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- प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ : कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की अध्यक्षता और प्रगतिशील कवि शरद कोकास के मुख्य अतिथि एवं आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा और कैलाश जैन बरमेचा की उपस्थिति में तृतीय सांगठनिक बैठक सम्पन्न हुई : बैठक में आगामी दिनों महाविद्यालय में विद्यार्थियों के बीच होने जा रहे काव्य पाठ और अन्य साहित्यिक विषयों पर संवाद किए गए
प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ : कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की अध्यक्षता और प्रगतिशील कवि शरद कोकास के मुख्य अतिथि एवं आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा और कैलाश जैन बरमेचा की उपस्थिति में तृतीय सांगठनिक बैठक सम्पन्न हुई : बैठक में आगामी दिनों महाविद्यालय में विद्यार्थियों के बीच होने जा रहे काव्य पाठ और अन्य साहित्यिक विषयों पर संवाद किए गए

👉 • [बाएँ से] कैलाश जैन बरमेचा, डॉ. परदेशीराम वर्मा, डॉ. महेशचंद्र शर्मा और शरद कोकास
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ’आरंभ’ के तत्वावधान में तृतीय सांगठनिक बैठक विगत दिनों 7 अप्रैल, 2026 को ‘भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस सभागार’ में अपराह्न 3.30 से 6.30 तक विभिन्न विचार-विमर्श, अतिथियों के प्रेरक उद्बोधन, नए सदस्यों का स्वागत, महाविद्यालय में होने जा रहे काव्यपाठ, सदस्यों का परिचय के साथ सम्पन्न हुई.

👉 ‘आरंभ’ की बैठक [बाएँ से] • प्रदीप भट्टाचार्य, कैलाश जैन बरमेचा, डॉ. परदेशीराम वर्मा, डॉ. महेशचंद्र शर्मा, शरद कोकास और नूरुस्सबाह खान ‘सबा’
आज की बैठक की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने की. मुख्य अतिथि नवें दशक के प्रगतिशील कवि शरद कोकास थे. मुख्य संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा एवं मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा की उपस्थिति में ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने स्वागत उद्बोधन दिया. बैठक संचालन महासचिव नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ ने की और आभार व्यक्त कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रजनी नेलसन ने दिया.
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत संस्थापक सदस्य डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. रजनी नेलसन, दीप्ति श्रीवास्तव, अनिता करडेकर ने पुष्पगुच्छ देकर किया.
पहली बार ‘आरंभ’ की बैठक में शिरकत हुई ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ मीडिया ग्रुप की प्रमुख श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य का स्वागत प्रदीप भट्टाचार्य ने किया.





👉 • सांगठनिक बैठक में उपस्थित आजीवन/संस्थापक/सामान्य वार्षिक सदस्य-
👉 • कैलाश जैन बरमेचा {मुख्य संरक्षक} डॉ. महेशचंद्र शर्मा {मुख्य सलाहकार} प्रदीप भट्टाचार्य {अध्यक्ष} डॉ. रजनी नेलसन {कार्यकारी अध्यक्ष} अनिता करडेकर {महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष} ब्रजेश मल्लिक {वरिष्ठ उपाध्यक्ष} शानू मोहनन {वरिष्ठ उपाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ} डॉ. अंजना श्रीवास्तव {उपाध्यक्ष} दीप्ति श्रीवास्तव {उपाध्यक्ष} नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ {महासचिव} आलोक कुमार चंदा {सचिव} ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल {उपसचिव} प्रकाशचंद्र मण्डल {कोषाध्यक्ष} पल्लव चटर्जी {इंटरनल ऑडिटर} जाविद हसन भाईजान {प्रवक्ता} डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ {मीडिया प्रमुख} आजीवन सदस्य/कार्यकारिणी एवं सामान्य सदस्य- राकेश गुप्ता ‘रूसिया’, विद्या गुप्ता, सुशील यादव, शौकत इकबाल, डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, जसवंत कुमार मंडावी, शुभेंदु बागची और श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य.


इस अवसर पर डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा कि-

लेखन में दृष्टि और दिशा हमें प्रतिबद्धता से मिलती है. प्रदीप भट्टाचार्य और इनकी टीम ने साहित्यिक संगठन का नाम ‘आरंभ’ रखा, अच्छा लगा. संस्था को प्रगतिशीलता से जोड़ा. अपने आसपास ही हमें लेखन की भरपूर प्रेरणा और सामग्री मिलती है. केवल दृष्टि चाहिए. भिलाई में यह ‘आरंभ’ परिणाम तक पहुंचकर यशस्वी बने, मेरी शुभकामनाएं है. साहित्य को संरक्षण देने की उदारता के लिए कैलाश जैन बरमेचा और संस्कृत के विद्वान आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा को बधाई.
‘पहल’ पत्रिका में प्रकाशित वैज्ञानिक दृष्टिकोण और इतिहास बोध को लेकर लिखी साठ पृष्ठों की लम्बी कविता ‘पुरातत्वावेत्ता तथा दीर्घ कविता ‘देह’ के लिए चर्चित कवि, कथाकार, लेखक, दर्शन एवं मनोवैज्ञानिक के अध्येता, नवें दशक के कवि शरद कोकास ने कहा कि-

ज्ञान ऐसी चीज है जिसका कोई अंत नहीं. हम कितना कुछ कर लें फिर भी पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते. किसी ना किसी जगह कमी रह ही जाएगी.
संस्था के मार्गदर्शन मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि-

आज हम विश्व स्वास्वस्थ दिवस मना रहे हैं इसलिए मैं यह कहना चाहता हूँ कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क और अच्छी रचना का निवास होता है.
संस्था के मुख्य संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा ने कहा कि-

साहित्य मात्र शब्दों का जाल नहीं है, यह वह शक्ति है जो सीधे जुबान से दिल में उतरकर आत्मा को छू लेती है. इसकी व्याख्या करने में सदियाँ भी लग जाए तो कम है. यही कारण है कि साहित्य ने समाज में समय-समय पर बड़े-बड़े परिवर्तन किए हैं. यदि इसे समाज का दर्पण कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. आज आवश्यकता इस बात की है कि साहित्य के नाम पर हो रही अनर्गल प्रस्तुतियां के बीच हम उस साहित्य को आगे लाएं जो समाज को दिशा दे, आत्मा को तृप्त करें और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत बनाए. इसी संकल्प के साथ हमारी नई साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की नींव रखी गई है. साहित्य सेवा है, साधना है, जो अंतिम सांस तक निरंतर चलती रहती है. प्रेमचंद जी के कथन का उल्लेख करते हुए बोले कि ‘हर वह सफलता हार है जिसका लक्ष्य किसी को नीचा दिखाना है’. ‘आरंभ’, “मैं” से ऊपर उठकर “हम” की भावना के साथ चलेगी.
गद्य एवं पद्य की चर्चित कवयित्री विद्या गुप्ता ने एक मार्मिक कविता का पाठ किया. नूरुस्सबाह ‘सबा’ ने भी एक बेहतरीन ग़ज़ल की प्रस्तुति दी.
‘आरंभ’ के सौजन्य से आगामी दिनों में किसी एक महाविद्यालय में विद्यार्थियों के बीच में हमारे सदस्य काव्य पाठ करेंगे. इसकी तैयारी भी पूरी कर ली गई है.
अंत में ‘आरंभ’ से जुड़े नए सदस्यों का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया. बैठक में राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक और कवि-ग़ज़लकार राकेश गुप्ता ‘रुसिया’ ने ‘आरंभ’ की आजीवन सदस्यता ग्रहण की.
संगठन को छत्तीसगढ़ राज्य से पंजीकृत करने हेतु शासन के दिशा-निर्देश को पूरी कर ली गई है.
संगठन में कुछ और सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है. ब्रजेश मल्लिक को वरिष्ठ उपाध्यक्ष और जाविद हसन भाईजान को ‘प्रवक्ता’ बनाया गया. प्रदीप भट्टाचार्य ने नाम का प्रस्ताव रखा और कैलाश जैन बरमेचा ने दोनों सदस्यों का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया.
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3रे सांगठनिक बैठक की कुछ झलकियाँ-

👉 • ब्रजेश मल्लिक का स्वागत करते हुए कैलाश जैन बरमेचा

👉 • जावेद हसन भाईजान का पुष्पगुच्छ देकर अभिनंदन किया कैलाश जैन बरमेचा

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव और बांग्ला साहित्यिक संस्था ‘पूबेर हावा’ के संस्थापक कवि शुभेंदु बागची ‘आरंभ’ की विचारधारा से प्रभावित होकर जुड़े. इनका स्वागत किया श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य ने

👉 • कवि ग़ज़लकार सुशील यादव ने ‘आरंभ’ की सदस्यता ग्रहण की. स्वागत किया ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य एवं कोषाध्यक्ष बांग्ला-हिंदी के कवि नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल

👉 • कैलाश जैन बरमेचा और ब्रजेश मल्लिक ‘आरंभ’ के आजीवन सदस्य

👉 • ‘आरंभ’ की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रजनी नेलसन ने बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ. परदेशीराम वर्मा का स्वागत किया

👉 • मानपुर-मोहला से ‘आरंभ’ के सदस्य डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’ भी बैठक में शामिल हुए. अपनी कृति शरद कोकास को भेंट करते हुए

👉 • दीप्ति श्रीवास्तव ‘आरंभ’ की संस्थापक सदस्य और उपाध्यक्ष हैं. दीप्ति जी ने अपनी कृति ‘माँ उदास कियूं’ कहानी संग्रह डॉ. परदेशीराम वर्मा को भेंट करते हुए

👉 • कुशल संचालन किया ‘आरंभ’ की महासचिव एवं शायरा नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ ने

👉 • ‘आरंभ’ की कार्यकारी अध्यक्ष एवं लेखिका डॉ. रजनी नेलसन ने बखूबी सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया

👉 • तृतीय सांगठनिक बैठक में उपस्थित संस्थापक सदस्य

👉 • ‘आरंभ’ की बैठक

👉 • ‘आरंभ’ की बैठक

👉 • डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’ के साथ अतिथि

👉 • ‘आरंभ’ की बैठक
[ • रिपोर्ट- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, मीडिया प्रभारी- ‘आरंभ’ ]
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