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कथायान – 2 : ‘ तपस्या ‘ •-संतोष झांझी

3 years ago
558

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तपस्या
-संतोष झांझी
[ भिलाई छत्तीसगढ़ ]

बीजी छत पर टहल रही थी,अनवरत इधर से उधर।कुछ भी खालो अब
मरा हजम ही नही होता।टहलते टहलते खीज उठती है बीजी ,थक कर पल भर के
लिये कुर्सी पर पीठ टिकाकर बैठ जाती है।छत के फर्श पर तो बैठ नहीं सकती,अगर
बैठ सकती तो कुछ देर पैर फैलाकर बैठने से कितनी राहत मिलती,पर यह मरा
घुटनों का दर्द न तो जमीन पर बैठने देता है न ही उठने।पहले कभी कभी बीजी
जमीन पर बैठ भी जाती थी।उस समय बिट्टी के बाऊजी भी उसके साथ टहलते
थे, हाथ बढाकरफूल की तरहजमीन से उठा देते थे वो बीजी को,,,,पर अब उनके
गुज़रने के बाद कैसा सहारा ? किसका सहारा ?

दोनो बेटे बहुएँ अपनें मे मस्त,समय ही नही किसी के पास कि दो बोल
बीजी से भी कभी बोल लें।अब तो दिन त्योहार मे भी बीजी की राय पूछने की जरूरत
नहीं समझते ।आपस में ही हर समय गजर बजर लगाये रहते हैं बीजी पास बैठी रहे
उस तरफ कोई ध्यान ही नहीं देता। बीच मे अगर बीजीकिसी बात मे कुछ कह भी दे
तो कोई उस तरफ गौर ही नहीं करता ।किससे बात करे बीजी ?बहुओं का क्या कुसूर?
पराई ठहरी। पुत्र ही उनके और उनको मायके के दुमछल्ले बने फिरते हैं। औरत के माँ
बाप की तो खूब खातर तवज्जों कर दे,बीजी ने ही पता नही की बिगाड़ दित्ता इनां
कपूतां दा।
बिमारी ठिमारी में भी बस लैक्चर ही पिलाते हैं सारे–“जाकर डाक्टर से
दवा क्यों नहीं लेते ” अपनी जोरूओ को जरा सिरदर्द भी हो तो गड्डी मे ले लेकर
दौड़े फिरते है नासपीटे। बहुएँ तो खुद गड्डी चलाकर इधर उधर भागी फिरती है तो खुद
दवा नहीं ला सकती अपनी? बीजी क्या करे ?।रिक्शा में चढ़ते उतरते भी साँस चढ
जाती है,,,घुटने तड़तड़ाने लगते हैं। बड़ी मजबूरी मे ही दवा लेने जाना पड़ता है बीजी को।

जब पैसे धेले की जरूरत पड़े इन पूतों को, तब बड़ी मीठी मीठी बातें
करें बीजी से।बीजी भी क्या करे, आखिर माँ है,शिकायत अपनी जगह है ममता अपनी

जगह,तरस आ जाता है उनकी उतरी हुई शकलें देखकर,,,पेंशन के जोड़ जोड़ कर रखे
पैसे निकालकर थमा देती है सपूतों का चेहरा लगाये इन कपूतों को। दूसरे ही दिन देखती
है बहू की नई साड़ी आ जाती है या सब मिलकर सिनेमा देखने चल देते हैं।

बीजी का दुख सुख पूछने वाली बस एक ही है लाजो। वह रोज छत पर
आकर पूछ लेती है घुटनों के दर्द का हाल,,,,,पर वह भी पन्द्रह दिनों से बाहर गई है और
पन्द्रह दिनों में बीजी किसी से बात करनें से भी तरस गई। पोते पोतियों भी पल्ला नहीं
पकड़ाते अब,, बड़े हो गये हैं। जब बड़े होने पर उनके बाप को माँ की जरूरत नही रह
गई तो पोते पोतियों को ही दादी की जरूरत कैसे रहेगी ?इन्हें पालने के लिये बीजी में
जैसे फिर से एक नई ताकत भर गई थी, कमर का दर्द,घुटनों का दर्द,भूलकर दिन रात
इन बच्चों के पीछे दौड़ती रही है।अब कोई बात तक नहीं करता।एक मिनट कोई पास
आकर नही बैठता। दादी नानी की कहानियों का युग बीत गया। बच्चों को उनसे अधिक
आकर्षक टेलीविजन मीडिया परोस रहा है।अर्ध नग्न,पुर्णनग्न,कूल्हे हिलाते कच्ची उम्र को
सेक्स और प्रेम के त्रिकोण,चौकोण और असंख्य कोणों के पाठ पढाता चीखता चिल्लाता
लड़ाकू कल्चर,, अपने माँ बाप की देखा देखी बच्चों ने भी बीजी को एक अनावश्यक प्राणी
अनावश्यक तत्व,अनावश्यक जीव ,,,हाँ वैसा ही कुछ समझ लिया है ।

बीजी ने मुंडेर से आंगन में झांका, लाजो को साहब सिंह मंसूरी
घुमाने ले गया है। तीनों बच्चों को नानी के घर छोड़कर गये हैं वो लोग। खूब सुन्दर है
लाजो,खिली खिली रंगत,घने स्वस्थ लंबे बालों की मोटी मोटी रस्से जैसी दो चोटिया।
बहुत प्यार करता है साहब सिंह लाजो को। एजेन्टी का काम करता है साहब सिंह, हफ्ता
हफ्ता बाहर रहना पड़ता है। महीने मे पाँच सात दिन ही घर में रह पाता है साहब सिंह।
हरबार लाजो के लिये ढेरों तोहफे लेकर लौटता है साहब सिंह।

बीजी की तेज अनुभवी आँखें कई महीनों से देख रही हैं, देख क्या
रहीं है समझ रहीं है,,,,,सूंघ रहीं हैं ,,कुछ ऐसा है जो ठीक नहीं है।लाजो की आँखों में
आजकल हर वक्त जैसे एक नशा सा छाया रहता है।देह की भाषा भी आजकल पता नहीं
कौन सी अनसुलझी पहेली सुलझाने में लगी है। होंठ कुछ कहते हैं पर आँखे कुछ और ही
कहती प्रतीत होती हैं। देह हमेशा तनी रहती है।देह का ज्वार जैसे बाहर फूट पड़ने कोघ घघ
आतुर हो।

अभी भी दरवाजे पर ताला जड़ा है।लगता है अभी भी नही लौटे,,नीचे
की बाटा दुकान वाला लड़का,,,,क्या तो नाम है उसका ?,,,भला सा,, दीपू मुखर्जी,,,अभी
अभी आकर ताला देखकर गया है,,,,बीमार लग रहा है,,उदास भी,,,दाढ़ी बढी हुई है।

जानें से पहले लाजो मुंडेर पर खड़ी खड़ी बीजी को बड़ी देर तक ऊँची
बताती रही अपनें मंसूरी जाने के बारे में,,,,बहुत खुश लग रही थी लाजो,,पर बच्चे छोड़
कर जाना उसे अच्छा नहीं लग रहा था।साहब सिह ने उसे समझाया था—बच्चों को कुछ
मजा नहीं आयेगा,अभी छोटे हैं,,हम भी परेशान हो जायेंगे ।कुछ साल बाद जब समझदार
हो जायेंगे,,फिर ले जायेगे बच्चो को घुमाने। बड़ी बेटी बंसो अभी छै साल की थी उससे छोटे
दोनों बेटे चार और अढ़ाई साल के।

बीजी ने उठकर फिर टहलना शुरू कर दिया।सोचने लगी—“अच्छा
लाजो उसदिन बात तो मुझसे कर रही थी,पर उसकी आँखें नीचे बाटा कंपनी के दरवाजे पर
कहीं उलझी थी।बीजी ने एकबार लाजो की नजरों का पीछा करते हुए नीचे झाँककर देखा
तो वहाँ दीपू मुखर्जी ऊँट की तरह गरदन उठाये ताकता हुआ खड़ा था फिर थोड़ी ही देर
बाद वह उपर चला आया था,,,लाजो के घर,,, बीजी ने दिमाग पर जोर डाला,,,उस समय
साहब सिंह कहां था,,, कहां था साहब सिंह ?? हाँ याद आया,,, वह बच्चों को नानी के घर
बाँधाघाट छोड़ने गया था उससमय।उसी दिन उन्हें रात की गाड़ी से मंसुरी जाना था न इसलिये।

बीजी ने अपनें माथे पर हाथ मारा–ओह मनां (मन)यह सब नहीं
सोचना चाहिये,,,पाप है, मुझे क्या ?,,,,पर निगाह तो इन्सान की पड़ ही जाती है न ? हो सकता
है दीपू को लाजो से कोई काम हो ,,पर दीपू चोरों की तरह चारों तरफ चौकन्नी निगाहों से
देखते हुए जब लाजो के घर से निकला,,, तब बीजी ने पहली बार इस बारे मे सोचा था।उसदिन
बीजी ने फिर एकबार अकेलापन महसूस किया। बीजी ने लाजो से अपनी मुलाकातों को याद
किया तो उन्हें बहुत सदमा पहुंचा,,उन्हें लगा लाजो उनसे मजबूरी मे बात करती थी।उसका
निशाना तो नीचे की बाटा कम्पनी की दुकान होती थी, जहां दीपू मुखर्जी खड़ा इधर ही देखता
रहता था।

सुबह सुबह किसी शोर से बीजी की नींद उचट गई। पास की
तिपाई से टटोल कर चश्मा और छड़ी उठा बीजी ने अपने कमरे का दरवाजा खोला। सामनें
ही सीढ़ियों के पास दोनो बेटे बहुएँ बड़ी रहस्य भरी,पर उत्तेजित आवाज में बाते कर रहे थे।
—“क्या हुआ ? बीजी ने घबरा कर पूछा।
—“वो साहब सिह की बीवी मर गई। “बड़ी बहू ने मुंह जरा तिरछा करते हुए कहा ।
–“क्या ? कैसे? बीजी के हाथ से छड़ी गिर गई।
–“मंसूरी मे फिसल कर खाई में गिर गई। “बेटा बोला।
–“हे भगवान, तह क्या किया ? छोटे छोटे बच्चे बेचारे,,,,,,”बीजी लड़खड़ाती नीचे बैठ गई ।कैसे
क्या करेगा बेचारा साहब सिंह? ”
जितने मुंह उतनी बातें। बिल्ली आँखें बंदकर दूध पीती है पर लोगो की आँखें भी कुछ अधिक
ही खुली रहती है ।चारों तरफ काना फूसी हो रही थी।–” साहब सिंह ने ही अपनी बीवी को
खाई में धकेल दिया होगा”
-“ऐसा न करता तो किसी दिन भाग जाती बंगाली के साथ।”
-“कितना प्यार करता था साहब सिंह उसे।”
–“जाने से पहले उसे कितने कपड़े बनवाकर दिये, कंगन बनवा दिये, मंसूरी की ठंड में पहनने
के लिये दो कोट बनवाकर दिये,,, एक हाफ कोट,एक ओवरकोट,,,,
–” पर साहब सिंह ने उसे पता नही लगने दिया कि वह सब जान गया है।”,,,–“एक चुप साध ली,
न झगड़ा न लड़ाई ,न मार पीट, बस बड़े प्यार मुहब्बत से सब काम कर दिया।

बीजी रोज टहलते हुए देखा करती, साहब सिंह कभी बच्चों को नहला
रहा है,कभी नाश्ता कभी खाना बनाकर खिला रहा है,कभी बंसो की चीटियां गूथते हुए देखती
साहब सिंह को, उसने लोगों की उस काना फूसी को भी गलत साबित कर दिया की देखना अब
साहब सिंह जल्दी ही दूसरी ब्याह लायेगा। तब होगी बेचारे बच्चों की दुर्गति,,, बच्चो की दुर्गति
बचाने के लिये साहब सिंह की खुद दुर्गति हो रही थी। बीजी देख रही थी उसकी पहले जैसी
ठेकेदार बेफिक्र हंसी फिर कभी भी किसी को सुनाई नहीं दी। जैसे मशीन बन गया था साहब सिंह
चलती फिरती मशीन,,,, सुबह से उठकर नाश्ता,फिर खाना बनाना, बच्चो को ब्रश करवाकर
नहला बुलाकर स्कूल भेजना, बर्तन, झाडू पोछा, करने के बाद खुद नहाता, सबके कपडे धो
डालता। घर मे किसी महरी की घुसपैठ, पूछताछ, और ताका झांकी से बचकर खुद सारे काम
करता। बच्चों को स्कूल छोड़ते हुए अपने काम पर निकल जाता। शाम को बच्चों के स्कूल से
लौटने तक खुद भी लौट आता। बच्चों को नाश्ता देकर रात का खाना बनाते हुए बच्चों को
पढाता रहता।

बीजी अक्सर बच्चों के पास चली जाती,।बंसो की चोटिया बना देती।
उनकी आँख पूरे घर मे लाजो की निशानियाँ तलाशती,पर उन्हे कोई भी ऐसी चीज नजर नही
आई।लाजो और साहब सिंह की बड़ी फोटो जो दीवार पर लगी थी वह कहीं भी नजर नही आई।
बीजी हैरान थी,फिर उन्होने सोचा,बच्चे फोटो देख उदास न हो शायद इसलिये साहब सिंह ने कुछ
समय के लिये सारी फोटो हटा दी होगी।

बीजी को बिट्टी के बाऊजी याद आये, दस साल हो गये बीजी ने
उनकी एक एक निशानी सहेज कर रखी है। कभी कभी जब बेटे बहुएँ घर पर नहीं होते बीजी
उनकी सारी निशानियाँ खोलकर घंटों यादों के गलियारों मे घूमती रहती है। कितना सुकून
मिलता है,उन यादों को दोहराने मे,। पति की याद मे बीजी की आँखें छलछला आईं। कितना
प्यार करते थे वो बीजी को। उन्हें दुनियाँ की सबसे सुन्दर और समझदार औरत समझते थे वो।
बीजी ने भी उनके परिवार के लिये,उनके माँ बाप और भाई बहनों के लिये,अपनी जवान
हसरतें की कभी चिन्ता नहीं की। बड़े बेटे की जमनी पर बीजी के पिताजी ने घी दूध के लिये
उस जमाने मे दो सौ रूपये भेजे थे। पति की इच्छा थी अपनें छोटे भाई को कोट सिलवाकर
देने की, बीजी ने खुशी खुशी वो दो सौ रूपये देवर का कोट बनवाने के लिये पति को दे दिये।
इस तरह बिना पंजीरी के ही पहली जचकी निकल गई।

प्यार ऐसे ही परवान नहीं चढता,प्यार हमेशा कुर्बानियां चाहता है।
धीरे धीरे पति पत्नि एक दूसरे के गुणों और स्वभाव,प्यार और विश्वास से इतने करीब आजाते
हैं कि वहाँ देह और दैहिक सुन्दरता का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

छै साल की बंसो अब बारह तेरह साल की हो गई। साहब सिंह की
मदद करने लायक अब हो गई थी बंसो। कभी कभार कहीं जाना होता तो साहब सिंह बीजी
को बच्चों के पास छोडकर जाता। बीजी के पास तो समय ही समय था। ऐसे ही एक दिन बीजी
ने साहब सिंह से कहा–“पुत्तर बंसो दोसूती कढाई के डिजाइन के लिये अडोस पड़ोस मे पूछ
रही है। लाजो के हाथ के बने ढेरों टेबिल क्लास और चार पांच चादरें थी। वो ही निकालकर
दे दे बंसो डिजाइन उतार लेगी।

साहब सिंह चुप रहा, उसने जैसे बीजी की बात सुनकर भी अनसुनी
कर दी थी। बीजी साहब सिंह की चुप्पी से हैरान थी। उसने प्यार से कहा–” सुन पुत्तर, तू जरा
इधर मेरे पास आकर बैठ,,, साहब सिंह चुपचाप आकर बीजी के पास बैठ गया।
–“देख पुत्तर, गुस्सा न करना,, वो सब चीजें जो चले गये,उनकी यादे होती है तूं उससे बचता
क्यों फिरता है ? बच्चे अपनी माँ की फोटो तक देखने को तरस गये हैं, दिखा दे न एक दिन
फोटो निकाल के, कितनी सुन्दर थी उनकी माँ,,, दिखना क्या? सामने दीवार पर लगा दे लाजो
की फोटो,, तुझे तो बच्चे डरकर यह सब कहते नहीं,,
साहब सिंह चुपचाप बीजी के पास सर झुकाये बैठा रहा।–” क्या बात है । तू उन यादों का
सामना करने से घबराता क्यो है? कुछ तो बताओ ?
–“क्या बोलूं बीजी, आप उम्र मे मुझसे बड़े हो, यादें वो होती है जिसे याद करनें से तनमन
मे मिठास सी घुल जाए ।ऐसी यादे जीवन की अमूल्य धरोहर होती हैं। इन्सान उन यादों के
सहारे पूरा जीवन गुजार देता है,पर,,, मैने अगर उन यादो को कुरेदा तो मुझे पता है बीजी
उन यादो की कड़वाहट मुझे जीने नहीं देगी। मुझे तो देवदास बनकर भरनें का भी अधिकार
नहीं है बीजी,,,, इन बच्चों का क्या होगा ?
मेरे जीवन का तो एक ही व्रत है,,, इन बच्चों का भविष्य संवारना,,, अपनी इस तपस्या पर
मैं उन यादों का काला साया भी पड़ने देना नही चाहता बीजी।
कहकर साहब सिंह नें घुटनों में मुंह छुपा लिया। बीजी ने साहब सिंह के सर पर धीरे से
हाथ रखा।अब चुप्पी साधने की बीजी की बारी थी।

•पता-
डी/7, सड़क – 12, आशीष नगर [पश्चिम], भिलाई नगर, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़. पिन : 490 006.
• मोबाइल नम्बर :
97703 36177

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लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
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कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
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🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
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चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
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रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

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रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

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कहानी : संतोष झांझी

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कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
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‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
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रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
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काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
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लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
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जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन