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डॉ. संजय दानी की तृतीय कहानी संग्रह ‘गुस्ताखी माफ़’ का हुआ विमोचन

👉 • ‘गुस्ताखी माफ़’ विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व आईएएस व कवि-लेखक संजय अलंग थे. अध्यक्षता ‘छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के प्रदेश अध्यक्ष व सुप्रसिद्ध कवि- व्यंग्यकार रवि श्रीवास्तव ने किया. समीक्षक रहे- कथाकार लोकबाबू और डॉ. परदेशीराम वर्मा.

👉 [बाएँ से] • संचालन शाद बिलासपुरी, लेखक डॉ. संजय दानी, लोकबाबू, डॉ. संजय अलंग, रवि श्रीवास्तव और डॉ. परदेशीराम वर्मा
• छत्तीसगढ़ आसपास
• दुर्ग
दुर्ग [30 सितम्बर, 2026 : डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’] : दुर्ग शहर के मोहननगर स्थित ‘आईएमए भवन सभागार’ में साहित्यकार व चिकित्सक डॉ. संजय दानी की तीसरी कहानी संग्रह ‘गुस्ताखी माफ़’ का विमोचन दुर्ग-भिलाई के 100 साहित्यकारों की उपस्थिति में मुख्य अतिथि डॉ. संजय अलंग द्वारा किया गया. इस अवसर पर रवि श्रीवास्तव, लोकबाबू, डॉ. परदेशीराम वर्मा, डॉ. संजय दानी, डॉ. ममता दानी, अनुराग दानी एवं दानी परिवार के सदस्य विमोचन के साक्षी बने. कार्यक्रम का आयोजन दानी परिवार ने किया था.
प्रारंभ में अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की. स्वागत उद्बोधन देते हुए डॉ. ममता दानी ने लेखकीय परिचय देते हुए कहा कि-

डॉ. संजय दानी की ‘गुस्ताखी माफ़’ 10वीं किताब है. कहानी संग्रह 3री है. इसके पूर्व दो कहानी संग्रह- ‘इंद्रधनुष’ और ‘रिश्तों की बुनियाद’ प्रकाशित हुई. अन्य संग्रह हैं- ‘मेरी ग़ज़ल मेरी हमशक्ल’ [ग़ज़ल] ‘ख़ुदा खैर करें’ [ग़ज़ल] चश्मेबद्दूर [ग़ज़ल] ‘आगरा 15 कि. मी.’ [उपन्यास] ‘पंछीवाला’ [उपन्यास] ‘आरक्षण’ [उपन्यास] ‘लव ज़िहाद’ [उपन्यास] डॉ. संजय दानी हिंदी, उर्दू, छत्तीसगढ़ी भाषा में सिद्धहस्त हैं. सहज एवं सरल शब्दों में अपनी बात करते हैं. इनकी रचनाओं में चिंताएं और सरोकार साफ होती है. इनकी रचनाओं में घर, परिवार, पड़ोस से लेकर देश, परदेश सांस लेती हैं. आज इस विमोचन कार्यक्रम में आप सबका दानी परिवार की तरफ से हृदय से अभिवादन करती हूँ.
डॉ. संजय अलंग ने कहा कि डॉ. संजय दानी की अधिकांश कहानियों के केंद्र बिंदू दुर्ग शहर के आसपास के गांव हैं और उनके पात्र भी हमारे बीच के ही लोग हैं. इनकी सारी कहानियां आपसी सौहार्द की बातें करती नज़र आ रही हैं. जब तक हम अपने आसपास, अपने समाज, अपने शहर की बातों को एवं समस्याओं को अच्छे से न समझे व उनका समाधान ढुंढ़ने का प्रयास न करें, तब तक हम वैश्विकता के ढाँचे में खुद को नहीं ढाल सकते.
रवि श्रीवास्तव, लोकबाबू और डॉ. परदेशीराम वर्मा ने भी अपनी बात रखते हुए बोले कि-
डॉ. संजय दानी की अधिकांश कहानियां घटना प्रधान है. कहानियों में घटनाएं इतनी तेजी से बदलती हैं कि पाठक की उत्सुकता अंत तक बरकरार रहती है. एक कहानी को जब हम पढ़ना शुरू करते हैं तो अंत तक पहुंचे बिना मन नहीं भरता. डॉ. संजय दानी की कहानियां पारंपरिक कहानियों की श्रेणी में रखी जा सकती हैं. शब्दों की बाज़ीगरी से वे ख़ुद को दूर रखते हैं, कहानियां सरल है, जो पाठकों को बांधकर रखने में पूरी तरह से सक्षम है.
डॉ. संजय दानी अपने साहित्यिक सफर के बारे में बताया और संग्रह में से दो कहानियों का वाचन किया.
संचालन शायर ईसराइल बेग शाद बिलासपुरी ने किया और आभार व्यक्त डॉ. संजय दानी के सुपुत्र अनुराग दानी ने दिया.
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इस गरिमामयी विमोचन कार्यक्रम ‘गुस्ताखी माफ़’ के साक्षी बनें, आप प्रमुख बुद्धिजीवी-


सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विनोद साव, कथाकार गुलबीर सिंह भाटिया, दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति की पूर्व अध्यक्ष व लेखिका सरला शर्मा, प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, ‘आरंभ’ के संयुक्त सचिव आलोक कुमार चंदा, राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक, त्रयम्बक राव साटकर ‘अंबर’, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, सुशील यादव, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल ‘सोनपांडर’, शायर रौनक जमाल, रऊफ कुरैशी, दीपक दुबे, संजय तिवारी, सरिता शर्मा, मो. हाजी रियाज़ खान गौहर, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, वासुकी प्रसाद ‘उन्मत’, ओमप्रकाश जायसवाल, राजकुमार चौधरी, मो. इकबाल खान ‘तन्हा’, हाजी तिहार निज़ाम, इंद्रजीत दादर ‘निशाचर’, डॉ. प्रशांत कानस्कर, और सुपरिचित कवयित्री शुचि ‘भवि’ एवं डॉ. संजय दानी परिवार के लोग.

👉 • इस अवसर पर चर्चित कवयित्री शुचि ‘भवि’ ने अपनी एक काव्य संग्रह ‘बाहों में आकाश’ डॉ. संजय अलंग को सप्रेम भेंट किया
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• समारोह की कुछ और प्रमुख सचित्र-




[ • रपट एवं फोटो संयोजन- डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
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