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- छत्तीसगढ़ [धमधा] : ऐतिहासिक नगर ‘धमधा’ की सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने के उद्देश्य से आयोजित ‘धमधागढ़ पुरखौती विरासत यात्रा’ में शामिल हुए शिक्षाविद् व सजग नागरिक
छत्तीसगढ़ [धमधा] : ऐतिहासिक नगर ‘धमधा’ की सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने के उद्देश्य से आयोजित ‘धमधागढ़ पुरखौती विरासत यात्रा’ में शामिल हुए शिक्षाविद् व सजग नागरिक

👉 • इस यात्रा में पूर्व कुलपति डॉ. शिवकुमार पांडेय, डॉ. एसके पाटिल, भारतीय सांस्कृतिक निधि [इंटेक] व शिक्षाविद डॉ. प्रो. डीएन शर्मा, ‘छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के राज्य अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, ‘इंटेक’ की संयोजिका डॉ. हंसा शुक्ला सहित 70 शिक्षाविद, कलाकार, साहित्यकार व सजग नागरिक शामिल हुए
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
‘धमधागढ़ पुरखौती विरासत यात्रा’ पंडितवा तालाब से आरंभ हुई. इस यात्रा में विरासत कार्यकर्ता गोविंद पटेल व वीरेंद्र देवांगन ने ‘धमधा’ ऐतिहासिक पर प्रकाश डाला.

यात्रा कबीरपंथ के पांचवें गुरु केवल मुनि नाम साहेब की समाधि दानी तालाब, नईया तालाब और उनसे जुड़े प्राचीन बुढ़वा नरवा, त्रिमूर्ति महामाया मंदिर, बूढ़ादेव और राजा किला,बूढ़ा तालाब व टार तालाब से होते हुए राज्य संरक्षित स्मारक विष्णु मंदिर, चौखड़िया, शीतला मंदिर पहुंची.
यात्रा में शामिल प्रबुद्धजनों ने प्रतिमाओं के अवलोकन के बाद ‘तमेरपारा’ में अशोक कसार के कांसा उद्योग व विमलचंद ताम्रकर के सौ साल पुराने पठऊँवा वाले मकान को देखा. शिक्षक विष्णु प्रसाद ताम्रकर की बनाई जीवंत मूर्तियों ने पर्यटकों का मनमोह लिया.
यात्रा के समापन पर आयोजित संगोष्ठी में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एसके पाण्डेय ने कहा कि-
‘धमधा’ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता की पहचान रहा कांसे का लोटा उद्योग कठिन चुनौती से जूझ रहा है.
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के पूर्व कुलपति डॉ. एसके पाटिल ने ‘धमधा’ के तालाबों के स्वत: भरने की प्राचीन प्रणाली की वैज्ञानिक अध्ययन कर 126 में से विलुप्त 70 से अधिक तालाबों को पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना बनाने का सुझाव दिया.
छत्तीसगढ़ राज्य साक्षरता प्राधिकरण के पूर्व सदस्य सचिव डॉ. डीएन शर्मा “ने धर्मधाम गौरवगाथा समिति के द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से विलुप्त हो चुके सात तालाबों को पुनर्जीवित करने कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ‘धमधा’ के विरासत को राष्ट्रीय मानचित्र पर लाना चाहिए”
समाजसेवी रमेश पटेल ने कहा कि- “शासन विलुप्त हो चुके तालाबों की भूमि मुक्त कराकर जनसहयोग से इनके पुनर्जीवित करने हेतु इस समिति को प्रदान करें”
रवि श्रीवास्तव ने कहा कि- ‘धमधा’ के प्राचीन कांसा उद्योग और यहां के पुराने मकान वास्तव में धरोहर है, जिनका संरक्षण आवश्यक है.
धमधा नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्वेता प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि- “हमारी धरोहर पर आने वाली पीढी़ गर्व कर सके इसलिए इनका संरक्षण जरूरी है”
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने धर्मधाम गौरवगाथा समिति के सदस्यों की प्रशंसा की.
कवयित्री विद्या गुप्ता, समिति के गोविंद पटेल, वीरेंद्र देवांगन एवं सामर्थ्य ताम्रकर साजन ने भी विचार व्यक्त किए.
इस यात्रा संगोष्ठी में कांति कुमार सोलंकी, डॉ. प्रज्ञा सिंह, डॉ. महेश चतुर्वेदी, शानू मोहनन, दीपक रंजन दास, डॉ. संध्या मदन मोहन, कमलेश चंद्राकर, जगमोहन सिन्हा, ममता जोगी, डॉ. अलका दास, नवनीत तिवारी के अलावा ‘धमधा’ रहवासी जुगल किशोर साहू, धर्मेंद्र साहू, सुनील साहू, केशर सिंह दीक्षित, मुखराज किशोर यादव, डीपी शर्मा, ईश्वरी निर्मलकर, अशोक देवांगन, अशोक धीवर, तुलेश्वर कहार, संतोष उमरे और बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे.
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