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रंग तरंग- 2026 : पाँच [26-30 अगस्त] दिनों तक कला की नगरी भिलाई में सजे-सुर-ताल-अभिनय और नृत्य के विविधा रंग : देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लगभग 250 कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां : दिवंगत पुरोधा कलाकारों को नमन एवं नई पीढ़ी को संस्कार

👉 • कला साहित्य अकादमी [कवच] की परिकल्पना एवं सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र, रवींद्र निकेतन, गीता आर्ट्स एंड नृत्य एसोसिएशन एवं कालीबाड़ी हुडको के विशेष सहयोग से ‘रंग तरंग’ में पांच दिनों तक अखिल भारतीय रंगतरंग नाट्य, गायन, कला, संस्कृति और रंगमंच का भव्य उत्सव महात्मा गांधी कला मंदिर [इंदिरा प्लेस] में यादगार प्रस्तुतियों के साथ सम्पन्न हुआ

👉 • अंतिम दिन [30 अगस्त] को पुरुस्कार वितरण समारोह के अतिथि रहे- प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक मिर्जा मसूद बेग [रायपुर] वरिष्ठ रंगकर्मी अजय डांगे, शक्तिपद चक्रवर्ती, मीता दास, मनोरंजन दास, दीपशिखा बोस और मानव सेन.

👉 • समारोह का संचालन सुप्रियो सेन, स्वाति सेनगुप्ता, सुमिता सरकार व आभार प्रदर्शन मणिमय मुखर्जी ने किया
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
भिलाई [प्रदीप भट्टाचार्य] : बीते पांच दिनों 26-30 अगस्त तक ‘कला मंदिर’ में अखिल भारतीय ‘रंग तरंग’ नाट्य व संगीत प्रतियोगिता के अंतिम दिन पुरस्कार समारोह सम्पन्न हुआ. सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति नाटक- ‘कन्यादान’ [पिप्पल एसोसिएशन फॉर थियेटर जमशेदपुर टाटानगर] को प्रथम पुरस्कार मिला. द्वितीय नाटक- ‘सन्नाटा’ [रंग रूप थियेटर इंदौर मध्यप्रदेश] और तृतीय नाटक- नाट्य वास्तु कानपुर का ‘जहर’ और पंचतत्व राउलकेला की ‘सुनीबो हेऊ ए कहानी’. सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए जन्मजय मोहंती को ‘सुनीबो हेऊ ए कहानी’, द्वितीय वरुण जोशी को ‘सन्नाटा’ और मोहम्मद निजाम ‘कन्यादान’ एवं प्रवीण कुमार अरोड़ा को ‘ज़हर’ के लिए तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.


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रंग तरंग पुरुस्कार-
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता-
अरुण आठवाले, राजकुमार दास. द्वितीय- राजा चंद्रादित्य, जन्मजय मोहंती और तृतीय- ‘ज़हर’ नाटक में ग्राहक बने कमलेश सेठी.
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री-
‘कन्यादान’ में ज्योति बनी प्रिया यादव. द्वितीय- ‘लांछन’ की मुस्कान शर्मा और तृतीय- ‘सुनीबो हेऊ ए कहानी’ में चारी बनी अनुष्का बारी. सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार- ‘लांछन’ नाटक की ख्याति को मिला.


सर्वश्रेष्ठ नाट्य लेखन- ‘असमंज बाबू की आत्मकथा’ के अख्तर अली, प्रकाश व्यवस्था- ‘सन्नाटा’, मंच सज्जा- ‘वो एक रात’, वस्त्र विन्यास- ‘सुनीबो हेउ ए कहानी’ एवं पंचतत्व, रूप सज्जा- ‘सन्नाटा’, सर्वश्रेष्ठ पार्श्व संगीत- ‘वो एक रात’, मोनो एक्टिंग- ‘निठल्ला’ भुनेश्वर साहू [प्रथम] ‘अनहार्ड’ अर्पित आचार्य [द्वितीय] ‘महारथी कर्ण’ प्रवीण कुमार अरोड़ा.


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कलावती सावंत स्मृति गायन पुरुस्कार-
सर्वश्रेष्ठ गायन- स्वीटी मैथी [प्रथम] नीता शंकर [द्वितीय] समीर स्वरूप [तृतीय] संगीत इंस्ट्रमेंटल में- वाई जय प्रकाश एवं दैना राजपूत. सब जूनियर में- पुलकित चंद्राकर [प्रथम] आदित्य चौहान [द्वितीय] सब जूनियर समूह में- प्रिशा सोना [प्रथम] लक्षिता ठाकुर, इमोन भट्टाचार्य [द्वितीय] यशी देवांगन, आयरा खान [तृतीय] सब जूनियर गायन समूह में प्रीति जैन, वंश साहू, लक्ष्य, सेजल, दिव्यांशस, आयुष मालवी और धारी यादव को भी सम्मानित किया गया. नृत्य स्पर्धा में- प्रिंस वानखेड़े [प्रथम] दीपक सोना [द्वितीय] और नव्या रंजन [तृतीय]. कलावती सामंत गायन संबलपुरी फोक एवं गीता आर्ट्स एंड नृत्य एसोसिएशन की प्रस्तुति को भी सराहा गया.


आयोजकीय सहयोग के लिए संगीता लहरी, शांतनु दास गुप्ता, सुचित्रा मुखर्जी, मिथुन दास, पी भानुजी राव, कुंवर नरेंद्र प्रताप सिंह राठौर, यश ओबेरॉय, वरदा जोशी, मोऊ दत्ता, चंदा बनर्जी और सुमिता सरकार को सम्मानित किया गया.


‘रंग तरंग-2026’ का शुभारंभ भारतीय संस्कृति की विविधता और सौहार्द के प्रतीक ‘ओणम’ के रंगों के बीच हुआ. 60 और 70 के दशक में दुर्ग-भिलाई की कला- सांस्कृतिक यात्रा को अपनी साधना से स्मृद्ध करने वाले दिवंगत पुरोधा कलाकारों को ‘स्मृति नमन’ अर्पित कर याद किया गया. यह श्रद्धांजलि केवल अतीत को याद करना नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को यह बताने का प्रयास भी था कि आज जिन सांस्कृतिक मंचों पर वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, उनकी नींव उन पुरोधाओं की तपस्या और समर्पण से मजबूत हुई है.
पुरोधाओं को नमन और नई पीढ़ी को संस्कार, ‘रंग तरंग’ का यही सबसे सुंदर संदेश बनकर उभरा.
छत्तीसगढ़ी लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को सीधे माटी से जोड़ा. सुआ नृत्य सहित लोक प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की लोक जीवन परंपरा, सहज उल्लास और सामूहिक संस्कृति की सुंदर झलक दिखाई दी.
प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन निर्णायक की भूमिका का निर्वहन किया- दीपेंद्र हालदार, सुप्रियो सेन, यश ओबेरॉय, भारत भूषण परगनिया, शैलजा चंद्राकर, जॉली सेन, डॉ. शर्मिठा नंदी, कु. दीपिका सामंत, मोऊ दत्ता, माणिक चक्रवर्ती, शांतनु चक्रवर्ती एवं अर्चना बनर्जी.
विशेष सहयोग रहा- दीपशिखा बोस, प्रतीक मंडल, मुकेश अग्रवाल, मिर्जा मसूद बेग, मानव सेन, वीके मोहम्मद, सुब्रतो दासगुप्ता, सुशांत विश्वास, मणिमय मुखर्जी, सुचिता मुखर्जी और शिशिर टमोटिया.
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