• Chhattisgarh
  • विशेष : ट्रंप का टैरिफ आतंकवाद और उसके सबक- प्रभात पटनायक

विशेष : ट्रंप का टैरिफ आतंकवाद और उसके सबक- प्रभात पटनायक

10 months ago
353

अर्थशास्त्र की पाठ्य पुस्तकें सिखाती हैं कि कोई देश टैरिफ तब लगाता है, जब उसे आयातित मालों से अपने घरेलू उत्पादकों की हिफाजत करनी होती है। लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफों का मकसद इससे कहीं व्यापक है।

ये टैरिफ तो एक सैन्य हस्तक्षेप की तरह या तख्तापलट की कोशिश की तरह या किसी आतंकवादी हमले की तरह हैं, जिनका मकसद ट्रंप की मर्जी के सामने दूसरे देशों को झुकाना है।

मिसाल के तौर पर भारत के वस्त्र निर्यातकों पर 50 फीसद टैरिफ का भार कोई इसलिए नहीं डाला गया है कि इसके जरिए किन्हीं अमेरिकी वस्त्र निर्माताओं को संरक्षण मुहैया कराया जाना है, बल्कि इसका मकसद तो भारत को ट्रंप की मर्जी के सामने घुटने टेकने पर मजबूर करना ही है।

हम इसी से ट्रंप की टैरिफ नीति की असंगतियों की व्याख्या कर सकते हैं। भारत के खिलाफ ट्रंप ने जो 50 फीसद टैरिफ लगाया है, कथित रूप से रूसी तेल खरीदने की सजा के तौर पर लगाया गया है। लेकिन, रूस से ऊर्जा का सबसे बड़ा खरीददार, भारत से बड़ा खरीददार तो चीन है। इसके बावजूद, चीन से अमेरिका में ज्यादातर आयातों पर टैरिफ की दर 50 फीसद से कम है।

इस भिन्नतापूर्ण सलूक की वजह इस तथ्य में छुपी है कि ट्रंप का मानना है कि भारत को दबाव डालकर झुकाया जा सकता है, जबकि चीन को नहीं झुकाया जा सकता है। चीन तो जवाब में चोट कर के अमेरिका को ही दर्द दे सकता है, मिसाल के तौर पर रेअर अर्थ्स के निर्यात रोक कर तकलीफ दे सकता है, जबकि भारत ने अभी तक तो किसी जवाबी कार्रवाई की धमकी नहीं दी है। इस लिहाज से भारत, ब्राजील से भी अलग है, जो ऐसा अकेला देश है, जिस पर 50 फीसद टैरिफ लगाया गया है। ब्राजील ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

ब्राजील के मालों पर 50 फीसद टैरिफ लगाने का ट्रंप का प्रकट कारण, और भी अजीबोगरीब है। कहा जा रहा है कि यह, नव-फासीवादी पूर्व-राष्ट्रपति, जेअर बोल्सोनारो पर मुकदमा चलाए जाने की सजा के तौर पर किया जा रहा है। बोल्सोनारो, पिछले चुनाव में हार गया था और ट्रंप का मानना है कि उसे सम्मान-सहित बरी किया जाना चाहिए। लेकिन, यह ट्रंप की उद्घतता का मुख्य कारण नहीं हो सकता है। भारत और ब्राजील को छांटकर, 50 फीसद टैरिफ थोपने के लिए चुने जाने का असली कारण संभवत: यही है कि अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ बन सकने वाले किसी भी संयुक्त मोर्चे को तोड़ा जाए और ऐसा किया जाए, तीसरी दुनिया के दो सबसे बड़े देशों को धमकाकर, इससे अलग होने के लिए मजबूर करने के जरिए।

नियंत्रणात्मक रणनीति ध्वस्त

टैरिफों का हथियार बनाया जाना, साम्राज्यवाद की एक पूरी तरह से नयी कार्यनीति है। निरुपनिवेशीकरण के बाद ज्यादातर तीसरी दुनिया के देशों ने नियंत्रणात्मक रणनीति अपनायी थी, जो आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती थी, घरेलू बाजार का प्रसार करती थी और घरेलू उत्पादन तथा प्रौद्योगिकीय क्षमताओं का विकास करने के लिए राज्य का और विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र का उपयोग करती थी। इस रणनीति के खिलाफ साम्राज्यवाद द्वारा लगातार लड़ाई छेड़े रखी गयी थी। और शुरूआत में इस लड़ाई का विचारधारात्मक घटक, पूर्वी एशिया की ‘‘चार की चौकड़ी’’ की तथाकथित सफलता की दुहाइयां देना था। ये चौकड़ी थी—हांगकांग, सिंगापुर, ताईवान और दक्षिणी कोरिया। इसी सिलसिले में विश्व बैंक ने ‘‘अंतर्मुखी’’ और ‘‘बहिर्मुखी’’ विकास रणनीतियों का विभेद गढ़ा था। पूर्वी एशियाई चौकड़ी की सफलता की दलील देकर, ‘‘बहिर्मुखी’’ विकास रणनीति की श्रेष्ठता के दावे किए जाते थे।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, एक बौद्धिक रूप से पूरी तरह से बेईमानी भरी दलील का इस्तेमाल किया जा रहा था कि पूर्वी एशियाई चौकड़ी में निर्यात तथा जीडीपी वृद्धि की जैसी दरों को हासिल किया गया था, वैसी दरें सभी देशों में हासिल की जा सकती हैं, बशर्ते सभी देश उनकी तरह ‘‘बहिर्मुखी’’ रणनीति पर चलें। यह दलील बेतुकी थी, क्योंकि सभी देशों को मिलाकर उनके निर्यात की वृद्धि दर की सीमाएं, विश्व बाजार की वृद्धि दर से तय होती हैं। इसका नतीजा यह है कि कुछ देशों में अगर कहीं तेज वृद्धि दर हासिल की जाती है तो, यह अन्य देशों में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि दर रहने के बल पर ही हो रहा होगा। लेकिन, इस तर्क को इस पूर्वधारणा के सहारे खारिज कर दिया गया कि हरेक देश एक ‘‘छोटा सा देश’’ है, जो जितना चाहे निर्यात कर सकता है।

दो कारकों ने बहस का पलड़ा, साम्राज्यवादी दलील के पक्ष में झुका दिया था। पहला कारक तो, चीन की निर्यात सफलता का ही था। बेशक, यह सफलता एक पूरी तरह से भिन्न सामाजिक-आर्थिक संदर्भ में और एक भिन्न विकास यात्रा पथ पर चलते हुए हासिल की गयी थी, फिर भी इसे सारी दुनिया के सामने ‘‘बहिर्मुखी’’ रणनीति की श्रेष्ठता को साबित करने वाली कामयाबी बनाकर पेश किया गया। दूसरा कारक था, विकसित दुनिया की पूंजी के प्रकटत: इसका इच्छुक होने का कि अपनी गतिविधियों को तीसरी दुनिया में ले जाए। तर्क दिया जा रहा था कि इससे पूंजीवाद का, तीसरी दुनिया की ओर प्रसरण होगा और यह विकसित तथा विकासशील दुनिया के अंतर को ही मिटा देगा। यह मान लिया गया था कि विकसित दुनिया के राज्य हाथ पर हाथ धरकर बैठे रहेंगे और अनंतकाल तक इसके चलते अपनी घरेलू अर्थव्यवस्थाओं में बेरोजगारी के बढ़ने को देखते रहेंगे तथा आर्थिक गतिविधियों के इस तरह के तबादले को रोकने के लिए कुछ करेंगे ही नहीं।

साम्राज्यवाद का शिकंजा कसा

बहरहाल, इन सभी कारकों ने बहस को नियंत्रणात्मक व्यवस्था के खिलाफ झुकाने का काम किया। अलबत्ता इस झुकाव का भौतिक आधार बड़े पूंजीपति वर्ग के वर्गीय हितों में था, जिसे वैश्विक हो जाने की संभावनाओं ने ललचाया था। और इसके पीछे शहरी उच्च मध्य वर्ग के हित थे, जिसके बच्चे बढ़े पैमाने पर विकसित देशों में बसने के लिए देश से बाहर जा रहे थे और इसलिए वह खुद को विकसित दुनिया से जितने घनिष्ठ रूप से जुड़ा देखता था तथा अब भी देखता है, उतने घनिष्ठ रूप से घरेलू मजदूरों तथा किसानों के साथ जुड़ा हुआ नहीं देखता है। इसी बीच विश्व बैंक तथा आईएमएफ भी काफी सक्रिय हो गए। ऐसा खासतौर पर तब हुआ, जब तेल धक्कों के बाद तीसरी दुनिया के कई देश भुगतान संतुलन संकट की चपेट में आ गए। इन वित्तीय एजेंसियों ने तीसरी दुनिया के अनेक देशों में वित्त मंत्रालयों के अति-महत्वपूर्ण निर्णयकारी पदों पर अपने कर्मचारियों को बैठा दिया। इसका सिलसिला अफ्रीका से शुरू हुआ और बाद में अन्य देशों तक पहुंच गया। इसका मकसद नियंत्रणात्मक निजामों को भीतर से ध्वस्त करना था। भारत को इसका श्रेय देना होगा कि उसने सबसे अंत तक इसका प्रतिरोध किया। लेकिन, 1991 में आखिरकार उसने भी घुटने टेक दिए।

यहां इसका वर्णन करने की जरूरत नहीं है कि बाद में नव-उदारवादी निजाम के अंतर्गत क्या हुआ? बहरहाल, अब यह स्पष्ट है कि तीसरी दुनिया के देशों को ललचा कर विकसित दुनिया के बाजारों पर निर्भर बनाने और ‘‘नियम आधारित’’ अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की बड़ी-बड़ी बातें करने के बाद, साम्राज्यवाद अब टैरिफ के जरिए उन्हें धौंस में लेने की स्थिति में आ गया है, जिससे उन्हें अपने फरमान मानने के लिए मजबूर कर सके।

साम्राज्यवाद, तीसरी दुनिया के करोड़ों लाचार किसानों तथा मजदूरों को, जिसमें पचासों लाख महिला मजदूर भी शामिल हैं, रोजगार से बाहर कराने का खतरा पैदा कर, उन पर भारी बदहाली थोप सकता है। भारतीय कपास किसानों के साथ तो वह पहले ही यह कर भी रहा है। उन्होंने अपने यहां विशाल कृषि सब्सीडियां बनायी हुई हैं, जबकि मोदी सरकार ने पिछले ही दिनों आयातित कपास पर लगा 11 फीसद आयात शुल्क उठा लिया। इससे किसानों की और ज्यादा आत्महत्याएं अपरिहार्य हो जाएंगी, जबकि भारत के करोड़ों कपड़ा मजदूरों पर, 50 फीसद का अनाप-शनाप टैरिफ लगाए जाने के चलते, अमेरिकी बाजार के बंद होने से पड़ने वाले प्रतिकूल असर पर, रत्तीभर फर्क नहीं पड़ने जा रहा है। भारत के कपड़ा तथा वस्त्र निर्यातों के साथ ट्रंप के टैरिफ यही करने जा रहे हैं।

संक्षेप में यह कि ग़ज़ा में जो कुछ सबसे जघन्य रूप में हो रहा है, उसे अन्यत्र भी घटित कराया जा सकता है और यह सैन्य हस्तक्षेप के जरिए नहीं, टैरिफ आतंकवाद के जरिए, साम्राज्यवादी फरमान को मानने से इंकार करने वाले तीसरी दुनिया के देशों के साथ किया जा रहा होगा। यह साम्राज्यवाद का बदले की भावना के साथ अपना जोर दिखाना है।

नियंत्रणात्मक रणनीति निरुपनिवेशीकरण की पूरक

सबक यह है कि एक मुख्य रूप से घरेलू बाजार आधारित, आत्मनिर्भरता-उन्मुख, नियंत्रणात्मक विकास रणनीति, निरुपनिवेशीकरण का आवश्यक परिपूरक है, जैसा कि भारत और तीसरी दुनिया के अन्य देशों ने निरुपनिवेशीकरण के फौरन बाद पहचाना था। एक ‘‘बहिर्मुखी’’ विकास रणनीति तो तीसरी दुनिया के देशों को साम्राज्यवाद के फरमान का चाकर बना देती है क्योंकि अन्य कारणों के अलावा तीसरी दुनिया के ये देश, साम्राज्यवादी बाजार पर निर्भर हो जाएंगे।

हमें किसानों के साल भर लंबे आंदोलन का शुक्रगुजार होना चाहिए, जिसने हमारे देश को अपनी खाद्यान्न आत्मनिर्भरता का त्याग करने और अमेरिका से खाद्यान्न के आयातों पर निर्भर होने से रोक दिया। हमारे खाद्यान्न के लिए, अमेरिका से आयातों पर निर्भर हो जाने ने तो, भारत पर अपनी मर्जी थोपने के लिए, साम्राज्यवाद के हाथों में और भी असरदार हथियार थमा दिया होता। जो साम्राज्यवादी ताकत ग़ज़ा के लोगों के नरसंहार में मिलीभगत कर सकती है, क्या उसे अपनी साम्राज्यवादी इच्छाओं के खिलाफ किसी तीसरी दुनिया के देश के चलने की सूरत में, उसे खाद्यान्न आयातों से वंचित करने के जरिए, भारत जैसे किसी देश में अकाल भड़काने में खास हिचक होगी?

इसलिए, भारत जैसे किसी देश के लिए यह जरूरी है कि अपनी विकास रणनीति को बदले। इससे, पुरानी नियंत्रणात्मक रणनीति पर ही लौटने का अर्थ नहीं लिया जाना चाहिए। इसके बजाए, जरूरत एक ऐसी नियंत्रणात्मक रणनीति के अपनाए जाने की है, जो अंतर्निहित रूप से भूमि सुधारों को लागू करने के जरिए, कृषि को बढ़ावा देने के माध्यम से, मेहनतकश जनता के पक्ष में आय का पुनर्वितरण करे और कल्याणकारी राज्य के कदमों के जरिए सामाजिक मजदूरी बढ़ाने के माध्यम से, घरेलूू बाजार के आकार को बढ़ाते रहने के लिए काम करे।

कोई कह सकता है कि मोदी सरकार ने 15 अगस्त को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में जिन रियायतों की घोषणा की है, उनके जरिए यही तो करने का प्रयास किया गया है। लेकिन, ऐसा दावा बेतुका होगा। हालांकि, जीएसटी में दी जा रही वास्तविक रियायतें, जो न तो मुख्यत: मेहनतकश जनता को दी जा रही हैं और न उनकी भरपाई ही अमीरों पर कर लगाकर की जाने वाली है, हमने तत्काल जो अनुमान लगाया था, उससे थोड़ा-सा ज्यादा रहने जा रहा है। (यह जीडीपी का 0.1 फीसद नहीं, 0.6 फीसद रहने जा रहा है और 0.32 लाख करोड़ नहीं, 1.95 लाख करोड़ रुपए रहने जा रहा है।) फिर भी यह दयनीय ढंग से थोड़ा रहने जा रहा है। एक ऐसे वैकल्पिक विकास यात्रापथ के लिए, जो कल्याणकारी राज्य के कदमों को सबसे ऊपर रखता हो, सरकार द्वारा जीडीपी का कम से कम 10 फीसद अतिरिक्त रूप से खर्च किए जाने की जरूरत होगी।

इसके अलावा सरकार को उन मजदूरों की तकलीफें दूर करने के लिए कदम उठाने होंगे, जिनके रोजगार पर ट्रंप के टैरिफों की कड़ी मार पडऩे जा रही है। इस तथ्य को देखते हुए कि साम्राज्यवाद टैरिफों को हथियार बना रहा है, इन चोटों के नुकसान से उबरने के लिए निर्यात सब्सीडियां देने जैसे कदम शायद पर्याप्त नहीं होंगे, क्योंकि ट्रंप उस स्थिति में टैरिफ और भी बढ़ा सकता है। फिर भी अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के ऊपर से, जैसी कार्रवाई चीन तथा ब्राजील कर रहे हैं, इस तरह के कदमों को आजमाया जा सकता है। इसके अलावा वैकल्पिक बाजारों की तलाश करने की सक्रिय कोशिशें की जानी चाहिए। इसके अलावा जो इन प्रहारों के शिकार होने जा रहे हैं, उनके लिए रोजगार के वैकल्पिक मौकों की तलाश किया जाना भी जरूरी है।

मोदी सरकार इस दिशा में कुछ कर तो नहीं ही रही है, वह वास्तव में अमेरिका को खुश करने के लिए अन्य क्षेत्रों में उसे रियायतें देने की ही कोशिशें कर रही है, जैसे भारत में कपास के तटकर मुक्त आयातों की इजाजत देना, जिसकी भारतीय किसानों पर कड़ी मार पड़ने जा रही है। इतना ही नहीं, यह सरकार ठीक इसी मुकाम पर उस मनरेगा पर खर्च में कटौतियां कर रही है, जो ग्रामीण भारत में मुसीबत के मारे लोगों के लिए एक जीवन-रेखा मुहैया करा सकती है।

[ • लेखक प्रभात पटनायक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के आर्थिक अध्ययन एवं योजना केंद्र में प्रोफेसर एमेरिटस हैं. ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले का इंतजार खत्म, 700 शिक्षको के हुए ट्रांसफर; 400 नाम हटाए गए
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले का इंतजार खत्म, 700 शिक्षको के हुए ट्रांसफर; 400 नाम हटाए गए

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 24 IFS अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें पूरी लिस्ट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 24 IFS अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें पूरी लिस्ट

ATM से मिलेगा अनाज : रायपुर समेत 3 शहरों में ग्रेन एटीएम शुरू, दूसरे राज्य के हितग्राही भी कर सकेंगे इस्तेमाल
breaking Chhattisgarh

ATM से मिलेगा अनाज : रायपुर समेत 3 शहरों में ग्रेन एटीएम शुरू, दूसरे राज्य के हितग्राही भी कर सकेंगे इस्तेमाल

भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी करने वाले अरुण पन्नालाल गए जेल, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका…
breaking Chhattisgarh

भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी करने वाले अरुण पन्नालाल गए जेल, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका…

छत्तीसगढ़ में मौसम का अलर्ट: 6 जिलों में 40-60 KM की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी, बिजली गिरने के साथ बारिश के आसार
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में मौसम का अलर्ट: 6 जिलों में 40-60 KM की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी, बिजली गिरने के साथ बारिश के आसार

सुप्रीम कोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, चुनाव याचिका पर अब होगी सुनवाई, जानिए क्या है मामला…
breaking Chhattisgarh

सुप्रीम कोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, चुनाव याचिका पर अब होगी सुनवाई, जानिए क्या है मामला…

हाईकोर्ट का अहम फैसला, तबादले के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकती किसी कर्मचारी की अर्जित वरिष्ठता…
breaking Chhattisgarh

हाईकोर्ट का अहम फैसला, तबादले के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकती किसी कर्मचारी की अर्जित वरिष्ठता…

NEET-UG 2026 पेपर लीक: CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA के 3 एक्सपर्ट पर लीक कराने का आरोप, बताया कैसे छात्रों तक पहुंचाया गया पेपर
breaking National

NEET-UG 2026 पेपर लीक: CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA के 3 एक्सपर्ट पर लीक कराने का आरोप, बताया कैसे छात्रों तक पहुंचाया गया पेपर

छत्तीसगढ़ को ई-बसों की सौगात… सबसे पहले दुर्ग-भिलाई में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, अब तक कुल 240 बसों को मिली मंजूरी
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ को ई-बसों की सौगात… सबसे पहले दुर्ग-भिलाई में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, अब तक कुल 240 बसों को मिली मंजूरी

जानिए याददाश्त बढ़ाने के आसान और वैज्ञानिक तरीके, बेहतर मेमोरी के लिए अपनाएं ये आदतें
breaking Chhattisgarh

जानिए याददाश्त बढ़ाने के आसान और वैज्ञानिक तरीके, बेहतर मेमोरी के लिए अपनाएं ये आदतें

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा छत्तीसगढ़ को भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं भविष्य की क्रिटिकल मिनरल अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बनाने का विजन
breaking National

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा छत्तीसगढ़ को भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं भविष्य की क्रिटिकल मिनरल अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बनाने का विजन

रेल यात्रियों को बड़ी राहत, अब घर बैठे करें अतिरिक्त लगेज की ऑनलाइन बुकिंग, हवाई यात्रा जैसी सुविधा रेलवे में भी शुरू
breaking Chhattisgarh

रेल यात्रियों को बड़ी राहत, अब घर बैठे करें अतिरिक्त लगेज की ऑनलाइन बुकिंग, हवाई यात्रा जैसी सुविधा रेलवे में भी शुरू

वरिष्ठजन कल्याण महासंघ के चुनाव में घनश्याम कुमार देवांगन सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित
breaking Chhattisgarh

वरिष्ठजन कल्याण महासंघ के चुनाव में घनश्याम कुमार देवांगन सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर
breaking National

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस
breaking Chhattisgarh

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस

छत्तीसगढ़ की बेटी सोनम शर्मा करेगी भारतीय नेटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व, हांगकांग में होगी प्रतियोगिता
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की बेटी सोनम शर्मा करेगी भारतीय नेटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व, हांगकांग में होगी प्रतियोगिता

20 लाख की प्रतिमा पर उठे सवाल, डेढ़ साल में उखड़ने लगी बाहरी परत, जांच और कार्रवाई की मांग तेज
breaking Chhattisgarh

20 लाख की प्रतिमा पर उठे सवाल, डेढ़ साल में उखड़ने लगी बाहरी परत, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी, 15 अक्टूबर तक आम जनता से मांगे गए सुझाव
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी, 15 अक्टूबर तक आम जनता से मांगे गए सुझाव

मॉनसून में बाथरूम की इन चीजों को जरूर बदलें, वरना बढ़ सकता है बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा
breaking Chhattisgarh

मॉनसून में बाथरूम की इन चीजों को जरूर बदलें, वरना बढ़ सकता है बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’
poetry

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन