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- संस्कृति, कला और विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय [IUCAS] द्वारा बांग्ला-हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी को ‘अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक नेता’ प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया
संस्कृति, कला और विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय [IUCAS] द्वारा बांग्ला-हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी को ‘अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक नेता’ प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया

• छत्तीसगढ़ आसपास
• छत्तीसगढ़ [भिलाई]
‘खंडमेघ’, ‘जीवन के नाना रंग’, ‘अक्षर आलापन’, ‘समय की अनुभूति’ और ‘ध्वनिमय यह जगत’ बांग्ला काव्य संग्रह के रचियता जन-पक्षधर प्रगतिशील व सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी को एक बेहतर दुनिया के लिए मिलकर काम करने के लिए संस्कृति, कला और विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय [IUCAS] के डायरेक्टर जनरल राजदूत मार्सेला मेंडेस ज़बाला [ब्राजील] और संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. बस्साम बिशारा ज़ब्लाह [फिलिस्तीन] के हस्ताक्षर से अंतर्राष्ट्रीय सम्मान ‘अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक नेता’ सम्मान से सम्मानित किया गया.
‘अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक नेता प्रमाणपत्र’ में लिखा गया है कि-
यह प्रमाण पत्र गर्व के साथ पल्लव चटर्जी को प्रदान किया जाता है आपके उत्कृष्ट नेतृत्व, दूरदर्शी योगदान और संस्कृति, कला, मानवीय मूल्यों एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति समर्पण की मान्यता में दिया गया है. आपकी प्रेरणादायक प्रतिबद्धा ने समुदायों को स्मृद्ध किया है और राष्ट्रों के बीच समझ और शांति के सेतुओं को मजबूत किया है. यह प्रमाणपत्र आपको सम्मान, आदर और सराहना के प्रतीक के रूप में प्रदान किया जाता है. एक सच्चे ‘अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक नेता’ के रूप में आपकी भूमिका के लिए. एक बेहतर दुनिया के लिए मिलकर.

प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की नींव रखने वाले पल्लव चटर्जी को International Cultural Leader का सम्मान मिलना हम साहित्यिक बिरादरी के लिए बड़े गर्व की बात है. आपकी कविता और लेखनी ने सही अर्थों में संस्कृति और इंसानियत के सेतु का काम कर रही है. पल्लव चटर्जी बांग्ला कविता के साथ-साथ हिंदी कविताओं में भी दखल रखते हैं. इनकी हिंदी कविता प्रगतिशील परंपरा से समकालीन कविता को जोड़ती हुई सार्थक रचनाशीलता की ओर जाती हुई दिखती है. इनकी हिंदी में लिखी छोटी-छोटी कविता घर-पड़ोस से लेकर देश-परदेश एवं जन-जीवन की सांस लेती है.
पल्लव चटर्जी भारतीय स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. आप अपना साहित्यिक गुरु बांग्ला के लब्धप्रतिष्ठत कवि-लेखक दिवंगत शिवव्रत देवानजी को मानते हैं और बांग्ला भाषा में प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार को अपना आदर्श मानते हैं. देश के अनेकों सम्मान से सम्मानित पल्लव चटर्जी ‘आरंभ’ के आजीवन-संस्थापक सदस्य एवं ‘बंगीय साहित्य संस्था’ से जुड़े हैं.
पल्लव चटर्जी कहते हैं कि कविता को सरल, सहज बनाकर पाठक तक पहुंचाना ही मेरे लेखन का मुख्य लक्ष्य है. मेरे कवि होने का कारण, मेरी चिंताएं और सरोकार साफ है.
इस उपलब्धि के लिए ‘आरंभ’ साहित्य समिति और ‘बंगीय साहित्य संस्था’ परिवार की तरफ से असंख्य बधाई.
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