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सफरनामा आरंभ के साथ : आखिरी सांस तक दौड़ने वाली आजाद कलम राजेश शर्मा- लेखक डॉ. देवधर महंत

5 months ago
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6 फरवरी, 2026 की अल्लसुबह महासमुंद की फिजा में एक मनहूस खबर शोक उंडेल गई कि विगत बीस वर्षों से निष्पक्ष और निर्भीक खबर परोसनेवाली कलम सहसा हमेशा के लिए चुप हो गई। फेसबुक में महासमुंद के युवा विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा की पोस्ट चौंका गई। एकाएक विश्वास नहीं हुआ। क्योंकि वह आजाद कलम बार -बार मौत से आंख- मिचौली खेलती हुई मौत को मात देती रही। हर बार मौत को पराजय मिलती रही। लेकिन अनुज के .पी. साहू की चलित भाषिक सूचना ने पुष्टि कर दी कि इस बार हम लोग सचमुच उस आजाद कलम को खो चुके हैं और वह कलम फड़फड़ाती हुई पंछी बनकर आसमान की ओर उड़ गई है, कभी वापस नहीं आने की शर्त पर । दूर कहीं कुमार गंधर्व कबीर को गा रहे थे .. उडि जाएगा हंस अकेला..। अबकी बार सचमुच हंस अकेला उड़ चुका था अपने मानसरोवर को सदा के लिए अलविदा कहकर।

फेसबुक में राजेश शर्मा की पोस्ट
अंखियों के झरोखे से गुजरी थी कि वे
21, जनवरी 2025 से रक्त संचरण, रक्तचाप में वृद्धि, शुगर लेवल वृद्धि के कारण जैन नर्सिंग होम में भर्ती हैं।
उनके लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाये।और मेरे जैसे अनेक लोग उनके लिए ईश्वर से मौन प्रार्थना कर रहे थे। उनकी हालत अनियंत्रित होने पर भाई के.पी. साहू की
पहल ने एम्स रायपुर में उनकी भर्ती करायी। शर्मा जी की सांसों को बचाए रखने की भरपूर कवायद की जाती रही लेकिन अंततः 6 फरवरी 2025 की सुबह शर्मा जी के अनगिन शुभचिंतकों की आशाओं पर गाज गिर गई। इस बार हमारी प्रार्थना अनुसुनी रह गई । वे वापस नहीं लौटे , वापस लौटी उनकी पार्थिव देह। जो पहले साप्ताहिक’ राष्ट्रीय अभियोजक’ के दफ्तर में अंतिम दर्शनार्थ रखी गई फिर श्मशान घाट में सैकड़ों नम आंखों के सामने अग्नि देवता की भेंट चढ़ गई पंचतत्व में विलीन होने के लिए।
*

मेरे शासकीय जीवन का एक तिहाई भाग लगभग बारह साल दो टुकड़ों में (1993 से 1997 तथा 2006 से 2013 ) महासमुंद जिले में खर्च हुआ है। दूसरी पारी में जैसे ही महासमुंद पहुंचा। लिखने- पढ़ने वाले वस्त्र व्यवसायी दिलीप चोपड़ा के माध्यम से राजेश शर्मा की अनन्य साहित्यिक अभिरुचि और उनके द्वारा संपादित साप्ताहिक अखबार ‘राष्ट्रीय अभियोजक ‘ के साहित्यिक पृष्ठों की सुरभि से परिचित हुआ। फिर मेरे जिज्ञासु और पिपासु कदम हठात स्वयमेव चल पड़े उनसे मिलने के लिए। ऐसा लगा कि वर्षों से जिस हस्ताक्षर की मुझे तलाश थी उससे भेंट हो चुकी है। पहली ही मुलाकात में राजेश शर्मा जी से मिलकर उनकी अनौपचारिकता और आत्मीयता से ऐसा बिल्कुल ऐसा नहीं लगा कि मैं उनसे पहली बार मिल रहा हूं। फिर यह संबंध कब प्रगाढ़ता और घनिष्ठता में तब्दील हो गया,पता ही नहीं चला शायद यह दो समान विचारधाराओं का पवित्र हार्दिक संगम था।
*
साप्ताहिक ‘ राष्ट्रीय अभियोजक ‘ में मेरी कविताएं निरंतर छपती रहीं। राजेश शर्मा के संपादन कौशल्य की विशेषता थी कि प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया की भीड़ में इस साप्ताहिक अखबार का अपना एक पाठक वर्ग तैयार हुआ था ,जो हर सप्ताह इस अखबार की बेसब्री से प्रतीक्षा करता था। इस अखबार के बहाने कविता की एक नई विधा ‘ कविता रिपोर्ताज ‘का प्रवर्तन हुआ। हिंदी साहित्य में अभी तक गद्य में ही रिपोर्ताज विधा प्रचलित रही थी ।राजेश शर्मा के संपादकीय साहस ने इस नई विधा को हवा दी और सम सामयिक घटनाएं ‘ कविता रिपोर्ताज ‘ बनकर मेरी लेखनी से प्रवाहित होती रहीं। कहना नहीं होगा मेरे हिस्से में अपार लोकप्रियता आयी । स्मृतिशेष राजेश शर्मा की यादों को प्रणाम निवेदित करते हुए उन कविता रिपोर्ताजों को किताब की शक्ल देने पर विचार कर रहा हूं। शायद मेरी ओर से राजेश शर्मा जी को यही सच्ची और सार्थक श्रद्धांजलि होगी।
*
राजेश शर्मा जी से मेरे आत्मीय संबंधों के अंतरंग तार जुड़ गए थे । लगातार उनसे मिलना – जुलना होता रहता था। कभी – कभी तो भाई के.पी. साहू भी इस बैठकी का हिस्सा हुआ करते थे ।यह सिलसिला महासमुंद जिले से स्थानांतरित होने और मेरे रिटायर्ड होने के बाद भी जारी रहा। बीच-बीच में मेरे मोबाइल फोन की घंटियां बजती रहती थीं और शर्मा जी मेरे कुशलक्षेम से अवगत होते रहते थे। कभी – कभी किसी पीड़ित को कानूनी सलाह की जरूरत होती थी . तब भी वे मुझे याद करते रहते थे। वे एक पत्रकार के अलावा अनेक लोगों के सुख-दुख के सहभागी थे , शुभ चिंतक थे , मददगार थे , उनके अपने आत्मीय थे । उनसे मिलनेवाला हर शख्स यह महसूस करता था कि शर्मा जी उनके अपने हैं। उनके पारिवारिक सदस्य हैं। हर मुलाकात में मेरा उनसे साहित्यिक संवाद हुआ करता था। उनसे बातचीत में झलकता था कि वे साहित्य के गंभीर अध्येता हैं। हर विषय पर उनकी मजबूत पकड़ दिखाई पड़ती थी। वर्तमान की राजनीतिक , सामाजिक , साहित्यिक और पत्रकारिता जगत की हालातों पर उनकी बेबाक राय सामने आती थी । शर्मा जी की उपस्थिति महासमुंद के लिए कुछ इस तरह से थी कि..
” जिधर से जाए वो खुशबू बिखेरता जाए ,
कोई तो चाहिए ऐसा भी इस शहर के लिए।”
सचमुच इस क्रूर , नृशंस और दोगले समय में राजेश शर्मा जी एक वातायन की
तरह थे । दुष्यंत कुमार के शब्दों में कहें तो…वह अकेला आदमी है शहर में या यूं कहें, इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है।”
पत्रकारिता पर बात करते हुए मैं उनसे अक्सर यह सवाल दागा करता था कि शर्मा जी आज के दौर में जब पीत पत्रकारिता का बोलबाला है , प्रायः साप्ताहिक अखबार आखिरी सांसें गिन रहे हैं, आप बिना भयादोहन (ब्लेकमेलिंग) या वसूली के कैसे इस दिए को आंधियों के बीच भी जलाए हुए हैं। वे तपाक से जवाब उगलते ” महंत जी आप जैसे शुभचिंतक मेरे साथ हैं,आप जैसे लोगों की शुभकामनाएं इस अखबार के साथ हैं।” जब मैं उनकी ओर फिर सवाल उछालता कि दो विपरीत ध्रुवों के बीच आप कैसे सामंजस्य बिठा पाते हैं?
वे भावुक हो जाते और बिना लाग लपेट के स्वीकारते कि “हां इस कठिन प्रक्रिया से गुजरना तो पड़ता है , कठिनाइयों से साक्षात्कार तो होता है।” वर्तमान पत्रकारिता जगत की दिशा और दशा पर बातचीत पर वे बेहद क्षुब्ध , आक्रोशित और परिवेदित दिखते और बार- बार छत्तीसगढ़ के स्वनामधन्य अग्रज पत्रकार रमेश नैयर को कोट करते कि ” आज पत्रकारिता राजनीति की रखैल हो गई है।” शर्मा जी सच को उजागर करने कोशिश करते और सच जानते हुए भी किसी कारण सच उजागर नहीं कर पाने की पीड़ा से भीतर ही भीतर उबलते रहते , खुद से लड़ते रहते। एक ऐसे दौर में जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका के चारों ओर सवालों के बेतरतीब जंगल उग आए हैं। लोगों की आत्माएं मर चुकीं हैं, शर्मा जी दबंगता के साथ बुदबुदाते…..

” हां मैंने कर ही दिया
इस कलम का सरकलम,
कमबख्त डरने लगी थी
इस जमाने में सच लिखने से।”

भाई के. पी. साहू जैसे अखबारनवीस भी लगभग इसी कुल गोत्र के हैं।वे भी शर्मा जी के प्रियपात्र रहे हैं।

जब भी शर्मा जी से मिलता वे कंप्यूटर में निरंतर अनथक खुद टाइप करते हुए पाए जाते। साप्ताहिक ‘ राष्ट्रीय अभियोजक ‘ उनका वन मैन शो जैसा था ।वे स्वयं पूरा स्क्रिप्ट फाइनल करते और डिजाइनिंग करते फिर हर सप्ताह स्वयं छपवाने रायपुर जाया करते थे। लगातार कठिन मेहनत और अपने खुद के शरीर पर लगातार अत्याचार की वजह से बीच-बीच में शर्मा जी बीमार पड़ जाते, अस्पताल दाखिल हो जाते । मैं मित्रतावश उन्हें उलाहना दिया करता कि “शर्मा जी अखबार की गुणवत्ता तो सर्वविदित है, लेकिन आप अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान दीजिए, काम करने की , शरीर की भी अपनी एक सीमा होती है।”हर बार उनका रटा लुटाया यही जवाब होता कि ” महंत जी मैं एक सैनिक की तरह ही मैदान में निरंतर लडता हुआ शहीद होना चाहता हूं। यही मेरी आखिरी इच्छा है।” सचमुच शर्मा जी अलग ही मिट्टी के बने हुए थे , वे रुकनेवालों , झुकने वालों या पीछे हटने वालों में से नहीं थे । वे मजबूरों – मजलूमों की बुलंद आवाज थे । या यूं कहें जिनके कोई नहीं , उनके आखिरी संबल हुआ करते थे शर्मा जी।वे बार-बार अपने आत्म विश्वास की दृढ़ता की दुहाई देते रहते….

” कैसे कह दूं कि थक गया हूं मैं,
जानें किस -किस का हौसला हूं।”

यह तो निर्विवाद सत्य है कि राजेश शर्मा जी टूटनेवालो या हार माननेवालों अथवा पीछे हटनेवालो में से कतई नहीं थे। उनके पास हताश- निराश जो भी आता वे उसे भी प्रेरित – ऊर्जस्वित कर देते थे। हां अपनी थकावट को वे जरूर स्वीकारते थे । ऐसी स्वीकारोक्ति के लिए भी तो साहस चाहिए ,जो शर्मा जी के पास था । लेकिन वे फिर दुगनेज्ञउत्साह के साथ अपने कुरुक्षेत्र में लौट आते थे ….

” बस थका हूं मैं अभी हारा नहीं हूं ,
ये लड़ाई मैं अभी हारा नहीं हूं।”

शर्मा जी मित्रता निभाना भली-भांति जानते थे । वे मित्रों के संकट की घड़ी में सदैव उपलब्ध रहा करते थे। इस संदर्भ में अपना निजी प्रसंग साझा करना अप्रासंगिक न होगा। जब विघ्न संतोषियों ने मुझे षड्यंत्रों के चक्रव्यूह में फंसाकर अभिमन्यु की तरह शहीद करने का कुचक्र रचा । तो शर्मा जी बेकडोर से अपनी मित्रता निभाते रहे। ऐसे समय में जब निकटता का दावा करनेवाले अनेक लोगों ने अपनी पीठ दिखा दी , शर्मा जी मेरे साथ पूरी मजबूती के साथ खड़े रहे।आखिर सत्य की जीत हुई। दो – दो बार हाईकोर्ट से मेरे खिलाफ रचा गया मामला क्वेश (निरस्त) हुआ । यहां तक कि पहली बार में ही न्याय दृष्टांत ( साइटेशन) भी बन गया। जबरन फंसाए गए एक अन्य मामले में भी मैं बाइज्जत बरी हुआ । यह शर्मा जी जैसे शुभचिंतकों की दुआओं की ही परिणति थी । तब अनेक सलाहकारों ने मुझे सलाह दी कि मुझे षड्यंत्रकारी के खिलाफ “विद्वेषपूर्ण अभियोजन” का मामला दायर करना चाहिए और षड्यंत्रकारी से मिलकर अपनी टी. आर. पी. बढ़ाने के लिए लगातार खबरें प्लांट करनेवाले एक अखबार श्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करना चाहिए। अंततः मैंने शर्मा जी से एक्सपर्ट राय ली । शर्मा जी ने कहा कि ” महंत जी कीचड़ में पत्थर मारने से छींटे अपनी ओर भी आते हैं। आपको न्याय मिल गया । दूध का दूध पानी का पानी हो गया। अब इस नाटक का यहीं पटाक्षेप करिए। ” मैंने उनके गुरु गंभीर परामर्श को अंगीकार कर लिया। सत्य परेशान जरूर हुआ लेकिन पराजित नहीं हुआ। आज उसी जज्बे ने मुझे हाईकोर्ट एडवोकेट और रेवेन्यू ( सिविल) लायर के साथ ही क्रीमिनल लायर बना दिया। मेरे घर में अब चार एडवोकेट हो गए । शर्मा जी मेरे इस उपक्रम से बहुत आह्लादित हुए। मेरे गाढ़े वक्त में , गर्दिश में साथ निभाने वाले शर्मा जी जैसे दुर्लभ, विरल, विलक्षण व्यक्तित्व को मैं भला कैसे विस्तृत कर सकता हूं ? हां मैंने अब ऐसे मित्र को खो दिया । मैं सचमुच निर्धन हो गया हूं। किसी महत्वपूर्ण शख्स की कीमत उसके जाने के बाद ही समझ में आती है।
यह सर्वथा प्रासंगिक है कि मेरे जन्मदिवस 23 अप्रैल 2025 को राजेश शर्मा जी ने फेसबुक में पोस्ट डाली थी….

“अंधकार चाहे भारी हो ,
लक्ष्य समुंदर पार हो।
सदा उजाला ही जीता है,
अगर सत्य आधार हो।”
*
कहते हैं महापुरुषों, योगियों, तपस्वियों को अपने जाने का पूर्वाभास हो जाता है। शर्मा जी को भी अपने जाने का पूर्वाभास हो गया था , तभी तो वे बार-बार दुहराते थे कि” मैं एक सैनिक की तरह मैदान में लड़ते हुए शहीद होना चाहता हूं।” 18 दिसंबर 2024 को ही उन्होंने फेसबुक में अपनी पोस्ट डाल दी थी कि…

” अब जिस्म कर रहा है,
हर रोज़ इशारे।
क्यों न सफर के लिए,
सामान समेटा जाए।

अब लगता है कि शर्मा जी इस बीच अपनी अंतिम यात्रा में जाने के लिए सामान समेटने लगे थे। महापुरुष, योगी , तपस्वी लोग इशारों में अपनी बात कहते हैं। साधारण लोग उनका इशारा समझ नहीं पाते। लेकिन शब्द कभी नहीं मरते । वे अक्षर -अक्षर ( जो कभी नष्ट न हो) से
बनते हैं । राजेश शर्मा जी जैसे शब्दकार कभी नहीं मरते । वे हमारी यादों में जीवित रहते हैं। हां यह सही है कि अपनी भौतिक शरीर के साथ शर्मा जी अब नहीं हैं। शहर में उनकी कमी की पूर्ति नहीं की जा सकती। एक खालीपन शहर के खाते में दर्ज हो चुका है…

“आपके बिना अजीब/इस शहर का आलम है/चिराग सैकड़ों जलते हैं/मगर रौशनी कम है.

• लेखक संपर्क-
• 93999 83585

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रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
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रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
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काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

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तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

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लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
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जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन