विश्व गौरैया दिवस पर विशेष : दिलशाद सैफी
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जब आई गौरैया
– दिलशाद सैफी
[ रायपुर : छत्तीसगढ़ ]

मेरे आंगन में जब आई गौरैया
भर -भर खुशियां लाई गौरैया
फुदक फुदक रही इधर से उधर
चू चू ची ची शोर मचाई गौरैया
पंख पीले,नारंगी तो कुछ भूरे
हम सबको बहुत भाई गौरैया
चांवल के दाने मुठ्ठी भर थे दिये
कुछ खाई कुछ बिखराई गौरैया
हरे घास के तिनके ला ला कर
सुंदर सा घोंसला बनाई गौरैया
छत-आंगन सारे सूने लगते थे
फिर से रौनक लौटाई गौरैया
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chhattisgarhaaspaas
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