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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-135’ में बांग्ला लेखक वीरेंद्रनाथ सरकार की पुस्तक ‘पल्ली गाथा’ का विमोचन और शारदीय नवरात्र पर विशेष काव्यपाठ प्रतियोगिता

👉 • ‘पल्ली गाथा’ का विमोचन करते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
भिलाई [9 अक्टूबर, 2026] : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में 9 अक्टूबर को भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-135’ में शारदीय नवरात्र पर्व के उपलक्ष्य में काव्य पाठ, लघु कथा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रतियोगिता के निर्णायक समिति में ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती एवं ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार थे. प्रतियोगिता के काव्य पाठ में पं. वासुदेब भट्टाचार्य, जीवन चंद्र हालदार, पल्लव चटर्जी, वीरेंद्रनाथ सरकार और प्रदीप भट्टाचार्य [हिंदी] एवं लघु कथा में स्मृति दत्त, ब्रजेश मल्लिक, शुभेंदु बागची एवं प्रकाश चंद्र मण्डल [कविता, लघु कथा] शामिल हुए. आलोक कुमार चंदा ने राहुल शील लिखित कविता ‘आमार दुर्गा’ एवं ममता सरकार ने मल्लिका सेनगुप्ता की कविता ‘माँ दुर्गा’ का पाठ किया. प्रतियोगिता के दिशा-निर्देश [स्वरचित व मौलिक] को ध्यान में रखते हुए जजमेंट समिति ने इन रचनाओं को प्रतियोगिता में नहीं रखा. विजेताओं के नाम की घोषणा आगामी कार्यक्रम में किया जाएगा. इस अवसर पर बानी चक्रवर्ती ने ‘आमादेर मोनेर गोभिरे…’ और दुलाल समाद्दार ने ‘मातृ रूपेर संस्तृता…’ कविता का पाठ किया.
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प्रारंभ में आयोजन के संयोजक पल्लव चटर्जी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि- प्रति सप्ताह ‘अड्डा’ में विविधता एवं रोचकता लाने के लिए ऐसे परिवर्तन होने चाहिए, जिससे रचनाकारों के लेखन में टिविस्ट आएगा. माँ दुर्गा एवं नवरात्र के आगमन पर आज हमने माँ दुर्गा विषय को चुना. नवरात्र में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों में हम साहस, करुणा, धैर्य, ज्ञान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की शक्ति को देखते हैं. इसी संदर्भ में आज उपस्थित कवियों-लेखकों को रचना का पाठ करना है.


पं. वासुदेब भट्टाचार्य ने ‘आमार नव दुर्गा’/ पल्लव चटर्जी ने ‘मूर्तिकार’/ जीवन चंद्र हालदार ने ‘देवीर वॉहन’/ वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘शक्ति रूपी माँ’/ प्रदीप भट्टाचार्य ने माँ, क्या बन पाओगी? तुम हजार चौरासी की माँ?/ प्रकाश चंद्र मण्डल ने ‘शारद आकाशे’ [लघु कथा] एवं ‘श्रीश्री दुर्गा माँ’/ ब्रजेश मल्लिक ने ‘ग्राम बांग्ला मोहल्ला दुर्गा पूजा’ [लघु कथा]/ शुभेंदु बागची ने ‘अस्तित्व’ [लघु कथा] और स्मृति दत्त ने प्रतिवेदन ‘एकटु कोरे शब्दो लीज बोन…’ पढ़ा.

इस अवसर पर बांग्ला के प्रतिष्ठित लेखक-कवि वीरेंद्रनाथ सरकार की बांग्ला कथा संग्रह ‘पल्ली गाथा’ [Palli Gatha- A Bengali Story Book] का विमोचन उपस्थित बंगीय सदस्यों के कर कमलों द्वारा किया गया. कोलकाता के ‘ज्ञानोदा प्रकाशन’ से प्रकाशित पुस्तक ‘पल्ली गाथा’ के प्रकाशक विमल कुमार मोईती हैं.
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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव शुभेंदु बागची ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि-

आगामी 12 अक्टूबर को नेहरू नगर स्थित ‘स्वाद रेस्टोरेंट’ के सभागार में ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्यों के लिए एक साहित्यिक कार्यशाला एवं संवाद चर्चा का कार्यक्रम रखा गया है. इस वर्कशॉप में व्याख्यान देंगे- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती- ‘बांग्ला साहित्य के गद्य शैली में धारावाहिक परिवर्तन’.उप सभापति स्मृति दत्त- ‘कवि जीवानंद एवं कवि सुकांत के कविताओं का तुलनात्मक परिचर्चा’. ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार- ‘कविता का आंगिक विश्लेषण एवं साहित्य में नवरस का प्रयोग’ और बांग्ला की सुप्रसिद्ध अनुवादक मीता दास- ‘महाश्वेता देवी एवं नवारूण भट्टाचार्य का साहित्यिक विश्लेषण’. उपस्थित सदस्य अपनी-अपनी प्रतिनिधि रचना [बांग्ला] में पाठ करेंगे और प्रश्न-उत्तर [संवाद] सत्र भी रखा गया है.


👉 • 1955 में स्थापित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के संस्थापक स्व. शिबव्रत देवानजी

👉 अड्डा- 135 में उपस्थित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सक्रिय सदस्य. [बाएँ से]- प्रदीप भट्टाचार्य, सुबीर रॉय, ममता सरकार, बानी चक्रवर्ती, रतन सरकार, दुलाल समाद्दार, जीवन चंद्र हालदार, आलोक कुमार चंदा, वीरेंद्रनाथ सरकार, स्मृति दत्त, पल्लव चटर्जी, ब्रजेश मल्लिक, विष्णु ढाली, पं. वासुदेब भट्टाचार्य, प्रकाश चंद्र मण्डल और शुभेंदु बागची
अड्डा- 135 की अध्यक्षता बानी चक्रवर्ती और संचालन प्रकाश चंद्र मण्डल ने किया.
[ • रिपोर्ट एवं फोटो संयोजन- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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