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रंगतरंग- 2026 : रक्षाबंधन पर भिलाई के कला-साहित्य पुरोधाओं को स्मृति नमन एवं देश के विभिन्न प्रांतों से आए नाट्य कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां

👉 • ‘रंगतरंग’ में गूंजा रंगमंच, तीन नाटकों ने बांधा समां : 29 अगस्त को दो नाटकों की प्रस्तुति होगी
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
भिलाई [28 अगस्त, 2026] रक्षाबंधन के पावन अवसर पर रंग तरंग-2026 में शुक्रवार की शाम भिलाई रंगमंचीय विविधता के रंगों से सराबोर रहा। सायं 6 बजे से देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे नाट्य दलों ने बैक-टू-बैक तीन नाटकों का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को देर शाम तक बांधे रखा। अलग-अलग प्रदेशों की भाषा, लोक-संवेदना, सामाजिक सरोकार और रंगशैली ने महात्मा गांधी कला मंदिर,सिविक सेंटर, भिलाई के मंच को राष्ट्रीय रंगमंच का जीवंत स्वरूप प्रदान किया।इसके पूर्व 26 अगस्त को रायपुर और राजनांदगांव की दो संस्थाओं ने प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुतियों के साथ एक मोनो एक्टिंग की प्रस्तुति दी।


नाटकों की प्रस्तुतियों में कलाकारों के सशक्त अभिनय, संवाद अदायगी, मंच-सज्जा और निर्देशन की दर्शकों ने जमकर सराहना की। प्रत्येक प्रस्तुति ने अपनी अलग कथावस्तु और रंगभाषा के माध्यम से दर्शकों को प्रभावित किया तथा तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साहवर्धन हुआ।
इस अवसर पर ‘स्मृति नमन’ के अंतर्गत भिलाई इस्पात संयंत्र के स्थापना काल (1960-70 दशक) में कला, साहित्य और रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिवंगत पुरोधाओं को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
आयोजकों ने कहा कि भिलाई की सांस्कृतिक यात्रा को समृद्ध करने वाले इन पुरोधाओं की स्मृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रंग तरंग-2026 का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। रक्षाबंधन के दिन आयोजित यह स्मरण समारोह रिश्तों की आत्मीयता के साथ कला की उस विरासत से जुड़ने का अवसर बना, जिसे भिलाई के पुरोधा कलाकारों ने अपने समर्पण से सींचा था।
रंग तरंग-2026 की परिकल्पना कला-साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ (कवच) द्वारा की गई है। आयोजन रवींद्र निकेतन, कालीबाड़ी, हुडको, भिलाई तथा गीता आर्ट्स, एक्ट एंड नृत्य एसोसिएशन (गाना) द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन में सेल, भिलाई इस्पात संयंत्र, भिलाई का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है।

महात्मा गांधी कला मंदिर में आयोजित इस शाम ने यह संदेश भी दिया कि भिलाई की पहचान केवल इस्पात नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि कला, साहित्य और रंगमंच की समृद्ध परंपरा वाली सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी है।आगामी कल याने कि 29 अगस्त को दो नाटकों सह मोनो एक्टिंग की प्रस्तुति होगी।
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