• Chhattisgarh
  • वेनेजुएला और ईरान के खिलाफ संसाधनों की लूट और सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिका इजरायली मुहिम- आलेख- डॉ. अशोक ढवले : अनुवाद- संजय पराते

वेनेजुएला और ईरान के खिलाफ संसाधनों की लूट और सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिका इजरायली मुहिम- आलेख- डॉ. अशोक ढवले : अनुवाद- संजय पराते

4 months ago
234

👉 • ये हमले एक स्पष्ट रूप रेखा बनाते हैं : दुनिया की अग्रणी साम्राज्यवादी शक्ति- अमेरिका- द्वारा चलाया गया एक सुनियोजित अभियान, जिसका उद्देश्य रणनीतिक संसाधनों पर कब्ज़ा करना, अपनी आधिपत्य का विरोध करने वाली संप्रभु सरकारों को हटाना और ‘वैश्विक दक्षिण’ पर अपने वर्चस्व को फिर से स्थापित करना है

👉 • वेनेजुएला का गुनाह क्या है? उसकी तेल की दौलत और नव-उदारवादी कड़े उपायों के आगे झुकने से इंकार.

2026 की शुरुआत में, महज़ दो महीनों के अंदर ही, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका ने सैन्य आक्रामकता की एक ऐसी बेशर्म लहर छेड़ दी, जिसने एक बार फिर समकालीन साम्राज्यवाद के क्रूर चेहरे को बेनकाब कर दिया है। 3 जनवरी को, अमेरिकी सेनाओं ने काराकास और वेनेज़ुएला के अन्य शहरों पर बमबारी की, और आधी रात को की गई एक छापेमारी में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया — यह कार्रवाई पुरानी शैली की ‘गनबोट कूटनीति’ की दुर्गंध से भरी हुई थी। इसके ठीक आठ हफ़्तों बाद, 28 फरवरी को, अमेरिका ने इज़राइल के साथ मिलकर पूरे ईरान में भयानक हवाई हमले किए ; इन हमलों के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई और कई अन्य राजनीतिक व सैन्य नेताओं को भी मार गिराया गया, और बाद में परमाणु स्थलों, मिसाइल ठिकानों तथा नागरिक बुनियादी ढांचों पर भी ज़ोरदार बमबारी की गई।

ये हमले एक स्पष्ट रूपरेखा बनाते हैं : दुनिया की अग्रणी साम्राज्यवादी शक्ति — अमेरिका — द्वारा चलाया गया एक सुनियोजित अभियान, जिसका उद्देश्य रणनीतिक संसाधनों पर कब्ज़ा करना, अपनीआधिपत्य का विरोध करने वाली संप्रभु सरकारों को हटाना, और ‘वैश्विक दक्षिण’ पर अपने वर्चस्व को फिर से स्थापित करना है।

संसाधनों की लूट की होड़ : वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का अपहरण

वेनेज़ुएला में हुए अपहरण का ड्रग कार्टेल या परमाणु खतरों से कोई लेना-देना नहीं था, जैसा कि दावा किया गया था। यह सीधे तौर पर तेल से जुड़ा मामला है — जो पूंजीवादी संचय का जीवन-रक्त है — और उन देशों को सज़ा देने से जुड़ा है, जो अपने देश के लिए स्वतंत्र रास्ता चुनने की हिम्मत करते हैं। वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है ; ईरान विशाल तेल और गैस क्षेत्रों के ऊपर स्थित है और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को नियंत्रित करता है। ऐतिहासिक रूप से, इन दोनों ने ही अमेरिका के आदेशों को मानने से इंकार किया है — वेनेज़ुएला ने बोलिवेरियन समाजवाद के ज़रिए, जिसकी शुरुआत महान ह्यूगो शावेज़ ने 1999 में पहली बार राष्ट्रपति बनने पर की थी ; और ईरान ने “प्रतिरोध की धुरी” में अपनी भूमिका के ज़रिए, जो फ़िलिस्तीनी और लेबनानी संघर्षों का समर्थन करती है। ये हमले लैटिन अमेरिका के लिए ट्रंप द्वारा पुनर्जीवित ‘मोनरो सिद्धांत’ को उजागर करते हैं, जो पश्चिम एशिया में नेतन्याहू के विस्तारवादी यहूदवाद के साथ जुड़ा हुआ है। ये दोनों मिलकर एक खतरनाक तनाव बढ़ने का संकेत देते हैं : साम्राज्यवाद अब दुनिया के देखते-देखते राष्ट्राध्यक्षों का अपहरण करने और सर्वोच्च नेताओं की हत्या करने के लिए भी तैयार है।

सबसे पहले वेनेज़ुएला में ऑपरेशन हुआ, जो अमेरिका के “पिछवाड़े” में स्थित है और जो अमेरिका की बेशर्मी से दखलंदाजी का एक परीक्षण स्थल है। ट्रंप ने खुद ‘ट्रुथ सोशल’ पर मादुरो को “सफलतापूर्वक” पकड़ने का दावा किया। ट्रंप के प्रशासन ने खुले तौर पर “तेल वापस लेने” की बात कही। दुनिया की सभी लोकतांत्रिक ताकतों ने मादुरो और उनकी पत्नी के अपहरण को वेनेज़ुएला की संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन करार दिया है। यह नंगा साम्राज्यवाद था, जो अमेरिका के कई दशकों के दखल से जुड़ा था — चिली में सल्वाडोर अलेंदे की सरकार गिराने से लेकर मध्य अमेरिका में लड़ी गई ‘गंदी लड़ाइयों’ तक। वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था पहले से ही कई सालों से प्रतिबंधों की मार झेल रही थी ; अब, सीधे सैन्य हमले से देश में भारी उथल-पुथल मचने का खतरा पैदा हो गया था। आम नागरिकों की मौतों में तेज़ी से वृद्धि हुई — शुरुआती हमलों में ही दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबरें आईं — वहीं मादुरो के अपहरण से वेनेज़ुएला अपनी चुनी हुई सरकार से वंचित हो गया। ज़रा इस घोर, बेमिसाल पाखंड को देखिए : वही अमेरिका, जो लोकतंत्र पर बड़े-बड़े उपदेश देता है, संयुक्त राष्ट्र की मंज़ूरी या अपनी ही कांग्रेस की निगरानी के बिना किसी राष्ट्राध्यक्ष का अपहरण कर लेता है, और पूरे लैटिन अमेरिका को अपने नव-औपनिवेशिक खेल के मैदान की तरह इस्तेमाल करता है।

वेनेज़ुएला का गुनाह क्या है? उसकी तेल की दौलत और नव-उदारवादी कड़े उपायों के आगे झुकने से इंकार। शावेज़ और मादुरो के शासन में, देश ने अपने तेल और दूसरे संसाधनों का राष्ट्रीयकरण किया, कई प्रगतिशील सामाजिक कार्यक्रमों का वित्त पोषण किया और क्यूबा, चीन और रूस के साथ गठबंधन किया — ये सब अमेरिका के कॉर्पोरेट दबदबे के लिए चुनौतियाँ थीं। प्रतिबंधों ने पहले ही उसकी अर्थव्यवस्था का दम घोंट दिया था ; जनवरी में हुआ हमला, ज़बरदस्ती सत्ता परिवर्तन की उसकी कोशिश का अगला कदम था। ये 2011 के लीबिया और 2003 के इराक जैसे ही हालात थे : लोकतंत्र के वादे की आड़ में तेल का लालच छिपा हुआ था। इस हमले ने अमेरिका की घरेलू राजनीति को भी साधा — इससे ट्रंप को ऐप्स्टीन कांड से ध्यान भटकाने और अपनी ताक़त का मर्दाना प्रदर्शन करके अपने समर्थकों को एकजुट करने में मदद मिली। लेकिन वेनेज़ुएला के मेहनतकश लोगों और पूरे लैटिन अमेरिका के लिए, यह एक बेशर्मी भरा हमला था। पूरे महाद्वीप में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, जिनमें “वेनेज़ुएला के साथ कोई युद्ध नहीं!” की मांग की गई।

ईरान के साथ घिनौना युद्ध

वेनेज़ुएला पर हुए इस हमले ने ईरान पर होने वाले कहीं अधिक बड़े हमले के लिए मंच तैयार कर दिया। 28 फरवरी को, मादुरो के अपहरण के महज़ कुछ हफ़्तों बाद ही, अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (अमेरिका) और ‘रोरिंग लायन’ (इज़राइल) शुरू कर दिया। अचानक हुए हवाई हमलों ने तेहरान, नतान्ज़, इस्फ़हान और दर्जनों अन्य ठिकानों को तहस-नहस कर दिया। कई शीर्ष नेता मारे गए। इज़राइली जेट विमानों और अमेरिकी मिसाइलों ने परमाणु सुविधाओं, बैलिस्टिक मिसाइल बुनियादी ढांचे, हवाई सुरक्षा प्रणालियों और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। आम नागरिकों और सैनिकों की हुई तत्काल मौतें अत्यंत भयानक थीं : अब तक 5,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं — जिनमें से अधिकांश ईरान और लेबनान के थे — और इनमें मीनाब के एक बालिका विद्यालय पर हुए एक ही हमले में मारी गईं 168 स्कूली छात्राएँ भी शामिल हैं। शोक-संतप्त माताओं द्वारा उठाए गए उनके ताबूत साम्राज्यवादी बर्बरता के प्रतीक बन गए।

इस हमले के घोषित लक्ष्य क्या थे? ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को “कमज़ोर करना” और सत्ता परिवर्तन के लिए “हालात बनाना”। ट्रंप और नेतन्याहू ने “अयातुल्ला शासन” को खत्म करने और ईरानियों द्वारा “गुलामी की ज़ंजीरें तोड़ने” के बारे में खुलकर बात की। यह हमला तब किया गया, जब परमाणु वार्ताओं का दौर चल रहा था — यह ताकत के जबरन इस्तेमाल को सही ठहराने के लिए झूठी कूटनीति का एक ‘ट्रोजन हॉर्स’ था। इस साम्राज्यवादी जोड़ी ने हज़ारों बम गिराए हैं, जिनमें स्कूल, अस्पताल, सांस्कृतिक स्थल और सैन्य ठिकाने आदि शामिल हैं।

लेकिन इस बार ईरान ने कड़ा जवाब दिया है — पश्चिम एशिया के कई देशों में फैले अमेरिकी अधीनस्थ ठिकानों और इज़राइल के प्रमुख लक्ष्यों पर मिसाइलें दागी गई हैं। उम्मीद के मुताबिक, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से पश्चिम एशिया के देशों द्वारा उत्पादित तेल का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दुनिया को जाता है। इससे वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू गईं और परिणामस्वरूप आर्थिक उथल-पुथल मच गई है। अमेरिका लगातार अलग-थलग पड़ता जा रहा है, क्योंकि कई प्रमुख यूरोपीय देशों ने अमेरिकी-इज़राइली आक्रामकता का समर्थन करने से इंकार कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस और अमेरिकी एवं यूरोपीय जनमत से भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

ईरान पर हुए हमले अमेरिका के वैश्विक वर्चस्व और इज़राइल की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के गठजोड़ को उजागर करते हैं। बड़े घरेलू भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे नेतन्याहू को सत्ता में बने रहने के लिए युद्ध की आवश्यकता थी। इसी तरह, ऐप्स्टीन कांड और गिरते चुनावी नतीजों से ध्यान हटाने के लिए उत्सुक ट्रंप ने भी बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़ दिया। लेकिन इसके पीछे गहरे मकसद थे : होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के प्रवाह पर नियंत्रण, फिलिस्तीन का समर्थन करने वाले प्रतिरोध के ध्रुव को कमजोर करना और चीन-रूस-ईरान गुट से पैदा किसी भी बहुध्रुवीय चुनौती को रोकना। हमास, हिज़्बुल्लाह और क्षेत्र में साम्राज्यवाद-विरोधी ताकतों को ईरान का समर्थन उसे एक प्रमुख लक्ष्य बनाता था। इसलिए, अमेरिका-इज़राइल के इस हमले का उद्देश्य पश्चिम एशिया में एकमात्र ताकतवर शक्ति के रूप में ईरान को समाप्त करना और फिलिस्तीनी प्रतिरोध की कमर तोड़ना है।

अमेरिका और इज़राइल को लगा था कि ईरान एक हफ़्ते के अंदर ही ढह जाएगा। हमलावरों को लगा था कि या तो लगातार बमबारी के दबाव में ईरानी सरकार हथियार डाल देगी, या फिर लोगों के विद्रोह से सत्ता बदल जाएगी। लेकिन, इनमें से कुछ भी नहीं हुआ। इसके विपरीत, ईरान ने इन दो शक्तिशाली दुश्मनों का मुकाबला करने में ज़बरदस्त हिम्मत, दृढ़ता और पक्का इरादा दिखाया है। इसमें कोई शक नहीं कि ईरान को चीन, रूस और ‘वैश्विक दक्षिण’ के कई देशों का पूरा समर्थन हासिल है। पाँच हफ़्तों से ज़्यादा चली ज़ोरदार लड़ाई के बाद, जिसमें ईरान ने डटकर मुकाबला किया, 8 अप्रैल को अमेरिका और इज़राइल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान के साथ दो हफ़्ते के लिए युद्धविराम पर राज़ी होना पड़ा है। इसके बावजूद, इज़राइल ने लेबनान पर अपने जानलेवा हमले जारी रखे है ; जवाब में ईरान ने एक बार फिर ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ को बंद कर दिया है, और अमेरिका ने वहाँ नौसैनिक घेराबंदी कर दी है। इन सब बातों का ‘वैश्विक दक्षिण’ और दुनिया के गरीब लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ा है।

इस युद्ध को हमलावरों ने ईरानी “खतरों” को बेअसर करने के लिए आवश्यक बताया था, लेकिन इसके विपरीत इसने सैन्य-प्रधान नीतियों के दिवालियापन को उजागर कर दिया : इसने हजारों लोगों की जान ली, लाखों लोगों को विस्थापित किया, बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया और वैश्विक तेल प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया, जिससे इस क्षेत्र से परे, दूर-दराज के मेहनतकश लोगों को आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ी। इस्लामाबाद में होने वाली वार्ताएं बार-बार विफल रही हैं। ईरान प्रतिबंधों में राहत, नाकाबंदी की समाप्ति और लेबनान में युद्धविराम से संबंधित पूर्व निर्धारित ढांचे पर जोर दे रहा है ; दूसरे दौर के शांति वार्ता की कोई ठोस पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, और तेहरान ने वर्तमान अमेरिकी मांगों के तहत इसमें भाग लेने से सार्वजनिक रूप से इंकार कर दिया है।

इस युद्ध में अब तक ईरान, एक सीधे और कायरतापूर्ण हमले से, बिना किसी आत्मसमर्पण या शासन के पतन के बच निकला है — जो अपने आप में साम्राज्यवादी अतिरेक पर एक करारा जवाब है — फिर भी इसके लोगों को भारी मानवीय और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी है। अमेरिका और इज़राइल, अपनी ज़बरदस्त मारक क्षमता के बावजूद, ईरान पर अपनी मर्ज़ी थोप नहीं पाए हैं और अब उन्हें इस सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है कि ज़ोर-ज़बरदस्ती से प्रतिरोध पैदा होता है, न कि अधीनता। इस युद्ध विराम का स्वागत नागरिकों के लिए एक अस्थायी ढाल के रूप में और युद्ध-विरोधी दबाव की जीत के रूप में किया जा रहा है, लेकिन यह कोई स्थायी शांति नहीं है। यह उन मूल कारणों को अनसुलझा छोड़ देता है : प्रतिबंधों का युद्ध, छद्म संघर्ष, संसाधनों पर नियंत्रण, और बहुपक्षीय मंचों पर ईरान को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में शामिल करने से इंकार। एक वास्तविक समाधान के लिए आपसी सम्मान, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय लोगों की जायज़ शिकायतों को दूर करने के आधार पर तनाव कम करने की ज़रूरत है — ये ऐसी प्राथमिकताएँ हैं, जिन्हें वर्चस्व की सोच के चलते लंबे समय से नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। आने वाले दिन, जब युद्धविराम की समय सीमा नज़दीक आ रही है, यह तय करेंगे कि कूटनीति की जीत होती है या फिर से नई आक्रामकता की।

हत्या और सत्ता परिवर्तन का निंदनीय अमेरिकी इतिहास

ईरान और वेनेजुएला की समानताएँ बेहद भयावह हैं। दोनों ही देश तेल उत्पादक दिग्गज हैं और अमेरिका के निर्देशों का विरोध कर रहे हैं। दोनों ने ही संकर युद्ध का सामना किया है — प्रतिबंध, दुष्प्रचार, और फिर सीधे हमले। वेनेजुएला में, मोनरो सिद्धांत ने गोलार्धीय प्रभुत्व को उचित ठहराया है ; ईरान में, यह “आतंकवाद के खिलाफ” अंतहीन युद्ध और परमाणु भय फैलाने की रणनीति है, जो संसाधनों पर कब्ज़ा करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। और आम नागरिकों की मौतें? साम्राज्यवादी गणना में तो ये महज़ मामूली नुकसान हैं! और सत्ता परिवर्तन का क्या? यह लोकतंत्र के लिए नहीं है — वाशिंगटन ने अतीत में, ऑगस्टो पिनोशे से लेकर ईरान के शाह तक, अनगिनत आज्ञाकारी तानाशाहों को सत्ता में बिठाया है — बल्कि उन आज्ञाकारी सरकारों के लिए हैं, जो एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन के लिए बाज़ार खोलती हैं और तेल अवीव के साथ गठबंधन करती हैं। और ऐसी सरकारें बहुत सारी हैं।

इतिहास इस पैटर्न पर रोशनी डालता है। अमेरिकी साम्राज्यवाद लंबे समय से संसाधनों से समृद्ध विरोधियों को निशाना बनाता रहा है : 1953 में ईरान में सीआईए का तख्तापलट, जिसमें लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मोहम्मद मोसद्देग को सत्ता से हटाकर उनकी जगह ईरान के शाह को बिठाया गया ; 2003 में इराक पर हमला और सद्दाम हुसैन की हत्या ; 2011 में लीबिया का गृहयुद्ध और मुअम्मर गद्दाफी की हत्या ; 2026 में वेनेज़ुएला के निकोलस मादुरो का अपहरण, और ईरान के अली खामेनेई की हत्या। यह सब तेल और अपनी दादागिरी के अलावा किसी और चीज़ के लिए नहीं था। इज़राइल की भूमिका — ईरान के सहयोगी हमास और हिज़्बुल्लाह पर उसके हमले, और अब खुद ईरान के मुख्य भूभाग पर हमले — ने गाज़ा में चल रहे जन संहार के तर्क को क्षेत्रीय स्तर तक फैला दिया है। 7 अक्टूबर 2023 से गाज़ा में इज़राइल द्वारा किए जा रहे इस राक्षसी जनसंहार के परिणामस्वरूप 75,000 से ज़्यादा आम नागरिकों की जान चली गई है, जिनमें से 60 प्रतिशत से ज़्यादा महिलाएं और बच्चे हैं।

अमेरिकी साम्राज्यवाद का संसाधनों की लूट के लिए नेताओं की हत्या करने और दुनिया भर में ज़बरदस्ती सत्ता बदलने का एक लंबा और गंदा इतिहास रहा है। इनमें मोहम्मद मोसादेग (ईरान, 1953), पैट्रिस लुमुम्बा (कांगो, 1961), क्वामे न्क्रूमा (घाना, 1966), अमिलकार कैब्राल (गिनी-बिसाऊ, 1973), सल्वाडोर अलेंदे (चिली, 1973), जुआन जोस टोरेस (बोलीविया, 1976), ऑरलैंडो लेटेलियर (चिली, 1976), मौरिस बिशप (ग्रेनाडा, 1983), थॉमस संकारा (बुर्किना फासो, 1987), सद्दाम हुसैन (2003), और मुअम्मर गद्दाफ़ी (2011) शामिल हैं। यहाँ तक कि अमेरिका में ही ‘असुविधाजनक’ माने जाने वाले अश्वेत नेताओं, जैसे मैल्कम एक्स (1965) और मार्टिन लूथर किंग जूनियर (1968) की भी हत्या कर दी गई, जबकि वे एफबीआई की निगरानी में थे।

जान-माल का नुकसान इस आपराधिकता को और भी उजागर करता है। मीडिया की मिलीभगत इसे संभव बनाती है। पश्चिमी मीडिया संस्थान इन सशस्त्र हमलों को “ज़रूरी” या “लक्षित” बताकर पेश करते हैं, और आम नागरिकों की हत्याओं तथा कानूनी उल्लंघनों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। संयुक्त राष्ट्र चार्टर में बल प्रयोग पर लगी रोक को पूरी तरह से धता बताते हुए तार-तार कर दिया जाता है।

मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा-आरएसएस सरकार की कानफोड़ू और शर्मनाक चुप्पी

हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा की गई तमाम कार्रवाइयों पर भारत की मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा-आरएसएस सरकार की कानफोड़ू चुप्पी बेहद शर्मनाक रही है। फ़िलिस्तीन पर ज़ुल्म, गाज़ा में नरसंहार, मादुरो का अपहरण, ईरान पर हमला, खामेनेई की हत्या, मिनाब में 168 स्कूली छात्राओं की हत्या, जहाज़ आईआरआईएस देना पर मारे गए ईरानी नाविक— जो हमारे ही न्योते पर भारत आए थे — इनमें से किसी भी घटना पर भारत सरकार की ओर से अफ़सोस का एक शब्द भी नहीं कहा गया, निंदा करना तो दूर की बात है! भारत इस समय देशों के शक्तिशाली समूह ब्रिक्स का अध्यक्ष है। भारत के इस चाटुकार रवैये के कारण वह इस मंच भी पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है।

इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने — ठीक ईरान पर हुए उस जघन्य हमले से महज़ दो दिन पहले इज़राइल का दौरा किया था ; गाज़ा के कसाईयों — नेतान्याहू और इज़राइल — की जमकर तारीफ़ की थी, और उन्हें बिना किसी शर्त के अपना समर्थन दिया था। ट्रंप और अमेरिका के सामने नरेंद्र मोदी का हर मामले में — जिसमें राष्ट्र-विरोधी ‘अमेरिका-भारत व्यापार समझौता’ भी शामिल है — पूरी तरह से घुटने टेक देना, ज़ाहिर है, अब जगज़ाहिर हो चुका है। यह सब कुछ, भारत की पहले की स्वतंत्र, गुट-निरपेक्ष और साम्राज्यवाद-विरोधी विदेश नीति का एक घोर मज़ाक है।

पूंजीवादी और साम्राज्यवादी व्यवस्था का पतन

ये हमले साम्राज्यवाद के पतन के दौरान उत्पन्न विरोधाभासों को उजागर करते हैं। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति अंतहीन युद्धों को छुपाती है ; नेतन्याहू का सुरक्षा को लेकर जुनून आक्रोश पैदा करता है। जनविरोध बढ़ता जा रहा है — सर्वेक्षण ईरान युद्ध के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ के घोर समर्थन को दोषी दर्शाते हैं ; लैटिन अमेरिकी सड़कों पर वेनेजुएला की आक्रामकता के खिलाफ आक्रोश फैल रहा है। वैश्विक वामपंथियों को एकजुट होना होगा : जन प्रदर्शन, मजदूर हड़तालें, ईरान और वेनेजुएला की आवाज़ों को बुलंद करने वाले एकजुटता अभियान ; युद्ध-विरोधी गठबंधन बनाना ; हर्जाने की मांग करना, हमलावरों पर प्रतिबंध लगाना और अमेरिका-नाटो-यहूदीवादी गठबंधनों को समाप्त करना।

अंततः, वेनेज़ुएला और ईरान पर ये दोहरे हमले एक पूँजीवादी और साम्राज्यवादी व्यवस्था की अंतिम साँसें हैं। संसाधनों और बाज़ारों के लिए पूँजीवाद की होड़ अंतहीन संघर्षों को जन्म देती है। ईरानी, लेबनानी, फ़िलिस्तीनी और वेनेज़ुएलाई लोग पूरी हिम्मत से इसका विरोध कर रहे हैं। वैश्विक एकजुटता इस स्थिति का रुख़ बदल सकती है। काराकास से लेकर तेहरान तक, यह संदेश ज़ोर-शोर से और साफ़-साफ़ गूँज रहा है : साम्राज्यवाद और यहूदीवाद की जीत नहीं होगी! यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक हर राष्ट्र वाशिंगटन और तेल अवीव के शिकंजे से आज़ाद नहीं हो जाता!

[ • लेखक डॉ. अशोक ढवले अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ में फिर तेज बारिश का दौर, कई जिलों में अलर्ट; गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर तेज बारिश का दौर, कई जिलों में अलर्ट; गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा बयान, कहा- बिजली के निजीकरण को लेकर कांग्रेस फैला रही भ्रम…
breaking Chhattisgarh

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा बयान, कहा- बिजली के निजीकरण को लेकर कांग्रेस फैला रही भ्रम…

बड़ा कदम: अदालतों के फैसलों और एफआईआर में अब नहीं लिखे जाएंगे ‘रखैल’ और ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्द…
breaking Chhattisgarh

बड़ा कदम: अदालतों के फैसलों और एफआईआर में अब नहीं लिखे जाएंगे ‘रखैल’ और ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्द…

छत्तीसगढ़ में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा! 24 घंटे में मिले 10 नए मामले, जानें किस जिले में कितने एक्टिव मरीज ?
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा! 24 घंटे में मिले 10 नए मामले, जानें किस जिले में कितने एक्टिव मरीज ?

दंतेवाड़ा के ‘खजाने’ से बदलेगी बस्तर की तस्वीर, DMF फंड से जंगलों तक पहुंचेगी सड़क, पानी और बिजली; 4 जिलों को फायदा
breaking Chhattisgarh

दंतेवाड़ा के ‘खजाने’ से बदलेगी बस्तर की तस्वीर, DMF फंड से जंगलों तक पहुंचेगी सड़क, पानी और बिजली; 4 जिलों को फायदा

दुर्ग के बाद अब यहां स्वाइन फ्लू की दस्तक, 7 मरीजों की पुष्टि से मचा हड़कंप, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग
breaking Chhattisgarh

दुर्ग के बाद अब यहां स्वाइन फ्लू की दस्तक, 7 मरीजों की पुष्टि से मचा हड़कंप, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग

नेपाल में बाढ़ का कहर, 178 भारतीय नागरिक समेत 644 टूरिस्ट लापता, 150 से ज्यादा मौतें
breaking international

नेपाल में बाढ़ का कहर, 178 भारतीय नागरिक समेत 644 टूरिस्ट लापता, 150 से ज्यादा मौतें

सीमा विवाद से मानसरोवर तक… डोभाल-वांग यी की मुलाकात में भारत-चीन के बीच इन 8 मुद्दों पर सहमति
breaking international

सीमा विवाद से मानसरोवर तक… डोभाल-वांग यी की मुलाकात में भारत-चीन के बीच इन 8 मुद्दों पर सहमति

छत्तीसगढ़ में 1 सितंबर से शुरू होगी बिजली कनेक्शनों की eKYC, जानिए घर बैठे कैसे करें पूरी प्रक्रिया?
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 1 सितंबर से शुरू होगी बिजली कनेक्शनों की eKYC, जानिए घर बैठे कैसे करें पूरी प्रक्रिया?

TET को लेकर मानी गई शिक्षकों की बड़ी मांग! छत्तीसगढ़ में अब साल में 3 बार होगी परीक्षा
breaking Chhattisgarh

TET को लेकर मानी गई शिक्षकों की बड़ी मांग! छत्तीसगढ़ में अब साल में 3 बार होगी परीक्षा

IGKV में एक बार फिर पेपर लीक ! B.Sc फर्स्ट ईयर का ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ पेपर परीक्षा से 6 घंटे पहले वायरल
breaking Chhattisgarh

IGKV में एक बार फिर पेपर लीक ! B.Sc फर्स्ट ईयर का ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ पेपर परीक्षा से 6 घंटे पहले वायरल

कांग्रेस ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा: CM साय
breaking Chhattisgarh

कांग्रेस ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा: CM साय

छत्तीसगढ़ में निजी बिजली वितरण कंपनी ने लगाया दांव, टाटा पावर ने मांगी अनुमति…
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में निजी बिजली वितरण कंपनी ने लगाया दांव, टाटा पावर ने मांगी अनुमति…

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बोले- शिक्षक ही करा रहे आंदोलन, प्राचार्यों का ध्यान सिर्फ केबिन स्पेस पर; यूट्यूब पत्रकारों की एंट्री पर रोक
breaking Chhattisgarh

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बोले- शिक्षक ही करा रहे आंदोलन, प्राचार्यों का ध्यान सिर्फ केबिन स्पेस पर; यूट्यूब पत्रकारों की एंट्री पर रोक

छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर, 1 सितंबर से शुरू होगी eKYC, नाम गलत हुआ तो अटक जाएगा सत्यापन
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर, 1 सितंबर से शुरू होगी eKYC, नाम गलत हुआ तो अटक जाएगा सत्यापन

भिलाई इस्पात संयंत्र : छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ सत्र 2026-27  के लिए विभिन्न आयु वर्गों में बीएसपी क्रिकेट टीम के गठन हेतु चयन स्पर्धा 26 एवं 27 अगस्त, 2026 को क्रिकेट ग्राउंड [सिविक सेंटर] में प्रात: 9.00 बजे से
breaking Chhattisgarh

भिलाई इस्पात संयंत्र : छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न आयु वर्गों में बीएसपी क्रिकेट टीम के गठन हेतु चयन स्पर्धा 26 एवं 27 अगस्त, 2026 को क्रिकेट ग्राउंड [सिविक सेंटर] में प्रात: 9.00 बजे से

खाद्य तेल के कम वजन वाले पैकेट पर सरकार का शिकंजा, अब सिर्फ 1 लीटर पैक की होगी बिक्री
breaking Chhattisgarh

खाद्य तेल के कम वजन वाले पैकेट पर सरकार का शिकंजा, अब सिर्फ 1 लीटर पैक की होगी बिक्री

220 की स्पीड पर ट्रेनों का ट्रायल! कंप्लीट होने वाला है हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक का काम
breaking National

220 की स्पीड पर ट्रेनों का ट्रायल! कंप्लीट होने वाला है हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक का काम

जिंगपिंग के भारत दौरे से पहले… NSA डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति से की मुलाकात, जानें इस मीटिंग के मायने
breaking international

जिंगपिंग के भारत दौरे से पहले… NSA डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति से की मुलाकात, जानें इस मीटिंग के मायने

छत्तीसगढ़ के पूर्व रणजी खिलाड़ी राजेश दवे को बड़ी जिम्मेदारी, एशिया कप के लिए बने टीम इंडिया के मैनेजर
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पूर्व रणजी खिलाड़ी राजेश दवे को बड़ी जिम्मेदारी, एशिया कप के लिए बने टीम इंडिया के मैनेजर

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य
poetry

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन