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स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला का आयोजन- ‘परंपरा भी, प्रकृति भी’

👉 • कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने प्राकृतिक मिट्टी एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का उपयोग करते हुए गणेश प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया सीखी और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया

👉 • महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने ‘ग्रीन गणेश-स्वच्छ पर्यावरण’ का संदेश देते हुए पर्यावरण-अनुकूल गणेश उत्सव मनाने का संकल्प लिया
• छत्तीसगढ़ आसपास
• दुर्ग-भिलाई
भिलाई-दुर्ग [14 सितम्बर, 2026] : स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती महाविद्यालय, हुडको, में विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्सवों के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से “इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला” का आयोजन कला संकाय, वाणिज्य विभाग, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।कार्यशाला में विद्यार्थियों को बी.एड. तृतीय सेमेस्टर के श्री डिकेश चंद्राकर एवं बीए तृतीय सेमेस्टर फरहद कामरान खान ने इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने की विधि का प्रशिक्षण दिया।

👉 • महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है और विद्यार्थियों को इसमें पहल करना चाहिए…
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को प्राकृतिक एवं जैव-अवक्रमणीय सामग्री से गणेश प्रतिमा निर्माण की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना तथा पारंपरिक उत्सवों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ना था। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने प्राकृतिक मिट्टी एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का उपयोग करते हुए गणेश प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया सीखी और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।इसी उद्देश्य से प्राकृतिक मिट्टी से गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया गया तथा प्रतिमाओं में बीज भी डाले गए। विसर्जन के पश्चात मिट्टी में मौजूद बीजों से पौधे उगेंगे जो हरियाली और खुशहाली का संदेश देंगे।

👉 • डॉ. दीपक शर्मा और डॉ. मोनिशा शर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है…
विद्यार्थियों ने प्लास्टर ऑफ पेरिस एवं प्रदूषणकारी सामग्रियों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया गणेश प्रतिमाओं को आकर्षक एवं पारंपरिक स्वरूप प्रदान करने के लिए हल्दी, चावल, धान, फूल-पत्तियां, विभिन्न दालें, सिंदूर एवं चंदन जैसी प्राकृतिक एवं आसानी से उपलब्ध सामग्री का रचनात्मक उपयोग किया। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि आस्था और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर भी उत्सव को सुंदर एवं सार्थक बनाया जा सकता है। जल स्रोतों के संरक्षण तथा स्वच्छ एवं हरित वातावरण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। विद्यार्थियों ने “ग्रीन गणेश – स्वच्छ पर्यावरण” का संदेश देते हुए पर्यावरण-अनुकूल गणेश उत्सव मनाने का संकल्प लिया।
डॉ. दीपक शर्मा, एवं डॉ मोनिशा शर्मा निदेशक, श्री शंकराचार्य शैक्षणिक परिसर हुडको ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमारी आस्था तभी सार्थक है, जब उसके साथ प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना भी जुड़ी हो।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी इस संदेश को अपने परिवार एवं समाज तक पहुँचाकर हरित, स्वच्छ एवं प्रदूषण-मुक्त उत्सव की दिशा में सकारात्मक योगदान देंगे।
प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है और विद्यार्थियों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा निर्माण जैसी गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में रचनात्मकता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि त्योहार हमारी संस्कृति और आस्था के प्रतीक हैं, इसलिए इन्हें प्रकृति के संरक्षण के साथ मनाना चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों को अपनाने तथा समाज में हरित एवं प्रदूषण-मुक्त उत्सव का संदेश प्रसारित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुनीता वर्मा, विभागाध्यक्ष, कला संकाय; डॉ. शमा ए. बेग, विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी विभाग एवं डॉ शर्मिला शामल विभागाध्यक्ष वाणिज्य द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्राकृतिक एवं जैव-अवक्रमणीय सामग्रियों का उपयोग करने तथा त्योहारों को पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि “हमारी आस्था और हमारी प्रकृति दोनों का सम्मान होना चाहिए। छोटे-छोटे पर्यावरण-अनुकूल प्रयास मिलकर स्वच्छ एवं हरित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।”
श्रीमती खुशबू पाठक , विभागाध्यक्ष प्रबंधन ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा निर्माण केवल एक रचनात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।
कार्यशाला का संदेश रहा—
“श्रद्धा वही, उत्सव वही—बस प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी नई।”
“मिट्टी का गणेश बनाएँ, पर्यावरण को बचाएँ।”
स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती महाविद्यालय विद्यार्थियों को ऐसे रचनात्मक एवं पर्यावरण-संवेदनशील कार्यक्रमों के माध्यम से हरित, स्वच्छ एवं सतत भविष्य की दिशा में निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. मंजू कनौजिया, सह प्राध्यापक, शिक्षा विभाग; सहायक प्राध्यापक वाणिज्य श्री अमरजीत; इंद्राणी दास, सहायक प्राध्यापक, प्रबंधन संकाय एवं ज्योति मिश्रा सहायक प्राध्यापक कला संकायने विशेष सहयोग प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा निर्माण की गतिविधियों में मार्गदर्शन प्रदान किया तथा कार्यशाला की व्यवस्थाओं एवं गतिविधियों के सुचारु संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।
इको फ्रेंडली गणेश मूर्तिकला वर्कशॉप ने विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ “परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण” का प्रभावी संदेश दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों का उत्साह एवं सहभागिता उल्लेखनीय रही।


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