आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

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• सोनिया नायडू
[ • रंगमंच एवं कला क्षेत्र, थिएटर से विगत 25 वर्षों से जुड़ी सोनिया नायडू ‘जनवादी लेखक संघ’ की विचारधारा से प्रभावित हैं. • रजत कुमार घोष और चीनू घोष की सुपुत्री सोनिया के पतिदेव स्व. शैलेंद्र नायडू रहे. • कविता, ग़ज़ल एवं कहानी लेखन के अलावा आपकी गायिकी मधुर है. अदाकारा एवं अच्छी नृत्यांगना भी हैं. पशु संरक्षण, समाजसेवा में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती हैं. • ‘प्रेरणा साहित्य संगम मंच’ दिल्ली/ ‘एसएचएमवी फाउंडेशन’ तेलंगाना हैदराबाद/’साहित्य संगम बुक्स’ बोकारो/’भिलाई वाणी’ भिलाई छत्तीसगढ़ के अलावा अनेक साहित्यिक संस्था/मंचों से सम्मान एवं कवि सम्मेलन में शिरकत की. • 1978 में जन्मीं सोनिया की शिक्षा मास्टर डिग्री तक है, वर्तमान में एक निजी स्कूल में शिक्षिका के पद पर पदस्थ हैं. • प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की विचारधारा से प्रभावित होकर सदस्य बनने की इच्छुक रखने वाली सोनिया नायडू की कविता पहली बार ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ में प्रकाशित की जा रही है. – संपादक ]
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• मुरझा गया प्रीत का पौधा

मुरझा गया तेरे प्रीत का पौधा ,
सूखकर कांठ बन गया ,
एक बूंद पानी की आस में ,
पौधा तरस तरस कर मुरझा गया ।।
लाया था माली बड़े शौक से ,
जतनकर गमले में बोया था ,
अपने प्रीत के कोमल स्पर्श से ,
पौधे में फूल खिलाऊंगा बोला था ।।
भूल गया माली पौधे को सिचना ,
मुरझा गया तेरे प्रीत का पौधा ,
तिल तिल मर कर सूख गया पौधा , देख- देख माली का रास्ता ।।
के लाख बारिश की बूंदों से अब ,
यह पौधा जी नहीं पाएगा ,
मन से हार गया है पौधा ,
हरगिस जी नहीं पाएगा ।।
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• मेरी किस्मत हो तुम

लाख कोशिशे कर लो मेरी जान,
मुझसे दूर न तुम जा पाओगे ,
कुछ तो नाता है तुम्हारे मेरे दरमियां ,
के तुम दूर जाकर भी वापस आओगे ।।
के दो दिलों में बसा ये प्रीत है ,
जिसने हमें जोड़े रखा है ,
के घर बस नहीं सकता है कभी हमारा ,
पर हमें किस्मत में बसा के रखा है।।
न मिलने की ललक है ,
न देखने की तड़प है ,
यह कैसा है पवित्र नाता हमारा ,
जो दूर होकर भी एक साथ धड़कता है ।।
के लाख गलतियां मुझमें में भी है ,
तो कुछ कमियां तुझमें में भी है ,
के हमें मिलों के फासले भी हैं ,
पर तब भी बिछड़कर हम
साथ -साथ हैं ।।
के इंसान क्या ही तोड़ेगा वो रिश्ता ,
जिसे महादेव ने जोड़ा है ,
जोओ कर लो तुम अपनी मनमानी,
होगा वही जो भोलेनाथ ने रचा है ।।
[ • छत्तीसगढ़, जुनवानी- भिलाई ]
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chhattisgarhaaspaas
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