• Chhattisgarh
  • विशेष : शहीद – ए – आज़म भगत सिंह : सर्वहारा क्रांति के कठिन रास्ते पर चलने वाला एक सजग बलिदानी क्रांतिकारी – विक्रम सिंह

विशेष : शहीद – ए – आज़म भगत सिंह : सर्वहारा क्रांति के कठिन रास्ते पर चलने वाला एक सजग बलिदानी क्रांतिकारी – विक्रम सिंह

3 years ago
529

“जो कोई भी कठिन श्रम से कोई चीज़ पैदा करता है, उसे यह बताने के लिए किसी खुदाई पैगाम की जरुरत नहीं कि पैदा की गयी चीज़ पर उसी का अधिकार है”, ये शब्द जो अपनी जेल डायरी के सफा 16 में भगत सिंह द्वारा लिखे गए थे, उनके विचार का सार है। यह उस 23 वर्ष के नौजवान का अटूट विश्वास है, जिसे आज के दौर में हमारे सामने पिस्तौल उठाये हुए एक अति उत्साही नायक के रूप में पेश किया जाता है, जिसे नौजवान सहज ही अपना आदर्श मान लेते हैं। लेकिन उनके विचारों से कभी रूबरू नहीं होते और न ही उनको आत्मसात करते हैं। जनवरी 1930 में असेम्बली बम काण्ड में हाई कोर्ट में की गई अपील में अंग्रेजी हुकूमत के प्रचार की पोल खोलने के साथ-साथ गोया भगत सिंह आज के नौजवानों से कह रहे हो कि “बम और पिस्तौल इंकलाब नहीं लाते, बल्कि इंकलाब की तलवार तो विचारों की सान पर तेज़ होती है।”

भगत सिंह एक सुलझे हुए क्रान्तिकारी थे, जो पूरी तरह से जानते थे, वह क्या करना चाहते हैं। छोटी सी उम्र में उनकी लेखनी और उनका व्यापक अध्ययन, उनके एक गंभीर बुद्धिजीवी और चिंतक होने की तरफ इशारा करता है। उनके द्वारा लिखे हुए मौलिक लेख, जो उन्होंने अलग-अलग नामों से लिखे, बहुत कुछ बयान करते हैं। उनकी जेल डायरी, जिसमे उपरोक्त पंक्तियाँ लिखी हैं और जिसे उन्होंने अमरीकी लेखक और पेशे से वकील राबर्ट जी. इंगरसोल को पढ़ते हुए नोट की थी, में अनेकों पुस्तकों का जिक्र है और अलग-अलग विषयों से अनेकों नोट हैं। उससे ही पता चलता है कि वह कितना पढ़ते थे, तब भी जब अपनी फाँसी की प्रतीक्षा कर रहे थे। सिद्धांत में पक्के और अभ्यास में निरंतर सटीक होने के चलते ही वह उस युग के क्रांतिकारियों की पहचान के रूप में विख्यात हुए।

वर्तमान दौर में भगत सिंह के विचार की ताकत तथा बलिदान के चलते, उनको नकारना किसी के बस का नहीं। वह नौजवानो में बहुत लोकप्रिय हैं। इसलिए दूसरा तरीका अपनाया गया है। भगत सिंह को तो आदर्श मानो, लेकिन उनके विचारों को सामने न आने दो। यह एक साजिश से कम नहीं है। जो भगत सिंह को उनकी लेखनी से जानते हैं, उनको पता है भगत सिंह अपने को इंक़लाब के विचार के बिना कुछ नहीं मानते थे। इसलिए आज के नौजवानों को जरुरत है उनके विचारों को समझने की।

नौजवानों के लिए जिम्मेवार भूमिका : भगत सिंह नौजवानों को बहुत महत्व देते थे। उस दौर में भी नौजवानों को राजनीति से दूर रहने की नसीहतें दी जाती थी। भगत सिंह इसके मुखर विरोधी थे। उन्होंने ‘विद्यार्थी और राजनीति’ शीर्षक से एक लेख लिखा, जो जुलाई, 1928 में ‘किरती’ में छपा था। अनेक नेता विद्यार्थियों को राजनीति में हिस्सा न लेने की सलाहें देते थे, जिनके जवाब में यह लेख लिखा गया था। भगत सिंह लिखते हैं, “जिन नौजवानों को कल देश की बागडोर हाथ में लेनी है, उन्हें आज ही अक्ल के अन्धे बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे जो परिणाम निकलेगा, वह हमें ख़ुद ही समझ लेना चाहिए। यह हम मानते हैं कि विद्यार्थियों का मुख्य काम पढ़ाई करना है, उन्हें अपना पूरा ध्यान उस ओर लगा देना चाहिए, लेकिन क्या देश की परिस्थितियों का ज्ञान और उनके सुधार के उपाय सोचने की योग्यता पैदा करना उस शिक्षा में शामिल नहीं? यदि नहीं, तो हम उस शिक्षा को भी निकम्मी समझते हैं, जो सिर्फ़ क्लर्की करने के लिए हासिल की जाये। ऐसी शिक्षा की ज़रूरत ही क्या है?”

वह आगे लिखते हैं, “कुछ ज़्यादा चालाक आदमी यह कहते हैं- “काका, तुम पोलिटिक्स के अनुसार पढ़ो और सोचो ज़रूर, लेकिन कोई व्यावहारिक हिस्सा न लो। तुम अधिक योग्य होकर देश के लिए फ़ायदेमन्द साबित होगे।…. क्या इंग्लैण्ड के सभी विद्यार्थियों का कॉलेज छोड़कर जर्मनी के खि़लाफ़ लड़ने के लिए निकल पड़ना पोलिटिक्स नहीं थी? तब हमारे उपदेशक कहाँ थे, जो उनसे कहते – जाओ, जाकर शिक्षा हासिल करो।” वह मानते थे कि नौजवनों का काम केवल नेताओं को माला पहनाना और उनके लिए नारे लगाना नहीं है, बल्कि उनको तो नीति निर्धारण में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्हें संघर्षो का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। यह आज के दौर में भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, जब देश के नौजवानों को राजनीतिक पार्टियाँ रैली, धरना और चुनाव प्रचार के लिए तो प्रयोग करती हैं, लेकिन जब यही नौजवान अपने हकों के लिए संगठित होते हैं, तो उन्हें राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी जाती है। जब तक नौजवान सांप्रदायिक हिंसा के लिए पैदल सैनिकों की तरह काम करते हैं, तो ठीक है। लेकिन अगर वही नौजवान शिक्षा और रोजगार के लिए आंदोलन का नेतृत्व करते हैं, तो नौजवानों को इन सब से दूर रहने के लिए ताकीद किया जाता है। भगत सिंह तब भी इसके खिलाफ लड़े थे और आज भी हमें इसके खिलाफ लड़ते हुए नौजवानों को उनके जनवादी अधिकारों के बारे में सजग करते हुए नीति निर्धारण में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार करना होगा।

अपने जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य ‘क्रान्ति’ की स्पष्टअवधारणा : आज़ादी की लड़ाई और उसके बाद बनने बाले देश के बारे में वह अपने समय के नेताओं से कहीं ज्यादा स्पष्ट थे। वह साफ़ घोषित करते हैं कि उनका मक़सद केवल अंग्रेजों की गुलामी से छुटकारा पाना नहीं है, बल्कि सत्ता परिवर्तन के लिए क्रांति करना है, जिससे वास्तविक सत्ता मज़दूरों और किसानों के हाथ में आ जाए। इस गंभीर मुद्दे पर उन्होंने नौजवानों से चर्चा ‘नौजवान राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम पत्र’ में की है। इसके साथ उन्होंने ‘क्रान्तिकारी कार्यक्रम का मसविदा’ में भी इस पर लिखा है। हालाँकि अदालत में सुनवाई के दौरान उनके राजनीतिक बयान और कई लेख और पर्चे हैं, जिनमें क्रांति के बारे में चर्चा की है। लेकिन हम यहाँ केवल ‘नौजवान राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम पत्र’ के जरिये ही उनके विचार को समझने का प्रयास करते हैं। वह इस पत्र में साफ़ लिखते है कि, “हम समाजवादी क्रान्ति चाहते हैं, जिसके लिए बुनियादी जरूरत राजनीतिक क्रान्ति की है। यही है जो हम चाहते हैं। राजनीतिक क्रान्ति का अर्थ राजसत्ता (यानी मोटे तौर पर ताकत) का अंग्रेजी हाथों में से भारतीय हाथों में आना है और वह भी उन भारतीयों के हाथों में, जिनका अन्तिम लक्ष्य हमारे लक्ष्य से मिलता हो। और स्पष्टता से कहें तो — राजसत्ता का सामान्य जनता की कोशिश से क्रान्तिकारी पार्टी के हाथों में आना। इसके बाद पूरी संजीदगी से पूरे समाज को समाजवादी दिशा में ले जाने के लिए जुट जाना होगा। यदि क्रान्ति से आपका यह अर्थ नहीं है तो महाशय, मेहरबानी करें और ‘इन्कलाब ज़िन्दाबाद’ के नारे लगाना बन्द कर दें।”

आगे वह बड़े ही सरल तरीके से सत्ता परिवर्तन, सामान्य विद्रोहों और सर्वहारा क्रांति के बीच का फर्क समझाते हैं — “क्रान्ति से हमारा क्या आशय है, यह स्पष्ट है। इस शताब्दी में इसका सिर्फ एक ही अर्थ हो सकता है — जनता के लिए, जनता का राजनीतिक शक्ति हासिल करना। वास्तव में यही है ‘क्रान्ति’, बाकी सभी विद्रोह तो सिर्फ मालिकों के परिवर्तन द्वारा पूँजीवादी सड़ाँध को ही आगे बढ़ाते हैं। किसी भी हद तक लोगों से या उनके उद्देश्यों से जतायी हमदर्दी जनता से वास्तविकता नहीं छिपा सकती, लोग छल को पहचानते हैं। भारत में हम भारतीय श्रमिक के शासन से कम कुछ नहीं चाहते। भारतीय श्रमिकों को — भारत में साम्राज्यवादियों और उनके मददगार हटाकर जो कि उसी आर्थिक व्यवस्था के पैरोकार हैं, जिसकी जड़ें, शोषण पर आधारित हैं — आगे आना है। हम गोरी बुराई की जगह काली बुराई को लाकर कष्ट नहीं उठाना चाहते। बुराइयाँ, एक स्वार्थी समूह की तरह, एक-दूसरे का स्थान लेने के लिए तैयार हैं”। क्रांति की असल अवधारणा की इतनी तीखी समझ के चलते ही सत्ताधारी वर्ग आज भी उनके विचारों से डरता है। वह शोषण के मूल आधार को चिन्हित करते थे और इसे बदलने का सीधा तरीका बताते थे, जिसका मक़सद केवल सत्ता परिवर्तन से केवल शोषकों को बदलना नहीं, बल्कि शोषण की समूल व्यवस्था को खत्म करना है।

क्रांति के लिए मज़दूरों और किसानों के आंदोलन का महत्व : इंक़लाब की अगुवाई क्रान्तिकारी पार्टी करेगी, जिसका मक़सद मौजूदा सामाजिक ढांचे में पूर्ण परिवर्तन और समाजवाद की स्थापना है। क्रांति में किसानों और मज़दूरों की भूमिका को वह पहचानते थे। उनका मानना था कि पैदावार करने वाले इन वर्गों के बिना मुकम्मल बदलाव संभव ही नहीं। इसके लिए वह सरमायेदार नेताओं की उलाहना भी करते थे कि वह जानबूझ कर उनकी सक्रिय भागीदारी आज़ादी की लड़ाई में सुनिश्चित नहीं करते हैं। हांँ, उनका आह्वान होता है, केवल आंदोलनों को लागू करने के लिए लेकिन नेतृत्व और निर्णय लेने से उन्हें दूर ही रखा जाता है। वह लिखते हैं, “वास्तविक क्रान्तिकारी सेनाएँ तो गाँवों और कारखानों में हैं — किसान और मजदूर। लेकिन हमारे ‘बुर्ज़ुआ’ नेताओं में उन्हें साथ लेने की हिम्मत नहीं है, न ही वे ऐसी हिम्मत कर सकते हैं। यह सोये हुए सिंह यदि एक बार गहरी नींद से जाग गये, तो वे हमारे नेताओं की लक्ष्य-पूर्ति के बाद भी रुकने वाले नहीं हैं।”

वह मेहनतकश वर्ग के सक्रिय नेतृत्व में विश्वास करते थे। इतनी छोटी सी उम्र में यह उनकी राजनीतिक और वैचारिक परिपक्वता थी। इसके चलते वह क्रांति में उत्पादन करने वाले वर्ग के नेतृत्व की अपरिहार्यता को समझते थे, तो यह कुशल संगठनकर्ता के तौर पर उनकी अद्भुत क्षमता थी कि वह इस वर्ग को लामबंद करने के तरीके को भी पहचानते थे। उस समय के बाकी बुर्ज़ुआ नेताओं की तरह वह मज़दूरों और किसानो को केवल अनुयायी नहीं मानते थे, जिनको आसानी से कोई भी अपनी राजनीति के पीछे लगा ले। वह कमेरे वर्ग को एक सजग वर्ग मानते थे, जिनको गम्भीरता से समझाना होगा कि क्रान्ति उनके हित में है और उनकी अपनी है और सर्वहारा श्रमिक वर्ग की क्रान्ति, सर्वहारा के लिए। इसी पत्र में वह स्पष्ट लिखते हैं, “हम इस बात पर विचार कर रहे थे कि क्रान्ति किन-किन ताकतों पर निर्भर है? लेकिन यदि आप सोचते हैं कि किसानों और मजदूरों को सक्रिय हिस्सेदारी के लिए आप मना लेंगे, तो मैं बताना चाहता हूँ कि वे किसी प्रकार की भावुक बातों से बेवकूफ नहीं बनाये जा सकते। वे साफ-साफ पूछेंगे कि उन्हें आपकी क्रान्ति से क्या लाभ होगा, वह क्रान्ति जिसके लिए आप उनके बलिदान की माँग कर रहे हैं। भारत सरकार का प्रमुख लार्ड रीडिंग की जगह यदि सर पुरुषोत्तम दास ठाकुर दास हो, तो उन्हें (जनता को) इससे क्या फर्क पड़ता है? एक किसान को इससे क्या फर्क पड़ेगा, यदि लार्ड इरविन को जगह सर तेज बहादुर सप्रू आ जायें।”

उपरोक्त बातों से साफ़ हो जाता है कि भगत सिंह एक सच्चे कम्युनिस्ट थे। लेकिन आज जब भगत सिंह के विचार को तिलांजलि देकर भी उनके नाम को हड़पने की होड़ लगी है, तो कई तरह का भ्रामक प्रचार किया जाता है। उनकी विरासत को हथियाने के लिए उन्हें कम्युनिस्टों से दूर किया जाता है। यहाँ तक कि अब तो साम्प्रदायिक पार्टियाँ भी, जिनका विचार उनके खुले तौर पर आतंकवादी कहता रहा है, जिनके साथी उनकी मूर्तियाँ तोड़ने जैसे नीच काम में लिप्त रहे हैं, भगत सिंह को अपने परिवार का हिस्सा बताते हैं। लेकिन बहुत ही साफ़ और स्पष्ट चेतावनी देने की जरुरत है इन सभी अवसरवादी ताकतों को कि वह भगत सिंह के नाम और विरासत से दूर रहें। जो देश सरकारों ने बनाया है और जिस दिशा में भाजपा देश को लेकर जा रही है, वह भगत सिंह के सपनों का देश नहीं है। वह तो एक कम्युनिस्ट थे, जिसने एक समाजवादी देश बनाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसमें शक की कोई गुंजाईश नहीं। फिर भी भ्रामक प्रचार के खिलाफ उपरोक्त पत्र के वह हिस्से हैं, जहां वह क्रांति के नेतृत्व के लिए जिम्मेदार कम्युनिस्ट पार्टी बनाने की बात करते हुए लिखते हैं, “पार्टी का नाम कम्युनिस्ट पार्टी हो। ठोस अनुशासन वाली राजनीतिक कार्यकर्ताओं की यह पार्टी बाकी सभी आन्दोलन चलायेगी।”

कठिन रास्ते पर बलिदानों के लिए तैयार सजग क्रांतिकारी : क्रांति की यह अवधारणा किसी नौजवान का सपना मात्र नहीं था, जिसे वह आसानी से पा लेने के किसी भ्रम में थे। यह तो भगत सिंह के मार्क्सवादी वैज्ञानिक दृष्टिकोण का ठोस विश्लेषण है। अपने मकसद को पूरा करने की कठिनाई और उसके लिए लाज़मी बलिदानों से वह भलीभांति परिचित और तैयार हैं। वह लिखते हैं, “क्रान्ति या आजादी के लिए कोई छोटा रास्ता नहीं है। ‘यह किसी सुन्दरी की तरह सुबह-सुबह हमें दिखायी नहीं देगी’ और यदि ऐसा हुआ तो वह बड़ा मनहूस दिन होगा। बिना किसी बुनियादी काम के, बगैर जुझारू जनता के और बिना किसी पार्टी के, अगर (क्रान्ति) हर तरह से तैयार हो, तो यह एक असफलता होगी।”

इसके लिए वह समर्पित कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हैं और खुद इसका नेतृत्व करते हैं। वह क्रांति के विज्ञान को समझते हैं। इसलिए सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप काम करने पर बल देते है। इसी खत में वह आगे लिखते हैं, “यह तो विशेष सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से पैदा होती है और एक संगठित पार्टी को ऐसे अवसर को सम्भालना होता है और जनता को इसके लिए तैयार करना होता है। क्रान्ति के दुस्साध्य कार्य के लिए सभी शक्तियों को संगठित करना होता है। इस सबके लिए क्रान्तिकारी कार्यकर्ताओं को अनेक कुर्बानियाँ देनी होती हैं। ….. हम तो लेनिन के अत्यन्त प्रिय शब्द ‘पेशेवर क्रान्तिकारी’ का प्रयोग करेंगे। पूरा समय देने वाले कार्यकर्ता, क्रान्ति के सिवाय जीवन में जिनकी और कोई ख्वाहिश ही न हो। जितने अधिक ऐसे कार्यकर्ता पार्टी में संगठित होंगे, उतने ही सफलता के अवसर अधिक होंगे।”

नारा तब भी इंक़लाब था, नारा आज भी इंक़लाब है : हमारे देश की वर्तमान हालात को देख कर समझ में आता है कि भगत सिंह के विचार कितने सटीक थे। देश आज़ादी का अमृतोत्सव मना रहा है, लेकिन देश का मेहनतकश मज़दूर, किसान और खेत मज़दूर आत्महत्या करने के लिए मज़बूर हो रहा है। देश के संसाधनों में उसकी हिस्सेदारी और उसकी आमदनी लगातार कम होती जा रही है। अगर हालात वही हैं, जिनका संकेत भगत सिंह ने दिया था, तो इलाज़ भी वही है, जो उन्होंने बताया था — मज़दूरों और किसानों के संघर्ष। पिछले वर्षो में हमारे अनुभव भी यही बताते हैं, जब देश में शोषणकारी कॉर्पोरेट साम्प्रदायिक नापाक गठजोड़ को मज़दूरों और किसानों के आंदोलन ने चुनौती दी। देश के नौजवानों को इसे समझते हुए मेहनतकश की एकता और आंदोलनों का नेतृत्व करना चाहिए, तभी भगत सिंह का देश हम बना पाएंगे। दूसरे शब्दों में दुश्मन तब भी साम्राज्यवाद था, दुश्मन आज भी साम्राज्यवाद है — नारा तब भी इंक़लाब था, नारा आज भी इंक़लाब है।


विक्रम सिंह

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

शी जिनपिंग-पीएम मोदी की मुलाकातः SCO Summit में ऐसे गर्मजोशी से मिले दो दिग्गज, पुतिन भी मौजूद थे
breaking international

शी जिनपिंग-पीएम मोदी की मुलाकातः SCO Summit में ऐसे गर्मजोशी से मिले दो दिग्गज, पुतिन भी मौजूद थे

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का रायपुर दौरा: सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस ने किया मॉकड्रिल
breaking Chhattisgarh

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का रायपुर दौरा: सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस ने किया मॉकड्रिल

एक ही घर से मिले 23 शव, तीर्थयात्रियों के होने की आशंका; 1000 मौतें, 4 हजार से ज्यादा लापता
breaking international

एक ही घर से मिले 23 शव, तीर्थयात्रियों के होने की आशंका; 1000 मौतें, 4 हजार से ज्यादा लापता

PM मोदी का शहबाज शरीफ के सामने सख्त संदेश: आतंकवाद पर डबल स्टैंडर्ड नहीं चलेगा, टेरर फंडिंग पर हो निर्णायक कार्रवाई
breaking Chhattisgarh

PM मोदी का शहबाज शरीफ के सामने सख्त संदेश: आतंकवाद पर डबल स्टैंडर्ड नहीं चलेगा, टेरर फंडिंग पर हो निर्णायक कार्रवाई

ED का बड़ा एक्शन पूर्व CM भूपेश बघेल के PA के.के. चंद्रवंशी के घर ED छापा, दस्तावेजों की जांच जारी
breaking Chhattisgarh

ED का बड़ा एक्शन पूर्व CM भूपेश बघेल के PA के.के. चंद्रवंशी के घर ED छापा, दस्तावेजों की जांच जारी

छत्तीसगढ़ में फिर तेज बारिश का दौर, कई जिलों में अलर्ट; गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर तेज बारिश का दौर, कई जिलों में अलर्ट; गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा बयान, कहा- बिजली के निजीकरण को लेकर कांग्रेस फैला रही भ्रम…
breaking Chhattisgarh

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा बयान, कहा- बिजली के निजीकरण को लेकर कांग्रेस फैला रही भ्रम…

बड़ा कदम: अदालतों के फैसलों और एफआईआर में अब नहीं लिखे जाएंगे ‘रखैल’ और ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्द…
breaking Chhattisgarh

बड़ा कदम: अदालतों के फैसलों और एफआईआर में अब नहीं लिखे जाएंगे ‘रखैल’ और ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्द…

छत्तीसगढ़ में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा! 24 घंटे में मिले 10 नए मामले, जानें किस जिले में कितने एक्टिव मरीज ?
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा! 24 घंटे में मिले 10 नए मामले, जानें किस जिले में कितने एक्टिव मरीज ?

दंतेवाड़ा के ‘खजाने’ से बदलेगी बस्तर की तस्वीर, DMF फंड से जंगलों तक पहुंचेगी सड़क, पानी और बिजली; 4 जिलों को फायदा
breaking Chhattisgarh

दंतेवाड़ा के ‘खजाने’ से बदलेगी बस्तर की तस्वीर, DMF फंड से जंगलों तक पहुंचेगी सड़क, पानी और बिजली; 4 जिलों को फायदा

दुर्ग के बाद अब यहां स्वाइन फ्लू की दस्तक, 7 मरीजों की पुष्टि से मचा हड़कंप, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग
breaking Chhattisgarh

दुर्ग के बाद अब यहां स्वाइन फ्लू की दस्तक, 7 मरीजों की पुष्टि से मचा हड़कंप, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग

नेपाल में बाढ़ का कहर, 178 भारतीय नागरिक समेत 644 टूरिस्ट लापता, 150 से ज्यादा मौतें
breaking international

नेपाल में बाढ़ का कहर, 178 भारतीय नागरिक समेत 644 टूरिस्ट लापता, 150 से ज्यादा मौतें

सीमा विवाद से मानसरोवर तक… डोभाल-वांग यी की मुलाकात में भारत-चीन के बीच इन 8 मुद्दों पर सहमति
breaking international

सीमा विवाद से मानसरोवर तक… डोभाल-वांग यी की मुलाकात में भारत-चीन के बीच इन 8 मुद्दों पर सहमति

छत्तीसगढ़ में 1 सितंबर से शुरू होगी बिजली कनेक्शनों की eKYC, जानिए घर बैठे कैसे करें पूरी प्रक्रिया?
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 1 सितंबर से शुरू होगी बिजली कनेक्शनों की eKYC, जानिए घर बैठे कैसे करें पूरी प्रक्रिया?

TET को लेकर मानी गई शिक्षकों की बड़ी मांग! छत्तीसगढ़ में अब साल में 3 बार होगी परीक्षा
breaking Chhattisgarh

TET को लेकर मानी गई शिक्षकों की बड़ी मांग! छत्तीसगढ़ में अब साल में 3 बार होगी परीक्षा

IGKV में एक बार फिर पेपर लीक ! B.Sc फर्स्ट ईयर का ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ पेपर परीक्षा से 6 घंटे पहले वायरल
breaking Chhattisgarh

IGKV में एक बार फिर पेपर लीक ! B.Sc फर्स्ट ईयर का ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ पेपर परीक्षा से 6 घंटे पहले वायरल

कांग्रेस ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा: CM साय
breaking Chhattisgarh

कांग्रेस ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा: CM साय

छत्तीसगढ़ में निजी बिजली वितरण कंपनी ने लगाया दांव, टाटा पावर ने मांगी अनुमति…
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में निजी बिजली वितरण कंपनी ने लगाया दांव, टाटा पावर ने मांगी अनुमति…

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बोले- शिक्षक ही करा रहे आंदोलन, प्राचार्यों का ध्यान सिर्फ केबिन स्पेस पर; यूट्यूब पत्रकारों की एंट्री पर रोक
breaking Chhattisgarh

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बोले- शिक्षक ही करा रहे आंदोलन, प्राचार्यों का ध्यान सिर्फ केबिन स्पेस पर; यूट्यूब पत्रकारों की एंट्री पर रोक

छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर, 1 सितंबर से शुरू होगी eKYC, नाम गलत हुआ तो अटक जाएगा सत्यापन
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर, 1 सितंबर से शुरू होगी eKYC, नाम गलत हुआ तो अटक जाएगा सत्यापन

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य
poetry

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

कहानी

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू
story

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन