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- विमोचन : विनोद शर्मा की कृति ‘ धरती कभी बाँझ नहीं होती ‘ का विमोचन देश के सुप्रसिद्ध कवि अरुण कमल ने किया :आयोजन ‘ जन संस्कृति मंच भिलाई – दुर्ग ‘ के तत्वावधान में कल्याण महाविद्यालय में किया गया…
विमोचन : विनोद शर्मा की कृति ‘ धरती कभी बाँझ नहीं होती ‘ का विमोचन देश के सुप्रसिद्ध कवि अरुण कमल ने किया :आयोजन ‘ जन संस्कृति मंच भिलाई – दुर्ग ‘ के तत्वावधान में कल्याण महाविद्यालय में किया गया…

भिलाई [रिपोर्ट, सुरेश वाहने] : जन संस्कृति मंच के बहुप्रतीक्षित आयोजन में विनोद शर्मा के कविता संग्रह ‘धरती कभी बाँझ नहीं होती’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कवि व आलोचक अरूण कमल ने किया। इस अवसर उन्होंने कहा -“विनोद शर्मा की कविताएं हृदय तक उतरती हैं। उनकी इस पहली किताब में ही अच्छी कविताओं का संग्रह है। कविताओं में नये शब्दों का प्रयोग हुआ है, जो तारीफें काबिल है। उनके बचपन का गांव लगातार उनकी कविताओं में साथ रहा है। कवि को अपनी भाषा और शब्दों से बड़ा प्रेम है।”

•संबोधित करते हुए अरुण कमल
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक सियाराम शर्मा ने कवि को बधाई देते हुए कहा -“कवि अनुभवों का उत्खनन करता हुआ दिखाई देता है। किसान, आदिवासी, लड़की के आंसू और उसका दुख विनोद शर्मा की कविताओं में दर्ज़ है। संग्रह की कविताएं मृत्यु के भय से निकालने वाली कविताएं है। मृत्यु को नयी तरह से समझने की कोशिश की है कवि ने।”
कविता संग्रह के कवि विनोद शर्मा ने कविताओं में प्रयुक्त बिम्बों के सूत्रों का खुलासा करते हुए अपने गांव और महत्वपूर्ण दृश्यों को याद किया। उन्होंने कविता संग्रह से चुनी हुई कविताओं का पाठ करते हुए कहा कि कविताएं खुद बोलती हैं। संग्रह में अधिकांश रचनाएं 1990 के बाद की हैं।

•कृतिकार विनोद शर्मा
चर्चित कथाकार कैलाश बनवासी ने अपने उद्बोधन में कहा -“चेहरा बांधे लड़की कस्बाई चरित्र की लड़की है, जो प्रेम को जीना चाहती है। हमारा समाज ऐसे चरित्र की लड़कियों को मान्यता नहीं देता। गहन संवेदना है, अगाध ममता है, प्रेम है उनकी कविताओं में।”
नासिर अहमद सिकंदर ने कहा -“संग्रह की कविताओं में प्रगतिशीलता की परंपरा दिखाई देती है। संग्रह में आजादी और मुक्ति की कविताएं हैं।”
युवा कवि अंजन कुमार ने अपना आलेख प्रस्तुत करते हुए बताया -” विनोद शर्मा की कविताओं में हम बिंब और कथ्य को अलग नहीं कर सकते। कवि हर उस चीज से मुक्त होना चाहता है जो प्रेम में बाधा उत्पन्न करता है। संग्रह में एक संवेदनशील और बेचैन कवि की कविताएं हैं।”

•सभागार में उपस्थित लेखक, कवि, पत्रकार और संपादक
संग्रह पर आलेख पाठ करते हुए अंबरीष त्रिपाठी ने कहा -“संग्रह की छोटी कविताओं का मन पर अधिक प्रभाव पड़ता है। उनकी कविताएं प्रतिरोध की सीमा तक पहुंचने में सफल रही हैं।”
घनश्याम त्रिपाठी ने संग्रह पर अपनी बात रखते हुए कहा -“इस संग्रह की कविताओं का मूल स्वर प्रेम है। कवि के अवसादग्रस्तता की कविताएं उन्हें समकालीन कविताओं से अलग करती है।”
गोष्ठी में स्वागत उद्बोधन सुरेश वाहने ने दिया। आभार प्रदर्शन अभिषेक पटेल ने तथा गोष्ठी का सफल संचालन भुवाल सिंह ठाकुर ने किया। इस गोष्ठी में बड़ी संख्या में साहित्य के मर्मज्ञ उपस्थित थे, जिसमें प्रमुख रूप से आलोचक जयप्रकाश, उपान्यासकार लोकबाबू, राजकुमार सोनी, मीता दास, वासुकि प्रसाद उन्मत्त, मुमताज, परमेश्वर वैष्णव, विजय वर्तमान, डॉ. रीता गुप्ता, प्रदीप भट्टाचार्य, ऋषि गजपाल, डॉ. रोली यादव, डॉ. पूजा पाण्डेय, डॉ. विद्याभूषण, श्याम लाल साहू, आर.पी. चौधरी, डॉ. शैलेन्द्र ठाकुर, के.आर. कोशरिया, डॉ. नौशाद सिद्दीकी, विवेक चौहान, सुरेंद्र मोहंती, सबिना एक्का, रसना मुखर्जी, प्रियंका यादव, ओमकुमारी देवांगन, बिमला नायक, कमलेश वर्मा, कुलदीप कुर्रे, मार्तंग सिंह, जितेन्द्र, सुबोध देवांगन शामिल हैं।

[बाएँ से – अंबरीष त्रिपाठी, डॉ. अंजन कुमार, नासिर अहमद सिंकन्दर, अरुण कमल, डॉ. सियाराम शर्मा, कैलाश बनवासी, विनोद शर्मा और घनश्याम त्रिपाठी]
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