मोदी सरकार के एक्शन से डरे मार्क जुकरबर्ग, Meta ने CSAM कंटेंट हटाया
Meta Remove CSAM Content: पीएम मोदी का फैसबुक से वीडियो हटाए जाने के बाद मोदी सरकार (Modi government) यानी भारत सरकार ने मेटा और मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) को आड़े हाथों लिया था। केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) को सेफ हार्बर बंद करने तक की चेतावनी दे दी थी। मार्क जुकरबर्ग के माफी के बाद मामला किसी तरह शांत हुआ था। मोदी सरकार के कड़े रूख के बाद Meta ने गैरकानूनी CSAM (Child Sexual Abuse Material) कंटेंट पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। Meta ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री यानी CSAM पर कार्रवाई की है।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गैरकानूनी सामग्री के मामले में सोशल मीडिया कंपनियों को ‘सेफ हार्बर’ की सुरक्षा नहीं मिल सकती। हालांकि किसी कंपनी ने कानून का उल्लंघन किया है या नहीं और उसे सेफ हार्बर मिलेगा या नहीं इसका अंतिम फैसला अदालत करेगी। सरकार ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बार-बार सामने आने वाले गैरकानूनी कंटेंट पर कार्रवाई कर रहे हैं।
दरअसल मोदी सरकार बाल यौन शोषण सामग्री के मामले पर काफी ज्यादा सख्त है। इसको लेकर कुछ कार्रवाई देखने को मिली है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून का उल्लंघन होने पर ‘सेफ हार्बर’ नहीं मिलेगा। वहीं मेटा का कहना है कि उसके ‘एल्गोरिदम’ और प्रणालियां कैसे काम करती हैं, इन सभी मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर चर्चा चल रही है। मामले की जांच की जा रही है, क्योंकि यह अन्य मैसेज ऐप से भी जुड़ा है।
सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान को लेकर दूसरे देश भी चिंतित
सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता केवल भारत में ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अन्य देशों में भी है। ऐसे नुकसान से निपटने की जिम्मेदारी सोशल प्लेटफॉर्म की ही है। एआई लेबलिंग को लेकर कानून स्पष्ट है कि एआई से तैयार सामग्री पर ‘लेबल’ लगाना अनिवार्य है और इसका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ध्यान भी रखना होगा।
PM मोदी का वीडियो हटाने के बाद मचा था बवाल
बता दें कि नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने कई मांगों को लेकर दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। युवाओं के गुस्से को देखते हुए को लेकर पेपर लीक कानून बनाने को लेकर पीएम मोदी ने वीडियो संदेश जारी किया था। प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए ये वीडियो संदेश सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्मस पर जारी किया था। वहीं वीडियो संदेश को फेसबुक से कुछ घंटे के लिए हटा दिया गया था। इसके बाद बवाल मच गया था। साथ ही पीएम मोदी के डिपपेक वीडियो वायरल हुए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने कंपनी के अधिकारियों को तलब भी किया था।
संसदीय समिति ने दी थी फाइनल वॉर्निंग
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो डिलीट करना लोकतंत्र पर सीधे हमले जैसा है। समिति ने मांग की है कि मार्क जुकरबर्ग इस मामले पर तुरंत माफी मांगें और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करें। साथ कहा कि ऐसा न करने पर सरकार फेसबुक का सेफ हार्बर क्लॉज खत्म कर सकती है। इससे प्लेटफॉर्म के अधिकारियों पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज हो सकेंगे। साथ ही समिति ने चेतावनी दी है कि गूगल, यूट्यूब, एक्स, फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे सभी प्लेटफॉर्म तीन दिनों के भीतर बाल यौन शोषण (Child Sexual Exploitative and Abuse Material) और महिलाओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को हटाएं, वरना सख्त कार्रवाई होगी।
मेटा ने प्लेटफॉर्म पर अवैध कंटेंट प्रमोट करने की बात मानी थी
संसदीय समिति की चेतावनी के चंद घंटे के अंदर मेटा भारत के सामने घुटनों के बल आ गया। इसके बाद मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने पीएम मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में भारत सरकार से माफी मांगी। इससे पहले मेटा के दिग्गज अधिकारी चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की थी। यह बैठक लगभग 45 मिनट तक चली, जिसके दौरान मेटा के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो को गलती से हटाए जाने के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया था। बैठक में Meta ने स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को प्रमोट करने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई। इस वजह से प्लेटफॉर्म पर अवैध कंटेंट भी प्रमोट हुआ। हालांकि, सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस तरह के कंटेंट की बात की गई।बैठक में सरकार ने Meta से CSAM, डीपफेक, वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात (Algorithmic Bias) और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर भी जवाब मांगा। सूत्रों ने कहा कि इन मुद्दों पर आगे भी Meta के अधिकारियों को फिर बुलाया जाएगा।
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