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■’अग्निपथ’ : इस आग में स्वाहा होने से कुछ नहीं बचेगा-बादल सरोज.

4 years ago
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🔵 कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कविता अस्तित्वमान होकर, भौतिक रूप धर देश भर में घूमती-फिरती नजर आती है। हरिवंशराय बच्चन की छोटी सी कविता – अग्निपथ – इन दिनों इसी धजा में हैं। उन्होंने लिखा था कि : “यह महान दृश्य है,/ चल रहा मनुष्य है,/ अश्रु स्वेद रक्त से,/लथपथ लथपथ लथपथ,/अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।” ठीक यही आज सड़कों पर नजर आ रहा है। मोदी सरकार की एक और जघन्य जनविरोधी, रोजगार विरोधी, कारपोरेटपरस्त और मूलतः देशविरोधी “अग्निपथ” योजना के खिलाफ देश भर के युवा सड़कों पर हैं। भविष्य चौपट होने के विषाद के आंसुओं से भरी आँखों, हुक्मरानों की लाठियों से पिटने से बहे लहू और पसीने से लथपथ।

🔵 अग्निपथ योजना और उसके नाम पर 4 साल की ठेका भर्ती से बनाये जाने वाले अस्थायी अग्निवीरों की घोषणा होने के बाद से ही इससे होने वाले विनाश के आयामों के बारे में काफी चर्चा हो चुकी है। सिर्फ विपक्षी दल, नागरिक प्रशासन से जुड़े रहे आला अधिकारी ही नहीं, भारतीय सेना के अनेक सेवानिवृत्त अफसर – जिनमे कई “भक्त श्रेणी” प्रजाति के अंध मोदी समर्थक भी हैं – भी इस अत्यंत आपत्तिजनक और राष्ट्रविरोधी योजना की भर्त्सना कर चुके है।

🔵 इसमें कोई संदेह नहीं कि इससे बाकी जो होगा, सो होगा ही, भारतीय सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी, सेना की पहचान और एकजुटता प्रभावित होगी, बड़ी संख्या में रोजगार देने वाली फ़ौज हर साल 35-40 हजार बेरोजगार पैदा करने वाला संस्थान बन जाएगी, जीवन को दांव पर लगाने वाले सैनिकों को महज 22-23 वर्ष की उम्र में छोटे-बड़े कारखानों के अस्थायी और ठेका मजदूरों से भी ख़राब श्रेणी में धकेल दिया जायेगा। बच्चन साब की उसी कविता में कहें, तो सम्मानजनक सेवा शर्तों, समुचित वेतन और पेंशन तथा अन्य सुविधाओं से वंचित रख अग्निवीर बनाये जाने वाले युवाओं से कहा जा रहा है कि : “वृक्ष हों भले खड़े,/ हों घने हों बड़े,/ एक पत्र छाँह भी, माँग मत, माँग मत, माँग मत। ”

🔵 इससे इनके और इस तरह भारत की सेना तथा सुरक्षा बलों के मनोबल और प्रोफेशनलिज्म पर क्या प्रभाव पडेगा, इसे समझने के लिए सैन्यविज्ञान, प्रबंधन विज्ञान या मनोविज्ञान की पढ़ाई जरूरी नहीं है।

🔵 यह सब गंभीर और दूरगामी प्रभाव डालने वाला घटना विकास है। मगर जैसा कि होता है, परिणाम सिर्फ तुरत-फुरत होने वाले तात्कालिक भर नहीं होते, नीतिगत फैसलों से एक प्रक्रिया – चैन रिएक्शन – शुरू होती है, जो आगे तक जाती है। अग्निपथ एक सचमुच का अग्नि-पथ है – जिसकी अग्नि में बहुत कुछ झुलसना है, काफी कुछ स्वाहा होना है।

“आर्थिक चतुराई” के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ मखौल
🔵 जैसा कि स्पष्ट है, अब सेना में भर्ती के लिए हर साल होने वाली रैलियां नहीं होंगी। अग्निपथ के बाद केंद्र सरकार फ़ौज की भर्ती हमेशा के लिए बंद करेगी । यह तब है, जब इस कथित राष्ट्रवादी सरकार ने पिछले दो वर्षों से नियमित सैन्य भर्ती की ही नहीं है। वे इसके लिए शर्मिन्दा नहीं हैं, बल्कि कोविड महामारी को सौभाग्य मानते हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बतायी गयी “वेतन और पेंशन खर्च बचाने” वाली इस मितव्ययिता की “आर्थिक चतुराई” के चलते पहले से ही हालत यह हो गयी है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना मानी जाने वाली भारत की सेना में 2021 तक 104,653 कर्मियों की कमी हो चुकी थी। अब यह पद कभी नहीं भरे जाएंगे, आने वाले वर्षों में इन पदों को भरने की बजाए उनकी जगह अग्निवीर लेंगे। यही चला तो अगले कोई बीसेक वर्ष में पूरी सेना ही अर्धप्रशिक्षित और अस्थायी अग्निवीरों का झुण्ड हो जाएगी।

🔵 राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ यह “प्रयोग” उस देश में किया जा रहा है, जिसकी सीमा 7 पड़ोसी देशों से लगती है। बंगलादेश (4,096 किलोमीटर), भूटान (578 किलोमीटर), चीन (3,488 किमी), म्यांमार (1,643 किमी), नेपाल (1,752 किमी), पाकिस्तान (3,310 किमी) और श्रीलंका के साथ भी थोड़ी सी ; इस तरह कुल जमीनी सीमा 14868 किलोमीटर की है। इसके अलावा 7 देशों के साथ करीब 7,000 किलोमीटर की समुद्री सीमा अलग से है। कुल मिलाकर यह जोड़ 21868 किलोमीटर होता है। क्या इतनी विराट सीमा की चौकसी और हिफाजत अस्थायी, अर्धकुशल, ठेके के मजदूर अग्निवीरों से कराई जा सकती है? वह भी तब, जब अमरीका का प्रोजेक्ट ब्रह्मपुत्र कभी रुका नहीं है और मोदी सरकार की अदूरदर्शी, अव्यावहारिक और अमरीकापरस्त विदेश नीति के चलते अब एक भी पड़ोसी देश ऐसा नहीं है, जिसके साथ असंदिग्ध विश्वास और अटूट दोस्ती के संबंध बचे हों।

सेना की बनावट संकट में
🔵 भारतीय सेना के तीनो अंगों के रूप की एक अखिल भारतीय बुनावट है। इसमें सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। मोटा-मोटी 6 जोन के आधार पर भर्तियां कर उत्तर-दक्षिण-पूरब-पश्चिम और मध्य के युवाओं का समावेश किया जाता है। भारत एक राष्ट्र जिनके समावेश से बना है, राष्ट्र की सेना उन सबको समाहित करके ही भारत की सेना बनती है। भाजपा ने कभी भारत के फ़ेडरल – संघीय – ढाँचे को आदर नहीं दिया। अग्निपथ की योजना सेना के संघीय और अखिल भारतीय स्वरुप का निषेध करती है।

🔵 अग्निपथ के पीछे जो समझदारी है और जिस तरह के खतरे छुपे हैं, इन्हे समझने के लिए मनु की किताब और गोलवलकर के बंच ऑफ़ थॉट पर सरसरी नजर डालना ही काफी है। इसके सामाजिक असर क्या होंगे, यह समझा जा सकता है। यह तब है, जब हाल के वर्षों में भाजपा और संघ ने भारतीय सेना का साम्प्रदायिकीकरण करने की योजनाबद्ध कोशिशें की हैं। जनरलों को सीधे और परोक्ष रूप से अपनी नफरती राजनीति का मोहरा बनाया है। भारतीय सेना को आरएसएस और बाबाओं के धार्मिक आयोजनों के इंतजामों में लगाया है। मिलिट्री ट्रेनिंग का पाठ्यक्रम तक बदला है।

अग्निवीरों की बेरोजगारी के खतरे और रोजगार के जुमले
🔵 यह दावा बकवास है कि चार साल बाद हर साल हजारों की संख्या में बेरोजगारी की मंडी में उतरने वाले ये अर्ध-प्रशिक्षित अग्निवीर सरकारी, सार्वजनिक संस्थानों में नियुक्त किये जाएंगे। सरकारी भर्ती बची नहीं है और सार्वजनिक संस्थान बेचे जा रहे हैं। ऐसे में किस तरह की नौकरियां मिलने वाली हैं? खुद मोदी के मंत्री किशन रेड्डी के मुताबिक शुरू जवानी में ही रिटायर होने वाले “अग्निवीरों को इलेक्ट्रिशियन, ड्राइवर, नाई और धोबी के कामों की ट्रेनिंग दी जायेगी ।” अमित शाह के चहेते भाजपा महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने वादा किया है कि “अग्निवीरों को भाजपा दफ्तरों की चौकीदारी में प्राथमिकता दी जाएगी।”

🔵 थलसेना की तरफ से प्रेस कांफ्रेंस लेने वाले लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने अम्बानी और टाटा का नाम लेकर कहा है कि इन युवाओं को उनके यहां रोजगार मिलेगा। पहली बात तो यह कि क्या जनता के खर्च पर, भले आधे-अधूरे ही, ट्रेंड किये गए युवा कार्पोरेटी मुनाफों की तिजोरियों की सुरक्षा करेंगे? उनके मारक दस्ते बनेंगे?? दूसरी बात यह कि इन धन पिशाचों के पास भी अब रोजगार कहाँ हैं? सबके धंधे मंदी में हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर मार्केटिंग तक हर भैंस पानी में घुसी हुयी है। कहाँ जाएंगे यह युवा? यह आशंका निराधार नहीं है कि इनमे से अनेक को आरएसएस और इसी तरह के अन्य साम्प्रदायिक हमलावर गिरोह के सदस्य के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। जातियों की निजी सेनाओं में लगाया जाएगा। माफिया गिरोहों को तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रशिक्षत युवा मिलेंगे।

🔵 ख़तरा इससे भी आगे का है और वह यह है कि इनमें से अनेक के दुनिया में हमलावर और लुटेरे देशों के भाड़े के सैनिकों – मर्सिनरीज – के रूप में भर्ती होने की अशुभ संभावना के दरवाजे खोले जा रहे हैं। यह एक तरह से भारत का ही निषेध होगा। गुजरी तीन शताब्दियों का ही इतिहास देख लें, तो मर्जी या गैर मर्जी भारतीयों की एक बड़ी संख्या व्यापार धंधों के लिए या गिरमिटिया मजदूर बन अफ्रीका और एशिया के अन्य देशों तथा कैरेबियन देशों में गयी। पिछली सदी में बड़ी तादाद में डॉक्टर्स और अन्य व्यावसयिक प्रशिक्षण प्राप्त कुशल कामगार यूरोप और अमरीकी महाद्वीप गए। ज्यादातर मेहनत मजदूरी और कुछ व्यापार करने खाड़ी के देशों में गए। हाल के दशकों में भारी संख्या में भारतीय युवाओं ने दुनिया भर में महाकाय कंपनियों के साइबर साम्राज्य को खड़ा किया।

🔵 मगर कभी भी कोई भी किसी दूसरे देश या गिरोह के लिए लड़ने वाला भाड़े का सैनिक बनकर नहीं गया। आजाद भारत की समझदारी खुद को युद्धक राष्ट्र बनाने की कभी नहीं रही – हमारी सेना भी हमलावर सेना नहीं, हिफाजत और सुरक्षा की मजबूत दीवार रही। इसलिए भारत में कभी समाज का सैनिकीकरण करने की वह कोशिश नहीं की गयी, जो इस्रायल जैसे जंगखोर देश करते रहे हैं। इसका एक और पहलू समाज का सैनिकीकरण करने का है। अग्निपथ का आधार सावरकर का वह विचार है, जो “राष्ट्र का हिन्दूकरण और हिन्दुओं का सैनिकीकरण” करने की बात करता है।

सेना का आत्मघाती राजनीतिकरण
🔵 इस योजना के खिलाफ उभरे जनाक्रोश और सड़कों पर उबलते विरोध के बाद एक अपराध के बाद दूसरा अपराध तीनों सेनाओं के प्रमुखों को ढाल और प्रवक्ता बनाकर किया जा रहा है। भारतीय सेना के ठेकेदारीकरण का निर्णय कैबिनेट और रक्षा मंत्रालय का है। मगर युवाओं के आक्रोश को देखकर राजनीतिक नेतृत्व दुम दबाकर बैठा है। यहाँ तक कि हर वक़्त बोलने वाले बड़बोले पीएम ने मुँह तक नही खोला है। मोदी सरकार ने अपने राजनैतिक निर्णय की हिमायत में तीनों सेनाध्यक्ष उतार कर भारत के संवैधानिक लोकतंत्र की एक और किल्ली उड़ा दी। फिसल के थोड़ा और पाकिस्तान की हालत में लाकर खड़ा कर दिया है, जहां इसी तरह के रास्ते पर चलकर आज स्थिति यह है कि राजनीतिक दल पीछे रह गए हैं, सेना निर्णायक हो गयी है। सेना का राजनीतिकरण करके एक बेहद खतरनाक परम्परा डाली जा रही है। जहाँ-जहाँ ऐसा हुआ है, वहाँ-वहाँ सत्यानाश ही हुआ है। इस तरह का दुरुपयोग तो कल बना दुष्ट राष्ट्र इजरायल भी नहीं करता, जिसे मौजूदा हुक्मरान अपना सैन्य-गुरु मानते हैं, वहाँ भी राजनीतिक दल ही राजनीति करते हैं ।

🔵 यह बात कहाँ तक जायेगी, इसके संकेत थल सेना प्रमुख की तरफ से पत्रकार वार्ता ले रहे अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी के कहे से स्पष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा : “हमारे साथ जो अग्निवीर में जुड़ना चाहता है, वो प्रतिज्ञा लेगा कि उसने किसी प्रदर्शन या तोड़फोड़ में हिस्सा नहीं लिया। फौज में पुलिस वेरिफिकेशन के बिना कोई नहीं आ सकता, इसलिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों से अनुरोध है कि अपना समय खराब न करें।” इस तरह की डराने-धमकाने वाली बयानबाजी राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व का काम है – सेना का नहीं। भाजपा ने इसी तरह की बयानबाजी किसान आंदोलन के दौरान भी कुछ फौजी अफसरों से कराई गई थी। कुछ मिलिट्री अफसरान तो जेएनयू के बारे में भी अनाप-शनाप बोले थे।

जब-जब दिन की बात की — तब-तब रात हुयी
🔵 मौजूदा शासक समूह की दो निर्विवाद निरन्तरित खासियत हैं। एक तो यह कि इनके कर्मों से देश को नुकसान पहुंचाने की जितनी भी खराब से खराब आशंका की जाए, वे उससे भी 50 जूते आगे नजर आते हैं। नोटबंदी से लेकर सब कुछ बेच डालने तक. शिक्षा – स्वास्थ्य – रोजगार सब तबाह कर देने के बाद भी उनके विरोधी और चिंतित शुभचिंतक डोकलाम से लेकर अमरीकी चौगुट – क्वाड – तक के आत्मघाती कारनामों के बावजूद यह मानते रहे कि अन्ततः भाई लोग हैं तो “राष्ट्रवादी”, इसलिए कम से कम सुरक्षा – सीमा और – सेना को मजबूत बनाने में तो कोई लेतलाली नहीं करेंगे। उनके साथ तो धंधा नहीं जोड़ेंगे।

🔵 मगर इस बार भी हुक्मरान सबको चौंकाते हुए उनकी आशंकाओं से खूब आगे, समूचे भारतीय अवाम की आश्वस्ति की प्रतीक भारत की सेना की नींवों में नमक और अम्ल डालते हुए – उसकी बनावट और पहचान को ही ध्वस्त करते नजर आये। दूसरी यह कि ये जिसके बारे में भी कुछ अच्छे शब्द बोलें तो यह पक्का मानिये कि उसके बुरे दिन शुरू होने जा रहे हैं ।

🔵 ये “जितना शोर मचाया घर में सूरज पाले का / उतना काला और हो गया वंश उजाले का।” वाला कुटुंब है। इनने जब-जब राष्ट्रवाद का शोर मचाया, तब-तब राष्ट्र को आघात पहुंचाया। मजदूर को श्रमवीर कहा और उसके रहे-सहे अधिकार भी छीन लिए। इधर किसान को अन्नदाता कहा, उधर उसकी खेती-किसानी उजाड़ दी। युवाओं की तारीफ़ में पुल बांधे और उनके भविष्य को चौपट करने वाली सुरंग बिछा दी। आंबेडकर को मालाएं पहनाई और दलितों को मध्ययुग में धकेल दिया। महिलाओं को जगत जननी कहा और रही-सही सांस भी अवरुद्ध करने के बंदोबस्त कर दिए। ये उस प्रजाति के धूर्त हैं, जो जनता को मूर्ख समझती है।

🔵 ठीक यही कारण है कि आज समूचे भारत को उन नौजवानों के साथ खड़ा होना चाहिए, जो सडकों पर आकर अपने गुस्से और छटपटाहट का इजहार कर रहे हैं। इनमें हजारों वे हैं, जो मिलिट्री भर्ती की परिक्षा के तीन चरण – फिजिकल, लिखित और मेडिकल – पार कर चुके हैं। ऐन नियुक्ति के वक़्त भर्ती निरस्त कर अग्निपथ लाई गयी है। लाखों वे हैं, जो अगली भर्ती की तैयारी में जमीन आसमान एक कर चुके हैं। वे सिर्फ अपने रोजगार के लिए नहीं लड़ रहे – जिनके खून में व्यापार है, उनके भेड़िया नाखूनों से देश को बचाने के लिए भी लड़ रहे हैं।

🔴 ठीक इसीलिए देश की मेहनतकश जनता का बड़ा हिस्सा इन युवाओं के साथ खड़ा है। छात्र-युवा संगठन सडकों पर हैं। गिरफ्तारियां दे रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चे ने अपने बेटे-बेटियों की लड़ाई को सही और जायज माना है, उनके समर्थन में आंदोलन का एलान किया है। श्रमिक और महिला संगठनों की एकजुटता भी सार्वजनिक हुयी है। लड़ाई आगे जाएगी – कृषि कानूनों की तरह अग्निपथ योजना भी वापस होगी।

🔴 कविताएं सिर्फ बयान नहीं करती – वे रास्ता भी सुझाती है। हरिवंशराय बच्चन अपने साहित्य में भले इससे बचते रहे हों, किन्तु उनकी यह कविता आव्हान करती है कि :
” तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,

कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।”

■बादल सरोज
[लेखक अ.भा.किसान सभा के सयुंक्त सचिव और ‘लोकजतन’ के संपादक हैं. संपर्क : 094250 06716]

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सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
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लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
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कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
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🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
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चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
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रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

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रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

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कहानी : संतोष झांझी

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कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
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‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
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रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
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काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
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लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
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जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन