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लेख : ‘भरोसा’ ममता का अभय कवच, माँ का आँचल- कैलाश जैन बरमेचा

👉 • “माँ का आँचल केवल लोरी सुनाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के हर तूफान से अपने बच्चे को बचाने के लिए होता है”
सृष्टि के कण-कण में यदि कहीं ईश्वर का साक्षात् प्रतिबिंब दिखाई देता है, तो वह माँ की ममता में है। एक बालक के लिए माँ की गोद दुनिया का सबसे अभेद्य किला है, जहाँ पहुँचकर हर भय समाप्त हो जाता है। माँ केवल एक जन्मदाता नहीं, बल्कि वह पहली शिक्षक है जो सुरक्षा, विश्वास और निस्वार्थ प्रेम का पाठ पढ़ाती है। यह कहानी आकांक्षा और उसकी नन्हीं बेटी आन्या के उसी अटूट बंधन की है, जहाँ समर्पण ही शक्ति बन जाता है।
पहाड़ों की ऊँची वादियों में बसे एक छोटे से गाँव में आकांक्षा अपनी नन्हीं बेटी आन्या के साथ रहती थी। उन ऊँचे शिखरों और गहरी खाइयों के बीच, आन्या के लिए उसकी माँ का आलिंगन ही उसका पूरा संसार था। जब भी आसमान में बादल गरजते या ठंडी हवाएँ पहाड़ों से टकराकर साय-साय करतीं, आन्या दौड़कर अपनी माँ की गोद में दुबक जाती। उस पल उसकी आँखों में जो सुकून होता, वह किसी राजमहल के ऐश्वर्य से भी बड़ा था।
आकांक्षा अपनी बेटी के लिए जितनी कोमल थी, समय आने पर उतनी ही कठोर और साहसी भी। वह अक्सर कहती थी, “माँ का आँचल केवल लोरी सुनाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के हर तूफान से अपने बच्चे को बचाने के लिए होता है।”
एक बार की बात है, शाम का धुंधलका घिर आया था। आकांक्षा आन्या को गोद में लिए पहाड़ी रास्ते से घर लौट रही थी। अचानक, पास की घनी झाड़ियों में हलचल हुई और एक जंगली जानवर की गुर्राहट गूँजी। रास्ता सुनसान था और खतरा बेहद करीब। उस क्षण, एक सामान्य स्त्री के भीतर की ‘माँ’ जाग उठी। जो आकांक्षा कल तक छिपकली से भी डर जाती थी, आज अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए एक शेरनी की तरह तनकर खड़ी हो गई।
उसने आन्या के सिर को अपने सीने से पूरी तरह ढँक लिया ताकि बच्ची भयभीत न हो। आकांक्षा की आँखों में उस वक्त वह तेज और संकल्प था, जिसे देखकर मौत भी रास्ता बदल ले। उसने अपनी पूरी शक्ति और साहस बटोरकर उस जानवर की आँखों में आँखें डालकर उसे ललकारा। उसकी चीख में एक माँ की दहाड़ थी। शायद प्रकृति ने भी उस ममता को सलाम किया, और वह जंगली जानवर उस प्रचंड साहस के सामने टिक न सका और पीछे हट गया।
आन्या ने जब अपनी माँ की गोद से सिर ऊपर उठाया, तो उसने देखा कि उसकी माँ हाँफ रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अपार शांति और विजय की मुस्कान थी। उस दिन आन्या ने अपनी पहली और सबसे बड़ी शिक्षा प्राप्त की—कि भरोसा क्या होता है और सुरक्षा की असली परिभाषा क्या है।
तस्वीर में दिख रही वह शांति और सुरक्षा कोई संयोग नहीं है। यह एक माँ का अपने बच्चे के प्रति वह पूर्ण समर्पण है, जिसमें वह स्वयं को मिटाकर भी अपने अंश को जीवित और सुरक्षित रखती है। माँ की गोद वह पाठशाला है जहाँ बच्चा निडरता का पहला पाठ पढ़ता है। आकांक्षा का प्रेम आन्या के लिए केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि वह आत्मबल है जो उसे भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार करता है।
”माँ का हृदय एक ऐसा कोमल बिछौना है, जहाँ पहुँचकर हर थकावट दूर हो जाती है और हर डर जीत में बदल जाता है।”

• लेखक- कैलाश जैन बरमेचा
[ छत्तीसगढ़-दुर्ग ]
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chhattisgarhaaspaas
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