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विशेष : पढ़ने की संस्कृति : केरल का अनूठा लाइब्रेरी आंदोलन – हरलीन कौर

2 years ago
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बीसवीं सदी में किसानों और मज़दूरों के नेतृत्व में ज़मींदारी प्रथा के ख़िलाफ़ अनेक लड़ाइयां लड़ी गईं। ज़मींदारों ने किसानों का उत्पीड़न कई तरीक़ों से किया था, जिनमें किसानों को पढ़ने से वंचित रखना भी शामिल था। इसलिए ज़मींदारों की सत्ता उखाड़ फेंकने के लिए केवल भूमि सुधार के उपाय करना काफ़ी नहीं था। ज़रूरी था आम जनता में पढ़ने व चिंतन की संस्कृति को बढ़ावा देना। इसलिए जहाँ भी मेहनतकशों की क्रांतियाँ हुईं, वहाँ एक नए समाज के निर्माण के लिए शिक्षा-संस्कृति को बढ़ावा देने का अभियान चलाया गया।

हमारे देश में केरल में कम्युनिस्ट आंदोलन की सक्रिय उपस्थिति के कारण इस तरह की मुहिम ने ज़ोर पकड़ा। वहाँ सार्वजनिक पुस्तकालयों के ज़रिए पढ़ने की संस्कृति विकसित हुई, जो आज भी बरक़रार है।

लगभग 3.34 करोड़ की आबादी वाले केरल राज्य के किसी भी क़स्बे या शहर में जाइए, आपको निश्चित रूप से वहाँ सार्वजनिक पुस्तकालय दिखाई देंगे, जिनमें लोग साथ लेकर जाने के लिए किताबें ढूँढ रहे होंगे या टेबल पर बैठकर किताबें पढ़ रहे होंगे। केरल में नौ हज़ार से ज़्यादा सार्वजनिक पुस्तकालय हैं।

1920 के दशक में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ जारी आंदोलन के दौरान साक्षरता का मुद्दा उपनिवेशवाद-विरोधी भारतीय राष्ट्रवाद के एजेंडे का हिस्सा था। सार्वजनिक पुस्तकालयों को साक्षरता अभियान का महत्त्वपूर्ण साधन माना जाता था। पुस्तकालय भारत के उन राज्यों में विकास एजेंडे का अहम हिस्सा पहले से ही बन चुके थे जो उदार शासकों के अधीन थे, (जैसे बड़ौदा, जिसे अब वडोदरा के नाम से जाना जाता है)।

भारत के लाइब्रेरी आंदोलन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी शुरुआत अधिकतर जगहों पर दोस्तों के किसी समूह द्वारा अपनी पुस्तकों और समाचार पत्रों को इकट्ठा कर अपने गाँव-क़स्बे में छोटा सा पुस्तकालय शुरू करने के साथ हुई थी।

उदाहरण के लिए के.एन. पणिक्कर – जिन्हें केरल के लाइब्रेरी आंदोलन का जनक माना जाता है — बताते हैं कि समाचार पत्रों तक केवल अमीर लोगों की पहुँच थी। पर जब वह ख़ुद किसी तरह से एक समाचार पत्र की सदस्यता लेने में सफल हो गए, तो उनके घर पर आठ-दस लोग इकट्ठा होने लगे, जो उनसे समाचार पढ़ कर सुनाने का आग्रह करते।

उन्होंने कहा, ‘जब कभी अख़बार नहीं आता था, तो मैं उन्हें महान नायकों की जीवनियाँ पढ़कर सुनाता था’। वह आगे कहते हैं कि ‘मेरे एक दोस्त ने दो समाचार पत्र और लगवा लिए थे और उसके पास कुछ पुस्तकें भी थीं। इन पुस्तकों और समाचार पत्रों को एक छोटे से बिना किराए वाले कमरे में इकट्ठा कर हमने एक छोटा पुस्तकालय शुरू किया था’।

इस तरह लाइब्रेरी शुरू करने से जुड़ी हज़ारों कहानियाँ हैं। ऐसे कई पुस्तकालयों को बाद में राज्य पुस्तकालय प्रणाली में शामिल कर लिया गया, जिससे उन पुस्तकालयों को संसाधन मिले और उनका दायरा भी बढ़ा।

इसी तरह के छोटे-छोटे पुस्तकालयों के साथ केरल में पुस्तकालय आंदोलन की शुरुआत हुई थी। भारत के अन्य राज्यों में भी लाइब्रेरी आंदोलन चले, पर आज भी इसका केंद्र केरल ही है। और आज भी ऐसे छोटे पुस्तकालय इस आंदोलन की जान हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण हैं कन्नूर ज़िले के पुस्तकालय।

केरल में सबसे ज़्यादा पुस्तकालय कन्नूर में हैं। लगभग 29,000 लोगों की आबादी वाले गाँव मायिल की ग्राम पंचायत, कन्नूर ज़िले की 93 स्थानीय सरकारों में से एक है। इस इलाक़े में केरल राज्य पुस्तकालय परिषद से संबद्ध 34 पुस्तकालय हैं। इसका मतलब है कि हर वर्ग किलोमीटर में लगभग एक पुस्तकालय है, जिनमें से प्रत्येक पुस्तकालय लगभग 872 लोगों को सेवा प्रदान करने में सक्षम है। दुनिया के किसी भी हिस्से में पुस्तकालयों का इस कदर असाधारण घनत्व देखने को नहीं मिलेगा। ये सभी पुस्तकालय राज्य सरकार द्वारा वित्त-पोषित हैं और सभी में कंप्यूटर व एकीकृत कैटलॉग की सुविधा के साथ-साथ प्रशिक्षित लाइब्रेरियन हैं, जो आसपास के समुदाय के लिए बेहतरीन संसाधन की तरह हैं।

इनमें से हरेक पुस्तकालय की अपनी कहानी है, और कई पुस्तकालयों का नाम तो किसी राष्ट्रवादी या कम्युनिस्ट नेता के नाम पर रखा गया है। जैसे, मायिल में स्थित वेलम पोथुजना वायनशाला की शुरुआत 1934 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य ईश्वरन नंबूथिरी द्वारा ग्रामीणों के बीच हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए स्कूल से हुई थी। आज इस लाइब्रेरी में 18,000 पुस्तकें हैं।

थालास्सेरी की पराल पोथुजना वायनशाला पब्लिक लाइब्रेरी 1934 में कौमुदी नाम की एक सोलह वर्षीय लड़की के योगदान से शुरू हुई थी, जिन्होंने अपने सोने के ज़ेवर स्वतंत्रता आंदोलन के लिए दे दिए थे। उसी पैसे से लाइब्रेरी का निर्माण किया गया, जिसमें अब कन्नूर ज़िले के इतिहास का अभिलेखागार भी शामिल है।

कंदक्कई में स्थित एस.जे.एम. वायनशाला और देशीय ग्रंथालयम केरल में उन्नीसवीं सदी के सामाजिक सुधार आंदोलनों के दौरान श्री जथावेद गुरु नामक एक व्यक्ति द्वारा बनाया गया था। उन्होंने गाँववासियों को जातिगत पदानुक्रम और भेदभाव से लड़ने के लिए प्रेरित करने हेतु एक छोटी सी लाइब्रेरी शुरू की थी, जहां आज दस हज़ार से अधिक पुस्तकें मौजूद हैं।

पिनाराई में स्थित सी. माधवन स्मारक वायनशाला की कहानी दिलचस्प है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी का पहला सम्मेलन 1939 में पिनाराई में गुप्त रूप से आयोजित किया गया था। उसके दो दशक बाद प्रगतिशील युवा संगठन ‘श्री श्री नारायण आश्रिता युवाजन संघम’ ने एक सामाजिक कार्यकर्ता के नाम पर सी. माधवन मेमोरियल लाइब्रेरी शुरू की।

आज इस पुस्तकालय में स्थानीय स्तर पर डोनेशन सिस्टम के ज़रिए हर साल हज़ारों किताबें इकट्ठी की जाती हैं। सामुदायिक भावना का विस्तार इस कदर हुआ है कि आज जब भी इस क्षेत्र में नया घर बनता है, तो लाइब्रेरी के नाम से उसके पास कोई फलदार पेड़ लगाया जाता है।

इसी तरह 1950 के दशक में एज़होम गाँव के बुनकरों ने ‘यंग मेन्स क्लब’ के नाम से एक रीडिंग रूम शुरू किया था, जिसे अब कुलप्पुरम वायनशाला और ग्रंथालयम कहा जाता है। वह छोटा रीडिंग रूम आज तीन मंज़िला जलवायु-नियंत्रित पुस्तकालय है, जिसमें सार्वजनिक आयोजनों के लिए एक विशेष जगह बनाई गई है और एक बड़ा खेल का मैदान तथा वेजिटेबल गार्डेन भी है। यह पुस्तकालय कई तरह की सामाजिक सेवाएँ भी प्रदान करता है, जैसे पुस्तक वितरण और महिलाओं के लिए मोटरसाइकिल ड्राइविंग का कोर्स। इस कोर्स से अब तक सौ से अधिक महिलाएँ ड्राइविंग सीख कर लाइसेंस प्राप्त करने में सफल रही हैं।

2008 में पुस्तकालय ने कन्नूर ज़िले के परियारम में स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर गांव के 700 घरों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी इकट्ठा की और गाँव वालों को नगरपालिका की विभिन्न सेवाओं के बारे में जानकारी दी।

देशोद्धारना वायनशाला एवं पब्लिक लाइब्रेरी की शुरुआत खजूर के बाग के किनारे 1960 के दशक में किसानों ने की थी। बीड़ी बनाने, बुनकरी जैसे दिहाड़ी मज़दूरी के काम करने वाले किसानों ने अपने पैसे जमा करके पठन-पाठन व चिंतन के लिए एक जगह बनाई जहां आज क़रीब 9,000 किताबें हैं।

कावुम्बई में स्थित थलियान रमन नंबियार मेमोरियल पब्लिक रीडिंग रूम हॉल (थलियान रमन नंबियार मेमोरियल पब्लिक लाइब्रेरी स्मारक पोथुजना वायनशाला) किसान नेता थलियान रमन के सम्मान में शुरू की गई। 1946 में कावुम्बई के किसान विद्रोह के दौरान उन्हें गिरफ़्तार किया गया था और चार साल बाद सलेम जेल में पुलिस द्वारा किए गए नरसंहार में उनकी हत्या हो गई। 1962 में स्थानीय किसानों ने उनके सम्मान में यह लाइब्रेरी बनवाई थी।

करिवेल्लूर स्थित एवन-वन लाइब्रेरी शुरू हुई थी एवन-वन क्लब के रूप में। इस लाइब्रेरी में आज 17,574 किताबें हैं और 619 सदस्य हैं। यह लाइब्रेरी बच्चों के लिए रीडिंग की गतिविधियाँ आयोजित करती है, समय-समय पर फिल्म स्क्रीनिंग आयोजित करती है और बुजुर्गों को उनके घरों तक किताबें पहुँचाती है। लाइब्रेरी के स्थानीय इतिहास समूह के साथ जुड़-कर दो स्थानीय शोधकर्ताओं ने इतिहास पर अपने शोध-ग्रंथ तैयार किए हैं।

महामारी के दौरान पुस्तकालय आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने देख-रेख कार्य में और छात्रों के लिए शिक्षा जारी रखने में उल्लेखनीय मदद पहुँचाई। इसका एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण नेटवर्क परियोजना है, जो कन्नूर ज़िले के आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू हुई थी। इस परियोजना की शुरुआत सीपीआई (एम) नेता और राज्यसभा सदस्य डॉ. वी. शिवदासन ने की थी और जल्द ही यह परियोजना पीपुल्स मिशन फॉर सोशल डेवलपमेंट (पीएमएसडी) ट्रस्ट का एक अभिन्न अंग बन गई। यह ट्रस्ट कन्नूर ज़िला पुस्तकालय परिषद के तहत काम करती है, और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इसके मुख्य संरक्षक हैं तथा शिवदासन अध्यक्ष हैं।

पीएमएसडी का संकल्प है हर वार्ड में एक पुस्तकालय स्थापित करने में सहयोग करना। इसी के साथ पीएमएसडी ने कन्नूर विश्वविद्यालय और केरल की लाइब्रेरी काउंसिल के साथ मिलकर जनवरी 2023 में पहली भारतीय लाइब्रेरी कांग्रेस की मेजबानी की, जिसमें पाँच लाख लोगों ने भाग लिया था। कांग्रेस की तैयारी के लिए आयोजकों ने विभिन्न विषयों पर 1,500 सेमिनार आयोजित किए। भाग लेने वालों में 3,000 लाइब्रेरियन के अलावा स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, सहकारी कार्यकर्ता, छात्र, शिक्षक और अन्य लोग शामिल थे।

भारतीय लाइब्रेरी कांग्रेस विभिन्न राज्यों में आयोजित होने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम बन चुका है। इस साल का आयोजन दिल्ली में होने वाला है। भारतीय लाइब्रेरी कांग्रेस का उद्देश्य निम्नलिखित विचारों को बढ़ावा देना है:

1. अधिक से अधिक स्थानों पर पुस्तकालय शुरू किए जाने चाहिए, जहां पुस्तकों के भंडार के साथ यथासंभव उन्नत तकनीक भी उपलब्ध हो।

2. पुस्तकालय केवल शहरी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाक़ों में भी स्थापित किए जाने चाहिए, जैसे पूर्वोत्तर केरल में वायनाड के पहाड़ी इलाके में।

3. लोगों के लिए पुस्तकालय एक महत्त्वपूर्ण और सक्रिय सार्वजनिक स्थान बनें, जहां सांस्कृतिक विकास के पर्याप्त मौक़े मिलने के साथ फिल्म स्क्रीनिंग, खेल, कला मेले और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों के आयोजन हो। पुस्तकालयों के आसपास स्वास्थ्य केंद्र और विज्ञान कक्षाएं स्थापित की जानी चाहिए।

लाइब्रेरी आंदोलन कामकाजी लोगों की मेहनत से चलता है। इनमें से एक हैं पय्यन्नूर अन्नूर के राजन वी.पी., जो छठी कक्षा तक पढ़े थे और एक बीड़ी मजदूर थे। जब राजन ने छोटी उम्र में एक बीड़ी फैक्ट्री में काम करना शुरू किया तो वे वहाँ के मज़दूरों की पढ़ने की आदत से खूब प्रभावित हुए। लंच ब्रेक से पहले मज़दूर एक-दूसरे को दैनिक समाचार पढ़कर सुनाते और लंच के बाद में कोई उपन्यास। ऐसा क्यूबा की सिगार फैक्टरियों में भी देखा जा सकता है। इस तरह रोज़ अख़बार और उपन्यास पढ़ते हुए राजन को आगे पढ़ने की प्रेरणा मिली, जिससे उन्हें अपने घर के पास स्थित एक सहकारी बैंक में क्लर्क के रूप में नई नौकरी मिल गई। 2008 तक वे बैंक के प्रबंधक रहे। उस वर्ष, राजन ने पीपुल्स लाइब्रेरी और रीडिंग रूम की स्थापना की, जो अब शहर में सांस्कृतिक जीवन का केंद्र बन गया है।

लाइब्रेरी आंदोलन की एक और अनूठी नेता हैं साठ साल की राधा वी.पी.। उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की है और एक बीड़ी मजदूर हैं। छोटी उम्र से ही उन्हें अपने घर के कामकाज की ज़िम्मेदारी उठानी पढ़ी। उन्होंने बचपन में ही सीपीआई (एम) की साप्ताहिक पत्रिका देशाभिमानी पढ़ना शुरू कर दिया था। वह पत्रिका में शामिल कहानियों व कविताओं पर टिप्पणी करते हुए संपादकों को पत्र भी लिखतीं। 2002 में राधा ‘जवाहर मूविंग लाइब्रेरी’ से जुड़ीं। यह लाइब्रेरी 2001 में शुरू हुई थी और पाठकों, ख़ास तौर पर महिलाओं और बुज़ुर्गों के घरों तक किताबें पहुँचाती है। काम के बाद राधा एक हाथ में लाइब्रेरी रजिस्टर और कंधे पर किताबों से भरा बैग लेकर घर-घर किताबें देने जाने लगीं। जल्द ही उन्हें इस रूप में आते देखना स्थानीय लोगों के लिए ख़ुशी का सबब बन गया।

2018 में उन्होंने दसवीं कक्षा पूरी की और उच्च शिक्षा के लिए ज़रूरी राज्य परीक्षा पास की। अपनी पढ़ाई और काम के बीच भी लाइब्रेरी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कभी कम नहीं हुई। वो कहती हैं कि, ‘मुझे यह काम करना अच्छा लगता है। मुझे कभी भी अपना बैग भारी नहीं लगा, क्योंकि किताबों की भीनी महक से मुझे हमेशा बहुत ख़ुशी मिलती रही।’

राजन और राधा जैसे कामकाजी लोग ही केरल के लाइब्रेरी आंदोलन को सुचारू रूप से चलाने के लिए ज़रूरी जज़्बे का प्रतीक हैं।

[ • नयूजक्लिक से साभार ]

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‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
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काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
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काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

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लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
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जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन