रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर विशेष – बलदाऊ राम साहू
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राममय हो जाओ

अवसान हो गया वनवास आज राम का
बन गया अवध में आवास आज राम का।
धमनियों में बहने फिर लगा है रक्त अब
झूम रहा भारत में दास आज राम का।
आह्लादित धरती, पुष्प गंध बिखेर रही
लौट आया फिर से विश्वास आज राम का।
कानों में कुंडल, गल मोतियों की माला
शोभित आभूषण है खास आज राम का।
श्याम वर्ण देह पर पीतवर्णी वस्त्र है
फब रहा है कैसा लिबास आज राम का।
अवध का कण-कण मानो रोमांचित है
देख लो मुख में, उल्लास आज राम का।
राममय हो जाओ चिंताएँ सब छोड़कर
बैठ आओ बन सखा, पास आज राम का।
[ दुर्ग छत्तीसगढ़ के बलदाऊ राम साहू प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार हैं. •संपर्क- 940 765 0458 ]
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chhattisgarhaaspaas
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