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छत्तीसगढ़ में बनेगी AI नीति, 4 हजार से ज्यादा गांवों तक Quality Internet पहुंचाने की तैयारी

रायपुर। राज्य में सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के उपयोग के लिए एआइ नीति बनाई जाएगी। इस नीति में डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी आडिट और केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
चार हजार गांवों को गुणवत्तापूर्ण इंटरनेट सेवा से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार, भारतनेट फेज-3, सेवा सेतु और डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि शासन के विभिन्न विभागों में एआइ आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा और एआइ नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
भाषिणी प्लेटफार्म को होगा उपयोग
साथ ही सरकारी स्तर पर एआइ पायलट परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी। नागरिकों को उनकी मातृभाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ”भाषिणी” प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें। प्रदेश में विद्यार्थियों और सरकारी कर्मचारियों को एआइ का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआइ जागरूकता कार्यक्रम, एआइ व रोबोटिक्स क्लब और हैकाथान आयोजित किए जाएंगे। महाविद्यालयों में एआइ सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आइटीआइ में एआइ लैब और विश्वविद्यालयों में सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।
एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम की कार्ययोजना प्रस्तुत
एआइ डेटा लैब, स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और सीड फंडिंग को बढ़ावा देकर राज्य में मजबूत एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई। बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक आदि अधिकारी मौजूद थे।
577 नए मोबाइल टावरों की मिली है स्वीकृति
अधिकारियों ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में डीबीएन वित्तपोषित लगभग एक हजार मोबाइल टावर स्थापित किया गया है। इसके अतिरिक्त 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति मिली है। इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 171 प्रकरणों का निराकरण एक माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
रिंग टोपोलाजी से जुड़ेंगी 4,114 ग्राम पंचायतें
भारतनेट फेज-3 की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। साथ ही आइपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा और गांवों तक एफटीटीएच सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
एआइ के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा प्रदेश : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एआइ केवल भविष्य की तकनीक नहीं बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है।
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआइ के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। राज्य में मजबूत एआइ इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा और सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआइ के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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