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छत्तीसगढ़ में 34 पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित, आवारा कुत्तों की होगी नसबंदी-टीकाकरण, 199 आश्रय स्थल भी तैयार

रायपुर। प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण और लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार ने सभी 33 जिलों में 34 पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों में आवारा कुत्तों की नसबंदी के साथ टीकाकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के साथ रेबीज जैसी बीमारियों के खतरे को कम करना है।
199 आश्रय स्थल तैयार
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अनुसार, प्रदेश में आवारा कुत्तों के लिए 199 आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। इनकी कुल क्षमता 4,340 कुत्तों की है। आश्रय स्थलों के रखरखाव और प्रबंधन के लिए 462 कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
नसबंदी के लिए आवारा कुत्तों को पकड़ने के काम में 827 लोग लगाए गए हैं। इनके लिए 39 वाहन और 347 कैचिंग नेट उपलब्ध कराए गए हैं। प्रदेश के 194 नगरीय निकायों में 2,593 समर्पित भोजन स्थलों का भी चिन्हांकन किया गया है।
जिला स्तर पर बनाए गए पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों में पशु चिकित्सकों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद से अभियान चल रहा है। स्थानीय निकायों के सहयोग से आवारा कुत्तों को पकड़कर केंद्रों तक लाया जाता है। नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनकी देखभाल की जाती है और स्वस्थ होने पर निर्धारित स्थान पर वापस छोड़ दिया जाता है।
संस्थाओं में प्रवेश पर रोक की व्यवस्था
विभाग की ओर से प्रदेश में कुल 51,160 संस्थाओं का चिन्हांकन किया गया है। इनमें आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए 49,458 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। संस्थाओं के प्रवेश द्वार पर आवश्यक सूचना वाले नोटिस बोर्ड भी लगाए गए हैं।
इसके अलावा 44,204 संस्थाओं में फेंसिंग, बाउंड्रीवाल, गेट सहित अन्य आवश्यक अधोसंरचना तैयार की गई है। व्यवस्था की निगरानी के लिए 1,424 निरीक्षणकर्ता अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
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