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प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के तत्वावधान में सातवीं सांगठनिक बैठक, बीते कार्यक्रम की समीक्षा और भव्य काव्य पाठ समारोह सम्पन्न

👉 [बाएँ से] • त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’, नीलमचंद सांखला, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर और प्रदीप भट्टाचार्य
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
भिलाई निवास [इंडियन कॉफी हाऊस सभागार : 21 जून, 2026] : प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ साहित्य समिति [छत्तीसगढ़ शासन से राज्य स्तरीय पंजीयन समिति] के तत्वावधान में बीते दिनों 7 वीं सांगठनिक बैठक एवं काव्य गोष्ठी भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस के सभागार में {प्रात: 11.00 बजे से सायं 4.00 बजे} कुल-51 सदस्यों में से 41 सदस्यों की उपस्थिति में सम्पन्न हुई.

👉 • माँ सरस्वती की पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में विवाहित महिलाओं की अग्रणी संस्था ‘स्वयंसिद्धा’ की संस्थापक अध्यक्ष- डॉ. सोनाली चक्रवर्ती थीं. अध्यक्षता- ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार एवं सुप्रसिद्ध संस्कृत विद्वान आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा थे. सातवीं सांगठनिक बैठक की अध्यक्षता ‘आरंभ’ के मुख्य संरक्षक- कैलाश जैन बरमेचा ने की. विशिष्ट अतिथि- ‘आरंभ’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष- त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’ थे. अन्य अतिथि रहे- उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश साहित्यकार नीलमचंद सांखला और उप वनमंडल के पूर्व अधिकारी कवि अब्दुल वाहीद खान.

👉 • ‘आरंभ’ के सदस्य
सातवीं सांगठनिक बैठक के संयोजक ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर भी मंचासीन थे. प्रारंभ में माँ सरस्वती वंदना, पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित किया गया. सरस्वती वंदना की सुमधुर प्रस्तुति श्रीमती संध्या साटकर ने की.


अतिथि सत्कार के बाद आयोजकीय व्यक्तत्व ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर ने आयोजन के उद्देश्य पर अपने विचार रखे. स्वागत उद्बोधन ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने दिया. आभार व्यक्त संस्था के संस्थापक व आजीवन सदस्य ब्रजेश मल्लिक ने किया.

👉 • कार्यक्रम के संयोजक ‘आरंभ’ के आजीवन व संस्थापक सदस्य ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर का स्वागत करते हुए ‘आरंभ’ के सक्रिय सदस्य राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ और शिवचरण दास गोयल
‘आरंभ’ की महासचिव एवं कार्यक्रम की मुख्य संचालिका नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ ने संस्था के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार कुछ इस तरह प्रकट की-

“मंजिल से आगे बढ़कर मंज़िल तलाश कर/मिल जाए तुझको तो समुंदर तलाश कर” इसी प्रेरक भाव को चरितार्थ करती ‘आरंभ’ एक प्रगतिशील विचारधारा की साहित्यिक संस्था अपने नाम के अनुरूप निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है. नवम्बर, 2025 को 21 सदस्यों के साथ प्रारंभ हुई, यह संस्था आज 51 सदस्यों के परिवार में परिवर्तित हो चुकी है. संस्था से जुड़े सभी साहित्यिक चिंतक समाज में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं. यही इस संस्था की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ प्रत्येक सदस्य अपनी प्रतिभा, अनुभव और साहित्यिक दृष्टि से संस्था को समृद्ध कर रहा है. आज संस्था की सातवीं सांगठनिक बैठक आयोजित हो रही है. हम महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के मध्य भी संस्था द्वारा काव्य पाठ कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जो न केवल संस्था के लिए गर्व का विषय है बल्कि नई पीढ़ी में साहित्यिक चेतना और सृजनशीलता के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है. निस्संदेह ‘आरंभ’ की यह सतत् प्रगति, साहित्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और सदस्यों का आपसी सौहार्द्र उसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है. साहित्य की यह यात्रा इसी प्रकार नए आयाम प्राप्त करती रहे, यही शुभकामनाएं हैं.
संस्था का राज्य स्तरीय पंजीयन 25 मई को होने के बाद से अब तक 51 सदस्यों की संख्या हो गई है. इस अवसर पर कैलाश जैन बरमेचा और आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने 6वीं सांगठनिक बैठक के बाद बने सभी नए सदस्यों का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया.
द्वितीय सत्र में काव्य पाठ का कुशल संचालन संस्थापक आजीवन सदस्य एवं ‘आरंभ’ की उपाध्यक्षा दीप्ति श्रीवास्तव ने किया.
मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में शामिल हुई मुख्य अतिथि ‘स्वयंसिद्धा’ की अध्यक्ष डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने कहा कि-

‘आरंभ’- हर मौन कलम को आवाज़ देने का मंच है, नव चेतना का यह अडिग दीप-स्तम्भ है. सोई हुई संस्कृति को जगाने का स्पदंन है. अक्षरों से नया इतिहास रचने का प्रण है. शोषितों के स्वरों का यह प्रखर उद्धोष-स्तम्भ है, एक नई सोच का नाम ‘आरंभ’ है. सोनाली जी ने संगठन को कैसे संचालित किया जाए इस संबंध में विस्तार से अपनी बात रखी.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि-

साहित्य की विविध विधाओं को समर्पित प्रगतिशील साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ ने अनेकानेक ऐसे सफल आयोजन सम्पन्न कराये हैं, जो सामान्य से हटकर हैं. कवियों की नवीन काव्य कृतियों के गरिमामय समारोह में उन पर फूलों की वर्षा करते हुए उनकी सहधर्मिणी पत्नियों को स-सम्मान मंच प्रदान करना. उनके स्वागत में पुष्पमाला और पुष्पगुच्छों में नोटों को भी सजाना, उत्तम जलपान एवं भोजन व्यवस्था के साथ काव्य पाठ के सफल आयोजन आदि उल्लेखनीय है. इसके अलावा इन सभी कार्यक्रमों में सर्वधर्म समभाव एवं परस्पर सामाजिक सद्भाव का वातावरण देखते ही बनता है. डॉ. शर्माजी ने ‘आरंभ’ के सभी आयोजनों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए सफल भविष्य की शुभकामनाएं भी दी.
‘आरंभ’ के आजीवन संस्थापक सदस्य एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’ विशिष्ठ अतिथि की आसंदी से अपने विचार कुछ इस तरह प्रगट किए-

‘आरंभ’ अपनी शिखरता पर है, वैसे तो इस संस्था के प्रणेता प्रदीप भट्टाचार्य हैं, जिन्होंने इस साहित्य समिति को एक नया आयाम दिया है, परंतु इसे बुलंदी पर स्थापित किया है समाजसेवी कैलाश जैन बरमेचा एवं आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने और इसमें रंग भरने वाले आप सब प्रतिष्ठित साहित्यकार बंधु. ‘आरंभ’ की महासचिव नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ अपनी मुखारविंद की आभा से इसे प्रज्ज्वलित किए हुए हैं. संचालन की भूमिका में दीप्ति श्रीवास्तव, डॉ. भावना दिवाकर ने ‘आरंभ’ को नई ऊँचाईयां प्रदान की है. निश्चित रूप से ‘आरंभ’ प्रगति के पथ पर अग्रसर है. बहुत कम समय में प्रदीप भट्टाचार्य ने अपनी मेहनत और लगन से इस समिति का राज्य स्तरीय पंजीयन कराया है जो कि काबिलेतारीफ है. मित्रों, नि:संदेह जब कोई आयोजन होता है तो मन खुशियों से लबरेज़ रहता है. ‘जीवन में बनते बिगड़ते रहते हैं समीकरण/फिर भी उपलब्धियों को ढुंढता है अंत:करण/मन खुशियों से लबरेज़ हो उठता है उस पल/और जीवन में मिली खुशियों का होता है स्मरण’ साहित्य को उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर देखना एक कवि अथवा साहित्यकार का प्रथम लक्ष्य होता है. बेहतर जीवन की परिकल्पना ही एक श्रेष्ठ साहित्यकार का निर्धारण होता है. ‘जलते हुए मशाल हो तुम/रोशनी यूँ ही बिखरा दोगे/रौशन हो जायेगा जग/तुम स्वयं ही रौशन हो जाओगे.’ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार- ‘जो साहित्य मनुष्य समाज को रोग-शोक, दारिद्र्य-अज्ञान तथा परावलंबन से बचाकर उसमें आत्मबल का संचार करता है, वह साहित्य निश्वय ही अक्षय निधि है’ और यही कार्य हमारे ‘आरंभ’ के साहित्यकार कर रहे हैं. ‘गुमां था हमें, मुद्दतें परिवर्तन का/गुमां न था, परिवर्तन इस कदर होगा’ आज के संयोजक ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर का भी तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूँ. आप सभी ‘आरंभ’ के सुदृढ़ स्तम्भ हैं. आप सब बहुत ऊपर जाएं, छत्तीसगढ़ राज्य का नाम रोशन करें. ‘आरंभ’ को जीवंत रखें. ‘आओ करें हम समाज का उत्थान/करें मिलजुलकर समाज का कल्याण/नहीं कोई दूजा/तुमसे बढ़कर सोचे/सृजनकर्ता हो तुम/रचना से देते ज्ञान/’आरंभ’ को देते रहो जीवन दान/’आरंभ’ को देते रहो जीवन दान…’
सांगठनिक बैठक-7 की अध्यक्षता करते हुए कैलाश जैन बरमेचा ने मई माह में हुई पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की समीक्षा की और आयोजन के बारे में विस्तृत जानकारी दी.
इस अवसर पर नीलमचंद सांखला और अब्दुल वहीद खान ने भी अपने विचार प्रगट किए.
द्वितीय सत्र में काव्य पाठ हुआ. कविता पाठ करने वाले सभी रचनाकारों को ‘आरंभ’ प्रतिभागी प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. इस सत्र का काव्यात्मक संचालन दीप्ति श्रीवास्तव ने किया. काव्य पाठ करने वालों में प्रमुख थे-

डॉ. संध्या श्रीवास्तव, वर्षा ठाकुर, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, तारकनाथ चौधुरी, अमृता मिश्रा, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, शशिप्रभा गुप्ता, नुरूस्सबाह खान ‘सबा’, नीलमचंद सांखला, प्रकाशचंद्र मण्डल, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, जाविद हसन ‘भाईजान’, डॉ. दीक्षा चौबे, मिताली श्रीवास्तव वर्मा, फरीदा शाहीन अंसारी, सुशील यादव, शौकत इकबाल, नितिन गोस्वामी, पल्लव चटर्जी, माला सिंह, राजकुमार भल्ला ‘आर्य’, शिवचरण दास गोयल, कमलेश तिवारी, प्रदीप कुमार पाण्डेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर, अब्दुल वहीद खान और ब्रजेश मल्लिक.
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काव्य पाठ के कुछ प्रमुख अंश-

इक अरसे से हुनर छुपाये हैं मैंने/कई ख्वाबों के पन्ने जलाये है मैंने…
• जलज ताम्रकर
कल्प वृक्ष सा अमर गीत कहाँ से लाऊँ मैं/हृदय के मरुस्थल में राष्ट्र जीवन का संगीत/कहाँ से लाऊँ मैं…
• माला सिंह
माँ तु एक बार पेड़ बनकर देख/मैं तेरे पेड़ का पत्ता बनूँगा/माँ मैं हर जन्म में तेरा बेटा बनूँगा…
• नीलमचंद सांखला
‘आरंभ’ के परिवेश में नए बुद्धिमता से/ओत-प्रोत व्यक्तित्व शख्सियत का साहित्य समिति में प्रवेश ही महान है…
• डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

👉 • डॉ. संध्या श्रीवास्तव काव्य पाठ करती हुई…

👉 • डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ काव्य पाठ करते हुए…
धर्म निभा रहा हूँ/मैं विशालकाय वृक्ष/जीवन की अंतिम सांस ले/ठूंठ बन गया हूँ, फिर भी/मेरा निष्प्राण शरीर, अपना धर्म निभा रहा है…
• वर्षा ठाकुर
लचक बाँस की उसे बचाती/तूफानों में टूट-फूट से/अकड़ा मत रह मुर्दे जैसा/जीवित है तो डोल बटोही…
• डॉ. दीक्षा चौबे
न रही कुछ ख्वाहिशें/न जरूरत हुई पूरी/हर रिश्तों को स्वार्थ में ढहते देखा है/पिता बिना मैंने खाली मकान देखा है/मैंने पिता के रूप में/खुला आसमां देखा है…
• मिताली श्रीवास्तव वर्मा

👉 • शौकत इकबाल कविता पाठ करते हुए…

👉 • पल्लव चटर्जी काव्य पाठ करते हुए…
दिन-रात का क्या है गुजर ही जायेगा/हर नशा इक दिन उतर ही जायेगा/रोक लो जो राह कोई मोड़ने लगे/मिलजुल रहें तो सब सँवर ही जायेगा…
• गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’
हम भी प्यासे थे मगर दरिया नहीं मांगा हमने/कोई फरियाद न की ज्यादा नहीं मांगा हमने/वो ही मालिक है/इबादत में मुझे कासा भर दे/अपनी बेटी को बड़ा रिश्ता नहीं मांगा हमने…
• सुशील यादव
जहाँ कर्ण के रथ के पहिये धंसे हुए थे/निशस्त्र हाथ बाहर करने में लगे हुए थे/तभी चले थे बाण वहीं असहाय कर्ण पर/धरती अंबर देख दृश्य आवाक हुए थे…
• राकेश गुप्ता ‘रुसिया’
हँसते-हँसते ही सही पर ‘योग’ को रोज अपनाना है/सिर्फ एक दिन नहीं, इसे जीवन का हिस्सा बनाना है…
• शिवचरण दास गोयल

👉 • त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’ ने भी एक बेहतरीन कविता का पाठ किया…

👉 • मिताली श्रीवास्तव वर्मा काव्य पाठ करती हुई…
वो जिसकी आँख से हर पल नेह का मेह बरस जाए/हृदय जिसका पराये पीर में रोता बिलखता था…
• तारकनाथ चौधुरी
यूँ तो मसरूफ़ है/सभी अपनी जिंदगी में मगर/मशहूर वही हैं/जो दूसरों के लिए जीये…
• नितिन गोस्वामी
जो भी उसी ने ही पागल समझ लिया/अपना फटा लिबास मैं लेकर जिधर गया/परियों के साथ मैं ख्वाबों के देश में/काटा जो जमके मच्छर सपना बिखर गया…
• डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
गिरी जब भी मेरे हक में सहारा बन गए अब्बा/मेरी मुश्किल के दरिया का किनारा बन गए अब्बा/न थी औकात मेरी/न कोई खास पहचान थी/मेरी पहचान का पहला इशारा बन गए अब्बा…
• फरीदा शाहीन अंसारी

👉 • शिवचरण दास गोयल काव्य पाठ करते हुए…

👉 • माला सिंह कविता पाठ करती हुई…

👉 • नीलमचंद सांखला ने भी पिता पर एक भावपूर्ण कविता को पढ़ा…

👉 • तारकनाथ चौधुरी कविता पाठ करते हुए…
इस अवसर पर डॉ. सोनाली चक्रवर्ती को ‘आरंभ’ मोमेंटों, प्रतीक चिन्ह, शॉल, श्रीफल देकर सम्मानित किया गया.

👉 [बाएँ से] • संध्या साटकर, नुरूस्सबाह खान ‘सबा’, संदीप चक्रवर्ती, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, शशि प्रभा गुप्ता, शेफाली भट्टाचार्य और अमृता मिश्रा

👉 • डॉ. सोनाली चक्रवर्ती का स्वागत करते हुए प्रदीप भट्टाचार्य, शेफाली भट्टाचार्य और कैलाश जैन बरमेचा

👉 • डॉ. सोनाली चक्रवर्ती को ‘आरंभ’ मोमेंटों भेंट करते हुए शशि प्रभा गुप्ता और डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
आयोजन में श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य, संध्या साटकर, शानू मोहनन, अनिल खरे, आलोक चौधुरी, अर्पिता चौधुरी, महेश तिवारी, दीपमाला सिन्हा, शेखर साहू और अनेक बुद्धिजीवी एवं ‘आरंभ’ के सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे.
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आयोजन की कुछ और प्रमुख सचित्र झलकियाँ-

👉 • ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य का स्वागत किया श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य और माला सिंह ने

👉 • त्रयम्बक साटकर राव ‘अंबर’ का स्वागत किया संध्या साटकर और दीप्ति श्रीवास्तव ने

👉 • अब्दुल वहीद खान का स्वागत करते हुए- मिताली श्रीवास्तव और डॉ. दीक्षा चौबे

👉 ‘आरंभ’ की महिला सदस्य [बाएँ से] शशि प्रभा गुप्ता, दीप्ति श्रीवास्तव, शेफाली भट्टाचार्य, फरीदा शाहीन अंसारी, नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ और माला सिंह

👉 फोटो क्लिक [बाएँ से] • जाविद हसन ‘भाईजान’, वर्षा ठाकुर, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर, कैलाश जैन बरमेचा, नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ और फरीदा शाहीन अंसारी

👉 भोजन का स्वाद [बाएँ से] • सुशील यादव, प्रदीप भट्टाचार्य और ब्रजेश मल्लिक

👉 फ़ुरसत में [बाएँ से] • कैलाश जैन बरमेचा, त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’, प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, पल्लव चटर्जी और डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

👉 • ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर अपनी कृति ‘गाथा महाराणा प्रताप की’ ‘आरंभ’ के प्रवक्ता जाविद हसन ‘भाईजान’ को भेंट करते हुए…

👉 • ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर कृति ‘गाथा महाराणा प्रताप की’ डॉ. संध्या श्रीवास्तव को भेंट करते हुए…

👉 • ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा के कर- कमलों से फरीदा शाहीन अंसारी और नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ को उत्कृष्ट काव्य पाठ के लिए प्रमाण पत्र देते हुए…

👉 • प्रकाशचंद्र मण्डल और ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

👉 • अब्दुल वाहीद खान और ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

👉 [बाएँ से] • कैलाश जैन बरमेचा, शशि प्रभा गुप्ता, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, नितिन गोस्वामी, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती और शेफाली भट्टाचार्य

👉 • काव्य पाठ में उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए डॉ. दीक्षा चौबे को ‘आरंभ’ सम्मान से सम्मानित करती हुई डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

👉 • कार्यक्रम के संयोजक ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर ने कुशल संचालन के लिए दीप्ति श्रीवास्तव को पुष्प गुच्छ देकर अभिवादन किया

👉 • ‘आरंभ’ के सक्रिय सदस्य कवि नितिन गोस्वामी

👉 • ‘आरंभ’ के मीडिया प्रभारी शायर डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’

👉 • ‘आरंभ’ के आजीवन सदस्य नीलमचंद सांखला का स्वागत किया- पल्लव चटर्जी और तारकनाथ चौधुरी

👉 • स्वागत उद्बोधन ‘आरंभ’ के अध्यक्ष- प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • ‘आरंभ’ जिनके सलाह से शुभारंभ हुआ आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा

[ • रिपोर्ट फोटो संयोजन- जाविद हसन ‘भाईजान’ और डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
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chhattisgarhaaspaas
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