• Chhattisgarh
  • विशेष : बाबा साहेब, भारतीय संविधान और मौजूदा खतरे- बादल सरोज

विशेष : बाबा साहेब, भारतीय संविधान और मौजूदा खतरे- बादल सरोज

1 year ago
430

डॉ. अम्बेडकर संविधान निर्माता माने जाते हैं। निस्संदेह वे ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे और विराट बहुमत से चुने गए थे। संविधान में उनकी विजन – नजरिये – का महत्वपूर्ण योगदान है। किन्तु उन्हें यहीं तक सीमित रखना उनके वास्तविक रूप को छुपाने की साजिश का हिस्सा बनना होगा। गाँव-गाँव में डॉ. अम्बेडकर के पुतले खड़े कर दिए गए हैं, जिसमे उनके हाथ में संविधान की किताब पकड़ा दी गयी है। वह किताब, जिसके बारे में बाद के वर्षों में, खासकर मृत्यु के 3-4 वर्ष पहले से ही उन्होंने काफी कुछ कहना शुरू कर दिया था। असली अम्बेडकर जाति व्यवस्था का सबसे सुव्यवस्थित अध्ययन करने वाले व्यक्ति हैं। जाति शोषण के अंत — जातियों के विध्वंस की बात करने वाले ‘बाबा साहेब’ हैं। (प्रसंगवश ‘बाबा साहब’ का यह संबोधन उन्हें कामरेड आर बी मोरे ने दिया था। कामरेड मोरे कम्युनिस्ट थे, बाद में सीपीएम के नेता रहे, विधायक रहे। वे 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा के लखनऊ स्थापना सम्मेलन में भी शामिल रहे।) बाबा साहब का अनोखा योगदान यह है कि उन्होंने जाति और वर्ण के द्वैत की अद्वैतता – मतलब इनके रूप में अलग अलग होने और उसी के साथ सार में एक-सा होने – को समझा और दोनों ही तरह के शोषण के खिलाफ लड़ाई को ही सामाजिक मुक्ति की गारंटी माना।

डॉ. अम्बेडकर ने अपनी पहली राजनीतिक पार्टी 15 अगस्त 1936 को बनाई थी, नाम रखा इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी। इसका झंडा लाल था। इसके घोषणापत्र में उन्होंने साफ़-साफ शब्दों में कहा था कि “भारतीय जनता की बेडिय़ों को तोड़ने का काम तभी संभव होगा, जब आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की असमानता और गुलामी के खिलाफ एक साथ लड़ा जाये।” एक फेबियन होने के नाते भले वे वर्ग की क्लासिकल आधुनिक परिभाषा की संगति में नहीं थे। मगर भारत में आर्थिक और सामाजिक शोषण के शिकार तबकों की वर्गीय बनावट के प्रति सजग थे। मोटे तौर पर फेबियनवाद एक तरह की ऐसी विचारधारा रही, जो बिना क्रान्ति के समाजवाद, बराबरी और लोकतंत्र लाना चाहती थी। उसकी भाषा मार्क्सवाद की तरह नहीं थी, इसलिए उन्हें समझने के लिए मार्क्सिस्ट जॉर्गन की वर्तनी कारगर नहीं होगी। मगर बाबा साहब ने भारतीय समाज के मामले में वर्ण और वर्ग की पारस्परिक पूरकता – ओवरलेपिंग — समझी थी। इसी आधार पर उन्होंने अपनी सक्रियता के दायरे तय किये। यही वजह है कि महाड़ के सत्याग्रह, चावदार तालाब के पानी की लड़ाई लड़ने के साथ, मनु की किताब जलाने और गांधी जी से तीखी बहस करने के बीच वे ट्रेड यूनियन बनाने और मजदूरों की लड़ाई लड़ने का भी समय निकाल लेते थे।

बाबा साहब ने जाति का वर्ग ही नहीं जेंडर भी पहचाना

उनका सबसे अधिक योगदान इस देश की महिलाओं के अधिकारों के लिये उनका संघर्ष था। बाबा साहब ने जाति का क्लास ही नहीं पहचाना था – उन्होंने जाति का जेंडर भी ढूंढा था। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अपनी थीसिस में उन्होंने लिखा कि “जाति की मुख्य विशेषता जाति के अंदर ही शादी करना है। कोई स्त्री अपनी इच्छा से शादी नहीं कर सकती। इसके लिए प्रेम पर भी रोक लगा दी गयी। बाल विवाह की कुरीति और विधवाओं के साथ सलूक तथा विधवा विवाह पर रोक इसी के लिए हैं।”
जाति शोषण की दीर्घायुता के जेंडर की पहचान उनका एक बड़ा मौलिक काम था। भारत के इस पहले कानून मंत्री ने महिलाओं के हक़ों के प्रति अपने समर्पण की वजह से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जब लोक सभा में हिंदू कोड बिल के खिलाफ तमाम जनसंघी और तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल सहित तथाकथित प्रगतिशील कांग्रेस के नेता भी खडे हो गये।

भारत के संविधान की मौलिक विशिष्टता

भारत का संविधान कई मामलो में अनोखी किताब है। भारत में दर्शन, साहित्य की बहुत विपुल सम्पदा मौजूद है। आदिवासी भाषाओं को छोड़ दें, तो दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल है, उसका संगम साहित्य है। संस्कृत/ प्राकृत जैसी प्राचीन और नयी सैकड़ों भाषाएँ, हजारों बोलियां हैं। इनमे खूब समृद्ध साहित्य है, किन्तु इस 5000 वर्ष के इतिहास में संविधान वह पहली किताब है, जो हर तरह के श्रेणीक्रम, जाति, वर्ण, लिंग, भाषा, क्षेत्र के आधार पर ऊंच-नीच, गैर-बराबरी को प्रतिबंधित करती है, उसे दंडनीय अपराध बनाती है। उन असमानताओं को आपराधिक और अमानवीय बताती है, जिन्हे कुछ शातिर धूर्तों ने धर्म का बाना पहना दिया था, भगवानो की सील-मोहर-ठप्पा लगवाकर बाध्यकारी बना दिया था।

यह कोई मामूली काम नहीं था — यह बहुत बड़ा काम था। इसने भारतीय समाज — सोये, ठहरे हुए, जड़ संबंधों में जकड़े समाज के रूपान्तरण की सीढ़ियों का सदियों से बंद दरवाजा खोला था। जैसे एक ही बात, महिलाओं को मतदान देने की ले लें। संविधान में यह अधिकार उस समय दिया गया, जब अनेक कथित विकसित देशों में भी यह नहीं था। जैसे स्वयं में और समाज में वैज्ञानिक रुझान और चेतना विकसित करने का काम धारा 51 ए (एच) के रूप में नागरिक के बुनियादी कर्तव्यों — फंडामेंटल ड्यूटी — में शामिल किया गया। जैसे : आमदनियों में 1/10 से अधिक अनुपात न होने, संपत्ति और दौलत का केन्द्रीयकरण न होने देने वाली नीतियां बनाने के निर्देश सरकारों पर आयद किये गए।

आज यह सब उलटा जा रहा है

मौजूदा समय विडम्बना का समय है। बिना किसी अतिशयोक्ति के कहा जाए, तो देश और समाज एक ऐसे वर्तमान से गुजर रहा है, जिसमें प्राचीन और ताजे इतिहास में , अंग्रेजो की गुलामी से आजादी के लिए लड़ते-लड़ते जो भी सकारात्मक उपलब्धि हासिल की गयी थी, वह दांव पर है। भविष्य में समाज को धकेल कर उसे मध्ययुग में पहुंचाने पर आमादा अन्धकार के पुजारी पूरे उरूज़ पर हैं। संविधान और संसदीय लोकतंत्र निशाने पर है। कल्याणकारी राज्य की अवधारणा उलटी जा रही है। मनुष्यों के बीच समानता और हर तरह की गैर-बराबरी को मिटा देने की संविधान प्रदत्त समझदारी को अपराध, यहां तक कि राष्ट्रद्रोह बताया जा रहा है। एक अम्बानी के 90 करोड़, एक अडानी की 112 करोड़ प्रति घंटे कमाई देख स्पष्ट है कि संपत्ति के केन्द्रीकरण की तो कोई सीमा ही नहीं बची। कमाई और लूट समानार्थी शब्द बन गए हैं। लोकतंत्र के चारों खम्भे डगमग कर रहे हैं। न्यायपालिका तक अछूती नहीं रही है। इधर बाकी सब को अधीनस्थ दास बनाने को ही राज चलाने का सही तरीके मानने वाले चतुर दुनिया के खुदगर्ज बड़े दानवों के मातहत और सेवक बनने पर गर्वित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। अंधविश्वास के घंटे-घड़ियाल खुद संवैधानिक पदों पर बैठे लोग बजा रहे हैं। असहमतियों को कुचल कर, विमर्श को प्रतिबंधित करके आज को घुटन भरा बनाकर आगामी कल को आशंकाओं भरा बना दिया गया है। संविधान के फंडामेंटल राइट्स – मूलभूत अधिकार – छीने जा रहे हैं।

संविधान कैसे और कहाँ से?

इस पर आने से पहले यह जानना ठीक होगा कि संविधान क्या है? यह कैसे आया? क्या संविधान सभा की बहसों से निकला संविधान? नहीं!! कोई भी बहस या मंथन या चर्चा शून्य में नहीं होती – वास्तविक परिस्थितियों की बुनियाद पर खड़ी होती है। हर विमर्श की एक निरंतरता होती है। यह किताब 1857 के महाविप्लव से शुरू हुए महामंथन का नतीजा थी, जिसे 1919 के जलियांवाला बाग़ से तेज और व्यवस्थित रफ़्तार मिली। क्रांतिकारी और स्वतन्त्रता संग्राम की अनेक धाराएं लड़ती भी थीं, फांसी भी चढती थीं, जेल भी जाती थीं और इसी के साथ बहस भी करती थीं। भगतसिंह की धारा, कांग्रेस में चली बहसें, गांधी, नेहरू, अम्बेडकर, पेरियार, कम्युनिस्ट, समाजवादी, मजदूर-किसान-छात्र आंदोलन, सांस्कृतिक आंदोलन, अनेक जागरण इसी तरह की धाराएं थीं। सबसे बढकर रूस की समाजवादी क्रान्ति से पैदा हुयी चकाचौंध का असर था। इस मंथन के तीन आयाम थे : एक, गुलाम कैसे बने ; दो, आजाद कैसे होंगे ; तीन, आजादी के बाद ऐसा क्या करेंगे, ताकि भविष्य में कभी गुलाम न बने ; मोटे तौर पर भारत का संविधान इस बहस का आम स्वीकार्य सार है।

आज मंडराते खतरे न अनायास हैं, न अप्रत्याशित

आज संविधान और उसमे निहित लोकतंत्र सहित बाकी समझदारियों पर जो खतरे मंडरा रहे हैं, वे अनायास नहीं है। वे अप्रत्याशित भी नहीं हैं। इनके बारे में इसके निर्माता सजग थे – उन्हें इसकी आशंका थी। खुद डॉ. बी आर अम्बेडकर ने 25 नवम्बर 1949 को संविधान सभा में दिए अपने आख़िरी भाषण में कहा था कि : “संविधान कितना भी अच्छा बना लें, इसे लागू करने वाले अच्छे नहीं होंगे, तो यह भी बुरा साबित हो जाएगा।’”

हालांकि इस बात की तो संभवत: उन्होंने कल्पना तक नहीं की होगी कि ऐसे भी दिन आएंगे, जब संविधान लागू करने का जिम्मा ही उन लोगों के हाथ में चला जाएगा जो मूलत: इस संविधान के ही खिलाफ होंगे। जो सैकड़ों वर्षों के सुधार आंदोलनों और जागरणों की उपलब्धि से हासिल सामाजिक चेतना को दफनाकर उस पर मनुस्मृति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कमर कसे होंगे। मगर आज स्थिति यही है। वह आरएसएस, जिसने संविधान बनाने का ही विरोध किया — खुलकर कहा कि मनुस्मृति ही भारत का संविधान है — वह सत्ता में बैठा है और उसी मनुस्मृति के अनुरूप देश चलाने, प्रशासन को ढालने, समाज मरोड़ने की कोशिश में है। अभी औपचारिक रूप से संविधान को बनाये रखते हुए, इसके बाद संविधान को ही बदलने की तरफ बढ़ते हुए। आज के दौर का सबसे बड़ा संकट यह है।

इसी भाषण में बाबा साहब ने कहा था कि “अपनी शक्तियां किसी व्यक्ति — भले वह कितना ही महान क्यों न हो — के चरणों में रख देना या उसे इतनी ताकत दे देना कि वह संविधान को ही पलट दे, संविधान और लोकतंत्र’ के लिए खतरनाक स्थिति है।” इसे और साफ़ करते हुए वे यह भी बोले थे कि ‘’राजनीति में भक्ति या व्यक्ति पूजा संविधान के पतन और नतीजे में तानाशाही का सुनिश्चित रास्ता है।’’ 1975 से ’77 के बीच आतंरिक आपातकाल भुगत चुका देश पिछले छह वर्षों से जिस भक्त-काल और एकल पदपादशाही को अपनी नंगी आँखों से देख रहा है, उसे इसकी और अधिक व्याख्या की जरूरत नहीं है। यह बर्बर तानाशाही का रास्ता है — संविधान तो अलग रहा, मनुष्यता के निषेध का रास्ता है।

कहाँ आ गये? क्यों और कैसे आ गये?

सवाल सिर्फ इतना भर नहीं है कि अंग्रेजों के भेदियों और बर्बरता के भेडिय़ों के साथ सहअस्तित्व करते-करते ये कहाँ आ गए हम? सवाल इससे आगे का है ; क्यों और कैसे आ गये, का भी है। इसके रूपों को अम्बेडकर की ऊपर लिखी चेतावनी व्यक्त करती है, तो इसके सार की व्याख्या उन्होंने इसी भाषण में दी अपनी तीसरी और बुनियादी चेतावनी में की थी। उन्होंने कहा था कि :
‘’हमने राजनीतिक लोकतंत्र तो कायम कर लिया — मगर हमारा समाज लोकतांत्रिक नहीं है। भारतीय सामाजिक ढाँचे में दो बातें अनुपस्थित हैं, एक स्वतन्त्रता (लिबर्टी), दूसरी भाईचारा-बहनापा (फ्रेटर्निटी)।” उन्होंने चेताया था कि ‘यदि यथाशीघ्र सामाजिक लोकतंत्र कायम नहीं हुआ, तो राजनीतिक लोकतंत्र भी सलामत नहीं रहेगा।’’

मनु दोबारा लौट रहे हैं, यह झूठी बात है — सच्ची बात यह है कि यह बंदा कभी कहीं गया ही नहीं था। कभी भेष बदलकर, तो अक्सर बिना भेष बदले ही घूम रहा था यत्र-तत्र-सर्वत्र। समाज, संस्थाओं, भाषा, बर्ताब, यहां तक कि हमारे घर, परिवार, संगठन, आंदोलन तक में बैठा रहा धूनी रमाकर, अपने पाँव छुआता हुआ, ढोक लगवाता हुआ। कभी कथित रीति-रिवाजों-परम्पराओं की चादर ओढ़ कर, तो कभी पर्वों, उत्सवों, त्यौहारों के दुशाले लपेटकर। अक्सर देश के नेताओं और प्रमुख व्यक्तियों को अपने आगोश में चपेटकर।

जाहिर-सी बात है कि यदि एक जगह अन्धेरा पाल पोसकर रखा जाए, तो दुनिया में कहीं भी रोशनी सलामत और निरापद नहीं है। सरल-सी बात है कि यदि समाज लोकतांत्रिक नहीं है, तो राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था कैसे लोकतांत्रिक बनी रह पाएगी। और इससे आगे की थोड़ी-सी कर्कश लगने वाली बात यह है कि यदि परिवार लोकतांत्रिक नहीं है, तो भला समाज कैसे लोकतांत्रिक बनेगा।

आज के समय में मिशन का अर्थ

इसलिए बिलाशक भारत उसके संविधान और लोकतंत्र पर झपट रही भेड़ियों की फ़ौज से लड़ना होगा। समानता की धारणा संविधानसम्मत समझ की तरफ लपक रही लपटों को बुझाने के लिए राजनीतिक मोर्चे पर लड़ना होगा। ठीक वैसे ही, जैसे गाँव की आग बुझाते हैं — पीने का पानी, कुंए, हैंडपम्प का पानी, पोखर, तालाब का पानी और जहां जैसा, वैसा उजला पानी, कम उजला पानी होगा — जुटाना होगा। इसी के साथ, इसके बाद नहीं, इसी के साथ लड़ना होगा इस भारत विरोधी हिंदुत्व के पालनहार कारपोरेट से — वैसे ही जैसे 3 कृषि कानूनों के खिलाफ किसान और 4 लेबर कोड के खिलाफ मजदूर डटे हैं। मगर इसी के साथ साथ मनु को देश निकाला देने के लिए विशेष जिद के साथ लड़ना होगा। यह लड़ाई बाद में फुर्सत से, अलग से नहीं लड़ी जाएगी। एक साथ लड़ी जायेगी। और यह भी कि यह लड़ाई समाज में ही नहीं लड़ी जाएगी — यह घर, परिवार और अपने खुद के भीतर भी लड़ी जाएगी। आज यदि बाबा साहब होते तो उनके मिशन का भी यही अर्थ होता।

इसे लड़ना और जीतना होगा — साथ-साथ। क्या ऐसा होगा? ऐसा ही होगा — क्योंकि इतिहास हादसों के नहीं, निर्माणों के होते हैं।

[ • लेखक बादल सरोज ‘लोक जतन’ के संपादक हैं. ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर
breaking National

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस
breaking Chhattisgarh

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस

छत्तीसगढ़ की बेटी सोनम शर्मा करेगी भारतीय नेटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व, हांगकांग में होगी प्रतियोगिता
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की बेटी सोनम शर्मा करेगी भारतीय नेटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व, हांगकांग में होगी प्रतियोगिता

20 लाख की प्रतिमा पर उठे सवाल, डेढ़ साल में उखड़ने लगी बाहरी परत, जांच और कार्रवाई की मांग तेज
breaking Chhattisgarh

20 लाख की प्रतिमा पर उठे सवाल, डेढ़ साल में उखड़ने लगी बाहरी परत, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी, 15 अक्टूबर तक आम जनता से मांगे गए सुझाव
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी, 15 अक्टूबर तक आम जनता से मांगे गए सुझाव

मॉनसून में बाथरूम की इन चीजों को जरूर बदलें, वरना बढ़ सकता है बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा
breaking Chhattisgarh

मॉनसून में बाथरूम की इन चीजों को जरूर बदलें, वरना बढ़ सकता है बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा

थाइलैंड-दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट के यात्रियों की आपबीती, ‘किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका…’,
breaking Chhattisgarh

थाइलैंड-दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट के यात्रियों की आपबीती, ‘किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका…’,

छत्तीसगढ़ में 14 पुलिस अफसरों के तबादले, 11 थाना प्रभारियों और 3 SI को नई जिम्मेदारी, देखें सूची
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 14 पुलिस अफसरों के तबादले, 11 थाना प्रभारियों और 3 SI को नई जिम्मेदारी, देखें सूची

छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव के बड़े सितारे, दो बेटों ने नेपाल में लहराया तिरंगा, भारत को दिलाया फुटबॉल का गोल्ड मेडल
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव के बड़े सितारे, दो बेटों ने नेपाल में लहराया तिरंगा, भारत को दिलाया फुटबॉल का गोल्ड मेडल

लोकसभा में बिना बहस जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पास, CJI को छोड़ 37 हुआ संख्या
breaking National

लोकसभा में बिना बहस जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पास, CJI को छोड़ 37 हुआ संख्या

छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश से पांच बाघ लाने की तैयारी, टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बसे वनग्रामों का होगा पुनर्वास
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश से पांच बाघ लाने की तैयारी, टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बसे वनग्रामों का होगा पुनर्वास

नवा रायपुर में 52 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल, इस साल के नवंबर तक होगा पूरा
breaking Chhattisgarh

नवा रायपुर में 52 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल, इस साल के नवंबर तक होगा पूरा

शोकसभा के नाम पर पूरे दिन कोर्ट का कामकाज बंद नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
breaking Chhattisgarh

शोकसभा के नाम पर पूरे दिन कोर्ट का कामकाज बंद नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

भारतीय बॉक्सर जैस्मिन ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता
breaking Chhattisgarh

भारतीय बॉक्सर जैस्मिन ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा की बड़ी उपलब्धि, सितार वादन में आकाशवाणी से मिला ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ का सर्वोच्च सम्मान
breaking Chhattisgarh

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा की बड़ी उपलब्धि, सितार वादन में आकाशवाणी से मिला ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ का सर्वोच्च सम्मान

सीएम साय की बड़ी घोषणा, आतंकी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को 20-20 लाख देगी सरकार…
breaking Chhattisgarh

सीएम साय की बड़ी घोषणा, आतंकी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को 20-20 लाख देगी सरकार…

छत्तीसगढ़ में कृषि शिक्षक बनने के लिए B.Ed और TET जरूरी, राज्य सरकार की नई पात्रता शर्त, 90 % कृषि स्नातक आवेदन करने से हो जाएंगे वंचित
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में कृषि शिक्षक बनने के लिए B.Ed और TET जरूरी, राज्य सरकार की नई पात्रता शर्त, 90 % कृषि स्नातक आवेदन करने से हो जाएंगे वंचित

Meta India Head के खिलाफ केस दर्ज, PM मोदी के AI मॉर्फ्ड वीडियो मामले में हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई
breaking National

Meta India Head के खिलाफ केस दर्ज, PM मोदी के AI मॉर्फ्ड वीडियो मामले में हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री पर पूरी तरह बैन, हेल्थ मिनिस्टर का बड़ा फैसला; पाम ऑयल-मिल्क पाउडर से होता था तैयार
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री पर पूरी तरह बैन, हेल्थ मिनिस्टर का बड़ा फैसला; पाम ऑयल-मिल्क पाउडर से होता था तैयार

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’
poetry

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन