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संघर्ष से सफलता का शिखर: कभी पिता संग की मजदूरी, आज बस्तर में नक्सलियों का काल बना चोरभट्टी का यह जांबाज

बस्तर: कहते हैं कि जिनके इरादों में जान और सीने में देशभक्ति का जज्बा हो, उनके आगे किस्मत को भी घुटने टेकने पड़ते हैं। कुछ ऐसी ही प्रेरक कहानी है महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम चोरभट्टी के बेटे सीताराम सागर की। आज वे केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं के लिए संघर्ष, साहस और राष्ट्रसेवा के जीवंत प्रतीक बन चुके हैं। एक बेहद साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने बस्तर के घने और खतरनाक जंगलों में अपनी वीरता की वो गाथा लिखी है, जिसने उन्हें जाबांज इंस्पेक्टर के रूप में स्थापित कर दिया।
मजबूरी की बेड़ियों को तोड़ा, आरक्षक से शुरू की राह
सीताराम सागर के जीवन की शुरुआत कांटों भरी रही। घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। अपने परिवार का पेट पालने के लिए उन्होंने अपने पिता के साथ तपती धूप में मजदूरी तक की। लेकिन, उन्होंने अपनी परिस्थितियों को कभी अपने सपनों पर हावी नहीं होने दिया। देशसेवा का जुनून उनके खून में दौड़ रहा था। इसी दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने पुलिस भर्ती की तैयारी की और साल 2007 में नारायणपुर जिले में बतौर आरक्षक (कांस्टेबल) पुलिस विभाग में प्रवेश किया।
इकलौते बेटे ने चुना जोखिम, डीआरजी में बने कमांडर
सीताराम अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र हैं, लेकिन जब बात मातृभूमि की रक्षा की आई, तो उन्होंने बस्तर के सबसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित मोर्चों पर तैनात होने का फैसला किया। उनकी अद्भुत बहादुरी, सटीक रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) जैसी फ्रंटलाइन फोर्स का हिस्सा बनाया गया। डीआरजी कमांडर के रूप में उन्होंने ऐतिहासिक थुलथुली मुठभेड़, काकूर ऑपरेशन और देश के सबसे बड़े नक्सली संगठन के महासचिव बसवराज के खिलाफ चलाए गए कड़े अभियानों का अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व किया और देश के दुश्मनों के हौसले पस्त किए।
मेडल और तीन बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन
लगातार 19 वर्षों तक बस्तर अंचल के बीहड़ों में माओवादियों से लोहा लेते हुए उन्होंने आरक्षक से इंस्पेक्टर तक का सफर तय किया। अदम्य साहस के प्रदर्शन के लिए उन्हें पुलिस विभाग द्वारा तीन बार ‘ऑफ-टर्न प्रमोशन’ (समय पूर्व पदोन्नति) दी गई। हाल ही में उनकी उत्कृष्ट और साहसिक सेवाओं के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक से भी नवाजा गया है। चोरभट्टी गांव के लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी सफलताओं के बाद भी सीताराम आज भी जमीन से जुड़े हैं और छुट्टियों में जब गांव आते हैं, तो ग्रामीण युवाओं को सेना और पुलिस में जाकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करते हैं।
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