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‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ छत्तीसगढ़ जिला भिलाई-दुर्ग इकाई के तत्वावधान में तीसरी मासिक काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई : विश्व कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का स्मरण किया गया एवं पद्म विभूषण पंडवानी लोक गायिका डॉ. तीजन बाई को ‘संस्थान’ द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई

👉 [नीचे बैठे हुए बाएँ से] • डॉ. संध्या श्रीवास्तव, सोनिया नायडू घोष, चंचल साहू, मंजू गुप्ता 👉[उपर खड़े हुए बाएँ से] • टीएन कुशवाहा ‘अंजन’, एनएल मौर्य ‘प्रीतम’, प्रदीप भट्टाचार्य, ओमप्रकाश जायसवाल, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’, शिवचरण दास गोयल, राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ और वीरेंद्र कुमार गुप्ता
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ छत्तीसगढ़ की जिला भिलाई-दुर्ग इकाई के तत्वावधान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त विश्वकवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए पावस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. ‘समरस’ संस्थान की यह तीसरी मासिक काव्य गोष्ठी थी.
कार्यक्रम की अध्यक्षता ‘समरस संस्थान’ के प्रांतीय उपाध्यक्ष हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’ ने किया. इस अवसर पर उपस्थित हुए- राजकुमार भल्ला ‘आर्य’, प्रदीप भट्टाचार्य, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’, डॉ. संध्या श्रीवास्तव, सोनिया नायडू घोष, शिवचरण दास गोयल, एनएल मौर्य ‘प्रीतम’, त्रिलोकिनाथ कुशवाहा ‘अंजन’, ओमप्रकाश जायसवाल, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, मंजू गुप्ता और चंचल साहू.

प्रारंभ में सरस्वती वंदना डॉ. संध्या श्रीवास्तव की मधुर वाणी से शुरू किया गया. ‘समरस’ के जिला अध्यक्ष राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ ने संस्थान के उद्देश्य एवं प्रतिवेदन पर प्रकाश डाला. कुशल संचालन एनएल मौर्य ‘प्रीतम’ ने किया और आभार व्यक्त प्रदीप भट्टाचार्य ने दिया.

👉 • डॉ. संध्या श्रीवास्तव ने स-स्वर सरस्वती वंदना का पाठ किया…
पावस काव्य गोष्ठी के पूर्व नोबेल पुरस्कार प्राप्त विश्वकवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर एवं विश्व प्रसिद्ध कथाकार मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती का स्मरण किया गया. दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक अवदानों को याद किया गया.

👉 • कवयित्री सोनिया नायडू घोष रवींद्रनाथ ठाकुर की पहली लिखी रचना का पाठ किया…
सोनिया नायडू घोष ने रवींद्रनाथ ठाकुर की पहली लिखी रचना का स-स्वर पाठ करके सबका दिल मनमोह लिया.

👉 • ‘समरस’ संस्थान के प्रांतीय उपाध्यक्ष हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि-
‘कथा सम्राट प्रेमचंद ने सामाजिक और सद्भाव का संदेश दिया. उन्हें कोई नोबेल, ज्ञानपीठ, भारत रत्न नहीं मिला, मगर आज भी विश्व में उन्हें याद किया जाता है. सौ साल बाद भी प्रेमचंद की रचनाएं भाषा शिल्प की दृष्टि से प्रासंगिक है. प्रेमचंद का साहित्य आम आदमी के समझ का साहित्य है’

प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष एवं ‘समरस’ जिला भिलाई-दुर्ग इकाई के सचिव प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि-
‘साहित्य जल्दबाज़ी की जगह नहीं, धीरज का मुकाम होता है. हम जो लिख रहे हैं, वो आने वाली पीढ़ी के लिए धरोहर है’
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• पढ़ी गई कविताओं के कुछ प्रमुख लाइन-

👉 [बाएँ से] • टीएन कुशवाहा ‘अंजन’, ओमप्रकाश जायसवाल, शिवचरण दास गोयल और वीरेंद्र कुमार गुप्ता
इंद्रधनुष का ताज पहनकर/आ जाता है पावस का मौसम/झूम-झूम कर उमड़-घुमड़ कर/गीत मधुरतम गाता मौसम/मतवाले झंझा-झकोरे संग/नेह बरसाने आता है मौसम/इंद्रधनुष का ताज पहनकर…
– डॉ. संध्या श्रीवास्तव
तुम बिन ये सावन भी/बिन मौसम बरसात लगे/सुनी-सुनी है मेरी आंगन/ओ मेरे साजन/कंगना, चूड़ी, बिंदी, झुमका/तेरे बिन हर रौनक बुझी-बुझी सी लगे…
– चंचल साहू
यूँ पकड़े रहना/तुम हाथ मेरा/मैं लड़खड़ाती बहुत हूं/खुद ही पूछ लेना हाल मेरा/मैं छुपाती बहुत हूं/पास आ जाना खुद ही मेरे/मैं शर्माती बहुत हूं/भीतर समाएं दर्द की दुनिया/मैं मुस्कुराती बहुत हूं…
– वीरेंद्र कुमार गुप्ता

👉 [बाएँ से] • वीरेंद्र कुमार गुप्ता, मंजू गुप्ता और चंचल साहू
कल पूछा बीबी ने/कविता कैसे लिख लेते हो/ज्ञानी तो तुम दिखते नहीं/सीदे-सादे लगते हो/देख अत्याचार और बलात्कार/आग सी दिल में लग जाती है/जब हाल देखता हूं चोटकरारी/कलम हाथ में आ जाती है/दिल के भाव उबलते हैं/और आप कविता बन जाती है…
– शिवचरण दास गोयल
नेताओं के हृदय की गति न जाने कोय/बात एकता की करे/बीज फूट का बोय…
– ओमप्रकाश जायसवाल
तीरा-तीरा हुआ आसमां है/निकला सूरज तो फिर वो कहाँ है/झूठे हैं महज/करते जो फिकरें/झूठा होता जो उनका बयां है/उसको दरिया में आओ डुबों दें/करता वह राहबर जो धुँआ है…
– टीएन कुशवाहा ‘अंजन’

👉 • ‘समरस’ जिला भिलाई-दुर्ग इकाई के अध्यक्ष रचना का पाठ करते हुए…

👉 • कवि शिवचरण दास गोयल ने हास्य व्यंग्य कविता का पाठ किया…
छोटा सा घर था वो हमारा/लगाये थे पौधे वहाँ/लगता था सुंदर घर जहाँ/हरा-भरा घर था हमारा…
– राजकुमार भल्ला ‘आर्य’
जख्म दिलों का अब बर्दास्त होता नहीं/दर्द इतना है के अब सहन होता नहीं…
सबसे बढ़कर इस जीवन में/हमने तुम्हें चाहा है/सबको अपना समझा/तुमने हमको माना पराया है…
– सोनिया नायडू घोष
सारा जग डूब जाएं/ऐसा साहित्य सागर बहाएं/स्वयं पारस बने और सबको स्वर्ण बनाएं…
– एनएल मौर्य ‘प्रीतम’
गर सुखी जीवन चाहो तो/बात माना करो, सभी लुगाई की/झूठ नहीं कहता/जब भी करता बात सभी की भलाई…
– हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
प्रश्न ऐसा है नहीं जिसका कि कोई हल न हो?/क्या चलेगा वह भला जिसमें कि आत्मबल न हो?/एक दिन तट से लिपट कर यूँ लहर कहती गई/जिंदगी ऐसी भी क्या, जिसमें कोई हलचल न हो?
– प्रदीप भट्टाचार्य

काव्य गोष्ठी के अंत में प्रख्यात पंडवानी लोक गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को ‘समरस संस्थान’ द्वारा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई. 🕉️ शांति
[ • रिपोर्ट एवं फोटो संयोजन- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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