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■मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के लिए पहली रचना : अवनीश देबनाथ.
4 years ago
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■अवनीश देबनाथ
[ जिंदल उ.मा.वि.अंग्रेज़ी माध्यम, रायगढ़-छत्तीसगढ़ में 6वीं में अध्ययनरत हैं बाल कवि ]
♀ मेरी पतंग
रंग-बिरंगी तितली जैसी उड़ती मेरी पतंग।
झूमना उसका देख हो रहा आसमान भी दंग।।
चुन्नू-मुन्नू-मुनिया मुझसे दूर रहो तुम तीनों।
पतंग बँधी है जिस मांझे से तुम उसको न छीनो।।
बारी-बारी सबको दूँगी उडा़ने मेरी पतंग,
रंग-बिरंगी तितली जैसी उड़ती मेरी पतंग…..
आजा़दी का पाठ पढा़ती सबको मेरी पतंग।
हाल बुरा होता है जब भी हाथ से छूटे पतंग।।
नहीं चाहती कभी किसी की कट जाये उड़ती पतंग,
रंग-बिरंगी तितली जैसी उड़ती मेरी पतंग….
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chhattisgarhaaspaas
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