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रायपुर में बंद घरों ने बढ़ाई जनगणना टीम की चिंता, 30 मई तक जानकारी ना देने पर ‘हाउस लॉक्ड’ में होंगे दर्ज

रायपुर। शहर में चल रही जनगणना के दौरान बड़ी संख्या में मकान बंद पाए जा रहे हैं। गर्मी की छुट्टियों में परिवारों के बाहर जाने के कारण जनगणना कर्मचारियों को कई घरों में ताला लगा मिल रहा है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से 30 मई तक वापस लौटकर अपनी जानकारी दर्ज कराने की अपील की है। यदि निर्धारित समय तक जानकारी नहीं मिलती है, तो संबंधित मकानों को ‘हाउस लाक्ड’ श्रेणी में दर्ज किया जाएगा।
रायपुर समेत पूरे प्रदेश में एक मई से घर-घर जाकर जनगणना का कार्य चल रहा है। अब तक चार लाख से अधिक लोगों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी है। कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बंद मकानों के पड़ोसियों को सूचना दें और अपना मोबाइल नंबर छोड़ें, ताकि परिवार लौटने पर संपर्क किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना का पूरा डेटा सुरक्षित डिजिटल सिस्टम में संग्रहित किया जा रहा है और जानकारी लीक होने की कोई संभावना नहीं है।
तीन बार पहुंचेगी जनगणना टीम
जनगणना निदेशालय ने प्रगणकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी बंद मकान को तुरंत ‘लाक्ड’ घोषित नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों को कम से कम दो से तीन बार वहां जाकर जानकारी लेने का प्रयास करना होगा। इसके लिए पड़ोसियों से संपर्क कर मकान मालिकों तक संदेश पहुंचाया जा रहा है। यदि एक महीने तक कोई जानकारी नहीं मिलती है, तब मकान को ‘वैकेंट-लाक्ड’ श्रेणी में दर्ज किया जाएगा। हालांकि मकान की नंबरिंग और भवन संबंधी विवरण फिर भी दर्ज किए जाएंगे।
मोबाइल एप से हो रही पूरी जनगणना
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जा रही है। सभी प्रगणकों को मोबाइल एप दिया गया है, जिसके जरिए वे घर-घर जाकर जानकारी अपलोड कर रहे हैं। शाम को सभी आंकड़े मुख्य सर्वर में अपडेट किए जाते हैं। अधिकारियों का दावा है कि सॉफ्टवेयर अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस है और डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। राज्यभर में 51,300 प्रगणक और नौ हजार पर्यवेक्षक इस काम में लगे हुए हैं। रायपुर जिले को 3,939 ब्लाकों में बांटकर सर्वे किया जा रहा है।
लौटते ही अपडेट कर सकेंगे जानकारी
प्रशासन ने साफ किया है कि बाहर गए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि किसी परिवार का घर बंद मिला है तो वापस आने पर वे संबंधित प्रगणक से संपर्क कर अपनी जानकारी अपडेट करा सकते हैं। इसके लिए मोबाइल एप में अलग से ‘डेटा अपडेट’ विकल्प दिया गया है। अधिकारी मानते हैं कि छुट्टियों के कारण यह स्थिति बनी है, लेकिन समय रहते जानकारी मिल जाए तो किसी भी परिवार का रिकॉर्ड अधूरा नहीं रहेगा। इससे भविष्य की सरकारी योजनाओं और आंकड़ों में भी सटीकता बनी रहेगी।
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