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छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर से बदलेगी बिजली व्यवस्था, मोबाइल पर मिलेगी रोजाना खपत की जानकारी; 54% क्षेत्र में काम पूरा

CG NEWS: स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता अब अपने बिजली खपत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रतिदिन प्राप्त कर सकते हैं। स्मार्ट मीटर की सहायता से बिजली बिल की त्रुटियों में सुधार, समय पर जानकारी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। स्मार्ट मीटर से होने वाले कई फायदे हैं। उपभोक्ता परिसर में होने वाली बिजली खपत और रीडिंग की रोज़ाना जानकारी मिलती है।
वर्तमान या पिछले 12 महीनों की बिजली खपत का चार्ट उपभोक्ता देख सकते हैं। लाए गए लोड का मासिक विवरण भी उपभोक्ताओं को उपलब्ध होता है। रीडिंग में होने वाली मानवीय चूक से छुटकारा मिलता है। बिजली बिल सुधार के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। बिजली खपत, लोड, चार्ज आदि की सटीक जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध होती है। औसत बिल की समस्या से तत्काल राहत मिलती है। बंद या खराब मीटर की जानकारी तत्काल मिलती है।
प्रदेश के सभी जिलों में लगभग 54 प्रतिशत क्षेत्र के लग चुका है। जिसके तहत रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिले सहित अनेक कस्बों और ब्लाक स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जानकारी के आभाव में ही उपभोक्ता परेशांन होता है जबकि स्मार्ट मीटर से जुड़े लाभों की जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी से संपर्क कर इस परेशानी से बचा जा सकता है। बिजली दफ्तर में हमेशा उपभोक्ताओं की समस्या को हल करने के लिए अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहते है।
साथ ही प्रदेश के बिजली विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर सही ढंग से काम कर रहा है की नहीं इसकी निगरानी के लिए विभाग के इंजीनियरों की टीम लगातार सर्वे भी करती है। प्रदेश सरकार के बिजली विभाग के मुताबिक स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता 1912 पर कॉल कर सकते हैं। यह पहल प्रदेश के लोगों के लिए विभाग द्वारा बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही उपभोक्ता मोर स्मार्ट बिजली एप के माध्यम से उपभोक्ता अपने प्रतिदिन की विद्युत खपत भी देख सकते हैं जिससे किसी भी तरह की परेशानी को तत्काल बिजली विभाग के इंजीनियरों के माध्यम से या सहयोग से तत्काल दूर भी किया जा सकता है।
प्रदेश में स्मार्ट मीटर से लोगों के जीवन में नया बदलाव आ गया है। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में स्मार्ट मीटर महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में सामने आए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण को गति मिली है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर नजर रखने और उसे नियंत्रित करने की नई सुविधा मिल रही है। स्मार्ट मीटरिंग और वितरण ढांचे के कार्यों को मिलाकर प्रदेश के लिए कुल स्वीकृत परिव्यय 8,126 करोड़ रुपये है।
16 मार्च 2026 तक RDSS के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 1,168.78 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके थे। प्रदेश में स्मार्ट मीटर का विस्तार केवल शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली उपभोक्ताओं को नई तकनीक से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। स्मार्ट मीटर का बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को बेहतर तरीके से समझ सकता है। केंद्र सरकार के अनुसार स्मार्ट मीटर से मोबाइल एप के माध्यम से लगभग रियल टाइम बिजली खपत देखी जा सकती है। पुराने उपयोग का ग्राफ, रिचार्ज या बिल भुगतान और कम बैलेंस की सूचना जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण आधारभूत आवश्यकता है। केंद्र सरकार की RDSS योजना में स्मार्ट मीटर के साथ पुराने कंडक्टर बदलना, सब-स्टेशनों और ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाना, नए ट्रांसफॉर्मर एवं सब-स्टेशन स्थापित करना और फीडर सेग्रीगेशन जैसे काम भी शामिल हैं। इनका उद्देश्य वितरण व्यवस्था की दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार करना है। स्मार्ट मीटरिंग इसी व्यापक बिजली सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।
नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ तभी सामने आएगा जब उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से मिलने वाले खपत डेटा का इस्तेमाल बिजली बचाने के लिए करें। गांव का उपभोक्ता भी अब अपनी खपत को समझकर बजट तय कर सकता है और अनावश्यक उपयोग रोक सकता है। इससे बिजली बचत के साथ परिवार के मासिक खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
स्मार्ट मीटर के बढ़ते नेटवर्क के साथ छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था धीरे-धीरे डिजिटल दौर की ओर बढ़ रही है। केंद्र और राज्य की साझा कोशिशों का लक्ष्य ऐसी वितरण व्यवस्था तैयार करना है जिसमें बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय हो, खपत की जानकारी पारदर्शी रहे और उपभोक्ता अपने बिजली खर्च पर पहले से बेहतर नियंत्रण रख सके।
chhattisgarhaaspaas
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