• Chhattisgarh
  • ■समीक्षा : धूप की मछलियाँ-डॉ. अनिता कपूर.

■समीक्षा : धूप की मछलियाँ-डॉ. अनिता कपूर.

5 years ago
868

【 डॉ. अनिता कपूर रिवाड़ी भारत से हैं, वर्तमान में कैलिफोर्निया USA में निवासरत हैं. ‘विश्व हिंदी संस्थान कनाडा’ कैलिफोर्निया शाखा की अध्य्क्ष हैं. कई वर्षों तक अमेरिका में हिंदी समाचार पत्र का संपादन भी किया. डॉ. अनिता कपूर लिखित ‘धूप की मछलियाँ’ कहानी संग्रह की समीक्षा सुप्रशिद्ध समीक्षक विजय कुमार तिवारी ने ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के लिए प्रेषित किया है,पढ़ें- -सम्पादक 】

♀ धूप की मछलियाँ
♀ डॉ. अनिता कपूर
♀ विजय कुमार तिवारी

समीक्षा करते समय केवल सारांश प्रस्तुत करना सम्यक नहीं है। रचना के पात्रों की परिस्थितियाँ,उनके संघर्ष,उनकी संभावनाएं,सुख-दुख,रचनाकार की प्रतिबद्धता और समझ सब तो परिदृश्य में उभरते ही हैं। विद्वतजनों ने खूब विवेचनाएं की हैं और आधार के सन्दर्भ में समृद्ध परम्परा विकसित की है। लेखन एक कला है,समीक्षा को भी स्वतन्त्र तरीके से बुना-देखा जाना चाहिए। यह सही है कि समीक्षा रचना आधारित होती है परन्तु चिन्तन किया जाय तो इसे भी प्रभावशाली बनाने की प्रविधियाँ विकसित की जा सकती हैं। लेखक या रचनाकार की संघर्ष-चेतना,प्रतिबद्धता,भाषा और शैली के संस्कार उभरने ही चाहिए।

पक्ष और विपक्ष में बहुत सी चर्चाएं हो रही हैं तथा मारकाट मची हुई है। उचित है या नहीं,यह तो बाद का विषय है,इसके होने को कोई रोक नहीं सकता। दरअसल सब कुछ मनुष्य की प्रवृत्तियों और चिन्तन से जुड़ा हुआ है। हमारा या हमारे समाज का चिन्तन जितना सारगर्भित और महत्वपूर्ण होगा,सृजन भी श्रेष्ठ होता जायेगा। इसके पक्ष में अन्यान्य बातें की जा सकती हैं। इतना तो स्वीकार करना ही चाहिए, कोई भी रचनाकार कुछ लिखता है,उससे पहले,लेखन के पूर्व की सम्पूर्ण प्रक्रियाओं से गुजरता ही है। अभी तक हमारे साहित्य चिन्तन में ऐसे तत्वों की पड़ताल कम ही हुई है। मान लेना चाहिए कि लेखक का भीतरी, किसी घटना से ,परिस्थिति से,व्यक्ति या व्यक्ति-समूहों से प्रभावित हुए बिना लिख ही नहीं सकता। आदर्श परिस्थितियों से विचलन लेखक सह नहीं सकता,उसकी कलम जय बोलने लगती है। सारांशतः हर लेखक को समुचित सम्मान दिया जाना चाहिए क्योंकि वह ऐसा चितेरा है जो संगतियों-विसंगतियों को पहचानता है और समाज को दिशा देता है। देश हो या विदेश,पूरी दुनिया में साहित्यकार अपने-अपने तरीके से सृजन में लगे हैं और मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

हिन्दी साहित्य में प्रवासी भारतीयों ने कम योगदान नहीं किया है और विदेशी भूमियों पर रहते हुए साहित्य को,नाना विधाओं से समृद्ध कर रहे हैं। एक ऐसी ही प्रतिबद्ध और समर्पित प्रवासी भारतीय लेखिका हैं-डा० अनिता कपूर, अमेरिका के कैलीफोर्निया में रहते हुए सतत लेखन-सृजन में लगी हैं। ‘धूप की मछलियाँ’ उनकी लघुकथाओं का संग्रह मेरे हाथों में है और अच्छा लग रहा है उनकी भावनाओं,संवेदनाओं और सुखद जीवन की उड़ान देखकर। डा० चंद्रेश कुमार छतलानी ने उनके लिए शुभकामना संदेश लिखा है,”वस्तुतः हिन्दी साहित्य में सार्थक कार्यों की महती परम्पराओं द्वारा पाठकों में उचित सन्देश प्रेषित करती लघुकथाओं का यह संग्रह ‘धूप की मछलियाँ’ सामयिक पाठक पीढ़ी के लिए सत्प्रेरणादायक सिद्ध हो सकता है जो कि अभिनंदनीय है।”

भूमिका के तौर पर डा० अनिता कपूर ने ‘कहानी लिखना एक कला है’ शीर्षक से अपना मन्तव्य लिखा है-“वह यानी लेखक अपनी कल्पना और वर्णन शक्ति से कहानी के कथानक,पात्र या वातावरण को प्रभावशाली बना देता है।— लेखक की भाषा-शैली पर बहुत कुछ निर्भर करता है। —आज की कहानी व्यक्तिवादी है जो व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक सत्य का उद्घाटन करती है।—लघुकथा आसान विधा नहीं है।” साथ ही उन्होंने लघुकथा सम्बन्धी अपना चिन्तन भी लिखा है। पाठक और साहित्य के मर्मज्ञ सहमत हो सकते हैं और नहीं भी हो सकते। इतना अवश्य है कि डा० अनिता कपूर ने अमेरिकी धरती से भारत को,यहाँ के पात्रों को और उनके जीवन संघर्षों को देखा है,अनुभव किया है और हमारे लिए संजोया है। ये पात्र विदेशों में बस गये हैं या रह रहे हैं। इस संग्रह में कुल 30 लघुकथाएं संग्रहित हुई हैं। प्रवासी होने के साथ-साथ वे भ्रमणशील भी हैं। अतः उम्मीद किया जाना चाहिए कि उनके अनुभव का दायरा विस्तृत होगा। उनके इस पुनीत कार्य के लिए अपनी और आप सभी की ओर से बधाई देता हूँ।

डा० अनिता कपूर जी की कहानियाँ सीधी-सपाट भाषा में लिखी गयी हैं। शुरु-शुरु में यह सहजता शायद निराश करे,यह तो होता ही है,परन्तु अंत आते-आते हर कहानी हमारे सामने कोई न कोई प्रश्न खड़ा कर ही देती है। इसे उनकी विशेषता के रुप में लेना चाहिए और सम्पूर्ण समाज के हित में विस्तार देते हुए सोचना चाहिए। पहली ही कहानी ‘मानसिकता’ में सब कुछ स्वतः उजागर होता हुआ दिखता है,प्रश्न तो है और उत्तर हम सभी को खोजना है। वैसे ही अगली कहानी ‘मास्क’ के बारे में चिन्तन कीजिए। हमारे सम्बन्ध ऐसे क्यों हैं?क्यों कोई भाई ऐसा करता है?उसे तो सुख में,दुख में साथ रहना चाहिए था। ठीक ही तो लिखा गया है,कोरोना काल में रिश्तों के मास्क परत-दर-परत उतर गये हैं। अपनी कहानियों में डा० अनिता कपूर ने अपने अनुभूत या आसपास के समाज में घटित सत्य को उजागर किया है। ‘फाहा’ की सुनन्दा की पीड़ा,उनके साथ घटा हुआ सत्य विचलित करता है और यह संदेश देता है कि ईश्वर ने हमारे भीतर बहुत से गुण और कलायें भर रखी हैं जो हमारे जीवन का आधार हो सकती हैं,वरना रिश्ते-नाते तो स्वार्थ में दुखी ही करते हैं। ‘अमिया’कहानी में भी सम्बन्धों को लेकर वही निराशा की भावनाएं हैं जबकि बाहर समृद्धि है और सुख के सभी साधन हैं। ‘बेटी’ कहानी भी रिश्तों पर प्रश्न उठाती है। धन और सम्पत्ति के आगे लोग अंधे हो जाते हैं,जिम्मेदारियाँ और नैतिकता को तिलांजलि दे देते हैं। अपनों के बजाय पराये मदद करते हैं।

रिश्तों को लेकर दुनिया में बहुत लिखा गया है। रिश्ते दुखी भी करते हैं और सुख भी देते हैं। महत्वपूर्ण है कि हमारे हिस्से में क्या आया है और हम अपने सम्बन्धों के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं? ‘विसर्जन’ अकेलेपन से जूझते वृद्ध की कहानी है। कम शब्दों में पूरी व्यथा उभर आयी है। कहानी में अकेले से जूझने का समाधान बताया गया है। बेहतर तो यही है कि हमसे जो बन पड़े,हम अपनी सक्रियता बढ़ाएं और प्रसन्न रहने की कोशिश करें। ‘गर्व’ किंचित भटकाव के साथ उभरती कहानी है। उद्देश्य और कथानक सार्थक है और सम्प्रेषण यानी बातचीत करके स्थिति स्पष्ट की गयी है जिसका अच्छा प्रभाव पड़ा है। ‘आइनों के जाले’ दुखद कहानी है। पाश्चात्य देशों में रह रहे ऐसे बेटों पर प्रश्न उठाती कहानी है जो अपनी मां को बेसहारा छोड़ देते हैं। आशा जी स्वयं को सक्रिय करती हैं,कहती हैं,” अब मैं अपने जैसे आईनों को देखती हूँ तो तुरत उसके जाले हटाने में जुट जाती हूँ। ‘ग्रहण’ कहानी में स्वार्थ और बेईमानी है। डा० अनिता जी को ऐसे लोग ज्यादा मिले हैं जो इस हद तक गिरते हैं और रिश्तों की मर्यादा तोड़ते हैं। ‘गरीबी का इलाज’ की स्थिति स्वतः स्पष्ट है। दो देशों के बीच आने-जाने के नियम होते हैं। अबैध तरीके से बार्डर पार करते हुए पति मारा जाता है। मारिया अमेरिका में रह रही है और जीविका के लिए साफ-सफाई का काम करती है। प्रश्न सोचने पर विवश करता है,पता नहीं यह अमेरिका का आकर्षण है या अपने को खो कर गरीबी का इलाज?

‘गंगा-जल’बहुत ही मार्मिक भाव-दशा का चित्रण करती कहानी है। अपने अंतिम क्रिया-कर्म के लिए बीमा ले लेने के बाद गुप्ता जी को लगा-इस वृद्धाश्रम और अपनों के बीच ठहरे पानी पर जमी काई से जो दुर्गन्ध आने लगी थी, वो अब गंगा-जल हो गयी है। ‘पेट की सरहद’ थोड़े अलग तरह की मानसिकता बयान करती कहानी है। नासिरा पाकिस्तान से आयी मिठाइयाँ परोसकर कहती है,”अरे जमीनी सरहदें तो सियासी हैं पर पेट की नहीं।” असुरक्षा की भावना से ग्रसित सोनी की कहानी ‘असुरक्षा’ व्यथित करती है। सोनी ऐसा कैसे कर सकती है? दोस्ती के नाम पर ऐसा शोषण? कहानी का संदेश यह भी है कि किसी के लिए चिन्ता करते समय वस्तु-स्थिति की पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए। ‘इतिहास’ कहानी में व्यक्त हुई पीड़ा किसी मां को न झेलना पड़े। मां जाते हुए पुत्र को व्यथित हो देखते हुए कहती है,”बेटा! इतिहास कभी न कभी अपने आप को दोहराता जरूर है। तुम्हारी पत्नी भी तो कभी सास बनेगी। तुम भी तो कभी बूढ़े होगे एक दिन।” अगली कहानी ‘एक बेटी यह भी’ में बेटी के द्वारा दुत्कारे जाने पर मां दुखी होकर बुदबुदाती है,”बच्चों! इतिहास खुद को अवश्य दोहराता है—तुम देखना एक दिन।”

हमारे समाज में लड़का-लड़की की मानसिकता भरी हुई है। अजय को लड़का चाहिए और पत्नी रुचि को लड़की। रुचि कारण बताती है,”मैं नहीं चाहती,मेरा बेटा बड़ा होकर मुझे भुला दे जैसे तुमने अपनी मां के साथ किया है।” अजय सम्हलता है और मां को लाने चल पड़ता है। ‘सही तस्वीर’ अच्छी कहानी है। ‘हैलो 911′ की तत्परता और व्यवस्था देख कहानीकार के मन में आता है,हे ईश्वर! बुजुर्गो के दुख व अकेलेपन का अहसास कराने वाली ऐसी ही कोई अलर्ट चीप उनके बच्चों के हृदय से जुड़ा हो।” अकेलेपन के अहसास को जीना कठिन है।’दिस इस अमेरिका’ की मार्मिकता प्रभावित करती है। जार्ज ने कहा,”आपके अकेलेपन से मेरी निःशब्द दोस्ती हो गयी है। आप वापस अपने देश लौट जाओ।” एक दिन नीना ने देखा,जार्ज के घर के सामने भीड़ लगी है और उन्हें वैन में रखा जा रहा है। नीना घबरा कर बैठ गयी। उसे जार्ज के बंद दरवाजे पर पसरे सन्नाटे ने भविष्य का आईना दिखा दिया। ‘सेवा’ ऐसी ही मार्मिक कहानी है। बेटा मां-बाप को छोड़ दिया है। दोनों गुरु द्वारे में सेवा करके जी रहे हैं। अमेरिका में बच्चे भी वही खेल खेलते हैं जो अपने आसपास घटित होते देखते हैं। बच्चों का बंटवारा हो जाता है। स्वीटी कहती है,’इस सप्ताह मैं पापा के घर रहने जा रही हूँ,अगले संडे मम्मी के पास वापस आऊँगी।’

‘आई लव यू’ में व्यक्त भाव गहरी पीड़ा का संकेत दे रहे हैं। लाॅकडाउन के दौर में पहले वाली बातें नहीं रहीं। आज ऐसे तैयार हो रहे हैं जैसे कोई दुल्हा। एक तरह से यहाँ व्यंग्य भाव भी है। ‘बुजुर्ग’ कहानी की अलग समस्या है। बच्चा बीमार है। मां-बाप दोनों नौकरी करते हैं। भारत से किसी बुजुर्ग को बुलाने की योजना बनी है। मीना एलान करती है कि उसकी मां आ रही है। सुरेश को अपनी मां की याद आती है जो किसी वृद्धाश्रम में है। वह बुदबुदाता है,”भगवान! मेरी बीबी सास तो बने पर बेटा मेरे जैसा न बने।” कहानी ‘

‘उतरन’ में सुखी,सम्पन्न सी दिखने वाली लड़की के कारनामे निराले हैं। उसने अपने सामान्य पति को छोड़ा और दीदी के पति से शादी कर ली,दीदी का सम्बन्ध-विच्छेद करवा दिया। आज उसकी दीदी शहर की मेयर है और वह किसी की उतरन पर खुश है। ‘प्रतिक्रिया’ में बेटे के छोड़ जाने की पीड़ा सहेजे सरिता अपने पुत्र अनिल के पुत्र होने के समाचार से खुश नहीं होती,कहती है,”बेटी होती तो अच्छा होता।” उसका मानना है कि बेटियाँ मां की होती हैं और बेटे पराया धन होते हैं।

‘ईश्वर का डबल प्रेम’ रचना अनिता कपूर जी की आत्म-लघुकथा है। इस पर अलग से कुछ कहने की जरुरत नहीं है,जैसा है,स्वीकार कर लेना है। उनके अपने द्वन्द्व-अन्तर्द्वन्द्व हैं,अपनी खोज है और जरूरी भी है। ‘सोने की मुर्गी’ अच्छी व्यंग्य रचना है। जिस खोज में पंडित जी हैं,संजीव बाबू अधिक ही तेज निकले। सम्बन्धों की आड़ में ऐसा ही होता है। ‘चाबी का गुच्छा’ कहानी किसी अश्लील संस्कृति की ओर संकेत करती है। मेघा को पीड़ा है कि उसे उसके पति ने ही ढकेला है। एक महिला के मुँह से अमर्यादित बात सुनकर दुखी होती है।’मेहँदी’ कहानी में सोनिया के प्रश्न ने कि आप विधवा जैसी दिखती नहीं हैं,मिसेज शर्मा को शून्य कर दिया। डा० अनिता कपूर लिखती हैं,”मैं समझ नहीं पाई कि ऐसी स्वार्थी सोच रखने वाली मुखौटा पहने हुए कुछ महिलाएं नारी शक्ति और स्त्री-विमर्श की बातें कर दोगली जिन्दगी कैसे जी लेती हैं। ‘तीसरी पारी’ में पुत्र के शब्द नीरा के मन को बेध रहे हैं। पति के गुजर जाने के बाद उसने सब कुछ किया और आज शादी होते ही पुत्र के शब्दों ने तिराहे पर ला खड़ा कर दिया है। उसे जिन्दगी की तीसरी पारी अकेले ही खेलने के लिए मजबूर कर दिया गया है। नीरा नकारात्मक बातों को परे करती है क्योंकि उसे अपनी उम्मीद को जिंदा रखना है।’आराम’ संग्रह की अंतिम कहानी है। सीमा मुम्बई की अपनी बालकनी में खड़ी है। सामने की जमीन में मकान खड़े हैं जहाँ पाँच वर्षों पहले मजदूरों की झोपड़ियाँ थीं। वह रज्जो से पूछती है। उसका उत्तर है,”मैडम जी! हम मजदूर ही तो हैं। आप लोगों को मकान बनाकर दे दिये और खुद बेघर होकर किसी और का घर बनाने चल दिये।

शीर्षक ‘धूप की मछलियाँ’ रचनाकार की भीतरी तड़प को दर्शाता है। मछलियों का पानी से बाहर जीवित रहना संभव नहीं है,शीघ्र ही उनका प्राणान्त हो जाता है। वैसे ही अपनों के सम्बन्धों से बाहर किसी का भी जीवन सहज नहीं रह जाता। डा० अनिता कपूर का अनुभव हर रचना में बयान हुआ है। उन्होंने अपने आसपास की दुनिया को गहराई से देखा और अनुभव किया है। विदेशों में जा बसे लोगों का अपनी सभ्यता-संस्कृति से लगाव नहीं रह जाता क्या? क्या वे भारतीय संस्कार भूल जाते हैं? क्या सचमुच वे स्वार्थी, निष्ठुर और मां-बाप के प्रति उदासीन हो जाते हैं? यदि ऐसा है तो कहीं न कहीं उनके संस्कार और पालन-पोषण पर प्रश्न खड़े होते हैं। निश्चित ही,ऐसे कुछ ही लोग होंगे,सब के सब ऐसा नहीं करेंगे। एक भी व्यक्ति को ऐसा नहीं होना चाहिए,चाहे देश में हो या विदेश में। ऐसा भी संभव है,संयोग बस डा० अनिता कपूर जी को ऐसे ही लोगों से मिलना हुआ हो। उनकी कहानियाँ अनुभवों पर आधारित हैं,इसलिए कथ्य-कथानक प्रभावित करते हैं और सोचने पर मजबूर करते हैं। भाषा-शैली अनुकूल है,परन्तु कहीं-कहीं मानो जल्दबाजी में प्रवाह टूटता सा दिखता है। उन्हें अपनी कहानियों पर कुछ और श्रम करना चाहिए। पाठक को उनके मन्तव्य या निहितार्थ को समझने में जोर लगाना पड़ता है। कुछ समस्या प्रकाशन के चलते भी है। भाव-संवेदनाएं खूब अभिव्यक्त हुई हैं। कहीं-कहीं व्यंगात्मक भाव भी उभरे हैं। अंग्रेजी शब्दों का बहुतायत प्रयोग हुआ है। लम्बे समय तक विदेश में रहने से ऐसा हुआ होगा। रिश्तों की पड़ताल हर रचना में हुई है,यह शायद उनकी मूल अनुभूति और चिन्तन है। निश्चित ही पाठक उनके अनुभवों से सीखेंगे और जीवन के ऐसे विचलनों से बचेंगे।

■समीक्षक संपर्क-
■94317 73963

◆◆◆ ◆◆◆

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

तलाक की डिक्री पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- सुनवाई का मौका दिए बिना नहीं हो सकता फैसला
breaking Chhattisgarh

तलाक की डिक्री पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- सुनवाई का मौका दिए बिना नहीं हो सकता फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से किया इनकार, कहा- न्यूज रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं
breaking Chhattisgarh

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से किया इनकार, कहा- न्यूज रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं

छत्तीसगढ़ में 8,720 पदों पर होगी भर्ती, 10वीं पास भी कर सकेंगे अप्लाई, जानिए पूरी प्रक्रिया
breaking jobs

छत्तीसगढ़ में 8,720 पदों पर होगी भर्ती, 10वीं पास भी कर सकेंगे अप्लाई, जानिए पूरी प्रक्रिया

चिराग पासवान के छत्तीसगढ़ चुनाव लड़ने के ऐलान पर कांग्रेस का बड़ा हमला, BJP के गठबंधन पर उठ रहे गंभीर सवाल
breaking Chhattisgarh

चिराग पासवान के छत्तीसगढ़ चुनाव लड़ने के ऐलान पर कांग्रेस का बड़ा हमला, BJP के गठबंधन पर उठ रहे गंभीर सवाल

सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve पहुंचे CM साय, छत्तीसगढ़ में इको-टूरिज्म मॉडल विकसित करने पर जोर
breaking Chhattisgarh

सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve पहुंचे CM साय, छत्तीसगढ़ में इको-टूरिज्म मॉडल विकसित करने पर जोर

मानसून की विदाई के साथ बदला छत्तीसगढ़ का मौसम, बढ़ेगा दिन का तापमान, रात में महसूस होगी ठंडक
breaking Chhattisgarh

मानसून की विदाई के साथ बदला छत्तीसगढ़ का मौसम, बढ़ेगा दिन का तापमान, रात में महसूस होगी ठंडक

वरिष्ठ भाजपा नेता अजय चंद्राकर के बिगड़े बोल, अधिकारी को कही गाड़ने की बात, कांग्रेस ने दी मानसिक चेकअप की सलाह
breaking Chhattisgarh

वरिष्ठ भाजपा नेता अजय चंद्राकर के बिगड़े बोल, अधिकारी को कही गाड़ने की बात, कांग्रेस ने दी मानसिक चेकअप की सलाह

इलॉन मस्क का भारतीय मूल की गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप: 4 बच्चों की मां शिवॉन बोलीं- एक हफ्ते में ही आई लव यू कहा था…
breaking Chhattisgarh

इलॉन मस्क का भारतीय मूल की गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप: 4 बच्चों की मां शिवॉन बोलीं- एक हफ्ते में ही आई लव यू कहा था…

भारत ने जीता गोल्ड मेडल, पाकिस्तान को 19 रन से हराया
breaking Chhattisgarh

भारत ने जीता गोल्ड मेडल, पाकिस्तान को 19 रन से हराया

नई सड़क, फोरलेन और बड़े पुल, 672 करोड़ के 24 कामों पर लगी मुहर, जानिए आपके जिले में क्या नया बनेगा
breaking Chhattisgarh

नई सड़क, फोरलेन और बड़े पुल, 672 करोड़ के 24 कामों पर लगी मुहर, जानिए आपके जिले में क्या नया बनेगा

पीएम मोदी से बातचीत में भावुक हुए कैप्टन स्मित, बोले- मुश्किल वक्त में पढ़ रहा था हनुमान चालीसा
breaking National

पीएम मोदी से बातचीत में भावुक हुए कैप्टन स्मित, बोले- मुश्किल वक्त में पढ़ रहा था हनुमान चालीसा

आशीष टिकरिया ने संभाला जनसंपर्क संचालक का पदभार, अधिकारियों-कर्मचारियों ने किया स्वागत
breaking Chhattisgarh

आशीष टिकरिया ने संभाला जनसंपर्क संचालक का पदभार, अधिकारियों-कर्मचारियों ने किया स्वागत

छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई शुरू, अगले 48 घंटे में कई जिलों से होगी वापसी
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई शुरू, अगले 48 घंटे में कई जिलों से होगी वापसी

छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला केस में बड़ी कार्रवाई: भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की मुश्किलें बढ़ीं, EOW ने भेजा नोटिस
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला केस में बड़ी कार्रवाई: भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की मुश्किलें बढ़ीं, EOW ने भेजा नोटिस

LPG सिलिंडर नहीं आ रहा? रायपुर में गैस और बिजली कनेक्शन की e-KYC अनिवार्य, ऑफलाइन-ऑनलाइन ऐसे करें वेरिफिकेशन
breaking Chhattisgarh

LPG सिलिंडर नहीं आ रहा? रायपुर में गैस और बिजली कनेक्शन की e-KYC अनिवार्य, ऑफलाइन-ऑनलाइन ऐसे करें वेरिफिकेशन

सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर बड़ा रुख, न पूरी तरह बैन न 24 घंटे की खुली छूट; तय होगा समय और पटाखों का प्रकार
breaking National

सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर बड़ा रुख, न पूरी तरह बैन न 24 घंटे की खुली छूट; तय होगा समय और पटाखों का प्रकार

केंद्र से बराबर राशि मिलने के बाद कितना हुआ काम? छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की वर्तमान स्थिति बताए राज्य सरकार: हाई कोर्ट
breaking Chhattisgarh

केंद्र से बराबर राशि मिलने के बाद कितना हुआ काम? छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की वर्तमान स्थिति बताए राज्य सरकार: हाई कोर्ट

छत्तीसगढ़ में जमीन का सीमांकन अब घर बैठे, तहसील के चक्कर खत्म, ऑनलाइन ऐसे करें आवेदन
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में जमीन का सीमांकन अब घर बैठे, तहसील के चक्कर खत्म, ऑनलाइन ऐसे करें आवेदन

25 करोड़ की फिरौती केस में नया मोड़, जमानत मिली तो फरार हुआ शोएब! अब ठिकानों पर रेड मार रही पुलिस
breaking Chhattisgarh

25 करोड़ की फिरौती केस में नया मोड़, जमानत मिली तो फरार हुआ शोएब! अब ठिकानों पर रेड मार रही पुलिस

ऑस्ट्रेलिया में छत्तीसगढ़ की बेटी का डंका, पल्लवी नायक की ‘Social Sage’ को मिला प्रतिष्ठित Champion Award
breaking Chhattisgarh

ऑस्ट्रेलिया में छत्तीसगढ़ की बेटी का डंका, पल्लवी नायक की ‘Social Sage’ को मिला प्रतिष्ठित Champion Award

कविता

इस माह के कवि और कविता : तारक नाथ चौधुरी
poetry

इस माह के कवि और कविता : तारक नाथ चौधुरी

आरंभ साहित्यिक मंच : वीणा सिंह
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : वीणा सिंह

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ
poetry

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन
poetry

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य
poetry

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

कहानी

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू
story

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन