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प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की आठवीं सांगठनिक बैठक में पत्रकार-लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन की पुस्तक ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ कुछ किस्से-कुछ कहानियां पर चर्चा-विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने रखे अपने विचार : लेखक का सम्मान : सांगठनिक बैठक में ‘आरंभ’ में 6 नए सदस्यों ने सदस्यता ली और पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को दी गई विनम्र श्रद्धांजलि

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• नरेंद्र कुमार बंछोर ने कहा कि-
– रोचक इतिहास बताने के साथ भविष्य की चिंता भी झलकती है ‘भिलाई ज़िंदाबाद’…
– भिलाई एक परिवार की तरह, इसे तोड़ने वालों को सफल नहीं होने देंगे…
– अस्पताल और टाउनशिप को बचाने ओए-सेफ़ी ने दिया है प्रस्ताव…
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• लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने लेखकीय व्यक्तव्य में कहा कि- पाठकों को ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ सौंपते हुए कई सवाल मन में उठ रहे हैं कि क्या भिलाई अपने वजूद को बचा पाएगा?
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• मुख्य वक्ता एनडीटीवी के युवा पत्रकार व कवि निलेश त्रिपाठी ने कहा कि- इस शहर को समझना है तो आपको ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ जरूर पढ़ना होगा!
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• सुस्थापित व्यंग्यकार विनोद साव ने किताब में लेखक की दादी मरहूमा फातिमा बी. को समर्पित वाक्य ‘आपने बीएसपी सेक्टर-1 अस्पताल के किचन में कोयले की भट्टी के सामने बरसों अपना खून जलाते हुए भरे-पूरे कुनबे को ठंडी छांव दी’ से अपनी बात रखी…
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• डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि- लेखक ने भिलाई का इतिहास बेहद रोचक ढंग से रखा. ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ पुस्तक को हर भिलाईवासी को जरूर पढ़ना चाहिए…
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• डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि- आज भिलाई की संस्कृति और भिलाई स्टील प्लांट के सार्वजनिक उपक्रम के स्वरूप को बचाए रखने की जरूरत है…



• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के तत्वावधान में लेखक-पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की पुस्तक ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ कुछ किस्से-कुछ कहानियां पर चर्चा-विचार गोष्ठी भिलाई निवास के इंडियन कॉफ़ी हाउस सभागार में आयोजित की गई.


प्रारंभ में संध्या साटकर ने सरस्वती वंदना की. इसके उपरांत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की.
स्वागत उद्बोधन ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य एवं आयोजकीय वक्तव्य ‘आरंभ’ के आजीवन व संस्थापक सदस्य एवं संयोजक शौकत इकबाल ने दिया.

चर्चा गोष्ठी के मुख्य अतिथि भिलाई इस्पात संयंत्र ऑफ़िसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं स्टील एग्ज़ीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया [सेफ़ी] के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर थे और अध्यक्षता ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने किया. मुख्य वक्ता रहे- एनडीटीवी के स्थानीय प्रमुख पत्रकार-कवि निलेश त्रिपाठी. विशिष्ट अतिथि सुस्थापित व्यंग्यकार विनोद साव और स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला थीं.
संचालन ‘आरंभ’ की महासचिव नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ और आभार व्यक्त ‘आरंभ’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’ ने दिया.
इस मौके पर नरेंद्र कुमार बंछोर ने कहा कि-

लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपनी इस किताब में न केवल भिलाई का इतिहास रोचक ढंग से बताया है बल्कि भिलाई के भविष्य को लेकर गहन चिंता भी व्यक्त की है. भिलाई के समक्ष आ रही चुनौतियों का खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा कि आज ऐसी परिस्थिति निर्मित की जा रही है कि किसी न किसी तरह भिलाई को निजिकरण की तरफ मोड़ दिया जाए. 2004 में ऐसा प्रयास किया गया था. लेकिन भिलाई की जनता की खासियत है कि अपनी एकजुटता से इसे नाकाम करती रही. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ‘ओए’ और ‘सेफ़ी’ की तरफ ऐसी किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा. अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया कि- सेक्टर-9 अस्पताल को लेकर भिलाई वासियों की चिंता जायज़ है. इसके लिए हमने [सेफ़ी-ओए] प्रस्ताव दिया है. मैनेजमेंट भी उस दिशा में आगे बढ़ रहा है कि हृदय, किडनी और न्यूरो जैसे विभाग के लिए किसी संस्था से अनुबंध कर यहाँ अलग से भवन दिया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर सभी को लाभ मिले.
टाउनशिप के संबंध में नरेंद्र कुमार बंछोर ने बताया कि-
उपर से यह दबाव जरूर है कि पब्लिक सेक्टर के पास जितनी भी जमीन है उसका मौद्रीकरण किया जाए और जितने पुराने मकान है, उन्हें गिराकर यह जगह किसी फर्म को दी जाए. इसके लिए ‘ओए-सेफ़ी’ का प्रस्ताव है कि एनबीसीसी या हाउसिंग बोर्ड जैसे किसी सरकारी उपक्रम को टाउनशिप में ऐसी खाली जगह दी जाए, जहाँ आवास गिराए जा चुके हैं और अवैध कब्जे हो रहे हैं. जिससे वहां तालपुरी की तरह कॉलोनी विकसित की जाए और पुराना टाउनशिप उजाड़ने की नौबत न आए.
नरेंद्र कुमार बंछोर ने कहा कि- ‘भिलाईवासी अपने आप को एक परिवार की तरह मानते हैं और इस परिवार को जो लोग भी तोड़ने का प्रयास करेंगे हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे.’

इसके पहले लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि-
मौजूदा दौर में सार्वजनिक उपक्रम कई तरह की चुनौतियों से रूबरू हो रहे हैं. अब जबकि पूरा परिवेश ही बदल रहा है तो ऐसे में पाठकों को ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ सौंपते हुए कई सवाल मन में उठ रहे हैं कि क्या भिलाई अपने वजूद को बचा पाएगा?
वहीं आधार वक्तव्य रखते हुए युवा पत्रकार व कवि निलेश त्रिपाठी ने कहा कि-
उनकी तरह तमाम लोग भिलाई को जानते जरुर हैं लेकिन भिलाई को पहचानना है, इस शहर को समझना है तो आपको ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ जरूर पढ़ना होगा.
देश के सुस्थापित व्यंग्यकार लेखक विनोद साव ने किताब में लेखक की दादी मरहूमा फातिमा बी. को समर्पित वाक्य ‘आपने बीएसपी सेक्टर-1 अस्पताल के किचन में कोयले की भट्टी के सामने बरसों अपना खून जलाते हुए भरे-पूरे कुनबे को ठंडी छांव दी’ से अपनी बात रखते हुए मैत्री बाग, सेक्टर-9 हॉस्पिटल का जिक्र किया एवं कल और आज के परिदृश्य को बताया.
डॉ. हंसा शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि लेखक ने भिलाई का इतिहास बेहद रोचक ढंग से रखा और इसे हर भिलाईवासी को जरूर पढ़ना चाहिए.
चर्चा गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि-

विश्व के मानचित्र में ‘भिलाई’ की अपनी एक पहचान है. आज भिलाई की संस्कृति और भिलाई स्टील प्लांट के सार्वजनिक उपक्रम के स्वरूप को बचाए रखने की जरूरत है. ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में किताब ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ की महत्ता और बढ़ जाती है.


आयोजन में संस्था ‘आरंभ’ की तरफ से कृतिकार मुहम्मद जाकिर हुसैन को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया.
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प्रथम सत्र : आठवीं सांगठनिक बैठक

👉 प्रथम सत्र- [बाएँ से] नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ {महासचिव} डॉ. महेशचंद्र शर्मा {मुख्य सलाहकार} ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर {संयोजक, प्रथम सत्र} शौकत इकबाल {संयोजक, द्वितीय सत्र} और प्रदीप भट्टाचार्य {अध्यक्ष}
चर्चा-विचार गोष्ठी के पहले सत्र में ‘आरंभ’ की आठवीं सांगठनिक बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने की. नियमावली पर विस्तृत जानकारी संस्था के संस्थापक व आजीवन सदस्य ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर ने उपस्थित आजीवन एवं संस्थापक सदस्यों के समक्ष रखी. तत्पश्चात खुला विचार-विमर्श हुआ- जिसमें दीप्ति श्रीवास्तव, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’ और ब्रजेश मलिक ने अपने-अपने विचार रखे.

👉 • ‘आरंभ’ के संस्थापक एवं आजीवन सदस्य ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर ने नियमावली से संबंधित विस्तृत जानकारी सदस्यों को दी

👉 • ‘आरंभ’ के संस्थापक एवं आजीवन सदस्य राकेश गुप्ता ‘रुसिया’ अपनी बात रखते हुए…

👉 • ‘आरंभ’ की आजीवन- संस्थापक सदस्य एवं उपाध्यक्षा दीप्ति श्रीवास्तव संस्था के हित में विचार रखी…

👉 • ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ ने भी अपने विचारों को सदन में रखा…

👉 • ‘आरंभ’ के संस्थापक-आजीवन सदस्य ब्रजेश मलिक ने भी सारगर्भित विचार रखे…
आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने सलाहकार व्यक्तत्व में बोले कि ‘आरंभ’ की गाँठ मजबूत है. इसे हम तोड़ने नहीं देंगे. उपस्थित सभी सदस्यों ने एक मत से प्रदीप भट्टाचार्य के नेतृत्व में विश्वास जताया.
‘आरंभ’ की महासचिव नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ ने संस्था का प्रतिवेदन एवं संचालन किया और धन्यवाद ज्ञापन ‘आरंभ’ की उपाध्यक्षा दीप्ति श्रीवास्तव ने दिया.

👉 ‘आरंभ’ साहित्य समिति के मुख्य सलाहकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि- संस्था ने इतने कम समय में अनेकों काम कर चुकी है, ये हम सबके लिए उपलब्धि है. पंजीयन हो गया, वेबसाइट पर काम चल रहा है. ये गर्व की बात है. कॉलेजों में काव्य गोष्ठी की जा रही है, हमारा अगला काव्य गोष्ठी महिला महाविद्यालय में प्रस्तावित है. सबके सहयोग से ही संस्था चलती है और हमारा मूलमंत्र भी है- ‘आरंभ’ हो अंत न हो-चिंतन कभी क्लांत न हो’

👉 • प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि- आप सबने मुझे चुना है, मैं अपना काम बखूबी करने में कहाँ तक सफल हूँ, निर्णय आपके पास है?
इस अवसर पर संस्था की विचारधारा से प्रभावित होकर घनश्याम कुमार देवांगन, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’, ओम प्रकाश शर्मा, हाजी रियाज़ खान गौहर, सोनिया नायडू घोष, ए. विजय लक्ष्मी, संध्या साटकर और श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य ने सदस्यता ग्रहण की.
‘आरंभ’ में अब कुल सदस्य संख्या-55 हो गई.



👉 • ‘आरंभ’ की आठवीं सांगठनिक बैठक में उपस्थित सदस्य
अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त हुई प्रख्यात पंडवानी गुरु पद्म विभूषण स्व. तीजन बाई को दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि अर्पित की.
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इस अवसर पर ‘आरंभ’ के सदस्य उपस्थित हुए-
आलोक कुमार चंदा [संयुक्त सचिव] त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’ [वरिष्ठ उपाध्यक्ष] दीप्ति श्रीवास्तव [उपाध्यक्षा] नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ [महासचिव] शानू मोहनन, ब्रजेश मलिक, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर, शौकत इकबाल, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, सुशील यादव, तारकनाथ चौधुरी, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, हाजी रियाज़ खान गौहर, जाविद हसन ‘भाईजान’, ओम प्रकाश शर्मा, घनश्याम कुमार देवांगन, शुभेंदु बागची, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’, सोनिया नायडू घोष, ए. विजय लक्ष्मी, शिवमंगल सिंह, शमशीर सिवानी, टीए खान, नागेंद्र साहू, मो. तारिक और श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य.
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कार्यक्रम की कुछ और प्रमुख सचित्र झलकियाँ-

👉 • पद्म विभूषण पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को ‘आरंभ’ ने मौन श्रद्धांजलि अर्पित की

👉 [बाएँ से] • ब्रजेश मलिक, मुहम्मद जाकिर हुसैन, नरेंद्र कुमार बंछोर, जाविद हसन ‘भाईजान’, शुभेंदु बागची और निलेश त्रिपाठी

👉 • कार्यक्रम के संयोजक ‘आरंभ’ के संस्थापक-आजीवन सदस्य शौकत इकबाल का पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित करते हुए प्रवक्ता जाविद हसन ‘भाईजान’ [बाएँ] और मीडिया प्रमुख डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’

👉 [बाएँ से] • ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ के लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन, नरेंद्र कुमार बंछोर, जाविद हसन ‘भाईजान’ और एनडीटीवी के पत्रकार निलेश त्रिपाठी

👉 • ‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ के अध्यक्ष- घनश्याम कुमार देवांगन ने नरेंद्र कुमार बंछोर के हाथों ‘आरंभ’ की सदस्यता ग्रहण की

👉 • कवयित्री सोनिया नायडू घोष ‘आरंभ’ की सदस्य बनी

👉 • कवि ओमप्रकाश शर्मा ‘आरंभ’ के सदस्य बनें

👉 • कवि हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’ ‘आरंभ’ में सक्रिय सदस्यता ग्रहण की

👉 • कवयित्री ए. विजय लक्ष्मी ‘आरंभ’ की सदस्य बनीं

👉 • समाजसेवी संध्या साटकर ‘आरंभ’ की सदस्यता ग्रहण की

👉 • श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य ने आरंभ’ की सदस्य बनीं. नरेंद्र कुमार बंछोर ने पुष्प गुच्छ देकर अभिवादन किया

👉 ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य को भेंट करते हुए लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन [बाएँ से] – • शेफाली भट्टाचार्य, प्रदीप भट्टाचार्य, मो. जाकिर हुसैन, आलोक कुमार चंदा और ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

👉 मुख्य अतिथि नरेंद्र कुमार बंछोर का स्वागत किया [बाएँ से] • आलोक कुमार चंदा, नरेंद्र कुमार बंछोर और ब्रजेश मलिक

👉 • ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य और महासचिव नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ का स्वागत

👉 • व्यंग्यकार विनोद साव ‘भिलाई ज़िंदाबाद’ पर अपनी बात रखते हुए…

👉 • कुशल संचालन किया नुरूस्सबाह खान ‘सबा’ ने. नरेंद्र कुमार बंछोर ने स्वागत किया पुष्प गुच्छ देकर

[ • रिपोर्ट एवं चित्र संकलन- जाविद हसन ‘भाईजान’ [प्रवक्ता] और डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ [मीडिया प्रभारी] ]
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