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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-131’ में शामिल हुए- पल्लव चटर्जी, प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य और तापस किरण रॉय
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-131’ में शामिल हुए- पल्लव चटर्जी, प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य और तापस किरण रॉय

👉 [बाएँ से] • विपुल सेन, सुजॉशा सेन, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, पं. वासुदेब भट्टाचार्य और तापस किरण रॉय [फोटो क्लिक- पल्लव चटर्जी]
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• भिलाई [12 सितम्बर, 2026] : साहित्य, कला-संस्कृति की नगरी भिलाई में विगत 65 वर्षों से बांग्ला भाषा के उन्ननयन को लेकर संचालित हो रही है ‘बंगीय साहित्य संस्था’. इसकी परिकल्पना स्व. शिबव्रत देवान जी, डॉ. भवानी प्रसाद मुखोपाध्याय, समरेंद्र विश्वास एवं कुछ साहित्यिक मित्रों ने की थी. वर्तमान में इसकी सभापति बानी चक्रवर्ती, उपसभापति स्मृति दत्त, दीपाली दासगुप्ता, महासचिव शुभेंदु बागची, उपसचिव प्रकाशचंद्र मण्डल, कोषाध्यक्ष पल्लव चटर्जी एवं संरक्षक समरेंद्र विश्वास हैं. संस्था के सौजन्य से बांग्ला भाषा में एक लिटिल मैंग्जिन ‘मध्यबलय’ का निरंतर प्रकाशन किया जा रहा है. ‘मध्यबलय’ के संपादक बांग्ला के देशव्यापी प्रगतिशील एवं प्रगतिवादी कवि दुलाल समाद्दार हैं. इनके संपादन में ‘मध्यबलय’ को कोलकाता के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा अनेकों बार उत्कृष्ट पत्रिका व संपादन का पुरुस्कार प्राप्त हो चुका है.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा प्रतिमाह साहित्य सभा, प्रति सप्ताह साहित्य अड्डा एवं साल में एक बार साहित्य महासम्मेलन का भव्य आयोजन करते आ रही है. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने अपना 60 साल का विशेष महासम्मेलन स्व. शिबव्रत देवानजी के नेतृत्व में मनाया था और हाल ही में बानी चक्रवर्ती एवं शुभेंदु बागची के नेतृत्व एवं समस्त सदस्यों के सहयोग से ‘रवींद्र-नज़रूल’ उत्सव का भव्य आयोजन किया गया था.
‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार की अर्धांगिनी स्व. खुकु समाद्दार की याद में समाद्दार परिवार की तरफ से प्रति वर्ष ‘खुकु दुलाल समाद्दार साहित्यिक अनुष्ठान’ भव्यता से मनाया जा रहा है. इस आयोजन में कोलकाता से सुप्रसिद्ध साहित्यकारों की उपस्थिति होती है. देशभर से मंगाए गए कविताओं को निर्णायक समिति की अनुशंसा पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरुस्कार [नगद राशि, मोमेंटों, शॉल-श्रीफल, सम्मान पत्र] प्रदान किया जाता है. ‘खुकु दुलाल समाद्दार साहित्यिक फाउंडेशन’ एक स्वतंत्र समिति है, मगर इसका आयोजन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के बैनर तले बीते दो वर्षों से किया जा रहा है. वर्ष- 2026 का आयोजन 29 नवम्बर को किया जाएगा. पुरुस्कारों की घोषणा हो चुकी है. समारोह की विधिवत आमंत्रण सूचना ‘खुकु दुलाल समाद्दार फाउंडेशन’ द्वारा निर्धारित समयपूर्व दी जाएगी.

👉 • रवींद्र-नज़रूल उत्सव- 2026
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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफ़ी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श अड्डा-131’ की अध्यक्षता राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक ने किया. कुशल संचालन बांग्ला-हिंदी के वैचारिक कवि एवं नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया. आभार व्यक्त भाषा-शिल्प लेखक कवि वीरेंद्रनाथ सरकार ने दिया.
प्रारंभ में उपस्थित सदस्यों ने हिंदी दिवस की महत्ता के बारे में बताया. प्रकाशचंद्र मण्डल ने पिछले दो साल की तीन पुरस्कृत हिंदी किताबों के बारे में विस्तृत जानकारी दी. साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त ममता कालिया की कृति ‘जीते जी इलाहबाद’, साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार प्राप्त पार्वती तिर्की की ‘फिर उगना’ और सूर्यबाला की पुस्तक ‘कौन देश को वासी-वेणु की डायरी’ का जिक्र किया.
‘अड्डा-131’ के सभापति ब्रजेश मल्लिक ने कहा कि- 4 अक्टूबर, 1977 को भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें सत्र में हिंदी में भाषण दिया था. विश्व मंच पर हिंदी में भाषण देना अपने आप में ऐतिहासिक रहा. अंग्रेजी भाषा अंतर्राष्ट्रीय पटल पर जरूरी है पर हिंदी की गरिमा एवं प्रभाव को हम सबको रेखांकित करते रहना है, खासकर हम साहित्यकारों को इस दायित्व को निभाना है.

इस अवसर पर सुजॉशा सेन ने बरनाली सेन की कविता ‘छाड़ पत्र’/तापस किरण रॉय ने बाउल कविता ‘सेल्फ़ी’/पं. वासुदेब भट्टाचार्य ने कहानी ‘शुभप्रभात’/वीरेंद्रनाथ सरकार ने लघुकथा ‘जीवन मृत्यु’ और ‘चिट्ठी’/ब्रजेश मल्लिक ने ‘राजबाड़ी’ कविता/विपुल सेन ने श्मशानेर देउयाले लिखित कविता ‘शरतेर आगमणी’/ पल्लव चटर्जी ने कविता ‘एआई’ और प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘जिस दिन मेरा दम निकलेगा’ एवं ‘शांति ओ शांति’ का पाठ किया.
[ • रपट एवं फोटो संयोजन- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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