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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के 355 वीं साहित्य सभा में शरदचंद्र चट्टोपाध्याय स्मरण दिवस मनाया गया और संस्था का मुखपत्र ‘मध्यबलय’ के 61वें अंक का लोकार्पण किया गया

▪️ इस अवसर पर उपस्थित हुए 👉 ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति- स्मृति दत्त, महासचिव- शुभेंदु बागची, ‘मध्यबलय’ के संपादक- दुलाल समाद्दार, उपसचिव- प्रकाशचंद्र मण्डल, कोषाध्यक्ष- पल्लव चटर्जी, ‘आरंभ’ के अध्यक्ष- प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, ब्रजेश मल्लिक, ‘सुरो-बानी’ के संयोजक- सुबीर रॉय, सोमाली शर्मा, बीरेंद्रनाथ सरकार, ममता सरकार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. वासुदेब भट्टाचार्य, गौतम शील, प्रभात मण्डल, रविंद्रनाथ देबनाथ, शंकरचंद्र रॉय, रतन सरकार, आशीष चक्रवर्ती, मि.शर्मा, अनुभव मण्डल और शेफाली भट्टाचार्य
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
इस्पात नगरी, संस्कारधानी एवं साहित्य की नगरी भिलाई में बांग्ला भाषा, संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को विगत 65 वर्षो से संजोए रखा है ‘बंगीय साहित्य संस्था’. इस संस्था के संस्थापक स्व. शिबव्रत देवानजी, डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी और अन्य कुछ सदस्य रहे. वर्तमान में इस संस्था की सभापति देश की लब्धप्रतिष्ठत लेखिका व कवयित्री बानी चक्रवर्ती और महासचिव व सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार शुभेंदु बागची हैं.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ साल भर अनेकों साहित्यिक आयोजन करते आ रही है. इस कड़ी में साहित्य सभा की 355वीं कड़ी बीते दिनों संस्था की उप सभापति बांग्ला की लोकप्रिय कवयित्री व लेखिका स्मृति दत्त के नेहरू नगर के साहित्यिक निवास में शरदचंद्र चट्टोपाध्याय स्मरण दिवस मनाया गया और बांग्ला भाषा में प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ के 61वें अंक का लोकार्पण भी किया गया. लगभग 200 पृष्ठ की इस पत्रिका में देश भर के अनेकों लेखकों की रचनाएं प्रकाशित है. पत्रिका के संपादक हैं- बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि दुलाल समाद्दार.
साहित्य सभा की अध्यक्षता दुलाल समाद्दार और बखूबी संचालन शुभेंदु बागची ने किया. आभार व्यक्त प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य ने किया.

👉 • कुशल संचालन करते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के महासचिव शुभेंदु बागची
प्रारंभ में उपस्थित सभी सदस्यों द्वारा महान कथाकार शरदचंद्र चट्टोपाध्याय को पुष्पांजलि अर्पित की गई. आयोजकीय व्यक्तत्व स्मृति दत्त ने दिया.
बांग्ला के प्रतिष्ठित लेखक बीरेंद्रनाथ सरकार ने शरदचंद्र चट्टोपाध्याय पर विस्तार से अपनी बात को रखा-

शरदचंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म ‘देवानंदपुर’ में पिता मोतीलाल और माता भुवनमोहिनी देवी के यहाँ 15 सितम्बर, 1876 को हुआ था. इनका निधन 16 जनवरी, 1938 को कोलकाता में हुआ. शरदचंद्र चट्टोपाध्याय बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय उपन्यासकारों और कहानीकारों में से एक थे. शरदबाबू की रचनाएं भारतीय समाज, विशेषकर महिलाओं, गरीबों और ग्रामीण जीवन की समस्याओं का सजीव चित्रण करती हैं. इनकी भाषा सरल, भावपूर्ण और जनसामान्य के लिए सहज थी, जिसके कारण वे आज भी हमारे बीच में हैं. शरदबाबू का बाल्यावस्था आर्थिक कठिनाईयों में बीता. गरीबी के कारण वे अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर सके. जीवन के संघर्षों ने ही उनकी साहित्यिक दृष्टि को गहराई प्रदान की. शरदचंद्र ने प्रारंभ में विभिन्न नौकरियां की और कुछ समय के लिए बर्मा {अब म्यांमार} में भी रहे. वहीं रहते हुए उन्होंने लेखन कार्य करते रहे. शरदचंद्र चट्टोपाध्याय की पहली कहानी थी- ‘बड़ीदीदी’ [1907]. कुछ और प्रसिद्ध रचनाएं हैं- देवदास, परिणीता, श्रीकांत, चरित्रहीन, दत्ता, पथेरदाबी, गृहदाह और पल्ली समाज. शरदबाबू की रचनाओं में समाज की कुरीतियों स्त्री-अधिकारों और मानवीय भावनाओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है. इनकी रचनाओं में ग्रामीण और मध्यवर्गीय जीवन का यथार्थ देखने को मिलता है. इनकी भाषा सरल और सहज होती थी. शरदचंद्र चट्टोपाध्याय भारतीय साहित्य के ऐसे महान लेखक थे जिन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं को उजागर किया. भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर शरदबाबू को आज ही नहीं हमेशा स्मरण करना सौभाग्य की बात है. ऐसे कथाकार को मेरा शत् शत् नमन.
इस अवसर पर संगीत, गीत एवं शरदचंद्र चट्टोपाध्याय की स्मृति में उपस्थित सदस्यों ने अपनी अपनी बातों को रखा. प्रकाशचंद्र मण्डल द्वारा गाया बाऊल गीत सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. सुजॉशा सेन ने भी अपनी मधुरवाणी से समां बाँधा. गौतम शील, प्रभात मण्डल एवं आशीष चक्रवर्ती ने सुमधुर गीत गाए.
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आयोजन की कुछ सचित्र झलकियाँ-

👉 • बांग्ला कवयित्री सोमाली शर्मा कविता प्रस्तुति देती हुई…

👉 • प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य आभार व्यक्त करते हुए…

👉 • उपस्थित बंगीय सदस्य

👉 • दुलाल समाद्दार ने अध्यक्षता की…

👉 • प्रभात मण्डल ने सु-मधुर गीत गाया…

👉 • प्रकाशचंद्र मण्डल और स्मृति दत्त

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य

👉 • समाजसेवी सुबीर रॉय ने प्रभावशाली ढंग से अपनी बात को रखा…

👉 • उपस्थित बंगीय सदस्य

👉 • बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि पल्लव चटर्जी ने भी महत्वपूर्ण कविता का पाठ किया…

👉 • ‘मध्यबलय’ अंक
[ • रिपोर्ट एवं प्रस्तुति- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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