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न सरकार का मुंह देखा और न ही संसाधनों की चिंता की, बीजापुर में दो सौ ग्रामीणों ने बना डाला विकास का संपर्क सेतु

बीजापुर। विकास और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे बीजापुर जिले से आत्मनिर्भरता और सामुदायिक एकता की अद्भुत मिसाल सामने आई है। ग्राम पंचायत पेद्दाकोड़ेपाल के आश्रित गांव कोयाईटपाल-डोगरीपारा के निवासियों ने किसी सरकारी मदद का इंतजार किए बिना, अपनी सालों पुरानी आवागमन की समस्या को खुद ही दूर कर लिया है। क्षेत्र के लगभग 200 ग्रामीणों ने एक साथ मिलकर सामूहिक श्रमदान किया और बहते नाले पर लकड़ी का एक अस्थायी पुल बनाकर तैयार कर दिया।
बरसात में बढ़ जाती थी मुसीबत
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, देश की आजादी के इतने दशकों बाद भी उनके इलाके में एक पक्की पुलिया का निर्माण नहीं हो सका था। हर साल वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही यहाँ की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। नदी-नाले उफान पर आने से बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता था और बुजुर्गों, मरीजों तथा गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भारी जोखिम उठाना पड़ता था। आवश्यक कार्यों के लिए लोगों को मीलों लंबा और खतरनाक रास्ता तय करना पड़ता था। इसी संकट को देखते हुए इस बार मानसून की बारिश शुरू होने से ठीक पहले ग्रामीणों ने यह कदम उठाया।
पूर्व मंत्री ने दिया पक्की पुलिया का आश्वासन
ग्रामीणों के इस सराहनीय प्रयास की भनक लगते ही भाजपा सोशल मीडिया जिला संयोजक के.जी. सुधाकर, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष संदीप तेलम और सहसंयोजक जितेंद्र तेलम मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों का हौसला बढ़ाया और इस गंभीर समस्या से पूर्व मंत्री महेश गागड़ा को अवगत कराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि जैसे ही वर्षा ऋतु समाप्त होगी, वैसे ही यहाँ छह मीटर लंबी नवीन पक्की पुलिया के निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ शुरू करा दिया जाएगा।
आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल
गांव वालों द्वारा बिना किसी प्रशासनिक सहायता के महज आपसी सहयोग से तैयार किया गया यह लकड़ी का पुल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व मंत्री से मिले आश्वासन के बाद अब उन्हें उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनकी यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। पक्की पुलिया का निर्माण होने से न सिर्फ सुरक्षित आवागमन संभव होगा, बल्कि इस सुदूर वनांचल क्षेत्र के विकास को भी एक नई दिशा मिलेगी।
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