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छत्तीसगढ़ी लेख : ‘झन मारव’ – डॉ. कविता कन्नौजे
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• झन मारव
– डॉ. कविता कन्नौजे
[ कवर्धा, जिला- कबीरधाम, छत्तीसगढ़ ]
आज बिहनिया ले एक ठन खबर पढ़ेंव- शराबी बेटा ह अपन बुजुर्ग पिता ला डंडा ले पीट-पीट के मार डारिस

कतका तड़पिस होही ओ सियनहा बबा हा , जब डंडा म मार खात रिहिस होही। कोनो पुराना रंजिस नई रिहिस, बस दारू के नशा म बेटा रिहिस अउ बाप के रोक-टोक करे ले गुस्सा म आके मार डारिस। सोंचके रोवाशी आगे मोला। त लिखे के मन करीस।
लोगन के एकाएक गुस्सा अब ककरो जान ले लेथे। लइका मन जेन मन हा जनम देवईया दाई-ददा ला नई छोरत हें, त काकर ऊपर भरोसा करे जाही?
ए बात नई हे कि अइसन खबर आज देखना कोनो आश्चर्य के बात हरे। रोजे समाचार पत्र, पत्रिका अउ सोशल मीडिया म देखथन कि पति ह पत्नी ला, पत्नी ह पति ला, भाई ह भाई ला, दोस्त ह दोस्त ला,प्रेमी हा प्रेमिका ला ता प्रेमिका हा प्रेमी ला , हर रिश्ता म कोनो ह कोनो ला मार डारथें। अब कोनो रिश्ता म भरोसा नई रहि गे हे।
बहुत सोचे के बात हे कि पहिली चाकू-छुरी धरना ,हत्या कर देना ,बहुत बड़े अपराधी प्रवृत्ति के मनखे मन के काम रहिस, अउ बंदूक के बारे म त हमन ढंग ले जाने घलो नई रेहेन — पुलिस अउ डाकू मन कर रहिथे कहिके सुने रेहेन
अब आज के जमाना म चाकू, छुरी, गोली-बंदूक दिखाना नान-नान लइका मन घलो करे लगिन हें। छोटे रहन ता हमन चोर ढोर मन ला डर्रावन — “काट दिहि,मार दिहि ,लेग जाहि कहिके ।अब ए सब काम घर-परिवार, अउ रिश्ता-नातेदारी वाले मन खुदे करथें, चोर डाकू के जरूरत नई रहि गे हे।
अइसन खबर पढ़के मन विचलित हो जाथे।
कइसन विकास के तरफ हमन जावत हन, जिहां रिश्ता-नाता ला भुला देहन अउ अपन आप ला आधुनिक कहत हन।
एक कनि के गुस्सा म ककरो जीवन चले जाथे, अउ ओकर बाद करे वाला के घलो जीवन खराब हो जाथे। ओ जेल जाथे — त मार के का मिलिस? दूसर के संग-संग अपन पूरा परिवार के जीवन घलो खराब हो जाथे।
मे पढ़े हंव कि गुस्सा आना स्वभाविक बात हे, काबर कि मनखे म संवेग भावना रहिथे। फेर जरूरत ले ज्यादा गुस्सा आना, जेमे अपन आप ला अउ दूसर ला घलो नुकसान पहुंचथे — त ओ मनोविकार हरे ।
आज हमन आधुनिक नई, मनोविकारी प्रवृत्ति के होत जावत हन। काकरो बात ला सुन नई सकन, सहन नई कर सकन, थोड़ कन बात मा हउहा जाथन — ये समाज बर बहुत दुख के बात हे। अगर रिश्ता नई निबहत हे छोर दौ, जहाँ गुंजाइस हे बात करके रस्ता निकालो, कुछ नई बनत हे अपन अपन मे रहो, अउ कोई अपराध करें हे ता सब अपराध बर नियम-कानून बने हे ओकर करम के सजा ओला मिल जाहि.हमन कोनो ला सजा देवइया नोहन ।
हमन कोनो ला जीवन नई दे सकन, त मार दे के अधिकार घलो नई हे।
अतकेच कहाथौं कि
“झन मारव-बस झन मारव”
[ • डॉ. कविता कन्नौजे आचार्य पंथ श्री गृन्धमुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कवर्धा, जिला- कबीरधाम, छत्तीसगढ़ में सहायक प्राध्यापक के पद पर पदस्थ हैं. ]
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chhattisgarhaaspaas
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