विशेष : श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव
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लो फिर बदल गया कैलेंडर
– दीप्ति श्रीवास्तव
[ भिलाई, जिला- दुर्ग, छत्तीसगढ़ ]
लो फिर बदल गया कैलेंडर
वही धूप वही हवा
वही दिन की तपिश…..
उसी सुनहरी धूप में
चाय का प्याला लबो
आ थिरकते कहता
लो आ गया नया वर्ष
गुनगुनी ठंड से
रगो में बहता भीना अहसास
कुछ अच्छा कर
दुआ कमाने की तमन्ना
नये साल को खुशगवार
बनाने की दिली ख्वाहिश
चाय का घूंट जब अंदर जाता
इच्छा शक्ति को अद्म्य बनाता
खुद से करते नये कसमें वादे
नये साल पर निभाने को
यह क्या चार दिन बीते
आ गये पुराने रंग ढ़ंग में
न निभा पाये कसमें वादे
जैसे दिन बदलता
वैसे कैलेंडर बदलता
कड़क चाय इलायची वाली
या अदरक वाली
सबका रंग-रूप एक सा
पर स्वाद में निराली
क्यूं न हर दिन को
निराला बना खुशियों
की चाह बनाये।
•संपर्क-
•94062 41497
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chhattisgarhaaspaas
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