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- हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग : कुलपति- प्रो. संजय तिवारी और कुलसचिव- भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर गंभीर आरोप : राज्यपाल ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की : समिति के अध्यक्ष होंगे- छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल एवं राज्यपाल के सचिव- डॉ. सीआर प्रसन्ना, उप सचिव- निधि साहू सदस्य और अवर सचिव- अनुभव शर्मा संयोजक होंगे
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग : कुलपति- प्रो. संजय तिवारी और कुलसचिव- भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर गंभीर आरोप : राज्यपाल ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की : समिति के अध्यक्ष होंगे- छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल एवं राज्यपाल के सचिव- डॉ. सीआर प्रसन्ना, उप सचिव- निधि साहू सदस्य और अवर सचिव- अनुभव शर्मा संयोजक होंगे

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हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी के खिलाफ वित्तीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमन डेका द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति करेगी. राज्यपाल द्वारा गठित समिति को 30 दिन में रिपोर्ट को सौंपनी होगी. आरोप है कि 14 मार्च को कुलपति ने उत्तरपुस्तिका की खरीदी संबंधी पत्र जारी कर पिछली बार खराब गुणवत्ता के कागज से हुई परेशानी का हवाला देते हुए ‘श्रीराम प्रिंटर्स’ पर नियमानुसार विचार करने की अनुशंसा की थी. मार्च, 2026 में 12 लाख उत्तरपुस्तिकाओं की खरीदी के लिए निविदा निकाली गई, लेकिन सबसे कम दर देने वाली शासकीय संस्था ‘संवाद’ को दरकिनार कर एक निजी फर्म की अनुशंसा की गई. बाद में उसी फर्म को 40 लाख से अधिक का काम दे दिया गया. एमबीए, एमसीए और पीजीडीबीएम सहित 8 नए पाठ्यक्रमों के लिए एआईसीटीई और आरसीआई से निरीक्षण कराया गया, जबकि शासन से पहले अनुमति नहीं ली गई. एक ही विभागीय संस्था को अलग स्वरूप में प्रस्तुत कर मान्यता लेने के प्रयास का भी आरोप है. बिना विधिवत निविदा प्रक्रिया अप नाए मौखिक निर्देश पर 40 लाख की 380 पुस्तकें खरीद ली गई. 5 विषयों के लिए 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति तब कर दी गई, जब संबंधित विभाग शुरू नहीं हुए थे और विद्यार्थियों का प्रवेश भी नहीं हुआ था. यह भी आरोप है कि कुलपति डॉ. संजय तिवारी बड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को कार्यपरिषद् की मंजूरी के लिए नहीं रखते.

👉 • भूपेंद्र कुमार कुलदीप
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर आरोप है कि-
उन्होंने एक दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी शुभांगी मराठे से अपने घर पर खाना बनवाया और घरेलू काम कराया. विश्वविद्यालय में पीड़िता महिला कर्मचारी को कलेक्टर दर से हर महीने करीब 11,505.00 रुपए वेतन मिलता है. महिला का आरोप है कि वेतन खाते में आते ही एक से तीन दिन के भीतर कुलसचिव द्वारा दबाव बनाकर फोन-पे के जरिए करीब 84 फीसदी हिस्सा कुलदीप के बेटे उदय प्रताप कुलदीप के बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिया जाता था. बैंक स्टेट्मेंट और फोन-पे के 35 पन्नों के ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की जांच से पता चला कि फरवरी 2025 से जुलाई 2026 तक 17 महीने में महिला को कुल- 1,77,137.00 रूपए वेतन मिला, जिसमें से कुल- 1,49,384.00 रूपए उदय प्रताप कुलदीप के खाते में ट्रांसफर हुई. तीन सदस्यीय जांच समिति में डॉ. नीलू श्रीवास्तव, ममता अवस्थी और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी सिंह थे.
विश्वविद्यालय की जांच समिति ने आरोपों की पुष्टि की है. प्रभारी कुल सचिव ने दुर्ग रेंज के डीआईजी को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया. पीड़ित शुभांगी मराठे दुर्ग के राजीव गाँधी नगर में निवासरत है. महिला, विश्वविद्यालय में अर्धकुशल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं. समिति ने इसे सुनियोजित तरीका बताते हुए कुलसचिव के खिलाफ कारवाई, अवैध राशि की वसूली और पीड़िता को सुरक्षा देने की सिफ़ारिश की है. इसके बाद मोहन नगर थाना पुलिस बयान और उसकी मूल हस्तलिखित शिकायत मांगी है.
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सोमवार [03 अगस्त] को कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को गिरफ्तार किया और फिर मुचलके पर रिहा कर दिया गया. इनके खिलाफ बीएनएस की धारा 316 (4) के तहत एफआईआर दर्ज हुई है.

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