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70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा कच्चा तेल, भारत समेत दुनिया को बड़ी राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि WTI और मर्बन क्रूड भी कमजोर कारोबार कर रहे हैं। कुछ समय पहले अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर चली गई थीं, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा होने की आशंका बढ़ गई थी। अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
ब्रेंट, WTI और मर्बन क्रूड में लगातार गिरावट
गुरुवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 70.60 डॉलर प्रति बैरल, WTI लगभग 67 डॉलर और मर्बन क्रूड करीब 65 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। कीमतों में आई इस नरमी से भारत जैसे तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण पहले तेल बाजार में भारी उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने तथा युद्ध जैसी स्थिति शांत होने से सप्लाई बाधित होने का जोखिम कम हुआ है। इसी वजह से बाजार में जोखिम प्रीमियम तेजी से घटा है।
डोनाल्ड ट्रंप की भविष्यवाणी होती दिख रही सच
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दिया था कि यदि ईरान के साथ समझौता होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। अब वैश्विक बाजार में आई नरमी को उनकी भविष्यवाणी से जोड़कर देखा जा रहा है। कई ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने भी 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिरावट का अनुमान जताया था।
होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह नहीं खुला, फिर भी क्यों सस्ता हुआ तेल?
गौरतालाब है कि, दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। इसके बावजूद बाजार भविष्य की संभावित सप्लाई को ध्यान में रखकर कीमतें तय करता है। अमेरिका-ईरान वार्ता में सकारात्मक प्रगति और समुद्री मार्ग पर तनाव कम होने की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
OPEC+ की बढ़ी सप्लाई भी बनी बड़ी वजह
तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ द्वारा उत्पादन बढ़ाने की रणनीति भी कीमतों पर दबाव बना रही है। वहीं UAE और सऊदी अरब जैसे प्रमुख उत्पादकों से अधिक सप्लाई की उम्मीद ने बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता कम कर दी है।
यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 70 डॉलर के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल कम हो सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घटेगा, महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी और अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक समर्थन मिलने की संभावना है।
chhattisgarhaaspaas
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