• Chhattisgarh
  • विशेष आलेख : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय [जेएनयू] केस के एक दशक बाद : भारतीय विश्वविद्यालय में असहमति की खामोश आवाज़ें- तारुषि असवानी

विशेष आलेख : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय [जेएनयू] केस के एक दशक बाद : भारतीय विश्वविद्यालय में असहमति की खामोश आवाज़ें- तारुषि असवानी

7 months ago
275

दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों की ओर जाने वाली सड़कों पर ईंटों की दीवारों पर लगे चमकीले बैनर एक साहित्य महोत्सव का ऐलान करते हैं। बैनरों के मुताबिक यह महोत्सव 12 से 14 फरवरी के बीच डीयू में आयोजित किया गया। कॉलेजों के भीतर और कैंपस हॉस्टलों में साउंड चेक के दौरान भजन बजाए गए।

महोत्सव की पुस्तिका में इसे कुलपति योगेश सिंह की परिकल्पना के अनुसार एक जीवंत साहित्यिक ‘परंपरा’ की शुरुआत बताया गया है।

लेकिन ठीक दस साल पहले यही फरवरी का महीना राजधानी के विश्वविद्यालयों में बिल्कुल अलग माहौल लिए हुए था। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक विरोध सभा देखते-देखते गिरफ्तारियों और राष्ट्रीय स्तर के टकराव में बदल गई थी, एक ऐसा घटनाक्रम जिसने विश्वविद्यालयों और राज्य के रिश्ते को नए सिरे से परिभाषित कर दिया।

इसके बाद के सालों में कॉलेजों में दाख़िला लेने वाले छात्र कहते हैं कि उस दौर की छाया आज भी बनी हुई है। उनका कहना है कि असहमति ख़त्म नहीं हुई है, लेकिन अब हर विरोध को अनुशासनात्मक कार्रवाई, पुलिस की नज़र और अनिश्चित भविष्य के ख़तरे के साथ तौला जाता है।

विरोध और सज़ा

9 फरवरी 2016 को, वर्ष 2001 में संसद पर हमले के दोषी ठहराए गए कश्मीरी अलगाववादी मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु को 2013 में फांसी दिए जाने के विरोध में जेएनयू में एक रैली आयोजित हुई, जिसके बाद कई छात्रों पर राजद्रोह के आरोप लगाए गए और उन्हें गिरफ्तार किया गया।

उस समय पुलिस ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने अफ़ज़ल गुरु की याद में एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें ‘भारत-विरोधी नारे’ लगाए गए। इसके बाद जेएनयू के छात्रों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ (एंटी-नेशनल) करार दिया जाने लगा और कैंपस वैचारिक टकराव का मैदान बन गया।

फरवरी 2016 की गिरफ्तारियों के बाद के दिनों में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कैंपस में असहमति के मुद्दे को राष्ट्रीय पहचान के सवालों से जोड़ दिया था। तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जेएनयू विवाद में सरकार ने ‘वैचारिक जंग जीत ली है,’ और यह संकेत दिया था कि आरोप झेलने वाले लोग भी अंततः देशभक्ति के नारे और तिरंगे को अपना रहे हैं।

वहीं तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि ऐसे नारों के ज़रिये भारत की एकता और अखंडता पर सवाल उठाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। और इस तरह विरोध प्रदर्शनों को सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया गया था।

विश्वविद्यालयों के शिक्षक याद करते हैं कि इसके बाद देश भर के परिसरों में प्रशासनों ने सार्वजनिक बैठकों, सुरक्षा इंतज़ामों और अनुशासनात्मक नियमों की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी। वक्ताओं को बुलाने, कार्यक्रमों की अनुमति देने और प्रदर्शनों के प्रबंधन को अब प्रतिष्ठा और क़ानूनी जोखिम के चश्मे से देखा जाने लगा। यह केवल कोरी आशंका नहीं थी कि कैंपस में होने वाला कोई भी कार्यक्रम राष्ट्रीय विवाद में बदल जा सकता है।

इसका असर जल्द ही इस विश्वविद्यालय के दायरे से बाहर भी दिखने लगा। 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में आयोजित एक साहित्यिक सेमिनार उस समय विवादों में घिर गया, जब जेएनयू से जुड़े रहे उमर ख़ालिद और शेहला रशीद को आमंत्रित किया गया। एबीवीपी के विरोध के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया, कैंपस के बाहर झड़पें हुईं और मामला जल्द ही विश्वविद्यालयों में स्वीकार्य अभिव्यक्ति की सीमाओं पर राष्ट्रीय बहस में बदल गया।

कई छात्रों और शिक्षकों के लिए यह इस बात का संकेत था कि कोई शैक्षणिक कार्यक्रम कितनी तेज़ी से टकराव के मैदान में बदल सकता है।

2016 के बाद दाख़िला लेने वाले छात्रों का कहना है कि उन्होंने इस सतर्कता को सामान्य समझ की तरह अपनाया। वे बताते हैं कि अब रैलियों में हिस्सा लेने से पहले निगरानी, सोशल मीडिया पर नज़र और भविष्य की नौकरी को लेकर बातचीत होती है। सवाल यह नहीं रह गया कि बोलने की आज़ादी है या नहीं, बल्कि यह कि बढ़ते असहिष्णु राजनीतिक माहौल में एक युवा कितना जोखिम उठा सकता है।

आंदोलनों की बदलती रणनीति

पूर्व में प्रदर्शनों का हिस्सा रहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया की एक छात्रा ने ‘द वायर’ से कहा, ‘हमें पीटा गया, एक महिला पुलिसकर्मी ने मुझे उन जगहों पर मारा, जहां किसी महिला को नहीं छुआ जाना चाहिए।’

2019 से देश के कई कैंपसों में टकरावों की एक ऐसी श्रृंखला देखने को मिली, जिसने हर अगले आंदोलन की दिशा तय की।

दिसंबर 2019 में जामिया कैंपस और सड़क के बीच की सीमा टूटती दिखी टीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो में दिल्ली पुलिस के जवानों को विश्वविद्यालय के गेट से अंदर घुसते, आंसू गैस छोड़ते और इमारतों में प्रवेश करते देखा गया, जबकि छात्र जान बचाने के लिए भागते नज़र आए।

लाइब्रेरी के भीतर की तस्वीरें कुछ ही मिनटों में फैल गईं और कई दिनों तक दिखाई जाती रहीं, जिसमे छात्र मेज़ों के पीछे दुबके हुए थे और कुछ खून से सने चेहरों के साथ बाहर निकल रहे थ। विश्वविद्यालय के पास नागरिकता (संशोधन) अधिनियम/एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भी आंसू गैस से तितर-बितर किया गया। छात्रों और नागरिक अधिकार समूहों ने अत्यधिक बल प्रयोग और शैक्षणिक परिसरों में अवैध प्रवेश के आरोप लगाए, जबकि पुलिस का कहना था कि वह मुख्य सड़क से हटे प्रदर्शनकारियों का पीछा कर रही थी।

देश भर के लोगों के लिए इस घटना ने कैंपस की सुरक्षा को लेकर धारणाओं को बदल दिया। वहीं, इसे झेल चुके छात्रों के लिए यह एक स्थायी आघात बन गया। एक छात्र ने बताया कि वे क़ानून का पालन करने वाले नागरिक हैं, फिर भी पुलिस या रैपिड एक्शन फ़ोर्स की मौजूदगी उन्हें असहज कर देती है।

सीएए/एनआरसी विरोधी आंदोलन जल्द ही भाजपा सरकार की कल्पना से कहीं आगे बढ़ गया और देश के कई इलाकों व विश्वविद्यालयों में फैल गया। विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद कुछ बदल गया। कैंपसों में सेंसरशिप बढ़ गई।

‘द वायर’ से बात करने वाले शिक्षकों और पर्यवेक्षकों ने कहा कि कई विश्वविद्यालयों में सुनियोजित ढंग से दक्षिणपंथी झुकाव वाले डीन, कुलपति और प्रोफेसरों की नियुक्ति की गई। विशेष रूप से 2016 के बाद और 2019 के बाद तो यह और तेज़ हुआ। ऐसे ‘भाजपा-समर्थक’ लोगों की नियुक्ति आसान होती गई, जो छात्रों को निलंबित करते, कार्यक्रमों की अनुमति नहीं देते या ऐसे आयोजनों को रद्द कर देते, जिनसे वामपंथी या उदार विचारधारा की बू आती हो।

जेएनयू से सेवानिवृत्त हुए अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अरुण कुमार का कहना है कि सत्ता से असहमति दर्ज करने की आज़ादी लगातार सीमित की जा रही है। उन्होंने ‘द वायर’ से कहा, ‘सत्ता असहिष्णु हो गई है। विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होते हैं, जहां मतभेद और असहमति से ज्ञान का जन्म होता है। भाजपा, आरएसएस के प्रति अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता निभा रही है। जैसे वहां असहमति की जगह नहीं है, वैसे ही वे कहीं और भी असहमति नहीं चाहते।’

कुमार ने 2016 से पहले और बाद की स्थिति की तुलना करते हुए कहा, ‘ऐसा नहीं है कि पहले विचारधाराएं नहीं थीं, लेकिन विश्वविद्यालयों में मतभेद और असहमति पर चर्चा की गुंजाइश थी। आज वह जगह बहुत संकरी हो गई है।’

दक्षिणपंथ का उभार

जेएनयू के विवाद की गूंज जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली विश्वविद्यालय, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़, साउथ एशियन यूनिवर्सिटी और आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली तक साफ़ सुनाई दी। कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और शिक्षकों को निलंबन पत्र थमाए।

मार्च 2025 में डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली की अंतिम वर्ष की एमए छात्रा को गणतंत्र दिवस पर कुलपति अनु सिंह लाठर के भाषण की आलोचना करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। लाठर ने अपने भाषण में राम जन्मभूमि आंदोलन को 525 साल पुराना बताया था और राम मंदिर के निर्माण के लिए सत्ता पक्ष की सराहना की थी। उन्होंने डॉ. आंबेडकर को ‘केवल’ दलित समुदाय तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय व्यक्तित्व के रूप में देखने की बात भी कही थी।

कई कैंपसों में निलंबन आदेश अब सिर्फ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि व्यापक संकेत माने जाने लगे हैं।

हाल ही में पूरी जेएनयू छात्रसंघ को यूजीसी के जाति-भेदभाव संबंधी नियमों के समर्थन में प्रदर्शन करने पर ‘निष्कासित’ कर दिया गया था। जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित ने एक साक्षात्कार में इस फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के छात्रों को केंद्र सरकार को ‘भगवान’ की तरह मानना चाहिए, क्योंकि उनकी शिक्षा सब्सिडी पर है।

शिक्षकों का कहना है कि ऐसे फ़ैसले यह संकेत देते हैं कि किस तरह की अभिव्यक्ति पर सज़ा मिल सकती है और किसे संस्थागत समर्थन मिलेगा। समय के साथ इसका नतीजा एक ख़ामोश, पहले से सोच-समझकर चलने वाली आज्ञाकारिता के रूप में सामने आता है, आयोजक अतिथि सूची पर पुनर्विचार करते हैं, छात्र हल्की नारेबाजी करते हैं और विभाग ऐसे विषयों से बचते हैं, जो जांच के दायरे में आ सकते हैं। इसी माहौल में रद्द सेमिनार, बदले गए पाठ्यक्रम और आधिकारिक तौर पर प्रोत्साहित कार्यक्रम व्यापक राजनीतिक अर्थ ग्रहण करते हैं।

पाठ्यक्रम में किए गए विवादास्पद बदलावों ने भी छात्रों को बार-बार सड़कों पर उतरने को मजबूर किया है। हाल के वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय में कांचा इलैया शेफर्ड की किताब ‘व्हाय आई एम नॉट अ हिंदू’ हटाने और मनुस्मृति के अंश जोड़ने या भगवद गीता से जुड़े पाठ बढ़ाने, जबकि मुग़ल काल से जुड़े अध्याय घटाने के प्रस्तावों का छात्रों और शिक्षकों ने विरोध किया।

कमला नेहरू कॉलेज की अर्थशास्त्र की सहायक प्रोफेसर मोनामी बसु ने ‘द वायर’ से कहा, ‘प्रोफेसर नंदिनी सुंदर के संयोजन में होने वाला कोलॉक्वियम बिना किसी वजह के रद्द कर दिया गया। एक तरह की चर्चा को हतोत्साहित किया जा रहा है और दूसरी तरह की चर्चा को आगे बढ़ाया जा रहा है।’

दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की सदस्य के तौर पर बसु का कहना है कि कुछ पाठ्यक्रमों और हिस्सों को किसी ख़ास विचारधारा के ख़िलाफ़ होने के कारण हटाया गया, जबकि कुछ को मौजूदा सत्ता की विचारधारा से मेल खाने के कारण शामिल किया गया। उन्होंने कहा, ‘मैंने इसका विरोध किया है। जाति और जेंडर से जुड़े हिस्सों को हटाने की कोशिशें हुईं, और कभी-कभी हम कुछ हिस्से बचाने में सफल भी हुए। यह भी सेंसरशिप का ही एक रूप है।’

बहिष्कार का सामान्यीकरण

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी प्रोफेसर अपूर्वानंद कहते हैं कि कैंपस में तेज़ आवाज़ में भजन बजते हैं, जिनका केंद्र ‘जय श्री राम,’ ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ होता है। उन्होंने ‘द वायर’ से कहा, ‘कैंपस को अब ऐसा बना दिया गया है। यह लोगों को अलग-थलग करने का काम करता है। यह आरएसएस का मंच बनता जा रहा है। कुछ हफ्ते पहले यहां सरस्वती पूजा हुई, हर तरफ जय श्री राम के झंडे थे। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भंडारे आयोजित किए गए थे।’

उन्होंने कहा, ‘यहां जो कुछ भी हो रहा है, वह हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। भाजपा या आरएसएस के झुकाव के बिना कोई छात्र गतिविधि होने नहीं दी जाती। छात्र राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं बची है। साहित्य महोत्सव की अतिथि सूची देख लीजिए।’ अपूर्वानंद के मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों में भी यही रुझान दिख रहे हैं।

पिछले साल अपूर्वानंद को जामिया हमदर्द में व्याख्यान के लिए बुलाया गया था, लेकिन आख़िरी वक्त पर कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। 2025 में उन्हें न्यूयॉर्क के ‘द न्यू स्कूल’ में एक अकादमिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना था, जिसके लिए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनसे पहले उनके भाषण का पाठ जमा करने को कहा। इंकार करने पर उन्हें विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई।

उन्होंने कहा, ‘यहां का माहौल पूरी तरह से ख़त्म कर दिया गया है।’

इसी बीच, डीयू लिटरेचर फ़ेस्टिवल की शुरुआत एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश, भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव, भाजपा के विदेश मामलों के प्रभारी डॉ. विजय चौथाईवाले से हुई। अन्य वक्ताओं में राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, दक्षिणपंथी टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप, राहुल शिवशंकर, रुबिका लियाक़त, द कश्मीर फ़ाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री और भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला शामिल थे।

इस रिपोर्ट के लिए जिन शिक्षकों से बात की गई, उनके मुताबिक अतिथियों की यह सूची उसी व्यापक बदलाव को दर्शाती है, जिसकी वे चर्चा कर रहे थे। जिसमें ‘कैंपस में गौशालाओं का निर्माण’ और कुलपति द्वारा ‘नक्सल मुक्त भारत : मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक का अंत’, कैंपस निशाने पर क्यों?’ जैसे विषयों पर भाषण देना भी शामिल है।

इसी माहौल में, मुंबई विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के सह-आयोजन में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ कविता और कहानी पाठ का एक कार्यक्रम 1 फरवरी को होना था, लेकिन अभिनेता ने आरोप लगाया कि ‘आख़िरी वक्त पर उनका आमंत्रण वापस ले लिया गया’ और कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

जामिया मिल्लिया, आंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली और साउथ एशियन यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में छात्र कहते हैं कि निलंबन, अनुशासनात्मक जांच और पुलिस मामलों की आशंका यह तय करती है कि वे कब और कैसे संगठित हों। कई छात्रों का कहना है कि वे अब अनुमति लेने, भाषा संयमित रखने और प्रशासनिक जांच के लिए पहले से तैयार रहने के आदी हो गए हैं, ऐसी बातें, जो एक दशक पहले असामान्य लगती थीं।

[ साभार: द वायर ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

गणेशोत्सव पर छत्तीसगढ़ में 700 करोड़ का कारोबार, 50 लाख घरों में विराजेंगे बप्पा, मूर्तियों के दाम 50% तक बढ़े
breaking Chhattisgarh

गणेशोत्सव पर छत्तीसगढ़ में 700 करोड़ का कारोबार, 50 लाख घरों में विराजेंगे बप्पा, मूर्तियों के दाम 50% तक बढ़े

छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों को बड़ी सौगात नेत्रहीन भी बन सकेंगे प्रथम-द्वितीय श्रेणी के अधिकारीसरकारी पद चिन्हांकित
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों को बड़ी सौगात नेत्रहीन भी बन सकेंगे प्रथम-द्वितीय श्रेणी के अधिकारीसरकारी पद चिन्हांकित

छत्तीसगढ़ में थमेगी बारिश की रफ्तार, रायपुर में 32 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान; जानें आज का मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में थमेगी बारिश की रफ्तार, रायपुर में 32 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान; जानें आज का मौसम

जशपुर से बस्तर तक कंटेंट क्रिएटर्स का कमाल, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को 40 देशों तक पहुंचाया, भाषा बनी डिजिटल ताकत
breaking Chhattisgarh

जशपुर से बस्तर तक कंटेंट क्रिएटर्स का कमाल, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को 40 देशों तक पहुंचाया, भाषा बनी डिजिटल ताकत

महतारी वंदन योजना से लखपति दीदी तक… ढाई साल में विष्णु देव साय सरकार के बड़े फैसलों से ऐसे बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर
breaking Chhattisgarh

महतारी वंदन योजना से लखपति दीदी तक… ढाई साल में विष्णु देव साय सरकार के बड़े फैसलों से ऐसे बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर

ताकतवर की सेवा करना और कमजोर को धोखा क्या यही न्याय है? – एमए बेबी, महासचिव, सीपीआईएम
breaking Chhattisgarh

ताकतवर की सेवा करना और कमजोर को धोखा क्या यही न्याय है? – एमए बेबी, महासचिव, सीपीआईएम

ब्रह्माकुमारीज़ : ‘एक रिश्ता- जो जीवन बदल दे’ थीम पर श्री कृष्ण की दिव्य झांकी [3-22 सितम्बर, 2026] कर रही है सभी को आकर्षित
breaking Chhattisgarh

ब्रह्माकुमारीज़ : ‘एक रिश्ता- जो जीवन बदल दे’ थीम पर श्री कृष्ण की दिव्य झांकी [3-22 सितम्बर, 2026] कर रही है सभी को आकर्षित

तमिलनाडु के सलेम स्टील प्लांट के महिला सर्किल समूह महिला समाज का तीज मिलन समारोह सम्पन्न
breaking Chhattisgarh

तमिलनाडु के सलेम स्टील प्लांट के महिला सर्किल समूह महिला समाज का तीज मिलन समारोह सम्पन्न

PM मोदी की बात पुतिन-शी तक पहुंचाने वाले सिद्धार्थ बाबू कौन? AIR 15 के बाद भी IAS नहीं, चुना IFS
breaking international

PM मोदी की बात पुतिन-शी तक पहुंचाने वाले सिद्धार्थ बाबू कौन? AIR 15 के बाद भी IAS नहीं, चुना IFS

प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा अपडेट: छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में इतने सालों से रह रहे हैं तो हो जाएंगे पात्र
breaking Chhattisgarh

प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा अपडेट: छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में इतने सालों से रह रहे हैं तो हो जाएंगे पात्र

छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों को बड़ा झटका, तीजा और गणेश चतुर्थी पर 7 मेमू और पैसेंजर ट्रेनें रद, यात्री बसों पर बढ़ा दबाव
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों को बड़ा झटका, तीजा और गणेश चतुर्थी पर 7 मेमू और पैसेंजर ट्रेनें रद, यात्री बसों पर बढ़ा दबाव

छत्तीसगढ़ में 14 सितंबर तक जारी रहेगा बारिश का दौर, ठंडी हवा और बूंदाबांदी ने बढ़ाई ठंडक, सुहाना हुआ मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 14 सितंबर तक जारी रहेगा बारिश का दौर, ठंडी हवा और बूंदाबांदी ने बढ़ाई ठंडक, सुहाना हुआ मौसम

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! प्राचार्यों को अब रोज करना होगा ये काम, जानिए छात्रों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
breaking Chhattisgarh

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! प्राचार्यों को अब रोज करना होगा ये काम, जानिए छात्रों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

सीएम विष्णु देव साय ने परिवार संग देखी फिल्म ‘हनुमान अंश’, बाबा नीम करौली के जीवन पर बनी फिल्म को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री किया, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष भी मौजूद रहे
breaking Chhattisgarh

सीएम विष्णु देव साय ने परिवार संग देखी फिल्म ‘हनुमान अंश’, बाबा नीम करौली के जीवन पर बनी फिल्म को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री किया, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष भी मौजूद रहे

एक ही तारीख, दो अलग संदेश! 9/11 की 25वीं बरसी पर PM मोदी ने याद किया स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण
breaking National

एक ही तारीख, दो अलग संदेश! 9/11 की 25वीं बरसी पर PM मोदी ने याद किया स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण

चीनी मीडिया ने पीएम मोदी की तारीफ कीः 7 साल बाद शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर खूब वाहवाही की, जानें Global Times ने क्या लिखा
breaking international

चीनी मीडिया ने पीएम मोदी की तारीफ कीः 7 साल बाद शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर खूब वाहवाही की, जानें Global Times ने क्या लिखा

बड़ी खबर : गुरु बालदास के बड़े बेटे और मंत्री खुशवंत साहब के भाई ढाल दास ने थामा कांग्रेस का हाथ
breaking Chhattisgarh

बड़ी खबर : गुरु बालदास के बड़े बेटे और मंत्री खुशवंत साहब के भाई ढाल दास ने थामा कांग्रेस का हाथ

छत्तीसगढ़ में ढहाए जाएंगे जर्जर भवन, कलेक्टर और एसपी को सीएम ने दिए निर्देश, होगा सेफ्टी ऑडिट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में ढहाए जाएंगे जर्जर भवन, कलेक्टर और एसपी को सीएम ने दिए निर्देश, होगा सेफ्टी ऑडिट

सरकारी नौकरी चाहिए तो छत्तीसगढ़ का निवासी होना जरूरी, तृतीय-चतुर्थ श्रेणी भर्ती में बदले नियम
breaking Chhattisgarh

सरकारी नौकरी चाहिए तो छत्तीसगढ़ का निवासी होना जरूरी, तृतीय-चतुर्थ श्रेणी भर्ती में बदले नियम

CM साय ने टाउन प्लानिंग के 21 सहायक संचालकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- शहरों की नींव होगी मजबूत
breaking Chhattisgarh

CM साय ने टाउन प्लानिंग के 21 सहायक संचालकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- शहरों की नींव होगी मजबूत

कविता

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ
poetry

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन
poetry

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य
poetry

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

कहानी

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू
story

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन