच्ची बेहोश हो गई तो आरोपी ने उसे मृत समझ लिया। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से बच्ची को तकिया कवर और जूट की बोरी में बंद कर घर के पीछे खंडहर में फेंक दिया। काफी देर तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर परिजन और आसपास के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान दो युवकों ने खंडहर में एक बोरा देखा, जिसमें से बच्ची का पैर बाहर निकला हुआ था। बोरा खोलने पर बच्ची लहूलुहान हालत में मिली। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
घटना के बाद थाने का घेराव
मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया था। आक्रोशित लोगों ने उतई थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग भी किया था।
15 दिन में पेश किया गया चालान
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी धनेश्वर साहू को गिरफ्तार कर लिया था। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने 25 अप्रैल को चालान कोर्ट में पेश कर दिया। इसके बाद विशेष पॉक्सो अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
डीएनए और फोरेंसिक साक्ष्य बने अहम सबूत
पुलिस को आरोपी के घर से बाल, तकिया कवर, जूट की बोरी, बच्ची के कपड़े और आरोपी के कपड़े मिले थे। इनका फोरेंसिक परीक्षण और डीएनए मिलान कराया गया। चिकित्सकीय जांच में बच्ची के शरीर, जांघ और गले पर खरोंच के निशान, अंदरूनी चोट और अधिक रक्तस्राव की बात सामने आई थी। पुलिस ने इन साक्ष्यों को केस में अहम आधार बनाया।
बच्ची ने कोर्ट में आरोपी को पहचान लिया
मामले की सुनवाई के दौरान साढ़े चार साल की बच्ची ने अदालत में पर्दे के पीछे खड़े आरोपी को पहचान लिया। उसने अपने साथ हुई घटना के संबंध में भी बयान दिया। सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य और बच्ची की गवाही समेत अन्य सबूतों के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
उम्रकैद के साथ 13 हजार रुपए जुर्माना
अदालत ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास के साथ 7 साल, 10 साल और 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई थी। 26 सितंबर को सजा का आदेश जारी किया गया। इस मामले में पुलिस की त्वरित जांच और समय पर चालान पेश किए जाने के बाद करीब पांच महीने में अदालत से फैसला आया!
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