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विशेष : पंडवानी अउ तीजन बाई- ओम प्रकाश साहू ‘अंकुर’
हमर छत्तीसगढ़ के लोक कला अउ संस्कृति के सोर सिरिफ भारत भर म नइ बल्कि दुनिया भर म बगरे हे। रंगकर्मी हबीब तनवीर के माध्यम ले इहां के लोककलाकार मन विदेश म घलो अपन प्रतिभा के लोहा मनाइस हे। एक तरफ मंदराजी दाऊ ह नाचा,दाऊ रामचंद्र देशमुख ह देहाती कला विकास मंडल अउ सांस्कृतिक संस्था चंदैनी गोंदा , दाऊ महासिंह चंद्राकर ह सोनहा बिहान के माध्यम ले हमर छत्तीसगढ़ी संस्कृति के परचम पूरा भारत वर्ष म फैलाइस। खुमान साव के संगीत, लक्ष्मण मस्तुरिया,केदार यादव ,भैया लाल हेड़ाऊ, अनुराग ठाकुर,ममता चंद्राकर, जयंती यादव,कविता वासनिक अउ आने गायक -गायिका मन के जादू चलिस।दूसर कोति रंगकर्मी हबीब तनवीर के नया थियेटर के माध्यम ले फिदा बाई मरकाम, माला बाई मरकाम, अंतराष्ट्रीय पंडवानी गायिका तीजन बाई,अंतरराष्ट्रीय पंथी गायक/नर्तक देवदास बंजारे बंजारे, मदन निषाद, गोविंद राम निर्मलकर, सुरूज बाई खाण्डे ( भरथरी,ढोला – मारू गायन), शिवकुमार दीपक,दीपक विराट, पूनम विराट,उदेराम श्रीवास मन जैसे कतको कलाकार मन भारत अउ छत्तीसगढ़ के मान बढ़ाइस। पंडवानी ल अंतराष्ट्रीय स्तर म पहिचान दिलाय म पंडवानी कलाकार झाड़ू राम देवांगन, पूना राम निषाद,तीजन बाई , रितु वर्मा के नांव शामिल हे। ये विधा म लक्ष्मी बाई बंजारे,शांति बाई,उषा बारले, प्रतिमा बारले, रेवा राम साहू, समप्रिया निषाद, दानी परधान,गोगिया परधान, रामजी देवार , तरूणा साहू,आराध्या साहू साधना करके छत्तीसगढ़ के लोक कला के सोर बगरावत हे।
येमा पंडवानी के देवी, पंडवानी के डाक्टर तीजन बाई ह 5 जुलाई 2026 के ये दुनिया ल छोड़ के चले गिस। एम्स रायपुर म इलाज चलत रिहिन।उंकर निधन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि भारत वर्ष के लिए अपूर्णीय क्षति हे। उत्कृष्ट पंडवानी गायन बर तीजन बाई भारत सरकार द्वारा बछर 1987 म पद्मश्री,2003 म पद्मभूषण, फुकुओका सम्मान,जापान (2018), पद्म विभूषण 2019,संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान 2022 ले सम्मानित होय रिहिन हे।वोहा पद्मश्री ले सम्मानित छत्तीसगढ़ के पहिली महिला हे।
पंडवानी एक परिचय
पंडवानी महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत कथा के छत्तीसगढ़ी लोक रुप हरे।येकर रचनाकार सबल सिंह चौहान ( रतनपुर) हे। पंडवानी के मुख्य नायक भीम,अर्जुन अउ मुख्य नायिका द्रोपदी हे। खलनायक म दुर्योधन, दु:शासन शकुनि,कीचक हे।
गायन अउ वाद्य यंत्र
पंडवानी म एक मुख्य गायक अउ वोला संग देय बर रागी होथे। गायक/ गायिका खुद तंबूरा,खंजरी,अउ करताल (खड़ताल) बजाथे।आने कलाकार मन तबला,ढोलक, हारमोनियम,बेंजो अउ मंजीरा ले संगत करथे। रागी ह मुख्य गायक के हुंकारू भरथे।वोहा मुख्य गायक गाथे तेला दोहराथे। रागी ह तत्कालीन कथा ल वर्तमान बेरा म जोड़थे। अइसे करके जिहां लोगन मन के मनोरंजन करथे त बाते -बात म संदेश घलो देथे।
पंडवानी के शैली
पंडवानी के दू शैली प्रचलित हे- वेदमती अउ कापालिक। वेदमती शैली के गायक मन शास्त्र सम्मत अउ महाभारत के मुताबिक गायन करथे। मंच म बइठ के प्रस्तुति देथे।येमन अपन आप ल पंडवानी गायक के जगह महाभारत गायक कहलाना पसंद करथे। ये शैली म सिरिफ गायन होथे।नृत्य नइ करे जाय।
दूसर कोति कापालिक शैली के बात करन त वाचिक परंपरा पर आधारित होथे। येमा मंच म खड़े होके,तंबूरा ल लहरावत , पांव ल थिरकात गायन करे जाथे।येमा गायन अउ नृत्य दूनों होथे।येमा कल्पना के घलो सहारा लेके कथा ल रोचक बनाय जाथे।ये शैली म । गायक/ गायिका नृत्य करथे अउ कथा अभिनय के बेरा थिरकथे।ये शैली म पुरुष मन के जोर रेहे हे पर तीजन बाई ह ये शैली ल अपना के एक इतिहास रच दिस।
हमर छत्तीसगढ़ म पारधी, देवार अउ भिम्मा पंडवानी गायन करइया प्रमुख जन जाति हरे। कंवर जनजाति के मन घलो शौकियाना रूप म गायन करथे।

तीजन बाई के शुरूआती जीवन
देश विदेश म पंडवानी के माध्यम ले अपन एक अलगे पहिचान बनइया तीजन बाई के जनम छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला के गनियारी गांव म 24 अप्रैल 1956 म होइस। उंकर जनम शोषित अउ वंचित समाज पारधी जाति म होइस।जीव- जंतु मन के शिकार करना पारधी समुदाय के काम राहय।उंकर बाबू जी के झुनुक लाल पारधी अउ महतारी के नांव सुखमती देवी रिहिन। छत्तीसगढ़ के लोक परब तीजा के दिन जनम होय के सेति वोकर नांव तीजन बाई रखे गिस। परिवार म गरीबी रिहिस । नानपन अब्बड़ अभाव म बीतिस। तीजन बाई पढ़ाई नइ कर पाइस पर अपन मिहनत अउ दृढ़ इच्छाशक्ति ले पंडवानी के माध्यम ले दुनिया म राज करिस ।
पंडवानी के शुरुआत
तीजन बाई ह नौ बछर के उमर म अपन चचेरा नाना बृज लाल पारधी ल पंडवानी गावत सुनिस। वोकर मन पंडवानी कोति रमगे अउ अपन नाना ले पंडवानी सीखे बर चालू कर दिस। बारह बछर के उमर म बिहाव होगे।जब तीजन बाई ह मंच म पंडवानी गायन चालू करिस त परिवार अउ समाज म अब्बड़ विरोध होइस। तेरह बछर के उमर म जब वोहा मंच म पंडवानी के गायन करत रिहिन त वोकर बाबूजी ह नंगत भड़क के प्रस्तुति ल रोके बर बोलिस पर तीजन बाई नइ मानिस। येला अपन कला के अपमान मानिस अउ अपन बाबू जी ल किहिस आज ले तोर मोर कोनो रिश्ता नइ हे। अइसन परिस्थिति म तीजन बाई ल खुद के घर से निकाल देय गिस। कलाकारी के कारण वोकर पहिली शादी टूटगे। दूसरा बिहाव ह घलो सफल नइ होइस। तीन जीवन साथी मन वोकर संग छोड़ दिस।अपन दू बेटा अउ एक झन गोद बेटा ल घलो खो दिस पर विपरीत परिस्थिति म घलो अपन कला ल नइ छोड़िस।
पहिली सार्वजनिक कार्यक्रम चंदखुरी म
तीजन बाई सन 1973 म पंडवानी गायन के शुरुआत करिन। पहिली सार्वजनिक कार्यक्रम चंदखुरी म होइस। येकर आयोजन मालगुजार भूषण लाल देशमुख ह करे रिहिन।
तीजन बाई ल वाद्ययंत्र मन के संग जुगलबंदी अउ लय के बारीकी मन ल उमेंद सिंह देशमुख ह सिखाइस जेला अपन गुरु मानत “ददा” काहय।
हबीब तनवीर ले भेंट फेर जिनगी म बदलाव
चंदखुरी म प्रस्तुति के बाद तीजन बाई के सोर आस पास के गांव म फइल गे ।येकर बाद भिलाई म कार्यक्रम देय के नेवता मिलिस।फेर दुर्ग, रायपुर अउ भोपाल के भारत भवन म घलो पंडवानी गायन के मउका मिलिस । तीजन बाई के भेंट भोपाल म देश के जाने-माने रंगकर्मी हबीब तनवीर ले होइस। तनवीर जी कला के पारखी रिहिन।वोहा तीजन बाई के प्रस्तुति ले अब्बड़ प्रभावित होइस अउ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ले तीजन बाई के भेंट कराइस। इंदिरा गांधी घलो तीजन बाई के गायन शैली ल खूब पसंद करिन।
येकर बाद फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल ह तीजन बाई के अद्भुत शैली ल देखके अपन टीवी धारावाहिक ” भारत एक खोज” म पंडवानी गायन बर नेवता दिस।

भिलाई स्टील प्लांट म नौकरी
दूरदर्शन म मउका मिले के बाद तीजन बाई के सोर घर- घर तक पहुंचिस। वोकर प्रतिभा के कदर करके भिलाई स्टील प्लांट म सरकारी नौकरी दे गिस। येकर ले उंकर जिनगी के गाड़ी बने चले लगिस अउ निश्चिंत होके देश के संगे संग विदेश म घलो पंडवानी के प्रस्तुति दे लगिस। बछर 1985 म फ्रांस म होय भारत महोत्सव म अपन विशिष्ट शैली ले धूम मचा दिस । मारीशस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, तुर्की, साइप्रस,माल्टा,कतको देश म उत्कृष्ट पंडवानी गायन कर भारत अउ छत्तीसगढ़ के समृद्ध लोक कला ल एक नवा ऊंचाई प्रदान करिस। तीजन बाई द्वारा वीर रस म
पांडव मन के कथा ल प्रस्तुत करे के अद्भुत कला, तंबूरा के बेमिसाल तान अउ मंच म भाव के अनुरूप अद्भुत अंग संचालन के कारण सिरिफ भारतवासी ह नइ अपितु विदेशी मन के घलो दिल ह खुश हो जाय अउ दर्शक मन ल बांध के राखय। तीजन बाई मूल कथा ल आज के सामाजिक अउ राजनीतिक स्थिति म जोड़त नंगत प्रहार करके अपन प्रस्तुति ल सार्थक बनाय। हमर गांव सुरगी के मुख्य सांस्कृतिक मंच म तीजन बाई के पंडवानी सुने रेहेन। वोकर प्रस्तुति ल देख के क्षेत्रवासी मन म अब्बड़ उछाह छागे रिहिन।
चतुर्भुज देवांगन के भजन’ चोला माटी के हे राम……वोकर प्रिय भजन राहय । जब तीजन बाई प्रस्तुति के शुरूआत – “बोलो वृंदावन बिहारी लाल की जय……”,
सना नना नना मोहन….. ल अपन तंबूरा के तान ले मंच म थिरकत विशिष्ट अंग संचालन शैली ले प्रस्तुति देय त हर दर्शक रोमांचित हो जाय।
तीजन बाई भले निरक्षर रिहिन पर वोहा पंडवानी के डाक्टर रिहिन। बछर 2003 म बिलासपुर विश्व विद्यालय अउ 2006 म रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर ह डी. लिट के मानद उपाधि ले सम्मानित करिन।
तीजन बाई खुद निरक्षर रिहिन पर महिला अधिकार अउ साक्षरता अभियान म बढ़ चढ़ के भाग लिस अउ साक्षरता के महत्व ल समझाके लोगन मन ल साक्षर बने बर प्रेरित करिन।
पंडवानी के देवी तीजन बाई के निधन भारत अउ छत्तीसगढ़ के लोक कला के लिए अपूर्णीय क्षति हे। तीजन बाई अपन यश रूपी शरीर ले जीवित रहि। पंडवानी के डाक्टर ल विनम्र श्रद्धांजलि। शत् शत् नमन.

• लेखक- ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’
[ अध्यक्ष- साकेत साहित्य परिषद् : सुरगी, जिला- राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ ]
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