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‘आईना-ए-अदब’ [उर्दू एवं हिंदी तंज़ीम] के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ- ‘याद-ए-रफ्तगाँ एक शाम मरहूम शायरों के नाम’ : छत्तीसगढ़ के जेरे एहतमाम एक नशिस्त काव्य गोष्ठी, खिराज-ए-अकीदत और श्रद्धा सुमन श्रद्धांजलि

• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
‘आईना-ए-अदब’ उर्दू हिंदी संगम तंजीम भिलाई-दुर्ग छत्तीसगढ़ के जेरे एहतमाम एक नशिस्त काव्य गोष्ठी- ‘एक शाम मरहूम शायरों के नाम’ का आयोजन बीते दिनों इंडियन कॉफ़ी हाउस सभागार [आकाशगंगा-सुपेला] में किया गया.
कार्यक्रम के मेहमान-ए-खुशुशी मुख्य अतिथि- उच्चन्यायालय [बिलासपुर] के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, साहित्यकार-कवि नीलमचंद सांखला, अध्यक्षता- सदारत उस्ताद शायर जनाब अब्दुस्सलाम कौसर [राजनांदगांव] थे. विशेष अतिथि के तौर पर उर्दू के अफसाना निगार शायर जनाब डॉ. रौनक जमाल, शायर जनाब लतीफ़ खान ‘लतीफ़’, सेवानिवृत्त सब डिविजनल फॉरेस्ट ऑफ़िसर व समाजसेवी शायर जनाब अब्दुल वहीद खान, प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष एवं लोकशिक्षण- लोकजागरण की वैचारिक-विचार की मासिक पत्रिका, वेब पोर्टल न्यूज़ चैनल के एडिटर-इन-चीफ़, प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, ‘आरंभ’ की महासचिव मशहूर शायरा मोहतरमा नुरूस्सबाह खान ‘सबा’, ‘कला परंपरा’ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख और कवि ओमप्रकाश शर्मा थे.


प्रारंभ में अतिथियों द्वारा शमा रौशन किया गया, तत्पश्चात इरफानउद्दीन इरफ़ान ने नात शरीफ से आग़ाज़ किया और सरस्वती वंदना कवयित्री मिताली श्रीवास्तव वर्मा ने की.
मेहमान-ए-खुसीसी को इस्तकबाल किया- अब्दुस्सलाम कौसर को जनाब हाजी रियाज़ खान गौहर, नीलमचंद सांखला को जनाब शकील अहमद सिद्दीकी, डॉ. रौनक जमाल को अबू तारिक, अब्दुल वहीद खान को इस्माईल खान, नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ को फरीदा शाहीन अंसारी, लतीफ़ खान ‘लतीफ़’ को ज़ाकिर भाई, प्रदीप भट्टाचार्य को शौकत इकबाल, डॉ. डीपी देशमुख को जाविद हसन ‘भाईजान’ और ओमप्रकाश शर्मा को डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ द्वारा फूलों की माला एवं पुष्प गुच्छ देकर किया गया.
इस मौके पर उर्दू और हिंदी ज़ुबानों का खुबसूरत संगम देखने को मिला. इस अवसर पर शायर-शायरा, कवि-कवयित्रियों ने शेरो-शायरी एवं कविताओं का पाठ किया. पढ़ने वालों में प्रमुख हैं-

शायर जनाब हाजी रियाज़ खान गौहर, इरफ़ानुद्दीन इरफ़ान, यूसुफ सागर, हाजी मिर्जा इसराइल बेग, शाद बिलासपुरी, आलोक नारंग, सुशील यादव, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, शायर मुमताज, हाजी ताहिर, शेख निज़ाम दुर्ग वी, डॉ. संजय दानी, एज़ाज बसर, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर, मो. इकबाल खान ‘तन्हा’, शुचि ‘भवि’, सोनिया सोनी, नीलम जायसवाल, मिताली श्रीवास्तव वर्मा, ओमप्रकाश जायसवाल, जलज ताम्रकर, शमशीर सिवानी, सतीश कुमार चौहान, शुभेंदु बागची, ब्रजेश मलिक, मो. सलीम, शहजाद खान, डॉ. प्रशांत कानस्कर, राही कमाल, पोषण कुमार, शकील अहमद सिद्दीकी, मुहम्मद जाकिर हुसैन, फरीदा शाहीन अंसारी, शौकत इकबाल, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, मो. अबू तारिक, जाविद हसन ‘भाईजान’ और इस्माईल खान.

👉 • अब्दुस्सलाम कौसर

👉 • प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • ओमप्रकाश शर्मा

👉 • लतीफ़ खान ‘लतीफ़’

👉 • डॉ. डीपी देशमुख

👉 • नीलमचंद सांखला
मंचासीन अतिथियों ने भी आयोजन उद्गार देते हुए बोले कि मरहूम शायरों के नाम ऐसे आयोजन समय-समय पर होते रहना चाहिए ताकि उन रचनाकारों की याद जीवंत बनी रहे. अतिथियों ने अपनी-अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया.
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पढ़ी गई कुछ प्रमुख शायरों की पंक्तियाँ-
👉 • शायरा नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ अपनी बेहतरीन ग़ज़ल का पाठ करती हुई…
👉 • अंतर्राष्ट्रीय शायर डॉ. रौनक जमाल ‘आईना-ए-अदब’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपने उद्गार प्रगट करते हुए…
एक परी चेहरा निगाहों में उतारे जाइये/अपनी तन्हाई यूँ ही तन्हा गुज़ारे जाइये…
– अब्दुस्सलाम कौसर
माँ! मैं तेरी खूबसूरती पर फिदा हूँ/ए मालिक! मेरे चेहरे को/मेरी माँ की खूबसूरती नसीब हो…
– नीलमचंद सांखला
कर गुज़रे कुछ काम अनोखा/जज़्बा यही जवानी है/जिसमें ये जज़्बा ना हो/वो खून नहीं बस पानी है/उम्र की तो बात करो मत/वो तो नंबर फ़ानी है/और लिखने की ये चाह है जब-तक/तब-तक दोस्त जवानी है…
– ओमप्रकाश शर्मा
अर्ज है कलाम से पहले/मुस्कुरा दो सलाम से पहले/बस इतनी सी दुआ दे दीजिए/थक ना जाऊँ, मुकाम से पहले…
– डॉ. रौनक जमाल
कितनी अजीब शंय है ये लोगों सुखनवरी/आया शबाब फ़िक्र में तो उम्र ढल गई/हमने खिलाफ़ झूठ के खोली थी बस जुबाँ/मालूम ये हुआ कि हुकूमत बदल गई…
– नुरूस्सबाह ‘सबा’
आज फिर याद मुहब्बत के ज़माने आए/याद आ-आ के मेरे दिल को दुखाने आए/मुद्दतों बाद हुवा मुझ पे करम यारों का/मर गया मैं तो वो काँधों पे उठाने आए…
– लतीफ़ खान ‘लतीफ़’
मेरे कत्ल की गवाही में/इंसान को बुलाया जाये/फरिश्तों को दूर रखें/शैतान को न लाया जाये…
– प्रदीप भट्टाचार्य
रुकावट आती है सफलता की राहों में/ये कौन नहीं जानता? फिर भी मंज़िल पा ही लेते हैं/जो हार नहीं मानता…
– शौकत इकबाल
हम दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है/जिस तरफ़ चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा…
– शकील अहमद सिद्दीकी
मुझे दिल में बसाया जा रहा है/करम मुझ पर लुटाया जा रहा है/मैं अपने आप से बेमानी थी जो/मुझे मुझ से मिलाया जा रहा है…
– फरीदा शाहीन अंसारी
हुज़ुर-ए-हक में आकर खो गए हैं/कि ये पाकीज़ा सरापा हो गए हैं/बहुत बेचैन ये जब जागते थे/बड़े आराम से अब सो गए हैं…
– अब्दुल एजाज़ ‘बशर’
उसे जो खामियाँ उसकी गिनाए/वो डर जाता है ऐसे आईने से…
– यूसुफ़ सागर
हमें भी मयकदे तक खींच लाई/हमारे दोस्तों की रहनुमाई…
– इरफ़ानुद्दीन इरफ़ान
उठ रहा है यकीं मुहब्बत से/दुनिया जीती गई है ताकत से/कब तलक हम उदास रखते उसे/मौत पीछे पड़ी थी मुद्दत से…
– राही कमाल
यूँ तो दुनिया में सभी आके चले जाते हैं/वक़्त के साथ उन्हें, हम भी भूल जाते हैं/कुछ तो ऐसे बसे हैं जेहन में/जो दिन-रात हमें अब भी याद आते हैं…
– डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’
मेरे मुंसिफ़ मेरे वाइज़ तेरा फ़रमान झूठा है/तेरे किस्से तेरे दावे तेरा ऐलान झूठा है…
– जलज ताम्रकर
इक अजनबी को राह दिखाना पड़ा मुझे/फिर वापसी का याद न था रास्ता मुझे…
– सुशील यादव
जाके परदेश हमें भूल न जाना भाई/सैयां तो खूबै कमात है/डायन खाये जात है महंगाई…
– ओमप्रकाश जायसवाल
बनाओ रिश्ता जहाँ में ऐसा/न जिसमें कोई दरार आये/ज़बां पे न बात ऐसी लाओ/किसी के मन में गुबार आये…
– आलोक नारंग ‘नारंग’
तू मेरे सुर्ख गुलशन को हरा कर दे/ज़मीं के आसमां का राब्ता कर दे/कि ख्वाबों में न आने का तू वादा कर/मेरे तन्हाई के हक में दुआ कर दे…
– डॉ. संजय दानी
बीना दूध के मथे कभी माखन तैयार नहीं होता/सदजन का अपना ख़ुद का कोई घर-द्वार नहीं होता…
– सोनिया सोनी
ये ठिकाना तो नहीं है बस सफ़र है जिंदगी/काम की भरमार है/पर मुख्तसर है जिंदगी/इस जहाँ में कौन कहता है कि ये खुशियों भरी/मौत के लम्हात से भी तल्खतर है जिंदगी…
– नीलम जायसवाल
कभी उन से यूँ उल्फत का सनम इकरार मत करना/मुहब्बत की ये दौलत है/इसे बाज़ार मत करना/बहुत कम बच गए हैं/हौसले वाले ज़माने में/मिले जो कोई तुमको तो उसे लाचार मत करना…
– शुचि ‘भवि’
किसे चाहिए मनी दे दें/जिसे चाहिए शोहरत/मुझे इश्क में रवानी चाहिए/ज़ूस्तज़ू मेरे कासे में…
– शुभेंदु बागची
मेरी छोटी सी जिंदगी
[आत्मचिंतन]
– ब्रजेश मलिक
ये बिखरे-बिखरे तुम्हारे गेसू/निगाह क्यों कर झुकी-झुकी है/तुम्हारे चेहरे की आज रंगत/बताओ तो क्यूँ उड़ी- उड़ी है? न फन की दौलत, न शानो-शौकत, न कोई इज्जत, न कोई शोहरत/मगर वही जनत रानी लब पे हैं/बातें उनकी बड़ी-बड़ी है!
– शाद बिलासपुरी
पत्थरों के नगर में हैं हम/आदमी की ये दुनिया नहीं/अश्क रोने से क्या फ़ायदा/अपना ग़म कोई सुनता नहीं…
– मोहम्मद सलीम
बीती यादों के सहारे जिया करता हूँ/ऐ ज़माने, मैं क्या बुरा करता हूं…
– हाजी ताहिर निज़ाम दुर्गवी

👉 • सुस्थापित शायरा शुचि ‘भवि’

👉 • कवि लेखक उपन्यासकार डॉ. संजय दानी

👉 • ग़ज़लों के बादशाह हाजी रियाज़ खान गौहर

👉 • राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मलिक

👉 • ‘जनवादी लेखक संघ’ भिलाई-दुर्ग के अध्यक्ष एवं अंतर्राष्ट्रीय शायर मुमताज

👉 • प्रतिष्ठित शायरा फरीदा शाहीन अंसारी

👉 • सुपरिचित शायर शाद बिलासपुरी

👉 • जन-पक्षधर रचनाकार राकेश गुप्ता ‘रुसिया’

👉 • देश के चर्चित शायर यूसुफ़ सागर

👉 • श्रृंगार की मंचीय कवयित्री सोनिया सोनी

👉 • छंद के कवि ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

👉 • साहित्यविद् सुशील यादव

👉 • हास्य व्यंग्य के मंचीय कवि शमशीर सिवानी

👉 • बांग्ला-हिंदी के देशव्यापी लोकप्रिय कवि शुभेंदु बागची
👉 • छत्तीसगढ़ [धरसीवां] से पधारे शायर इरफ़ानुद्दीन इरफ़ान अपनी प्रस्तुति देते हुए…
स्वागत सत्र का संचालन डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ एवं कवि सम्मेलन का कुशल संचालन मो. अबू तारिक ने किया. कार्यक्रम संयोजक शौकत इकबाल थे.

👉 • आयोजन के संयोजक शौकत इकबाल ने कहा कि- ‘आईना-ए-अदब’ के तत्वावधान में ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर होते रहेंगे. उपस्थित सभी अतिथियों और रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया

👉 • मो. अबू तारिक ने शेरो-शायरी से बखूबी संचालन किया, जिससे श्रोता अंत तक बंधे रहे…
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एक शाम मरहूम शायरों के नाम कार्यक्रम में इन सभी को खिराज़-ए-अकीदत और श्रद्धा सुमन विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित किया गया-
मरहूम शायरों के नाम है- ‘आईना-ए-अदब’ [उर्दू-हिंदी संगम तंजीम] भिलाई-दुर्ग के संस्थापक जनाब डॉ. ज़फर अहमद सिद्दीकी हमेशा शायरों को हौसलाअफ़ज़ाई करते थे. ऐसे शख्सियत को सलाम है खिराज-ए-अकीदत है. इनके करीबी दोस्त शायर को आज इस कार्यक्रम में याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं-
शायर जनाब इनामुल्लाह शाह, युसुफ मछलीशहरी, ज़ख्मी बालोदेवी, पं. गया प्रसाद खुदी, हाजी बदरुल कुरैशी बद्र, बाबा शेख निज़ाम दुर्गवी, नवाब जफ़र, मीम हैरत, शेख निज़ामुद्दीन उर्फ निज़ाम ‘राही’, सुल्तान जावेद, नदीम कानपुरी, खुर्शीद नज़मी, अंजारूल बर्क, वहीद खान बिलासपुरी, युनुस मछलीशहरी, शौक जालंधरी, अशोक सिंघई, प्रदीप वर्मा, जय नारायण सोनी निर्झर, राम कैलाश तिवारी, रामबरन कोरी ‘कशिश’, डॉ. राधेश्याम सिंदूरिया, ओमप्रकाश शर्मा, कलुसिया जी, पं. नंद किशोर दुबे, डॉ. सुरेंद्र दुबे, मुकुंद कौशल, डॉ. त्रिलोकीनाथ क्षत्रिय, पं. दानेश्वर शर्मा, कृष्ण कांत ‘कशिश’, डॉ. विमल कुमार पाठक, हरिशंकर उजाला, डॉ. विधुरानी खरे, शांति कम्बोज, डॉ. शीला शर्मा, आरसी मुदरियाल, एम एल वैद्य, अरुण कसार, जमुना प्रसाद कसार, मो. हसन ज़फ़र, रज़ा हैदरी, राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, निदा फ़ाजली, डॉ. बशीर बद्र, बी. कृष्णमूर्ति दीवाना, केबीआर शर्मा और पद्म विभूषण पंडवानी लोक गायिका डॉ. तीजन बाई.
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एक शाम मरहूम शायरों के नाम आयोजन की कुछ और प्रमुख सचित्र झलकियाँ-

👉 • ‘आईना-ए-अदब’ के अध्यक्ष हाजी रियाज़ खान गौहर का संस्था ने उनके अध्यक्षीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए सम्मानित किया

👉 • ‘कला परंपरा’ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख ने ‘कला परंपरा’ की प्रति डॉ. रौनक जमाल को सप्रेम भेंट करते हुए [बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ. डीपी देशमुख, डॉ. रौनक जमाल, शायर मुमताज और शौकत इकबाल

👉 • कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीलमचंद सांखला को ‘आईना-ए-अदब’ द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया

👉 • सभागार में उपस्थित रचनाकार

👉 • सभागार में उपस्थित रचनाकार

👉 [बाएँ से] शकील अहमद सिद्दीकी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ और ‘आरंभ’ के संस्थापक एवं आजीवन सदस्य ब्रजेश मलिक

👉 • ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि थे

👉 • सभागार में उपस्थित रचनाकार

👉 • सभागार में उपस्थित रचनाकार

👉 • पत्रकार-लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन का स्वागत करते हुए अतिथि
👉 • सुस्थापित शायर अब्दुस्सलाम कौसर द्वारा प्रस्तुत की गई शेर की बानगी…
👉 • कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च न्यायालय के पूर्व मजिस्ट्रेट नीलमचंद सांखला के उद्गार…
अंत में आभार प्रदर्शन कार्यक्रम के संयोजक शौकत इकबाल ने दिया.
[ • रिपोर्ट एवं चित्र संयोजन- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ और जाविद हसन ‘भाईजान’ ]
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