कविता आसपास : सुधा वर्मा
3 years ago
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🌸 चिलचिलाती धूप
– सुधा वर्मा
[रायपुर, छत्तीसगढ़ ]
चिलचिलाती धूप
कितनी गर्मी का एहसास दिलाती ।
गाँव मे घूमते नहर तालाब।
धूप रह रह कर निहारती
कभी बरगद की छांव में
कभी नीम की छांव मे
कभी कुयें के पार मे
धूप अपनी गर्मी का
एहसास दिलाने की कोशिश में
पीछे पीछे भाग रही है।
आखिर हार ही जाती है।
इंसान हर छण बचने के
उपाय खोजता रहता।
गाँव में खुमरी ओढ़ कर
अब काली छतरी ओढ़ कर
गाँव शहर नाप रहा है।
चिलचिलाती धूप
इंतजार करती रहती है।
पर हर बार बदली आ जाती है
दोनों के बीच
एक दीवार खड़ी हो जाती है।
बदली, बारीश और घने बादल
रह रह कर पावस का
एहसास दिलाते रहते।
थक हार कर धूप ने
चिलचिलाना बंद कर दिया ।
मुस्कुराते हुये बादलो की
ओट में छुप गया।
पावस को आगे आने बोल
लौट गया दूसरी दिशा की ओर।
•संपर्क –
•94063 51566
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chhattisgarhaaspaas
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