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‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत जिला-दुर्ग इकाई : हिंदी पखवाड़ा के उपलक्ष्य पर काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई

👉 [बाएँ से] • नीलम जायसवाल, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’, ब्रजेश मल्लिक, प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ. बीना सिंह ‘रागी’, एनएल मौर्य ‘प्रीतम’, शिवचरण दास गोयल, ओमप्रकाश जायसवाल, राजकुमार भल्ला ‘आर्य’, सोनिया नायडू घोष, डॉ. अशोक कुमार सिंह और रजत कुमार घोष
• छत्तीसगढ़ आसपास
• दुर्ग-भिलाई
दुर्ग-भिलाई [30 सितम्बर, 2026] : ‘समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत’ छत्तीसगढ़ जिला-दुर्ग इकाई के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा के उपलक्ष्य पर काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई.
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता ‘समरस’ के प्रांतीय उपाध्यक्ष हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’ और मुख्य अतिथि राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक थे.
काव्य गोष्ठी का कुशल संचालन ‘साहित्य सृजन परिषद्’ के अध्यक्ष एवं ‘समरस’ के कोषाध्यक्ष एनएल मौर्य ‘प्रीतम’ ने किया. स्वागत उद्बोधन ‘समरस’ के अध्यक्ष राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ और आभार व्यक्त प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष एवं ‘समरस’ के जिला-दुर्ग इकाई के सचिव प्रदीप भट्टाचार्य ने दिया.

इस अवसर पर उपस्थित रचनाकारों ने श्रृंगार रस, वीररस एवं प्रगतिवादी कविताओं का पाठ किया. कुछ कविताओं में प्रगतिशील परंपरा की समकालीन कविता लगी. प्रारंभ में सोनिया नायडू घोष द्वारा गणेश वंदना एवं डॉ. बीना सिंह ‘रागी’ ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी.
‘समरस’ के जिला-दुर्ग इकाई के अध्यक्ष कवि राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि-
‘समरस’ एक राष्ट्रीय पंजीकृत संस्था है, इसका हेड ऑफिस गाँधी नगर [गुजरात] में है. ‘समरस’ के संस्थापक डॉ. मुकेश व्यास ‘स्नेहिल’, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन ‘चंद्रिका’, राष्ट्रीय महामंत्री आनंद कुमार जैन ‘अकेला’, राष्ट्रीय सचिव रजनी शर्मा एवं राष्ट्रीय मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार सिंघल और छत्तीसगढ़ राज्य अध्यक्ष अखिलेश्वर मिश्रा हैं. संस्था का उद्देश्य है- “साहित्य से संवेदना, संवेदना से समरसता- समरसता से सृजन”
राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ ने कहा कि कुछ माह पूर्व इस संस्था का गठन प्रांतीय उपाध्यक्ष हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’ के दिशा-निर्देश में जिला-दुर्ग इकाई का गठन किया गया. कार्यकारिणी सदस्य हैं- राजकुमार भल्ला ‘आर्य’ [अध्यक्ष] शिवचरण दास गोयल [कार्यकारी अध्यक्ष] रचना पांडेय [उपाध्यक्षा] प्रदीप भट्टाचार्य [सचिव] नामित क्षत्रिय [मीडिया प्रभारी] अजय निदान कनूरकर [प्रचार प्रसार प्रभारी] ओमप्रकाश जायसवाल [संगठन सचिव] एनएल मौर्य ‘प्रीतम’ [कोषाध्यक्ष] सोनिया नायडू घोष [महिला प्रमुख] कार्यकारी सदस्य- शुचि ‘भवि’, सुरभि ताम्रकर ‘शावि’ और ए. विजय लक्ष्मी एवं संरक्षक- संध्या श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, नितिन गोस्वामी.
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कुछ प्रमुख रचनाएं, जो पढ़ी गई-

जब तक नभ में उड़ती है, चंद्रशान दिखाती है/नीले-नीले आसमान को गले लगाती है/पूरी दुनिया आँख उठाए हमें निहारती है/इक्कीसवीं उड़ान पर खुशियाँ कर रही है/जीवन एक पतंग है/इसे उड़ते ही रहना है/लाख थपेड़े खाकर भी आसमान में डटे रहना है…
– शिवचरण दास गोयल
सूरज बिन जग अंधकार है/तेरे बिन जीना यहाँ बेकार है/प्यार दुनिया का आधार है/बाँट ले तू इसे यही संसार है…
– राजकुमार भल्ला ‘आर्य’
पैसे और अधिक पैसे/पाने की अभिलाषा में ‘प्रीतम’/मानवता के शिखर से फिसल/ मानव कहाँ तक और गिरेगा…
– एनएल मौर्य ‘प्रीतम’
👉 • डॉ. बीना सिंह ‘रागी’ कविता पाठ करती हुई…
माँ बाप की सेवा आज नहीं कर पाए तो/कल उन्हें तुम जब तशकिट में पावोगे/गर ए मरहूम हो गए तो जिंदगी भर/अपने तकदीर में पछतावोगे/उठ जाता है जब से माँ पिता का साया/जिंदगी भर के लिए दिल में चुभन होती है/झोली भर लो ‘रागी’ इनके दुआओं से अपनी/इनके कदमों में ही जन्नत की किरण होती है…
पीत वसना मन की वीणा/झंकृत करती मौन प्रहर/जैसे रुकमणि का ध्येय कृष्ण में वो ढूंढ रही थी अपना ही वर/सोलह वसंत की नूतन अभिलाषा, दृग में काजल की रेखा/पायल की ध्वनि में प्रतिध्वनित/अनकही सी विधि का लेखा…
– डॉ. बीना सिंह ‘रागी’
👉 • राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक पिता एवं परिवार पर मार्मिक कविताओं का पाठ किया
– ब्रजेश मल्लिक ने ‘मेरी छोटी सी जिंदगी’ शीर्षक से एक भावपूर्ण कविता का पाठ किया और एक बांग्ला कविता को पढ़ा.
जिंदगी की आपाधापी में/कब उम्र ढल गयी/पता ही नहीं चला/स्वप्न पूरा होने से पहले/जवानी निकल गयी/पता ही नहीं चला…
एक अयोध्या दिल में मेरे/किसी ने पावन धाम न देखा/युगों से सीता कहलाई/मुझमें किसी ने राम न देखा…
– नीलम जायसवाल
जब चुनाव हो मोल-तोल हो/मेल-जोल भी गोल-मोल हो/देशी कहीं विह्वस्की पिला रहे हैं रम/वंदेमातरम, वंदेमातरम…
– ओमप्रकाश जायसवाल
अब क्या कहूं और/क्या करूं?सोचता हूं जिस मां बाप ने/परेशानी और मेहनत से/बढ़ा किया/हमने उनके लिए/क्या किया/जब बूढ़े हो जाते हैं/उनका हम साथ क्यों/नहीं दे पाते हैं/सवाल का जवाब नहीं है/सभी बुजुर्ग कैसे और क्या/महसूस करते हैं/इसी बात को लेकर/कभी-कभी हम भी/डरते हैं/कैसे एक बंद कमरे में/असहाय जीवन जीने के लिए/हम छोड़ देते हैं/और अपनी दुनिया में/खुश रहते हैं/अब क्या कहूं और/क्या करूं? चाह कर भी कुछ लोग/मजबूर हो जाते हैं/रोजी और शोहरत के चक्कर में/बहुत दूर चले जाते हैं…
मिट्टी का ढांचा है प्यारे/मिट्टी में मिल जाएगा/कोई न साथ तेरे आया/और न कोई जाएगा/भजले श्री राम का नाम/जीवन पार लगाएगा/बोलो राम राम राम/जय सिया राम…
– हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
मेरे बाबा : इस जीवन में सबसे ज्यादा/मेरे बाबा मुझे चाहते हैं/आज भी हूँ मैं परियों की रानी/मेरे बाबा मुझे ये एहसास कराते हैं…
जी करता मेरा/तेरे साथ मैं चलूं/हाथों में लिए हाथ/मैं चल तुझे/छुने का हक तो नहीं है मुझे/एक चाह है मेरी/भर लूं तुमको बाँहों में…
– सोनिया नायडू घोष
अभी एक इम्तिहान बाकी है/दर्द की दास्तान बाकी है/वक्त मरहम बना/मगर फिर भी, जख्म का निशान बाकी है/इसलिए सर उठा के वो निकला/लोग समझे, कि शान बाकी है/झूठ की आंच में उबलता सच/अभी अंतिम उफान बाकी है…
– रजत कुमार घोष

👉 • प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य ने कम पंक्तियों में छोटी-छोटी कविताओं का पाठ किया
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कार्यक्रम की कुछ और सचित्र प्रमुख झलकियाँ-

👉 सामाजिक साहित्यिक चिंतक रजत कुमार घोष का सम्मान करते हुए [बाएँ से] • राजकुमार भल्ला ‘आर्य’, रजत कुमार घोष, प्रदीप भट्टाचार्य, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’ और ब्रजेश मल्लिक

👉 • रजत कुमार घोष की बेटी कवयित्री सोनिया नायडू घोष ने पिता रजत कुमार घोष का सम्मान किया और पिता पर एक मार्मिक कविता का पाठ भी किया.

👉 • ‘आरंभ’ द्वारा सोनिया नायडू घोष को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया…
[ • रिपोर्ट एवं फोटो संयोजन- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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