बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू

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• बलदाऊ राम साहू
[ • बलदाऊ राम साहू एक शिक्षाविद् व बाल साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं. उन्होंने लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है. विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक संस्थाओं में कार्य करते हुए अंत में वे सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा आयोग रायपुर के पद से फरवरी-2020 में सेवानिवृत्त हुए हैं. • बलदाऊ राम साहू की अब तक 30 से अधिक रचना संग्रह प्रकाशित है, जिसमें 20 से अधिक बाल-साहित्य हैं. प्रमुख चर्चित पुस्तकें हैं- पंछी गाएं आसमान में, नाच रही है मछली रानी, नाव चली हैया-हैया, कहानी संग्रह- ‘उड़ान’, छत्तीसगढ़ी संग्रह- रातिहा पहागे, सूरुज कहाँ लुकागे, चिंकी के सपना, सुरुज नवा उगइया हे, बगरे हे अंजोर मया के अंजोर, पहाती के सुकवा, अब पलाश में अंगार कहाँ. • बलदाऊ राम साहू छत्तीसगढ़ी साहित्य, लोक भाषा, लोक-संस्कृति के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं. उन्हें अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है. • संप्रति : अध्यक्ष- हिंदी साहित्य भारती छत्तीसगढ़, सदस्य- राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग छत्तीसगढ़ एवं सदस्य राजभाषा सलाहकार, पशु पालन, मत्स्य, डेयरी मंत्रालय भारत सरकार दिल्ली के दायित्वों का निर्वहन करते हुए अनवरत साहित्य साधनारत हैं. – संपादक ]
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• चाँद पाने की चाह
– बलदाऊ राम साहू
[ छत्तीसगढ़ दुर्ग ]

मुनिया अपनी मम्मी से बहुत प्यार करती थी और मम्मी भी उसे पलकों पर बिठाकर रखती थीं। मुनिया बहुत जिज्ञासु थी। उसे हर चीज़ के बारे में जानना अच्छा लगता था। इसीलिए वह अपनी भाँ से तरह-तरह के प्रश्न करती रहती थीं।
एक रात, मुनिया अपनी मम्मी के साथ छत पर टहल रही थीं। आसमान में तारों की बारात सजी हुई थी। तभी मुनिया की नज़र उस बड़े गोल और चमकते हुए चाँद पर पड़ी। वह थोड़ी देर तक चाँद को देखती रही और फिर अपनी मम्मी से बोली, “मम्मी, मम्मी! मुझे वह चाँद दिला दो ना। वह कितना सुंदर है!”
मम्मी ने मुस्कुराकर कहा, “मुनिया, चाँद बहुत दूर है। उसे कोई नहीं ला सकता।”
“कोई नहीं?”
“हाँ, कोई नहीं।”
पर मुनिया तो मुनिया थी। वह कहाँ मानने वाली थी! उसने फिर कहा, “नहीं मम्मी, मुझे वह चाँद चाहिए। या तो आप मुझे वह चाँद दिला दो, या फिर मुझे वहाँ जाने का रास्ता बता दो। मैं खुद जाकर ले आऊँगी।”
मम्मी ने मुनिया को समझाने की कोशिश की, पर मुनिया की ज़िद तो बस चाँद पर ही टिकी थी और वह सोचने लगी कि आखिर चंदा भैया रोज़-रोज़ आसमान में क्या करते होंगे? और उन प्यारे-प्यारे तारों से क्या बातें करते होंगे? उसके मन में चाँद को देखने की और उससे मिलने की बहुत बड़ी इच्छा थी।
तभी मुनिया को अपने भाई मुन्नू की याद आई। मुन्नू हमेशा बड़ी-बड़ी बातें करता था। मुनिया ने मम्मी को बताया, “मम्मी, पता है? मुन्नू भैया ने मुझे कहा था कि वह मेरे लिए आसमान से सारे तारे तोड़कर लाएगा और मुझे प्यार से देगा। पर वह मुझे चाँद नहीं दिला सकता क्या?”
मम्मी मुनिया की बातों पर मुस्कुरा दीं। वह जानती थीं कि मुनिया अभी छोटी है और उसकी ज़िद भी प्यारी है। उन्होंने मुनिया को गले से लगा लिया और प्यार से बोलीं, “मुनिया, मुन्नू ने तुम्हें तारे तोड़ने की बात की थी, पर वह तारे नहीं ला सकता। चाँद तो बहुत बड़ा है और तारे भी बहुत बड़े हैं। चूँकि वे हमसे बहुत दूर हैं, इसीलिए वे छोटे-छोटे दिखते हैं। जब तुम बड़ी हो जाओगी और स्कूल में चांद-तारों के बारे पढ़ोगी तब खुद समझ जाओगे, ये सब सौर मंडल के ग्रह- नक्षत्र हैं। पर तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हें चाँद से भी सुंदर चीज़ दिलाऊँगी।”
मुनिया ने अपनी मम्मी की आँखों में देखा और पूछा, “क्या, मम्मी?”
मम्मी ने प्यार से मुनिया के माथे को चूमा और कहा, “मेरे लिए तो तुम और मुन्नू ही चाँद हो, मुनिया। तुम दोनों का मुस्कुराता हुआ चेहरा मेरे लिए चाँद से भी ज़्यादा सुंदर है।”
मुनिया को अपनी मम्मी की बात सुनकर बहुत अच्छा लगा। वह समझ गई कि माँ का प्यार सबसे अनमोल है। उसने सोचा, “चाँद तो बहुत दूर है, पर माँ तो मेरे पास है। और माँ का प्यार तो चाँद से भी ज़्यादा चमकता है। उसने लगा सच में उसके पास तो अनमोल तोहफा माँ का प्यार है।”
उस रात मुनिया अपनी मम्मी की बाहों में चैन की नींद सोई।
• लेखक संपर्क-
• 94076 50458
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chhattisgarhaaspaas
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